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टॉप-10 कंपनियों में 9 की वैल्यू ₹2.18 लाख करोड़ घटी:एयरटेल टॉप लूजर रही, इसकी वैल्यू ₹55,852 करोड़ घटी; HDFC बैंक का मार्केट कैप भी घटा

टॉप-10 कंपनियों में 9 की वैल्यू ₹2.18 लाख करोड़ घटी:एयरटेल टॉप लूजर रही, इसकी वैल्यू ₹55,852 करोड़ घटी; HDFC बैंक का मार्केट कैप भी घटा

मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 9 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 2.18 लाख करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान भारती एयरटेल की वैल्यू सबसे ज्यादा घटी। एयरटेल का मार्केट कैप 55,852 करोड़ रुपए घटकर ₹10.71 लाख करोड़ पर आ गया। HDFC बैंक की मार्केट वैल्यू ₹37,580 करोड़ घटकर ₹13.65 लाख करोड़ पर आ गई। वहीं रिलायंस का मार्केट कैप 34,846 करोड़ रुपए घटकर ₹18.86 लाख करोड़ पर आ गया। बीते हफ्ते सिर्फ हिंदुस्तान यूनिलीवर की वैल्यू बढ़ी इनके अलावा बजाज फाइनेंस, TCS, LIC, लार्सन एंड टुब्रो, SBI और ICICI बैंक का मर्केट कैप भी घटा। बीते हफ्ते सिर्फ हिंदुस्तान यूनिलीवर की वैल्यू बढ़ी। HUL का मार्केट कैप 5,462 करोड़ रुपए बढ़कर 5.49 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। शुक्रवार को सेंसेक्स 961 अंक गिरा था सेंसेक्स शुक्रवार 27 फरवरी को 961 अंक (1.17%) की गिरावट के साथ 81,287 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 318 अंकों की गिरावट रही। ये 25,179 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार में रियल्टी और ऑटो शेयरों में बिकवाली का दबाव दिखा था। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ से बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन अगर मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।

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मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 9 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 2.18 लाख करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान भारती एयरटेल की वैल्यू सबसे ज्यादा घटी। एयरटेल का मार्केट कैप 55,852 करोड़ रुपए घटकर ₹10.71 लाख करोड़ पर आ गया। HDFC बैंक की मार्केट वैल्यू ₹37,580 करोड़ घटकर ₹13.65 लाख करोड़ पर आ गई। वहीं रिलायंस का मार्केट कैप 34,846 करोड़ रुपए घटकर ₹18.86 लाख करोड़ पर आ गया। बीते हफ्ते सिर्फ हिंदुस्तान यूनिलीवर की वैल्यू बढ़ी इनके अलावा बजाज फाइनेंस, TCS, LIC, लार्सन एंड टुब्रो, SBI और ICICI बैंक का मर्केट कैप भी घटा। बीते हफ्ते सिर्फ हिंदुस्तान यूनिलीवर की वैल्यू बढ़ी। HUL का मार्केट कैप 5,462 करोड़ रुपए बढ़कर 5.49 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। शुक्रवार को सेंसेक्स 961 अंक गिरा था सेंसेक्स शुक्रवार 27 फरवरी को 961 अंक (1.17%) की गिरावट के साथ 81,287 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 318 अंकों की गिरावट रही। ये 25,179 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार में रियल्टी और ऑटो शेयरों में बिकवाली का दबाव दिखा था। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ से बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन अगर मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।

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