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एलर्जी से हैं परेशान? पहाड़ों की इन 4 जड़ी-बूटियों से बनाएं ये कमाल का लेप, खुजली-जलन से मिलेगी राहत – Uttarakhand News

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पहाड़ों की शुद्ध हवा और पानी के साथ-साथ यहां की वनस्पतियां भी औषधीय गुणों का खजाना हैं. त्वचा की जिद्दी एलर्जी, खुजली और लालिमा से परेशान लोगों के लिए पहाड़ों का एक पारंपरिक नुस्खा आज भी रामबाण माना जाता है. रतप्त्या, खोचड्या, पछपत्या और गोलपत्या जैसी चार खास जड़ी-बूटियों का यह मिश्रण बीहड़ राहत देने वाला है.

पिथौरागढ़: पहाड़ न सिर्फ अपने खान-पान के लिए बल्कि औषधीय पौधों और वनस्पतियों के लिए भी बहुत प्रसिद्ध हैं. यहां की हवा, पानी और पेड़-पौधे सभी औषधीय गुणों से भरपूर माने जाते हैं. त्वचा की एलर्जी एक ऐसी समस्या है जो दिखने में भले ही छोटी लगे, लेकिन इसकी परेशानी बहुत ज्यादा होती है. यदि आप बार-बार त्वचा की खुजली, लालिमा या जलन से परेशान रहते हैं, तो पहाड़ों में प्रचलित चार खास जड़ी-बूटियों का लेप आज भी एक भरोसेमंद घरेलू नुस्खा बना हुआ है.

इन चार पौधों में छिपा है एलर्जी का इलाज
पहाड़ों के बुजुर्ग त्वचा संबंधी रोगों के लिए चार विशेष पौधों के मिश्रण की सलाह देते हैं. इन पौधों के स्थानीय नाम रतप्त्या, खोचड्या, पछपत्या और गोलपत्या हैं. ये पौधे पहाड़ी इलाकों की ढलानों और जंगलों में आसानी से मिल जाते हैं. स्थानीय लोगों का अटूट विश्वास है कि इन पौधों का इस्तेमाल करने से त्वचा की बीमारियों में वाकई आराम मिलता है और लोग इन्हें सालों से घरेलू उपचार के रूप में अपनाते आ रहे हैं.

लेप बनाने की विधि और इस्तेमाल का तरीका
इस प्राकृतिक लेप को बनाने का तरीका बहुत ही सरल और प्रभावी है. सबसे पहले इन चारों पौधों की ताजी पत्तियां तोड़ी जाती हैं. पत्तियों को साफ पानी से धोने के बाद इन्हें सिलबट्टे या ओखली में बारीक पीस लिया जाता है. जब यह पूरी तरह पिसकर एक गाढ़ा हरा पेस्ट बन जाता है, तो इसे प्रभावित जगह पर लगाया जाता है. जहां भी एलर्जी, खुजली या सूजन हो, वहां इसे रोज कुछ दिनों तक लगाने से काफी राहत महसूस होने लगती है.

क्या कहती हैं गांव की बुजुर्ग महिलाएं?
गांव की रहने वाली नर्वदा देवी बताती हैं, “हम बचपन से देखते आए हैं कि घर के बड़े लोग इन्हीं जड़ी-बूटियों को पीसकर लेप बनाते थे. जब भी परिवार में किसी को खुजली या त्वचा की एलर्जी होती थी, तो सबसे पहले यही लेप लगाया जाता था और कुछ ही दिनों में आराम मिल जाता था.” आज भी बहुत से लोग बाजार की दवाओं के बजाय इस प्राकृतिक उपाय को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि यह पूरी तरह से शुद्ध है.

सावधानी भी है जरूरी
पहाड़ी लोगों का अनुभव भले ही इस नुस्खे को सफल बताता है, लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है. इसलिए किसी भी तरह का घरेलू नुस्खा अपनाने से पहले किसी जानकार, स्थानीय वैद्य या डॉक्टर से परामर्श लेना हमेशा बेहतर रहता है ताकि उपचार सुरक्षित और सही दिशा में हो सके.

About the Author

Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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पिथौरागढ़: पहाड़ न सिर्फ अपने खान-पान के लिए बल्कि औषधीय पौधों और वनस्पतियों के लिए भी बहुत प्रसिद्ध हैं. यहां की हवा, पानी और पेड़-पौधे सभी औषधीय गुणों से भरपूर माने जाते हैं. त्वचा की एलर्जी एक ऐसी समस्या है जो दिखने में भले ही छोटी लगे, लेकिन इसकी परेशानी बहुत ज्यादा होती है. यदि आप बार-बार त्वचा की खुजली, लालिमा या जलन से परेशान रहते हैं, तो पहाड़ों में प्रचलित चार खास जड़ी-बूटियों का लेप आज भी एक भरोसेमंद घरेलू नुस्खा बना हुआ है.

इन चार पौधों में छिपा है एलर्जी का इलाज
पहाड़ों के बुजुर्ग त्वचा संबंधी रोगों के लिए चार विशेष पौधों के मिश्रण की सलाह देते हैं. इन पौधों के स्थानीय नाम रतप्त्या, खोचड्या, पछपत्या और गोलपत्या हैं. ये पौधे पहाड़ी इलाकों की ढलानों और जंगलों में आसानी से मिल जाते हैं. स्थानीय लोगों का अटूट विश्वास है कि इन पौधों का इस्तेमाल करने से त्वचा की बीमारियों में वाकई आराम मिलता है और लोग इन्हें सालों से घरेलू उपचार के रूप में अपनाते आ रहे हैं.

लेप बनाने की विधि और इस्तेमाल का तरीका
इस प्राकृतिक लेप को बनाने का तरीका बहुत ही सरल और प्रभावी है. सबसे पहले इन चारों पौधों की ताजी पत्तियां तोड़ी जाती हैं. पत्तियों को साफ पानी से धोने के बाद इन्हें सिलबट्टे या ओखली में बारीक पीस लिया जाता है. जब यह पूरी तरह पिसकर एक गाढ़ा हरा पेस्ट बन जाता है, तो इसे प्रभावित जगह पर लगाया जाता है. जहां भी एलर्जी, खुजली या सूजन हो, वहां इसे रोज कुछ दिनों तक लगाने से काफी राहत महसूस होने लगती है.

क्या कहती हैं गांव की बुजुर्ग महिलाएं?
गांव की रहने वाली नर्वदा देवी बताती हैं, “हम बचपन से देखते आए हैं कि घर के बड़े लोग इन्हीं जड़ी-बूटियों को पीसकर लेप बनाते थे. जब भी परिवार में किसी को खुजली या त्वचा की एलर्जी होती थी, तो सबसे पहले यही लेप लगाया जाता था और कुछ ही दिनों में आराम मिल जाता था.” आज भी बहुत से लोग बाजार की दवाओं के बजाय इस प्राकृतिक उपाय को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि यह पूरी तरह से शुद्ध है.

सावधानी भी है जरूरी
पहाड़ी लोगों का अनुभव भले ही इस नुस्खे को सफल बताता है, लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है. इसलिए किसी भी तरह का घरेलू नुस्खा अपनाने से पहले किसी जानकार, स्थानीय वैद्य या डॉक्टर से परामर्श लेना हमेशा बेहतर रहता है ताकि उपचार सुरक्षित और सही दिशा में हो सके.

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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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