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कानपुर में बढ़ता कैंसर का खतरा, तंबाकू और खराब लाइफस्टाइल बना रहे मुंह और पेट को निशाना, बढ़ रही मरीजों की संख्या

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Kanpur News: कानपुर में कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है. डॉ. चमन कुमार वनवानी के अनुसार, शहर में मुंह के कैंसर के बढ़ते मामलों का सबसे बड़ा कारण तंबाकू उत्पाद है. गुटखा, पान मसाला और स्मोकिंग की आदत लोगों को धीरे-धीरे इस गंभीर बीमारी की ओर धकेल रही है.

कानपुर: कानपुर में मुंह (Oral) और पेट के कैंसर के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी चिंता का विषय बनती जा रही है. डॉक्टरों के अनुसार, सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह कैंसर शुरुआती स्टेज में पकड़ में नहीं आता. मरीजों को जब तक गंभीर दिक्कतें शुरू नहीं होतीं, तब तक वे डॉक्टर के पास नहीं जाते. इसी वजह से अधिकतर मामलों में बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है.

डॉ. चमन कुमार वनवानी के अनुसार, शहर में मुंह के कैंसर के बढ़ते मामलों का सबसे बड़ा कारण तंबाकू उत्पाद है. गुटखा, पान मसाला और स्मोकिंग की आदत लोगों को धीरे-धीरे इस गंभीर बीमारी की ओर धकेल रही है. वहीं पेट के कैंसर के पीछे जंक फूड, तला-भुना खाना, अनियमित खानपान और खराब लाइफस्टाइल बड़ी वजह बन रहे हैं. डॉक्टर बताते हैं कि लगातार रहने वाले मुंह के छाले, सफेद या लाल धब्बे, निगलने में दिक्कत या पेट में लंबे समय तक रहने वाली समस्या को नजर अंदाज करना खतरनाक हो सकता है.

समय पर जांच और जागरूकता ही बचाव का रास्ता
डॉ. सुरेंद्र कुमार दबस का कहना है कि इन कैंसर की सबसे चिंताजनक बात यह है कि लोग शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते. अगर समय-समय पर हेल्थ चेकअप और स्क्रीनिंग कराई जाए तो बीमारी को शुरुआत में ही पकड़ा जा सकता है और इलाज आसान हो जाता है.

वहीं डॉ. हिमांशु शुक्ला बताते हैं कि आज के समय में रोबोटिक सर्जरी और नई तकनीकों की मदद से कैंसर का इलाज पहले से ज्यादा सुरक्षित और असरदार हो गया है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि मरीज समय पर डॉक्टर तक पहुंचे. कानपुर में तेजी से बदलती लाइफस्टाइल और गलत खानपान की आदतें इस खतरे को और बढ़ा रही हैं. खासकर युवा वर्ग में गुटखा और फास्ट फूड का बढ़ता चलन आने वाले समय में और गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है.

मुंह और पेट के कैंसर का बड़ा केंद्र
डॉक्टरों का साफ कहना है कि अगर अभी से सावधानी नहीं बरती गई, तो कानपुर मुंह और पेट के कैंसर का बड़ा केंद्र बन सकता है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि तंबाकू से दूरी बनाना, संतुलित आहार लेना, समय पर खाना और शरीर में किसी भी असामान्य बदलाव को नजर अंदाज न करना ही इस बीमारी से बचाव का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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कानपुर: कानपुर में मुंह (Oral) और पेट के कैंसर के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी चिंता का विषय बनती जा रही है. डॉक्टरों के अनुसार, सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह कैंसर शुरुआती स्टेज में पकड़ में नहीं आता. मरीजों को जब तक गंभीर दिक्कतें शुरू नहीं होतीं, तब तक वे डॉक्टर के पास नहीं जाते. इसी वजह से अधिकतर मामलों में बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है.

डॉ. चमन कुमार वनवानी के अनुसार, शहर में मुंह के कैंसर के बढ़ते मामलों का सबसे बड़ा कारण तंबाकू उत्पाद है. गुटखा, पान मसाला और स्मोकिंग की आदत लोगों को धीरे-धीरे इस गंभीर बीमारी की ओर धकेल रही है. वहीं पेट के कैंसर के पीछे जंक फूड, तला-भुना खाना, अनियमित खानपान और खराब लाइफस्टाइल बड़ी वजह बन रहे हैं. डॉक्टर बताते हैं कि लगातार रहने वाले मुंह के छाले, सफेद या लाल धब्बे, निगलने में दिक्कत या पेट में लंबे समय तक रहने वाली समस्या को नजर अंदाज करना खतरनाक हो सकता है.

समय पर जांच और जागरूकता ही बचाव का रास्ता
डॉ. सुरेंद्र कुमार दबस का कहना है कि इन कैंसर की सबसे चिंताजनक बात यह है कि लोग शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते. अगर समय-समय पर हेल्थ चेकअप और स्क्रीनिंग कराई जाए तो बीमारी को शुरुआत में ही पकड़ा जा सकता है और इलाज आसान हो जाता है.

वहीं डॉ. हिमांशु शुक्ला बताते हैं कि आज के समय में रोबोटिक सर्जरी और नई तकनीकों की मदद से कैंसर का इलाज पहले से ज्यादा सुरक्षित और असरदार हो गया है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि मरीज समय पर डॉक्टर तक पहुंचे. कानपुर में तेजी से बदलती लाइफस्टाइल और गलत खानपान की आदतें इस खतरे को और बढ़ा रही हैं. खासकर युवा वर्ग में गुटखा और फास्ट फूड का बढ़ता चलन आने वाले समय में और गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है.

मुंह और पेट के कैंसर का बड़ा केंद्र
डॉक्टरों का साफ कहना है कि अगर अभी से सावधानी नहीं बरती गई, तो कानपुर मुंह और पेट के कैंसर का बड़ा केंद्र बन सकता है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि तंबाकू से दूरी बनाना, संतुलित आहार लेना, समय पर खाना और शरीर में किसी भी असामान्य बदलाव को नजर अंदाज न करना ही इस बीमारी से बचाव का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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