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चीन आबादी बढ़ाने के लिए ‎ले रहा आईवीएफ का सहारा‎:इनफर्टिलिटी 18 प्रतिशत, इससे IVF कराने वालों की संख्या बढ़कर 11 लाख हुई

चीन आबादी बढ़ाने के लिए ‎ले रहा आईवीएफ का सहारा‎:इनफर्टिलिटी 18 प्रतिशत, इससे IVF कराने वालों की संख्या बढ़कर 11 लाख हुई

चीनी जोड़े पुरानी पीढ़ियों के मुकाबले ‎‎अधिक उम्र में शादी कर रहे हैं। यह ‎‎इनफर्टिलिटी की समस्या अधिक बढ़ने‎ का एक कारण है।‎‎ संतान पैदा कर सकने वाले जोड़ों में ‎‎इनफर्टिलिटी 2020 में 18% पाई गई‎ जबकि 2007 में यह 12% थी। इससे ‎आईवीएफ की मांग बढ़ी है। चीन में लैब‎ की मदद से संतान को जन्म देने का ‎इलाज कराने वालों की संख्या 2013 के ‎‎2.36 लाख के मुकाबले 2019 में 11 ‎लाख हो गई थी। आज चीन में 600 ‎‎लाइसेंसी क्लिनिक हैं। उपलब्ध आंकड़ों‎ के अनुसार आईवीएफ से 2022 में ‎करीब तीन लाख बच्चों के जन्म हुए थे। अधिक‎ बच्चों के लिए बेचैन देश में इस छोटी ‎संख्या ने भी सरकार का ध्यान खींचा है।‎ चीनी सरकार ने जन्मदर बढ़ाने के लिए ‎‎अच्छा पैकेज देना शुरू किया है। 2025 ‎में तीन साल से कम आयु के प्रति बच्चे‎ के लिए हर साल 47689 रुपए भत्ता देने ‎की योजना शुरू की है। जनवरी में कंडोम पर वैट की दर 13% कर दी गई। 2022 ‎में केंद्र सरकार ने फर्टिलिटी ट्रीटमेंट को ‎सार्वजनिक बीमा योजनाओं में शामिल‎ किया है। 2024 में दस लाख से अधिक‎ लोगों को आईवीएफ ट्रीटमेंट कराने के‎ खर्च की भरपाई की गई। 2025 के मध्य ‎में सभी 31 प्रांतीय सरकारों ने इसे अपनी‎ योजनाओं में शामिल कर लिया है। ‎आईवीएफ के एक चक्र पर 20 से 50 ‎हजार युआन तक खर्च आता है। कई‎ शहर दस हजार युआन तक दे रहे हैं।‎ फिर भी, जनसंख्या विशेषज्ञों को‎ संदेह है कि आईवीएफ सब्सिडी से‎जन्मदर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।‎‎जापान और दक्षिण कोरिया दशकों से‎आईवीएफ सहित जन्म दर बढ़ाने से‎जुड़ी नीतियों पर भारी खर्च कर रहे हैं।‎ दोनों की आबादी कोई खास नहीं बढ़ी ‎है। चीन में संतान पैदा करने की दर ‎बहुत अधिक बढ़ाने के लिए सहायक ‎कार्यक्रमों को कई गुना बढ़ाना पड़ेगा।‎ यह इतना आसान नहीं है। अस्पतालों में‎ ऐसे अधिक मरीज आ रहे हैं जिनकी आयु ‎35-40 के बीच है। इस आयु में ‎सफलता की दर कम होती है। हॉन्गकॉन्ग‎ साइंस टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के स्टुअर्ट‎गीतेल बास्टेन कहते हैं, आईवीएफ ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎इनफर्टिलिटी में मदद करता है, संतान के‎ बारे में दुविधा या अस्पष्टता में नहीं। इस ‎तरह बहुत कम लोगों को फायदा होता है।‎ चीन में यह सीमित पूल पहुंच की‎ समस्या और सरकार की नीतियों से और‎ सिकुड़ गया है। क्लीनिक्स की संख्या‎ संपन्न शहरों में ज्यादा है। 2023 से‎ 2025 तक दो करोड़ 22 लाख आबादी ‎के बीजिंग में 53 हजार लोगों ने सरकारी‎ इंश्योरेंस से फर्टिलिटी ट्रीटमेंट कराया ‎था। इसकी तुलना में इतनी ही आबादी ‎के उत्तर पूर्वी प्रांत जिलिन में छह हजार‎ से कम महिलाओं को ही 2024 में‎ योजना शुरू होने के पहले वर्ष में फायदा‎ हुआ था।‎ स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के करेन एगलस्टोन कहते हैं, ये असमानताएं ‎चीन के हेल्थ सिस्टम के ढांचे की ‎झलक दिखाती हैं। प्रांतों को अपने‎ इंश्योरेंस खर्च का बड़ा हिस्सा उठाना ‎पड़ता है। इसलिए संपन्न इलाके ज्यादा‎ खर्च करते हैं। गरीब इलाकों में लोगों की ‎इलाज कराने की क्षमता नहीं है। मिसाल‎ के तौर पर निंगशिया की प्रति व्यक्ति‎ सालाना आय ट्रीटमेंट के एक साइकल‎ से कम है। इसके अलावा आईवीएफ के ‎लिए कड़े राष्ट्रीय और प्रांतीय नियम हैं।‎ केवल विवाहित जोड़ों का इलाज हो‎ सकता है। कई स्थानों में मां की आयु का‎ ध्यान रखा जाता है। एग फ्रीज करने के ‎नियम बहुत सख्त हैं।‎ फर्टिलिटी दर बहुत कम चीन उन देशों में है जिनमें फर्टिलिटी ‎(प्रजनन क्षमता) की दर दुनिया में ‎सबसे कम है। औसत चीनी महिला ‎का अपने जीवनकाल में केवल एक‎ बच्चा होता है। यह 2017 के 1.8‎ और आबादी को स्थिर रखने के ‎लिए जरूरी 2.1 से बहुत कम है।‎

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