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‘डर नहीं, वीरता की कहानी सुनाना चाहती हूं’:होर्मुज में फंसे रुड़की के कैप्टन की पत्नी बोलीं- बच्चों की तरह क्रू संभाल रहे, हमें उन पर गर्व

‘डर नहीं, वीरता की कहानी सुनाना चाहती हूं’:होर्मुज में फंसे रुड़की के कैप्टन की पत्नी बोलीं- बच्चों की तरह क्रू संभाल रहे, हमें उन पर गर्व

‘मैं अपने बच्चों को उनके पिता की वीरता की कहानी सुनाना चाहती हूं… डर की नहीं।’ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मिसाइलों के खतरे के बीच फंसे कैप्टन आशीष शर्मा की पत्नी सरुणिका शर्मा की यह बात हालात की गंभीरता और गर्व दोनों को एक साथ बयां करती है। उनका कहना है कि आशीष न सिर्फ जहाज की कमान संभाले हुए हैं, बल्कि 24 भारतीय क्रू मेंबर्स को अपने बच्चों की तरह संभाल रहे हैं और इस पर पूरे परिवार को गर्व है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रुड़की के कैप्टन आशीष शर्मा इस समय दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाके स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकर की कमान संभाले हुए हैं। जहाज पर 24 भारतीय क्रू मेंबर मौजूद हैं और हर दिन मिसाइलों के खतरे के बीच गुजर रहा है। इन हालात के बीच भी वे परिवार को सिर्फ एक मैसेज भेज पा रहे हैं- “All OK, All is Well”। हर रात मिसाइलें गुजरती हैं, मलबा गिरता है… कैप्टन की पत्नी सरुणिका शर्मा बताती हैं कि पिछले 20-22 दिनों से जहाज होर्मुज के पास ही फंसा हुआ है। वे कहती हैं, मिसाइलें जहाजों के ऊपर से गुजरती हैं। जो इंटरसेप्ट होती हैं, उनका मलबा नीचे गिरता है। और जहाज क्रूड ऑयल से भरे हैं… जरा सी चूक बड़ी तबाही बन सकती है। खतरनाक स्थिति में भी हौसला बिल्कुल नहीं टूटा कैप्टन आशीष के साथ 24 भारतीय क्रू मेंबर हैं, जिनकी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है।
सरुणिका कहती हैं, वो एक जांबाज की तरह अपने पूरे क्रू को संभाल रहे हैं… जैसे बच्चे हों। इतनी खतरनाक स्थिति में भी उनका हौसला बिल्कुल नहीं टूटा है। उनके मुताबिक अब मर्चेंट नेवी के जहाज भी निशाने पर हैं, टैंकरों को टारगेट किया जा रहा है, ये बहुत गलत है। ये सिर्फ जहाज नहीं, पूरी दुनिया की सप्लाई लाइन हैं। सरकार से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की अपील की सरुणिका ने भारत सरकार से अपील करते हुए कहा, भारत की स्थिति अभी मजबूत है। सरकार अच्छा काम कर रही है, लेकिन इस बड़े संकट में भी बातचीत होनी चाहिए। तेल, एलपीजी जैसी जरूरी चीजें इन्हीं जहाजों से जाती हैं… ये रुक गईं तो पूरी दुनिया प्रभावित होगी। ‘हम सिर्फ पेशा नहीं, समंदर जैसा दिल चुनते हैं’ भावुक होते हुए सरुणिका कहती हैं, जब हम नेवी या ऐसी जॉब चुनते हैं, तो हम सिर्फ पेशा नहीं चुनते… हम समंदर जैसा दिल भी चुनते हैं। हर दिन खतरा, हर दिन हौसला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस समय युद्ध जैसे हालात में है। सैकड़ों जहाज इस इलाके में फंसे हैं और हर पल अनहोनी का खतरा बना हुआ है। इन सबके बीच रुड़की के कैप्टन आशीष शर्मा 24 जिंदगियों की जिम्मेदारी निभाते हुए हर दिन अपने परिवार को एक ही भरोसा दे रहे हैं, सब ठीक है। ———————– ये खबर भी पढ़ें : ईरान-इजराइल जंग- उत्तराखंड के लोग मिडिल ईस्ट में फंसे: देहरादून का युवक बोला- अब्बा, हमला हो गया; मौलाना और छात्र कमरे में कैद मिडिल ईस्ट (ईरान-इजराइल) में गहराते युद्ध के बाद उत्तराखंड के कई लोग मिडिल ईस्ट में फंस गए है। देहरादून, विकासनगर और हरिद्वार के कई युवा और मौलाना इस वक्त ईरान के कुम और तेहरान जैसे शहरों में फंसे हुए हैं। (पढ़ें पूरी खबर)

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‘डर नहीं, वीरता की कहानी सुनाना चाहती हूं’:होर्मुज में फंसे रुड़की के कैप्टन की पत्नी बोलीं- बच्चों की तरह क्रू संभाल रहे, हमें उन पर गर्व

‘मैं अपने बच्चों को उनके पिता की वीरता की कहानी सुनाना चाहती हूं… डर की नहीं।’ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मिसाइलों के खतरे के बीच फंसे कैप्टन आशीष शर्मा की पत्नी सरुणिका शर्मा की यह बात हालात की गंभीरता और गर्व दोनों को एक साथ बयां करती है। उनका कहना है कि आशीष न सिर्फ जहाज की कमान संभाले हुए हैं, बल्कि 24 भारतीय क्रू मेंबर्स को अपने बच्चों की तरह संभाल रहे हैं और इस पर पूरे परिवार को गर्व है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रुड़की के कैप्टन आशीष शर्मा इस समय दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाके स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकर की कमान संभाले हुए हैं। जहाज पर 24 भारतीय क्रू मेंबर मौजूद हैं और हर दिन मिसाइलों के खतरे के बीच गुजर रहा है। इन हालात के बीच भी वे परिवार को सिर्फ एक मैसेज भेज पा रहे हैं- “All OK, All is Well”। हर रात मिसाइलें गुजरती हैं, मलबा गिरता है… कैप्टन की पत्नी सरुणिका शर्मा बताती हैं कि पिछले 20-22 दिनों से जहाज होर्मुज के पास ही फंसा हुआ है। वे कहती हैं, मिसाइलें जहाजों के ऊपर से गुजरती हैं। जो इंटरसेप्ट होती हैं, उनका मलबा नीचे गिरता है। और जहाज क्रूड ऑयल से भरे हैं… जरा सी चूक बड़ी तबाही बन सकती है। खतरनाक स्थिति में भी हौसला बिल्कुल नहीं टूटा कैप्टन आशीष के साथ 24 भारतीय क्रू मेंबर हैं, जिनकी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है।
सरुणिका कहती हैं, वो एक जांबाज की तरह अपने पूरे क्रू को संभाल रहे हैं… जैसे बच्चे हों। इतनी खतरनाक स्थिति में भी उनका हौसला बिल्कुल नहीं टूटा है। उनके मुताबिक अब मर्चेंट नेवी के जहाज भी निशाने पर हैं, टैंकरों को टारगेट किया जा रहा है, ये बहुत गलत है। ये सिर्फ जहाज नहीं, पूरी दुनिया की सप्लाई लाइन हैं। सरकार से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की अपील की सरुणिका ने भारत सरकार से अपील करते हुए कहा, भारत की स्थिति अभी मजबूत है। सरकार अच्छा काम कर रही है, लेकिन इस बड़े संकट में भी बातचीत होनी चाहिए। तेल, एलपीजी जैसी जरूरी चीजें इन्हीं जहाजों से जाती हैं… ये रुक गईं तो पूरी दुनिया प्रभावित होगी। ‘हम सिर्फ पेशा नहीं, समंदर जैसा दिल चुनते हैं’ भावुक होते हुए सरुणिका कहती हैं, जब हम नेवी या ऐसी जॉब चुनते हैं, तो हम सिर्फ पेशा नहीं चुनते… हम समंदर जैसा दिल भी चुनते हैं। हर दिन खतरा, हर दिन हौसला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस समय युद्ध जैसे हालात में है। सैकड़ों जहाज इस इलाके में फंसे हैं और हर पल अनहोनी का खतरा बना हुआ है। इन सबके बीच रुड़की के कैप्टन आशीष शर्मा 24 जिंदगियों की जिम्मेदारी निभाते हुए हर दिन अपने परिवार को एक ही भरोसा दे रहे हैं, सब ठीक है। ———————– ये खबर भी पढ़ें : ईरान-इजराइल जंग- उत्तराखंड के लोग मिडिल ईस्ट में फंसे: देहरादून का युवक बोला- अब्बा, हमला हो गया; मौलाना और छात्र कमरे में कैद मिडिल ईस्ट (ईरान-इजराइल) में गहराते युद्ध के बाद उत्तराखंड के कई लोग मिडिल ईस्ट में फंस गए है। देहरादून, विकासनगर और हरिद्वार के कई युवा और मौलाना इस वक्त ईरान के कुम और तेहरान जैसे शहरों में फंसे हुए हैं। (पढ़ें पूरी खबर)

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