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जब हमारी नाक का काम एक बड़े नथुने से ही चल सकता है तो दो छिद्र क्यों…है इसकी भी सॉलिड वजह

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क्या आपने कभी ये सोचा कि अगर आपकी नाक में एक बड़े छेद से ही काम चल सकता है तो उसकी जगह दो नथुने क्यों होते हैं. अगर आप एक नाक बंद कर लें तो भी कुछ खास नहीं होता. ऐसे में ये सवाल तो मन में उठता ही है कि मुंह की तरह एक ही बड़ा छिद्र नाक में भी तो हो सकता है. लेकिन हकीकत ये है कि इसकी भी वजह तो है. साइंस ने बेहतर तरीके से इसका तर्क देते हुए इसे समझाया है.

इसका जवाब नोज साइकल यानि नाशिका चक्र नामक एक आश्चर्यजनक रूप से जटिल प्रक्रिया में छिपा है. आपकी नाक के दोनों छिद्र एक समान रूप से काम करने की बजाय, दिन भर बारी-बारी से वायु प्रवाह को नियंत्रित करते हैं. यानि एक टाइम पर एक काम पर लगा होता है तो दूसरा शांत रहता है. कुछ घंटों बाद उनका रोल बदल जाता है.

ये लगातार होने वाला बदलाव आपके शरीर को अधिक कुशलता से सांस लेने में मदद करता है. यहां तक ​​कि गंध को महसूस करने की आपकी क्षमता को भी बढ़ाता है. हममे से किसी को इसका पता शायद नहीं लग पाता, लेकिन रोजाना नाक के इन दोनों छिद्रों का रोल हमारे आराम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

जैसे कान दो होने से आवाज़ की दिशा पता चलती है, वैसे ही दो नथुने हल्के-फुल्के अंतर से गंध के स्रोत की दिशा बताने में मदद करते हैं (news18 ai image)

हमारी नाक के छिद्र बारी-बारी से सांस कैसे लेते हैं

हमारा शरीर स्वाभाविक रूप से नाक से सांस लेने के लिए बना है. मुंह से सांस लेना आमतौर पर तभी शुरू होता है जब हमें अतिरिक्त हवा की जरूरत होती है. उदाहरण के लिए व्यायाम के दौरान ऐसा होता है या जब नाक बंद हो जाती है.

हालांकि नाक का काम केवल हवा को अंदर-बाहर करना ही नहीं है. ये फेफड़ों के लिए एक तैयारी कक्ष की तरह काम करती है. जब हवा इससे होकर गुजरती है, तो वह फिल्टर होती है, फिर शरीर के तापमान तक गर्म होती है. फिर उचित स्तर तक नमीयुक्त हो जाती है. जब तक ये आपके फेफड़ों तक पहुंचती है, तब तक यह पूरी तरह से अनुकूलित हो चुकी होती है. इस प्रक्रिया के बिना, हवा ठंडी और शुष्क रहेगी. अगर ऐसा हुआ तो हमारे श्वसन मार्ग में जलन और सूजन हो सकती है.

दो नथुने क्या करते हैं

दो नथुने होने से यह मुश्किल काम आसान हो जाता है. एक नथुना ज़्यादातर हवा को संभालता है, जबकि दूसरे को आराम करने का मौका मिलता है – जिससे नमी बनी रहती है और संतुलन कायम रहता है. अध्ययनों से पता चलता है कि दोनों नथुने कभी भी एक साथ बराबर काम नहीं करते. इसकी बजाय, ये बारी-बारी से काम करने वाली प्रणाली बेहतर तरीके से चलती रहती है.

दोनों नथुने की सूंघने की क्षमता अलग-अलग कैसे

सांस लेना और सूंघना आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं. हर सांस के साथ गंध के छोटे-छोटे अणु नाक में जाते हैं, जहां वे बलगम में घुल जाते हैं. फिर मस्तिष्क को संकेत भेजते हैं.

हवा के दो अलग-अलग रास्ते होने से हमारे गंध सूंघने वाले सेल तक अधिक मात्रा में और लगातार हवा पहुंचती है. (news18 ai image)

नाक जब सांस ले रही होती है, तब हर नथुने से हवा अलग-अलग गति से बहती है. जब कोई नथुना थोड़ा अधिक बंद होता है, तो हवा का प्रवाह धीमा हो जाता है. इससे कुछ गंध के अणुओं को घुलने के लिए अधिक समय मिल जाता है, जिससे उन्हें पहचानना आसान हो जाता है.

दूसरी ओर, अधिक खुले नथुने से वायु का प्रवाह तेज होता है, जिससे अलग अलग तरह के गंध अणुओं का पता लगाने में मदद मिलती है जो अधिक तेजी से घुल जाते हैं. सरल शब्दों में कहें तो हर नाक का छिद्र गंध को अपने-अपने तरीके से ग्रहण करता है. आपका मस्तिष्क इन संकेतों को मिलाकर गंध की एक अधिक समृद्ध और विस्तृत अनुभूति उत्पन्न करता है. तो कह सकते हैं कि दो नथुने हमारी गंध का पता लगाने की क्षमता को बेहतर बनाते हैं.

जैसे कान दो होने से आवाज़ की दिशा पता चलती है, वैसे ही दो नथुने हल्के-फुल्के अंतर से गंध के स्रोत की दिशा बताने में मदद करते हैं. (news18 ai image)

बीमारी में छिपा हुआ सहयोगी

सांस लेने और सूंघने के अलावा, हमारी नाकें हमें बीमारियों से बचाने में भी मदद कर सकती हैं. जब आपको सर्दी-जुकाम होता है, तो अक्सर एक नाक बंद हो जाती है जबकि दूसरी नाक से हवा का प्रवाह अधिक होता है.

एक नाक जुकाम की स्थिति में बंद होने को ये मत मानिए कि ये दिक्कत वाली या नुकसान करने वाली बात है बल्कि ऐसा करके नाक आपकी सुरक्षा करती है. नाक बंद होने से नाक के अंदर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे वायरस के लिए अनुकूल परिस्थितियां नहीं बनतीं. वायरस ठंडे वातावरण में पनपते हैं.
इस लिहाज से, दो नथुने होने से एक अंतर्निर्मित बैकअप प्रणाली मिलती है, जो आपके शरीर को स्थिति से निपटने में मदद करती है और साथ ही संक्रमण के प्रसार को संभावित रूप से सीमित भी करती है.

पहली नजर में, दो नथुने अनावश्यक लग सकते हैं लेकिन वास्तव में, वे एक सुव्यवस्थित प्रणाली बनाते हैं जो सांस लेने में सहायता करती है , गंध की अनुभूति को बढ़ाती है और यहां तक ​​कि आपके शरीर की रक्षा प्रणाली में भी योगदान देती है.

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इसका जवाब नोज साइकल यानि नाशिका चक्र नामक एक आश्चर्यजनक रूप से जटिल प्रक्रिया में छिपा है. आपकी नाक के दोनों छिद्र एक समान रूप से काम करने की बजाय, दिन भर बारी-बारी से वायु प्रवाह को नियंत्रित करते हैं. यानि एक टाइम पर एक काम पर लगा होता है तो दूसरा शांत रहता है. कुछ घंटों बाद उनका रोल बदल जाता है.

ये लगातार होने वाला बदलाव आपके शरीर को अधिक कुशलता से सांस लेने में मदद करता है. यहां तक ​​कि गंध को महसूस करने की आपकी क्षमता को भी बढ़ाता है. हममे से किसी को इसका पता शायद नहीं लग पाता, लेकिन रोजाना नाक के इन दोनों छिद्रों का रोल हमारे आराम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

जैसे कान दो होने से आवाज़ की दिशा पता चलती है, वैसे ही दो नथुने हल्के-फुल्के अंतर से गंध के स्रोत की दिशा बताने में मदद करते हैं (news18 ai image)

हमारी नाक के छिद्र बारी-बारी से सांस कैसे लेते हैं

हमारा शरीर स्वाभाविक रूप से नाक से सांस लेने के लिए बना है. मुंह से सांस लेना आमतौर पर तभी शुरू होता है जब हमें अतिरिक्त हवा की जरूरत होती है. उदाहरण के लिए व्यायाम के दौरान ऐसा होता है या जब नाक बंद हो जाती है.

हालांकि नाक का काम केवल हवा को अंदर-बाहर करना ही नहीं है. ये फेफड़ों के लिए एक तैयारी कक्ष की तरह काम करती है. जब हवा इससे होकर गुजरती है, तो वह फिल्टर होती है, फिर शरीर के तापमान तक गर्म होती है. फिर उचित स्तर तक नमीयुक्त हो जाती है. जब तक ये आपके फेफड़ों तक पहुंचती है, तब तक यह पूरी तरह से अनुकूलित हो चुकी होती है. इस प्रक्रिया के बिना, हवा ठंडी और शुष्क रहेगी. अगर ऐसा हुआ तो हमारे श्वसन मार्ग में जलन और सूजन हो सकती है.

दो नथुने क्या करते हैं

दो नथुने होने से यह मुश्किल काम आसान हो जाता है. एक नथुना ज़्यादातर हवा को संभालता है, जबकि दूसरे को आराम करने का मौका मिलता है – जिससे नमी बनी रहती है और संतुलन कायम रहता है. अध्ययनों से पता चलता है कि दोनों नथुने कभी भी एक साथ बराबर काम नहीं करते. इसकी बजाय, ये बारी-बारी से काम करने वाली प्रणाली बेहतर तरीके से चलती रहती है.

दोनों नथुने की सूंघने की क्षमता अलग-अलग कैसे

सांस लेना और सूंघना आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं. हर सांस के साथ गंध के छोटे-छोटे अणु नाक में जाते हैं, जहां वे बलगम में घुल जाते हैं. फिर मस्तिष्क को संकेत भेजते हैं.

हवा के दो अलग-अलग रास्ते होने से हमारे गंध सूंघने वाले सेल तक अधिक मात्रा में और लगातार हवा पहुंचती है. (news18 ai image)

नाक जब सांस ले रही होती है, तब हर नथुने से हवा अलग-अलग गति से बहती है. जब कोई नथुना थोड़ा अधिक बंद होता है, तो हवा का प्रवाह धीमा हो जाता है. इससे कुछ गंध के अणुओं को घुलने के लिए अधिक समय मिल जाता है, जिससे उन्हें पहचानना आसान हो जाता है.

दूसरी ओर, अधिक खुले नथुने से वायु का प्रवाह तेज होता है, जिससे अलग अलग तरह के गंध अणुओं का पता लगाने में मदद मिलती है जो अधिक तेजी से घुल जाते हैं. सरल शब्दों में कहें तो हर नाक का छिद्र गंध को अपने-अपने तरीके से ग्रहण करता है. आपका मस्तिष्क इन संकेतों को मिलाकर गंध की एक अधिक समृद्ध और विस्तृत अनुभूति उत्पन्न करता है. तो कह सकते हैं कि दो नथुने हमारी गंध का पता लगाने की क्षमता को बेहतर बनाते हैं.

जैसे कान दो होने से आवाज़ की दिशा पता चलती है, वैसे ही दो नथुने हल्के-फुल्के अंतर से गंध के स्रोत की दिशा बताने में मदद करते हैं. (news18 ai image)

बीमारी में छिपा हुआ सहयोगी

सांस लेने और सूंघने के अलावा, हमारी नाकें हमें बीमारियों से बचाने में भी मदद कर सकती हैं. जब आपको सर्दी-जुकाम होता है, तो अक्सर एक नाक बंद हो जाती है जबकि दूसरी नाक से हवा का प्रवाह अधिक होता है.

एक नाक जुकाम की स्थिति में बंद होने को ये मत मानिए कि ये दिक्कत वाली या नुकसान करने वाली बात है बल्कि ऐसा करके नाक आपकी सुरक्षा करती है. नाक बंद होने से नाक के अंदर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे वायरस के लिए अनुकूल परिस्थितियां नहीं बनतीं. वायरस ठंडे वातावरण में पनपते हैं.
इस लिहाज से, दो नथुने होने से एक अंतर्निर्मित बैकअप प्रणाली मिलती है, जो आपके शरीर को स्थिति से निपटने में मदद करती है और साथ ही संक्रमण के प्रसार को संभावित रूप से सीमित भी करती है.

पहली नजर में, दो नथुने अनावश्यक लग सकते हैं लेकिन वास्तव में, वे एक सुव्यवस्थित प्रणाली बनाते हैं जो सांस लेने में सहायता करती है , गंध की अनुभूति को बढ़ाती है और यहां तक ​​कि आपके शरीर की रक्षा प्रणाली में भी योगदान देती है.

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