Saturday, 19 Sep 2026 | 09:23 PM

Trending :

EXCLUSIVE

Hospital Costs Out-of-Pocket | Health Insurance India 2026

Hospital Costs Out-of-Pocket | Health Insurance India 2026

नई दिल्ली4 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

प्रतीकात्मक फोटो।

देश में हाल के वर्षों में हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज तेजी से बढ़ा है। सरकार का दावा है कि यह बीमा सुरक्षा देश की करीब आधी आबादी तक पहुंच चुकी है। लेकिन इलाज का बोझ आम परिवारों की जेब पर अब भी भारी पड़ रहा है। एनएसएस हेल्थ सर्वे 2025 के मुताबिक, देश में एक अस्पताल में भर्ती होने पर अब भी औसतन 34,064 रुपए जेब से खर्च करने पड़ते हैं।

सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक हाल के वर्षों में बीमारी रिपोर्ट करने वाले दोगुने हो गए हैं। 2017-18 में 15 दिनों के भीतर 7.5% लोग बीमार पड़ते थे। 2025 में यह संख्या 13.1% हो गई। यह बढ़ोतरी सिर्फ ज्यादा बीमारियों का नहीं, बल्कि बढ़ती जागरूकता, बढ़ती पहुंच और डायबिटीज-हाइपरटेंशन जैसी गैर-संक्रामक बीमारियां बढ़ने का भी संकेत है।

प्रतीकात्मक फोटो।

प्रतीकात्मक फोटो।

निजी अस्पतालों में औसत खर्च 8 गुना तक ज्यादा सरकारी अस्पतालों में जेब से औसत खर्च ₹~6,631 है। आधे मामलों में ₹‌~1,100 या उससे भी कम है। निजी अस्पतालों में यही औसत ₹‌~50,508 है। करीब आठ गुना का अंतर है। प्रसव के मामले में भी सरकारी अस्पताल में औसत खर्च ~₹2,299, जबकि सभी अस्पतालों में ~14,775 है।

निजी अस्पतालों में प्रति इलाज औसत खर्च ₹50,508

अस्पताल औसत मीडियन
सरकारी ₹6,631 ₹1,100
चैरिटी, ट्रस्ट, NGO ₹39,530 ₹10,000
प्राइवेट ₹50,508 ₹24,000
सभी ₹34,064 ₹11,285

नोट: मीडियन मतलब आधे मामलों में औसत खर्च, स्रोत: एनएसएस हेल्थ सर्वे 2025

47% से ग्रामीण, 44% शहरी को हेल्थ कवर स्वास्थ्य बीमा के मोर्चे पर काफी कामयाबी मिली है। ग्रामीण कवरेज 2017-18 के 14.1% से बढ़कर 2025 में 47.4% और शहरी कवरेज 19.1% से बढ़कर 44.3% पहुंच गया। ग्रामीण इलाकों में 45.5% और शहरी क्षेत्रों में 31.8% लोग सरकारी बीमा से कवर हैं। इसके बावजूद बीमा होने का मतलब पूरी आर्थिक सुरक्षा नहीं है, क्योंकि दवाएं, जांच और फॉलो-अप खर्च अक्सर जेब से ही भरने पड़ते हैं।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
CBSE Three Language Policy Virodh

May 22, 2026/
4:29 pm

16 मिनट पहले कॉपी लिंक शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को 19 लोगों के एक...

राजस्थान के कप्तान रियान पराग ई-सिगरेट पीते दिखे:मैच के दौरान ड्रेसिंग रूम का वीडियो वायरल; ई-सिगरेट बैन, BCCI कार्रवाई कर सकता है

April 29, 2026/
8:16 am

PL 2026 में राजस्थान रॉयल्स (RR) के कप्तान रियान पराग विवाद में फंस गए हैं। पंजाब किंग्स के खिलाफ मंगलवार...

authorimg

March 16, 2026/
10:20 pm

Last Updated:March 16, 2026, 22:20 IST बाजार में अक्सर संतरा और किन्नू साथ-साथ नजर आते हैं और कई लोग इन्हें...

भाजपा का स्थापना दिवस आज, घर-घर फहराएंगे ध्वज:रतलाम में BJP के नए भवन निर्माण का होगा शुभारंभ; 67 लाख में खरीदी जमीन

April 6, 2026/
9:23 am

भारतीय जनता पार्टी 6 अप्रैल को अपने 47 वर्ष स्थापना दिवस मनाएगी। भाजपा कार्यकर्ता घर-घर पार्टी का ध्वज फहरायेंगे। प्रदेश...

सर्वे में देरी:सैटेलाइट सर्वे में उलझा 3 लाख किसानों का पंजीयन, मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर

April 17, 2026/
5:53 am

मप्र के किसान गेहूं बेचने के लिए मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर लगा रहे हैं। वे वे किसान हैं,...

Mumbai Actress TV Set Suicide Story; Tunisha Sharma Boyfriend

February 17, 2026/
4:30 am

3 दिन पहलेलेखक: ईफत कुरैशी और वर्षा राय कॉपी लिंक बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के केस-5 में जानिए एक्ट्रेस तुनिषा शर्मा...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Hospital Costs Out-of-Pocket | Health Insurance India 2026

Hospital Costs Out-of-Pocket | Health Insurance India 2026

नई दिल्ली4 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

प्रतीकात्मक फोटो।

देश में हाल के वर्षों में हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज तेजी से बढ़ा है। सरकार का दावा है कि यह बीमा सुरक्षा देश की करीब आधी आबादी तक पहुंच चुकी है। लेकिन इलाज का बोझ आम परिवारों की जेब पर अब भी भारी पड़ रहा है। एनएसएस हेल्थ सर्वे 2025 के मुताबिक, देश में एक अस्पताल में भर्ती होने पर अब भी औसतन 34,064 रुपए जेब से खर्च करने पड़ते हैं।

सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक हाल के वर्षों में बीमारी रिपोर्ट करने वाले दोगुने हो गए हैं। 2017-18 में 15 दिनों के भीतर 7.5% लोग बीमार पड़ते थे। 2025 में यह संख्या 13.1% हो गई। यह बढ़ोतरी सिर्फ ज्यादा बीमारियों का नहीं, बल्कि बढ़ती जागरूकता, बढ़ती पहुंच और डायबिटीज-हाइपरटेंशन जैसी गैर-संक्रामक बीमारियां बढ़ने का भी संकेत है।

प्रतीकात्मक फोटो।

प्रतीकात्मक फोटो।

निजी अस्पतालों में औसत खर्च 8 गुना तक ज्यादा सरकारी अस्पतालों में जेब से औसत खर्च ₹~6,631 है। आधे मामलों में ₹‌~1,100 या उससे भी कम है। निजी अस्पतालों में यही औसत ₹‌~50,508 है। करीब आठ गुना का अंतर है। प्रसव के मामले में भी सरकारी अस्पताल में औसत खर्च ~₹2,299, जबकि सभी अस्पतालों में ~14,775 है।

निजी अस्पतालों में प्रति इलाज औसत खर्च ₹50,508

अस्पताल औसत मीडियन
सरकारी ₹6,631 ₹1,100
चैरिटी, ट्रस्ट, NGO ₹39,530 ₹10,000
प्राइवेट ₹50,508 ₹24,000
सभी ₹34,064 ₹11,285

नोट: मीडियन मतलब आधे मामलों में औसत खर्च, स्रोत: एनएसएस हेल्थ सर्वे 2025

47% से ग्रामीण, 44% शहरी को हेल्थ कवर स्वास्थ्य बीमा के मोर्चे पर काफी कामयाबी मिली है। ग्रामीण कवरेज 2017-18 के 14.1% से बढ़कर 2025 में 47.4% और शहरी कवरेज 19.1% से बढ़कर 44.3% पहुंच गया। ग्रामीण इलाकों में 45.5% और शहरी क्षेत्रों में 31.8% लोग सरकारी बीमा से कवर हैं। इसके बावजूद बीमा होने का मतलब पूरी आर्थिक सुरक्षा नहीं है, क्योंकि दवाएं, जांच और फॉलो-अप खर्च अक्सर जेब से ही भरने पड़ते हैं।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.