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कम वेतन पर काम को मजबूर युवा:खेती छोड़कर गांव से निकले, पर शहरों में स्थायी नौकरी मुश्किल, 15 हजार आईटीआई फिर भी स्किल की कमी

कम वेतन पर काम को मजबूर युवा:खेती छोड़कर गांव से निकले, पर शहरों में स्थायी नौकरी मुश्किल, 15 हजार आईटीआई फिर भी स्किल की कमी

देश का युवा अब खेती में भविष्य नहीं देखता। वह अच्छी नौकरी और बेहतर लाइफ स्टाइल के लिए गांवों से निकलकर शहर जा रहा है। लेकिन वहां न तो स्थायी नौकरी मिल रही है और न ही पढ़ाई और मेहनत के हिसाब से वेतन। नतीजतन सबसे ऊर्जावान वर्ग एक ऐसे चक्र में फंसता जा रहा है, जहां काम तो है पर तरक्की नहीं। अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026’ के मुताबिक, 1983 से 2023 के बीच खेती में 20-29 साल के युवाओं की हिस्सेदारी 56% से घटकर 27% रह गई। लेकिन शहरों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, स्किल की कमी और कमजोर जॉब मार्केट के बीच युवाओं को मुफीद काम नहीं मिल रहा है। देश में स्किल डेवलपमेंट का ढांचा, खास तौर पर आईटीआई तेजी से फैले हैं। लेकिन कई नए संस्थान प्रशिक्षण के मामले में राष्ट्रीय मानकों पर खरे नहीं उतरते। देश में 15,000 से ज्यादा आईटीआई हैं, फिर भी उद्योगों को स्किल वर्कर्स नहीं मिल पा रहे हैं। पहले आईटीआई शहरों और औद्योगिक केंद्रों के आसपास बनाए जाते थे, ताकि ट्रेनिंग के बाद सीधे नौकरी मिल सके। लेकिन अब 70% नए आईटीआई गांवों में खुल रहे हैं और ज्यादातर ट्रेनिंग वहीं हो रही है। दूसरी तरफ 66% कारखानें शहरों में हैं। यानी जहां स्किल तैयार हो रही है, वहां नौकरी नहीं है और जहां नौकरी है, वहां स्किल की सप्लाई नहीं है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि काम में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। लेकिन इसका बड़ा हिस्सा बिना वेतन के पारिवारिक काम या छोटे-मोटे स्वरोजगार से आता है, जहां न तो स्थिर आमदनी होती है न पहचान। इसके चलते शहरों में पढ़ी-लिखी महिलाएं अब गिग वर्क या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की तरफ जा रही हैं, ताकि नौकरी और घर की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बना सकें। इन कामों में लचीलापन तो है, पर नौकरी की सुरक्षा और स्थिरता नहीं है।
रिपोर्ट कहती है कि सिर्फ स्किल डेवलपमेंट से समस्या हल नहीं होगी। जब तक बड़े पैमाने पर सुरक्षित नौकरियां नहीं होंगी, युवा आबादी कम उत्पादक कामों में ही उलझी रहेगी। 7% से भी कम ग्रेजुएट्स एक साल के भीतर स्थायी नौकरी पा रहे, 12वीं पास में यह औसत सिर्फ 4% रिपोर्ट बताती है कि भारत में 7 फीसदी से भी कम ग्रेजुएट्स को एक साल के भीतर स्थायी नौकरी मिलती है। 12वीं पास युवाओं में तो यह आंकड़ा 4 फीसदी ही है। वाइट-कॉलर जॉब, मसलन ऑफिस एग्जीक्यूटिव, बैंक कर्मचारी, आईटी प्रोफेशनल में हालात ज्यादा नाजुक हैं। ग्रेजुएट्स में बस 3.7 फीसदी को और 12वीं पास युवाओं में सिर्फ 1.5 फीसदी को ऐसी नौकरियां मिल पाती हैं।

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रिपोर्ट कहती है कि सिर्फ स्किल डेवलपमेंट से समस्या हल नहीं होगी। जब तक बड़े पैमाने पर सुरक्षित नौकरियां नहीं होंगी, युवा आबादी कम उत्पादक कामों में ही उलझी रहेगी। 7% से भी कम ग्रेजुएट्स एक साल के भीतर स्थायी नौकरी पा रहे, 12वीं पास में यह औसत सिर्फ 4% रिपोर्ट बताती है कि भारत में 7 फीसदी से भी कम ग्रेजुएट्स को एक साल के भीतर स्थायी नौकरी मिलती है। 12वीं पास युवाओं में तो यह आंकड़ा 4 फीसदी ही है। वाइट-कॉलर जॉब, मसलन ऑफिस एग्जीक्यूटिव, बैंक कर्मचारी, आईटी प्रोफेशनल में हालात ज्यादा नाजुक हैं। ग्रेजुएट्स में बस 3.7 फीसदी को और 12वीं पास युवाओं में सिर्फ 1.5 फीसदी को ऐसी नौकरियां मिल पाती हैं।

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