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बंगाल चुनाव बना ‘फोर्ट नॉक्स’! 2 लाख+ युवा, बख्तरबंद वार्ता, हाईटेक विचारधारा के बीच चुनाव की तैयारी

बंगाल चुनाव बना 'फोर्ट नॉक्स'! 2 लाख+ युवा, बख्तरबंद वार्ता, हाईटेक विचारधारा के बीच चुनाव की तैयारी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (पश्चिम बंगाल चुनाव) से पहले सिक्योरिटी का ऐसा अनोखा खाका तैयार किया गया है, जो पहले कभी देखने को नहीं मिला. करीब 2.4 लाख केंद्रीय अर्धसैनिक बल (सीएपीएफ) की राज्य शक्ति को लगभग किले में स्थापित किया गया है। यह किसी भी राज्य के चुनाव में अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा इलेक्ट्रॉनिक मनी जा रही है। बल, राज्य पुलिस और अतिरिक्त सशस्त्र युवा समूह एक मल्टी-लेयर प्रोटोटाइप प्लान पर काम कर रहे हैं, दक्षिणी मतदान केंद्र पूरी तरह से तरह के कर्मचारी और तकनीशियन हो सकते हैं।

तैयारी पूरी, परमाणु ऊर्जा बोर्ड को पार करना होगा नामुमकिन
इस बार सुरक्षा रणनीति को और मजबूत बनाने के लिए कोलकाता में सीएपीएफ के डीजी स्तर की अप्रोच बैठक हुई, जिसमें सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। साल्ट लेक स्थित सीआरपीएफ मुख्यालय में हुई इस हाई-लेवल मीटिंग में राज्य पुलिस और चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ मिलकर इंटीग्रेटेड स्टूडेंट को तैयार किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह पहली बार है जब किसी चुनाव से पहले सभी सीएपीएफ प्रमुख एक साथ किसी राज्य में रहेंगे।

जमीन पर सुरक्षा का नजरिया भी सख्त है। सुझाव और हिंसा-प्रभावित बूथों पर अतिरिक्त बल दिए गए हैं। मार्क्समैन और शौर्य जैसे बख्तरबंद गाड़ियाँ की सुरक्षित छुट्टियाँ और त्वरित कार्रवाई के लिए सिद्धांत हैं। इसके अलावा, अन्य राज्यों से करीब 3,000 अतिरिक्त सशस्त्र प्रशिक्षक भी बुलाए गए हैं।

क्या है शैरी और मार्क्समैन
कोलकाता में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले असमान स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। विशेष बख्तरबंद वाहन शौर्य और मार्क्समैन को पश्चिम बंगाल लाया गया है। ये वाहन शहर की सड़कों और प्रमुख सहयोगियों पर आधारित हैं, जिससे आम लोगों का ध्यान भी उनकी ओर आकर्षित होता है। शौर्य और मार्क्समैन ने बख्तरबंद वाहन बनाए हैं, जिनमें विशेष रूप से आंतरिक सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए डिज़ाइन किया गया है।

इनमें से एक-रेज़िस्टेंट बॉडी, ब्लास्ट-प्लॉट क्लेक्शन क्षमता, ग्राउंड ग्राउंड रेयरेंस और हार्ड डीओल में आसानी से चलने की क्षमता है। ये वाहन बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को सुरक्षित रूप से ले जाने में सक्षम हैं और इनमें आधुनिक संचार प्रणाली, स्टार्टअप उपकरण और आपातकालीन स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया के लिए विशेष उपकरण भी मौजूद हैं।

लक्ष्मण रेखा के अंदर ही होगा मतदान
हर बूथ पर लगभग 100 मीटर की ‘लक्ष्मण रेखा’ लागू होती है, जहां केवल पात्र और अधिकारिक अधिकारी का ही प्रवेश शुल्क है। फ़र्ज़ी वोटिंग निषेध के लिए मल्टी-लेयर अवेडेट सिस्टम लागू होता है। निगरानी के लिए सीसीटीवी, बॉडी कैमरा और प्रोमोशनल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

वोटिंग के बाद भी हाईटेक किला रहेगा अभेद्य
चुनाव में इस बार सुरक्षा पूरी तरह से हाई-टेक नज़र आएगी। वोटिंग पर हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे, बॉडी कैमरे और आधुनिक कम्यूनिटी सिस्टम लगाए जा रहे हैं। इससे किसी भी तरह की मंदबुद्धि या क्रियाकलाप पर तत्काल कार्रवाई संभव होगी। सुरक्षा केवल मतदान तक सीमित नहीं रहेगी. वोटिंग ख़त्म होने के बाद भी ईवीएम, स्ट्रॉन्ग रूम और गणना सेंटर पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। क्यूआरटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) और एंटी-सबोटाज जांच लगातार सक्रिय मोबाइल। सीएपीएफ अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ सुरक्षा नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का मिशन है- जहां हर वोट सुरक्षित और कर्मचारी रहेंगे।

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तैयारी पूरी, परमाणु ऊर्जा बोर्ड को पार करना होगा नामुमकिन
इस बार सुरक्षा रणनीति को और मजबूत बनाने के लिए कोलकाता में सीएपीएफ के डीजी स्तर की अप्रोच बैठक हुई, जिसमें सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। साल्ट लेक स्थित सीआरपीएफ मुख्यालय में हुई इस हाई-लेवल मीटिंग में राज्य पुलिस और चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ मिलकर इंटीग्रेटेड स्टूडेंट को तैयार किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह पहली बार है जब किसी चुनाव से पहले सभी सीएपीएफ प्रमुख एक साथ किसी राज्य में रहेंगे।

जमीन पर सुरक्षा का नजरिया भी सख्त है। सुझाव और हिंसा-प्रभावित बूथों पर अतिरिक्त बल दिए गए हैं। मार्क्समैन और शौर्य जैसे बख्तरबंद गाड़ियाँ की सुरक्षित छुट्टियाँ और त्वरित कार्रवाई के लिए सिद्धांत हैं। इसके अलावा, अन्य राज्यों से करीब 3,000 अतिरिक्त सशस्त्र प्रशिक्षक भी बुलाए गए हैं।

क्या है शैरी और मार्क्समैन
कोलकाता में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले असमान स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। विशेष बख्तरबंद वाहन शौर्य और मार्क्समैन को पश्चिम बंगाल लाया गया है। ये वाहन शहर की सड़कों और प्रमुख सहयोगियों पर आधारित हैं, जिससे आम लोगों का ध्यान भी उनकी ओर आकर्षित होता है। शौर्य और मार्क्समैन ने बख्तरबंद वाहन बनाए हैं, जिनमें विशेष रूप से आंतरिक सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए डिज़ाइन किया गया है।

इनमें से एक-रेज़िस्टेंट बॉडी, ब्लास्ट-प्लॉट क्लेक्शन क्षमता, ग्राउंड ग्राउंड रेयरेंस और हार्ड डीओल में आसानी से चलने की क्षमता है। ये वाहन बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को सुरक्षित रूप से ले जाने में सक्षम हैं और इनमें आधुनिक संचार प्रणाली, स्टार्टअप उपकरण और आपातकालीन स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया के लिए विशेष उपकरण भी मौजूद हैं।

लक्ष्मण रेखा के अंदर ही होगा मतदान
हर बूथ पर लगभग 100 मीटर की ‘लक्ष्मण रेखा’ लागू होती है, जहां केवल पात्र और अधिकारिक अधिकारी का ही प्रवेश शुल्क है। फ़र्ज़ी वोटिंग निषेध के लिए मल्टी-लेयर अवेडेट सिस्टम लागू होता है। निगरानी के लिए सीसीटीवी, बॉडी कैमरा और प्रोमोशनल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

वोटिंग के बाद भी हाईटेक किला रहेगा अभेद्य
चुनाव में इस बार सुरक्षा पूरी तरह से हाई-टेक नज़र आएगी। वोटिंग पर हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे, बॉडी कैमरे और आधुनिक कम्यूनिटी सिस्टम लगाए जा रहे हैं। इससे किसी भी तरह की मंदबुद्धि या क्रियाकलाप पर तत्काल कार्रवाई संभव होगी। सुरक्षा केवल मतदान तक सीमित नहीं रहेगी. वोटिंग ख़त्म होने के बाद भी ईवीएम, स्ट्रॉन्ग रूम और गणना सेंटर पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। क्यूआरटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) और एंटी-सबोटाज जांच लगातार सक्रिय मोबाइल। सीएपीएफ अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ सुरक्षा नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का मिशन है- जहां हर वोट सुरक्षित और कर्मचारी रहेंगे।

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