Sunday, 19 Apr 2026 | 03:51 PM

Trending :

दादाजी धाम में मनाई गई अक्षय तृतीया व परशुराम जयंती:वैदिक मंत्रोच्चार के बीच षोडशोपचार पूजन, हवन-आरती के साथ हुआ विशेष आयोजन अक्षय की ‘भूत बंगला’ की वर्ल्डवाइड कमाई 60 करोड़ पहुंची:धुरंधर 2 रिलीज के 31 दिन बाद भी फिल्म को टक्कर दे रही रील लाइफ में देशभक्ति पर जोर:‘बॉर्डर 2’ के बाद अब 'ऑपरेशन सिंदूर' से भी वरुण बदलेंगे इमेज सागर चौपाटी पर 8-10 नकाबपोश बदमाशों का उत्पात:दुकानों और गाड़ियों में की तोड़फोड़, मची भगदड़; CCTV फुटेज के आधार पर तलाश जारी सलमान के सामने डांस करने से घबराए वरुण:फिल्म 'है जवानी तो इश्क होना है; के सेट पर पहुंचे सलमान; वरुण ने शेयर किया वीडियो Cooler Cooling युक्तियाँ: तेज़ गर्मी में भी काम के रूप में काम करता है, ये आसान ट्रिक्स मिनटों में कर दें ठंडा
EXCLUSIVE

Lenskart Employees Can Wear Bindis, Hijabs

Lenskart Employees Can Wear Bindis, Hijabs

नई दिल्ली8 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

आईवियर रिटेलर कंपनी लेंसकार्ट ने सोशल मीडिया पर भारी विरोध के बाद पब्लिकली माफी मांगी है। इसके अलावा कंपनी ने अब एक नई और पारदर्शी ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ जारी की है, जिसमें कर्मचारियों को कार्यस्थल पर अपने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को पहनने की पूरी अनुमति दी गई है।

लेंसकार्ट की नई पॉलिसी में अब बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे आस्था के प्रतीकों को शामिल किया गया है। कंपनी ने X पर बयान जारी कर कहा कि वे अपनी गाइडलाइंस को सार्वजनिक और पारदर्शी बना रहे हैं ताकि ग्राहकों और समुदाय की चिंताओं को दूर किया जा सके।

विवाद की वजह, वायरल हुआ पुराना डॉक्युमेंट

यह पूरा विवाद इस हफ्ते की शुरुआत में तब शुरू हुआ जब लेंसकार्ट की ‘एम्प्लॉई ग्रूमिंग पॉलिसी’ का एक डॉक्युमेंट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

इसमें कर्मचारियों को बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों को पहनने से रोका गया था। इसके बाद इंटरनेट पर कंपनी के बहिष्कार की मांग उठने लगी थी।

फाउंडर पीयूष बंसल ने दी सफाई

विवाद बढ़ता देख कंपनी के फाउंडर पीयूष बंसल ने दखल देते हुए स्पष्ट किया कि वायरल हुआ डॉक्युमेंट एक ‘पुराना वर्जन’ था और यह कंपनी के वर्तमान रुख को नहीं दर्शाता।

बंसल ने कहा कि हमारी पॉलिसी में धार्मिक अभिव्यक्ति के किसी भी रूप पर कोई पाबंदी नहीं है। उन्होंने इस भ्रम की स्थिति के लिए माफी भी मांगी है।

लेंसकार्ट बोला- हम भारतीयों के लिए बने हैं

कंपनी ने अपने नए बयान में अपनी जड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लेंसकार्ट भारत में, भारतीयों द्वारा और भारतीयों के लिए बना है।

कंपनी के 2,400 से ज्यादा स्टोर्स ऐसे लोगों द्वारा चलाए जाते हैं जो अपनी परंपराओं को साथ लेकर आते हैं।

कंपनी ने वादा किया है कि भविष्य की हर ट्रेनिंग और पॉलिसी में समावेशी मूल्यों का ध्यान रखा जाएगा।

क्या होता है ‘ग्रूमिंग पॉलिसी’?

कॉर्पोरेट जगत में कंपनियां अपने कर्मचारियों के ड्रेस कोड और व्यवहार के लिए कुछ नियम बनाती हैं, जिसे ग्रूमिंग पॉलिसी कहा जाता है।

इसका उद्देश्य ब्रैंड की एक समान पहचान बनाना होता है, लेकिन भारत जैसे विविधता वाले देश में इसमें धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना अनिवार्य माना जाता है।

ये खबर भी पढ़ें…

लेंसकार्ट के ड्रेस कोड पर विवाद: बिंदी-तिलक पर रोक और हिजाब को मंजूरी देने वाला लेटर वायरल, CEO पीयूष बंसल बोले- यह पुरानी गाइडलाइन

लेंसकार्ट अपने ड्रेस कोड को लेकर विवादों में घिर गई है। सोशल मीडिया पर कंपनी का एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट वायरल हुआ है। इसमें कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से मना किया गया है, जबकि हिजाब और पगड़ी को शर्तों के साथ मंजूरी दी गई है।

विवाद तब बढ़ा जब एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने X पर इसका स्क्रीनशॉट शेयर किया। उन्होंने कंपनी के फाउंडर से पूछा- पीयूष बंसल, क्या आप स्पष्ट कर सकते हैं कि लेंसकार्ट में हिजाब ठीक है लेकिन बिंदी और कलावा क्यों नहीं? इसके बाद लोगों ने लेंसकार्ट को ट्रोल किया और कंपनी की नीति पर सवाल उठाए। पूरी खबर पढ़ें…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
रायसेन में संतान सुख का झांसा देकर ठगी:पूजा के बहाने अफसर की पत्नी से लाखों के जेवर लेकर महिला फरार

February 21, 2026/
5:43 pm

रायसेन की शीतल सिटी कॉलोनी में शनिवार को ठगी की एक चौंकाने वाली वारदात सामने आई है। यहां संतान प्राप्ति...

Silent Heart Attack Symptoms Explained; Warning Signs

March 24, 2026/
4:30 am

6 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक खांसी, छींक, थकान और बुखार। ये सब सर्दी-जुकाम और फ्लू के कॉमन लक्षण...

भोपाल के 3 डॉक्टरों के खिलाफ जिला कोर्ट में परिवाद:लिंग जांच से जुड़े नियमों की अनदेखी, स्वास्थ्य विभाग पहुंचा कोर्ट; एक डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक भी शामिल

March 11, 2026/
12:05 am

भोपाल में गर्भ में बच्चे का लिंग पता लगाने पर रोक से जुड़े पीसीपीएनडीटी एक्ट के उल्लंघन के मामले में...

चीनी रोबोट्स का इंसानों जैसा डांस वायरल:बच्चों के साथ मार्शल आर्ट्स भी किया, एक्सपर्ट्स बोले-चीन ने रोबोटिक्स में अमेरिका को पछाड़ा

February 18, 2026/
3:10 pm

चीन ने सोमवार को दुनिया को अपनी तकनीकी ताकत दिखाई। एक कार्यक्रम में इंसानों जैसे दिखने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने...

बालाघाट में विवाहिता ने की खुदकुशी:पिता बोले- पढ़ी-लिखी थी ऐसा नहीं कर सकती, लगाया प्रताड़ना का आरोप

March 12, 2026/
11:46 am

बालाघाट के कोतवाली थाना क्षेत्र में एक विवाहिता महिला का शव उसके बेडरूम में फांसी पर लटका मिला है। मृतका...

उज्जैन के महाकाल रेस्टोरेंट में लगी आग:समय रहते आग पर काबू पाया, बड़ा हादसा टला

April 15, 2026/
12:03 am

उज्जैन के महाकाल क्षेत्र स्थित गुदरी चौराहे पर मंगलवार को महाकाल रेस्टोरेंट में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। घटना...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Lenskart Employees Can Wear Bindis, Hijabs

Lenskart Employees Can Wear Bindis, Hijabs

नई दिल्ली8 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

आईवियर रिटेलर कंपनी लेंसकार्ट ने सोशल मीडिया पर भारी विरोध के बाद पब्लिकली माफी मांगी है। इसके अलावा कंपनी ने अब एक नई और पारदर्शी ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ जारी की है, जिसमें कर्मचारियों को कार्यस्थल पर अपने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को पहनने की पूरी अनुमति दी गई है।

लेंसकार्ट की नई पॉलिसी में अब बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे आस्था के प्रतीकों को शामिल किया गया है। कंपनी ने X पर बयान जारी कर कहा कि वे अपनी गाइडलाइंस को सार्वजनिक और पारदर्शी बना रहे हैं ताकि ग्राहकों और समुदाय की चिंताओं को दूर किया जा सके।

विवाद की वजह, वायरल हुआ पुराना डॉक्युमेंट

यह पूरा विवाद इस हफ्ते की शुरुआत में तब शुरू हुआ जब लेंसकार्ट की ‘एम्प्लॉई ग्रूमिंग पॉलिसी’ का एक डॉक्युमेंट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

इसमें कर्मचारियों को बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों को पहनने से रोका गया था। इसके बाद इंटरनेट पर कंपनी के बहिष्कार की मांग उठने लगी थी।

फाउंडर पीयूष बंसल ने दी सफाई

विवाद बढ़ता देख कंपनी के फाउंडर पीयूष बंसल ने दखल देते हुए स्पष्ट किया कि वायरल हुआ डॉक्युमेंट एक ‘पुराना वर्जन’ था और यह कंपनी के वर्तमान रुख को नहीं दर्शाता।

बंसल ने कहा कि हमारी पॉलिसी में धार्मिक अभिव्यक्ति के किसी भी रूप पर कोई पाबंदी नहीं है। उन्होंने इस भ्रम की स्थिति के लिए माफी भी मांगी है।

लेंसकार्ट बोला- हम भारतीयों के लिए बने हैं

कंपनी ने अपने नए बयान में अपनी जड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लेंसकार्ट भारत में, भारतीयों द्वारा और भारतीयों के लिए बना है।

कंपनी के 2,400 से ज्यादा स्टोर्स ऐसे लोगों द्वारा चलाए जाते हैं जो अपनी परंपराओं को साथ लेकर आते हैं।

कंपनी ने वादा किया है कि भविष्य की हर ट्रेनिंग और पॉलिसी में समावेशी मूल्यों का ध्यान रखा जाएगा।

क्या होता है ‘ग्रूमिंग पॉलिसी’?

कॉर्पोरेट जगत में कंपनियां अपने कर्मचारियों के ड्रेस कोड और व्यवहार के लिए कुछ नियम बनाती हैं, जिसे ग्रूमिंग पॉलिसी कहा जाता है।

इसका उद्देश्य ब्रैंड की एक समान पहचान बनाना होता है, लेकिन भारत जैसे विविधता वाले देश में इसमें धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना अनिवार्य माना जाता है।

ये खबर भी पढ़ें…

लेंसकार्ट के ड्रेस कोड पर विवाद: बिंदी-तिलक पर रोक और हिजाब को मंजूरी देने वाला लेटर वायरल, CEO पीयूष बंसल बोले- यह पुरानी गाइडलाइन

लेंसकार्ट अपने ड्रेस कोड को लेकर विवादों में घिर गई है। सोशल मीडिया पर कंपनी का एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट वायरल हुआ है। इसमें कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से मना किया गया है, जबकि हिजाब और पगड़ी को शर्तों के साथ मंजूरी दी गई है।

विवाद तब बढ़ा जब एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने X पर इसका स्क्रीनशॉट शेयर किया। उन्होंने कंपनी के फाउंडर से पूछा- पीयूष बंसल, क्या आप स्पष्ट कर सकते हैं कि लेंसकार्ट में हिजाब ठीक है लेकिन बिंदी और कलावा क्यों नहीं? इसके बाद लोगों ने लेंसकार्ट को ट्रोल किया और कंपनी की नीति पर सवाल उठाए। पूरी खबर पढ़ें…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.