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गैरेज में नहीं,ड्राइंग रूम में सजती हैं करोड़ों की कारें:लग्जरी स्टोरेज रईसों का स्टेटस सिंबल, महामारी में घर में रहने की आदत ने इस ट्रेंड को हवा दी

गैरेज में नहीं,ड्राइंग रूम में सजती हैं करोड़ों की कारें:लग्जरी स्टोरेज रईसों का स्टेटस सिंबल, महामारी में घर में रहने की आदत ने इस ट्रेंड को हवा दी

अब अमीरी दिखाने का तरीका बदल रहा है। पहले लग्जरी चीजों को सुरक्षित अलमारियों या गैरेज में रखा जाता था, लेकिन अब सुपर-रिच लोग महंगी कारों, हैंडबैग्स और वाइन कलेक्शन को घर के अंदर कलाकृति की तरह सजाकर रखते हैं। अमेरिका के बेवर्ली हिल्स के प्रसिद्ध प्लास्टिक सर्जन बेन तालेई इसका उदाहरण हैं। उन्होंने अपने घर का रेनोवेशन इसलिए कराया ताकि उनकी दुर्लभ सुपरकारों का कलेक्शन कांच की दीवारों के पीछे साफ दिखाई दे सके। उनके घर की किचन से ही सुपरकारों की कतार नजर आती है। तालेई अपनी संपत्ति में लगभग 5,000 वर्गफुट की कार गैलरी बनाने की योजना भी बना रहे हैं, जिसकी लागत करीब 130 करोड़ रुपए होगी। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमीर लोगों में यह नया ‘लग्जरी ट्रेंड’ तेजी से बढ़ रहा है। अब वे कारों के लिए गैरेज की बजाय डिजाइनर गैलरी या निजी क्लब जैसे स्पेस बनवा रहे हैं। इंग्लैंड के कोट्सवोल्ड्स में आर्किटेक्चर फर्म हॉलैंड ग्रीन ने एक ग्राहक के लिए ऐसा गैरेज तैयार किया, जहां मालिक अपनी फेरारी के पास बैठकर कॉफी पी सकता है, ठीक वैसे ही जैसे कोई आर्ट गैलरी में बैठकर पेंटिंग निहारता है। यह ट्रेंड सिर्फ कारों तक सीमित नहीं है। महंगी वाइन और लग्जरी हैंडबैग्स को भी अब तहखानों या बंद अलमारियों में रखने के बजाय खास डिस्प्ले स्पेस में सजाया जा रहा है। पश्चिम लंदन में आर्किटेक्ट रॉबर्ट डौगे ने एक घर में पारंपरिक वाइन सेलर की जगह ऐसी डिस्प्ले गैलरी बनाई, जिसमें वाइन की गुणवत्ता भी बनी रहती है और पूरा कमरा आर्ट गैलरी जैसा दिखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के बाद लोग घर में अधिक समय बिताने लगे हैं, इसलिए वे अपने शौक और पहचान को घर के भीतर ही प्रदर्शित करना चाहते हैं। आखिरकार, इन बेशकीमती चीजों को देखकर मिलने वाली खुशी भी उनके लिए उतनी ही अहम है जितनी उनकी कीमत। बढ़ते निवेश के बीच थिएटर जैसा अनुभव भी लंदन स्थित मार्टिन केम्प डिजाइन की सीईओ जेमिमा ग्राफ के मुताबिक, अब ऐसे ‘लिफ्ट सिस्टम’ लगाए जा रहे हैं जो मेहमानों के आने पर वाइन कलेक्शन को जमीन के नीचे से ऊपर की ओर लाते हैं। वे इसे ‘स्टोरेज का थिएटर’ कहती हैं। ड्रेसिंग एरिया अब ‘पर्सनल म्यूजियम’ में बदल रहे हैं। बीसीजी और वेस्टियायर कलेक्टिव की एक रिपोर्ट के मुताबिक लग्जरी सेकंड-हैंड मार्केट सालाना 10% से अधिक की दर से बढ़ रहा है और अब यह 200 अरब डॉलर से अधिक का है। यही कारण है कि हर्मीस और चैनल के हैंडबैग्स को अब महज एक्सेसरी नहीं, बल्कि निवेश माना जा रहा है।

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