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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान लखनऊ में जाम में फंसे:शादी में शामिल हुए बिना लौटे; एक जगह दो VIP शादियों से हुई अव्यवस्था

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान लखनऊ में जाम में फंसे:शादी में शामिल हुए बिना लौटे; एक जगह दो VIP शादियों से हुई अव्यवस्था

भाजपा नेता की बेटी की शादी के लिए सोमवार को लखनऊ आए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जाम में फंस गए। हालात ऐसे बने कि शादी में शिरकत किए बिना ही उन्हें वापस लौटना पड़ा। भाजपा के दिग्गज नेता का इस तरह से लौट जाना सरकार और संगठन के नेताओं के लिए किरकिरी का सबब बन गया। दरअसल, 20 अप्रैल को भाजपा के 2 दिग्गज नेताओं के यहां शादी थी। दोनों का समारोह जनेश्वर मिश्र पार्क के अलग-अलग हिस्से में था। एक हिस्से में भाजपा एमएलसी और मध्यप्रदेश के भाजपा प्रभारी महेंद्र सिंह की बेटी की शादी थी। दूसरे में योगी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह की भतीजी की शादी थी। दोनों शादी समारोह में शामिल होने के लिए सीएम योगी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, केंद्र और राज्य सरकार के कई मंत्री, भाजपा के राष्ट्रीय और प्रदेश पदाधिकारी, आरएसएस के कई वरिष्ठ पदाधिकारी समेत विधायक, सांसद और अधिकारी पहुंचे थे। मंत्री की भतीजी की शादी में पहुंचकर वर-वधु को आशीर्वाद दिया
शिवराज सिंह चौहान भी शादी समारोह में शामिल होकर वर-वधु को आशीर्वाद देने आए थे। शिवराज के प्रोटोकॉल में प्रदेश सरकार के पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री ब्रजेश सिंह को लगाया गया था। शिवराज का निजी विमान शाम 7.30 बजे अमौसी एयरपोर्ट पर लैंड करना था। हालांकि, उनका विमान 30 मिनट की देरी से रात 8 बजे एयरपोर्ट पहुंचा। यहां से ब्रजेश सिंह शिवराज को लेकर 21 किमी. दूर जनेश्वर मिश्र पार्क पहुंचे। सबसे पहले शिवराज ने दिनेश प्रताप सिंह की भतीजी की शादी में पहुंचकर वर-वधु को आशीर्वाद दिया। उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं और उपहार दिया। महेंद्र सिंह की बेटी के शादी समारोह के लिए निकले तो जाम में फंसे
दिनेश प्रताप सिंह की भतीजी को शादी में शामिल होने के बाद शिवराज का काफिला जनेश्वर पार्क के दूसरे हिस्से की ओर बढ़ा। दोनों शादियों में VVIP समेत 10 हजार से ज्यादा मेहमान पहुंचे थे। इस वजह से भारी ट्रैफिक जाम लगा था। इसी जाम में शिवराज का काफिला फंस गया। मौके पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने जाम खुलवाने की कोशिश की, लेकिन जाम नहीं खुल पाया। इस दौरान शिवराज का काफिला करीब 15 मिनट तक जाम में फंसा रहा। उन्हें रात 9.30 बजे तक अपने निजी विमान से वापस दिल्ली रवाना होना था। निजी विमान को 9.30 बजे तक ही एयरपोर्ट पर रुकने की अनुमति थी। ऐसे में लेट होने की संभावना को देखते हुए शिवराज सिंह ने जाम को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने महेंद्र सिंह की बेटी के लिए लाए तोहफे को ब्रजेश सिंह को सौंप दिया। इसके बाद शिवराज बिना शादी समारोह में शिरकत किए लौट गए। ब्रजेश सिंह ने मंच पर पहुंचकर महेंद्र सिंह को इसकी जानकारी दी। साथ ही शिवराज सिंह की ओर से दिया गया तोहफा भी भेंट किया। पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री ब्रजेश सिंह का कहना है- शिवराज सिंह चौहान थोड़ा विलंब से पहुंचे थे। जनेश्वर मिश्र पार्क में शादियों में बहुत वीवीआईपी आए थे। वीवीपीआई की फ्लीट क्रैश हो रही थी। शिवराज जिस निजी प्लेन से आए थे, उसका एफएलटी रात 9.30 बजे तक था। इसलिए उन्हें महेंद्र सिंह जी के यहां शादी में शामिल हुए बिना ही लौटना पड़ा। भाजपा एमएलसी महेंद्र सिंह की बेटी की शादी की तस्वीरें- लखनऊ के जाम में अमित शाह भी फंस चुके
मार्च 2022 में जब यूपी में योगी सरकार 2.0 का शपथ ग्रहण समारोह था। इस शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी आना था। वे आए भी, लेकिन जाम की वजह से उन्हें पैदल लंबा रास्ता तय करना पड़ा। इस घटना के करीब एक महीने बाद तत्कालीन एडीजी यातायात ज्योति नारायण को हटाकर पीटीएस जालौन भेज दिया गया था। लगभग चार साल जालौन में पीटीएस में रहने के बाद हाल ही में उन्हें प्रयागराज जोन का एडीजी बनाया गया है। यातायात का जिम्मा पूरी तरह से जिले की पुलिस के हाथ में
जिलों में यातायात का जिम्मा पूरी तरह से जिले की पुलिस के हाथ में होता है। छोटे जिलों में एक से दो ट्रैफिक इंस्पेक्टर के जिम्मे पूरे जिले की ट्रैफिक व्यवस्था की कमान होती है, जो सीधे पुलिस कप्तान को रिपोर्ट करते हैं। वहीं, बड़े जिलों में एडिशनल एसपी के हाथ में यातायात व्यवस्था की कमान होती है। जिन जिलों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू है, वहां एसपी रैंक के अधिकारी (आईपीएस) के पास ट्रैफिक कंट्रोल की जिम्मेदारी होती है। यानी ट्रैफिक इंफोर्समेंट का जिम्मा पूरी तरह से जिले की पुलिस कप्तान या पुलिस कमिश्नर के हाथ में होता है। —————————– ये खबर भी पढ़िए- मुस्कान बोली- मैं साहिल के साथ शिमला-मसूरी घूम रही थी:सौरभ की हत्या में फंसाया गया; मेरठ कोर्ट में जज ने पूछे 32-32 सवाल मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में आरोपी मुस्कान-साहिल ने 21 अप्रैल (मंगलवार) को जिला कोर्ट में अपना पक्ष रखा। जज अनुपम कुमार ने दोनों से 32-32 सवाल पूछे। दोनों ने कहा- सौरभ राजपूत की हत्या में झूठा फंसाया जा रहा है। 29 सवालों में मुस्कान-साहिल ने आरोपों को सिरे से नकार दिया। हालांकि, हत्या के बाद कसौल-मसूरी और शिमला साथ घूमने, रुकने की बात पर हां में जवाब दिया। दोनों ने अपने जवाब में कहा कि हम साथ घूमने गए थे, हम रुके भी थे, लेकिन हत्या नहीं की है। पूरी खबर पढ़िए

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भाजपा नेता की बेटी की शादी के लिए सोमवार को लखनऊ आए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जाम में फंस गए। हालात ऐसे बने कि शादी में शिरकत किए बिना ही उन्हें वापस लौटना पड़ा। भाजपा के दिग्गज नेता का इस तरह से लौट जाना सरकार और संगठन के नेताओं के लिए किरकिरी का सबब बन गया। दरअसल, 20 अप्रैल को भाजपा के 2 दिग्गज नेताओं के यहां शादी थी। दोनों का समारोह जनेश्वर मिश्र पार्क के अलग-अलग हिस्से में था। एक हिस्से में भाजपा एमएलसी और मध्यप्रदेश के भाजपा प्रभारी महेंद्र सिंह की बेटी की शादी थी। दूसरे में योगी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह की भतीजी की शादी थी। दोनों शादी समारोह में शामिल होने के लिए सीएम योगी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, केंद्र और राज्य सरकार के कई मंत्री, भाजपा के राष्ट्रीय और प्रदेश पदाधिकारी, आरएसएस के कई वरिष्ठ पदाधिकारी समेत विधायक, सांसद और अधिकारी पहुंचे थे। मंत्री की भतीजी की शादी में पहुंचकर वर-वधु को आशीर्वाद दिया
शिवराज सिंह चौहान भी शादी समारोह में शामिल होकर वर-वधु को आशीर्वाद देने आए थे। शिवराज के प्रोटोकॉल में प्रदेश सरकार के पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री ब्रजेश सिंह को लगाया गया था। शिवराज का निजी विमान शाम 7.30 बजे अमौसी एयरपोर्ट पर लैंड करना था। हालांकि, उनका विमान 30 मिनट की देरी से रात 8 बजे एयरपोर्ट पहुंचा। यहां से ब्रजेश सिंह शिवराज को लेकर 21 किमी. दूर जनेश्वर मिश्र पार्क पहुंचे। सबसे पहले शिवराज ने दिनेश प्रताप सिंह की भतीजी की शादी में पहुंचकर वर-वधु को आशीर्वाद दिया। उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं और उपहार दिया। महेंद्र सिंह की बेटी के शादी समारोह के लिए निकले तो जाम में फंसे
दिनेश प्रताप सिंह की भतीजी को शादी में शामिल होने के बाद शिवराज का काफिला जनेश्वर पार्क के दूसरे हिस्से की ओर बढ़ा। दोनों शादियों में VVIP समेत 10 हजार से ज्यादा मेहमान पहुंचे थे। इस वजह से भारी ट्रैफिक जाम लगा था। इसी जाम में शिवराज का काफिला फंस गया। मौके पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने जाम खुलवाने की कोशिश की, लेकिन जाम नहीं खुल पाया। इस दौरान शिवराज का काफिला करीब 15 मिनट तक जाम में फंसा रहा। उन्हें रात 9.30 बजे तक अपने निजी विमान से वापस दिल्ली रवाना होना था। निजी विमान को 9.30 बजे तक ही एयरपोर्ट पर रुकने की अनुमति थी। ऐसे में लेट होने की संभावना को देखते हुए शिवराज सिंह ने जाम को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने महेंद्र सिंह की बेटी के लिए लाए तोहफे को ब्रजेश सिंह को सौंप दिया। इसके बाद शिवराज बिना शादी समारोह में शिरकत किए लौट गए। ब्रजेश सिंह ने मंच पर पहुंचकर महेंद्र सिंह को इसकी जानकारी दी। साथ ही शिवराज सिंह की ओर से दिया गया तोहफा भी भेंट किया। पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री ब्रजेश सिंह का कहना है- शिवराज सिंह चौहान थोड़ा विलंब से पहुंचे थे। जनेश्वर मिश्र पार्क में शादियों में बहुत वीवीआईपी आए थे। वीवीपीआई की फ्लीट क्रैश हो रही थी। शिवराज जिस निजी प्लेन से आए थे, उसका एफएलटी रात 9.30 बजे तक था। इसलिए उन्हें महेंद्र सिंह जी के यहां शादी में शामिल हुए बिना ही लौटना पड़ा। भाजपा एमएलसी महेंद्र सिंह की बेटी की शादी की तस्वीरें- लखनऊ के जाम में अमित शाह भी फंस चुके
मार्च 2022 में जब यूपी में योगी सरकार 2.0 का शपथ ग्रहण समारोह था। इस शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी आना था। वे आए भी, लेकिन जाम की वजह से उन्हें पैदल लंबा रास्ता तय करना पड़ा। इस घटना के करीब एक महीने बाद तत्कालीन एडीजी यातायात ज्योति नारायण को हटाकर पीटीएस जालौन भेज दिया गया था। लगभग चार साल जालौन में पीटीएस में रहने के बाद हाल ही में उन्हें प्रयागराज जोन का एडीजी बनाया गया है। यातायात का जिम्मा पूरी तरह से जिले की पुलिस के हाथ में
जिलों में यातायात का जिम्मा पूरी तरह से जिले की पुलिस के हाथ में होता है। छोटे जिलों में एक से दो ट्रैफिक इंस्पेक्टर के जिम्मे पूरे जिले की ट्रैफिक व्यवस्था की कमान होती है, जो सीधे पुलिस कप्तान को रिपोर्ट करते हैं। वहीं, बड़े जिलों में एडिशनल एसपी के हाथ में यातायात व्यवस्था की कमान होती है। जिन जिलों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू है, वहां एसपी रैंक के अधिकारी (आईपीएस) के पास ट्रैफिक कंट्रोल की जिम्मेदारी होती है। यानी ट्रैफिक इंफोर्समेंट का जिम्मा पूरी तरह से जिले की पुलिस कप्तान या पुलिस कमिश्नर के हाथ में होता है। —————————– ये खबर भी पढ़िए- मुस्कान बोली- मैं साहिल के साथ शिमला-मसूरी घूम रही थी:सौरभ की हत्या में फंसाया गया; मेरठ कोर्ट में जज ने पूछे 32-32 सवाल मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में आरोपी मुस्कान-साहिल ने 21 अप्रैल (मंगलवार) को जिला कोर्ट में अपना पक्ष रखा। जज अनुपम कुमार ने दोनों से 32-32 सवाल पूछे। दोनों ने कहा- सौरभ राजपूत की हत्या में झूठा फंसाया जा रहा है। 29 सवालों में मुस्कान-साहिल ने आरोपों को सिरे से नकार दिया। हालांकि, हत्या के बाद कसौल-मसूरी और शिमला साथ घूमने, रुकने की बात पर हां में जवाब दिया। दोनों ने अपने जवाब में कहा कि हम साथ घूमने गए थे, हम रुके भी थे, लेकिन हत्या नहीं की है। पूरी खबर पढ़िए

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