कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को कहा कि सरकार महिला आरक्षण संशोधन और लोकसभा में सीटें बढ़ाने की बिल जल्दबाजी में ला रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान संसद सत्र बुलाना अचार संहिता का उल्लंघन है। सरकार बिल को जल्द से जल्द पास कराना चाहती है, ताकि आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका फायदा मिल सके। आज दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की इस मुद्दे पर बैठक हुई। इसमें खड़गे ने कहा कि अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है। जानकारी सिर्फ प्रधानमंत्री के लेटर के जरिए सामने आई है। लंबे समय तक चुप रहने के बाद अब अचानक इस मुद्दे पर सक्रियता दिखाई जा रही है। सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का सत्र बुलाया बुलाया है। इस दौरान संविधान संशोधन बिल लाने की तैयारी है। सरकार महिलाओं को 33% आरक्षण देने के साथ लोकसभा और विधानसभा सीटों में 50% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव ला सकती है। इसके तहत लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 816 हो जाएगी। बैठक की चार मुख्य बातें… इसी बीच राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कांग्रेस महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है। CWC की बैठक में महिला आरक्षण, परिसीमन और पश्चिम एशिया के हालात पर भी चर्चा हुई। एक दिन पहले सरकार ने ड्राफ्ट को मंजूरी दी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट मीटिंग में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी थी। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग बिल लाएगी सरकार राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में सीटों का आरक्षण होगा। सरकार एक संशोधन बिल के एक संविधान साथ-साथ परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग साधारण बिल भी लाएगी। ताकि नए सिरे से सीटों का निर्धारण हो सके। नई सीटों का निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है। यह कानून राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया जाएगा। महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 सीटें बढ़ेंगी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 लोकसभा सीटें बढ़ेंगी। 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी। महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए 24 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। यहां लोकसभा की सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार में महिला सीटों की संख्या 20 हो सकती है। यहां कुल सीटें 40 से 60 तक पहुंच सकती है। एमपी में 15 महिला आरक्षित सीटें बढ़ सकती हैं। तमिलनाडु में 20 और दिल्ली में 4 यानी महिला सीटें होंगी। झारखंड में 7 महिला आरक्षित सीटें बढ़ने का अनुमान है। 1931 में पहली बार महिला आरक्षण का मुद्दा उठा था 1931: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महिला आरक्षण पर पहली बार चर्चा हुई, लेकिन प्रस्ताव अंततः खारिज कर दिया गया। बेगम शाह नवाज और सरोजिनी नायडू जैसी नेताओं ने महिलाओं को पुरुषों पर तरजीह देने के बजाय समान राजनीतिक स्थिति की मांग पर जोर दिया। 1971: भारत में महिलाओं की स्थिति पर समिति का गठन किया गया। इसके कई सदस्यों ने विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का विरोध किया। 1974: महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए महिलाओं की स्थिति पर एक समिति ने शिक्षा और समाज कल्याण मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी। इसमें पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की सिफारिश की 1988: राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (National Perspective Plan) ने पंचायत स्तर से संसद तक महिलाओं को आरक्षण देने की सिफारिश की। इसने पंचायती राज संस्थानों और सभी राज्यों में शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण अनिवार्य करने वाले 73वें और 74वें संविधान संशोधनों की नींव रखी। 1993: 73वें और 74वें संविधान संशोधनों में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल सहित कई राज्यों ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू किया है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… 2029 चुनाव से पहले लागू होगा 33% महिला आरक्षण:लोकसभा सीटें बढ़कर 816 होंगी, महिला सांसदों की संख्या 273 तक पहुंचेगी केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में दो बिल लाए जा सकते हैं। इसके जरिए महिला आरक्षण लागू करने की मौजूदा शर्त में बदलाव किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…













































