तमिलनाडु और खासकर पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने इस बार बहुत कड़ी तैयारी की है. आयोग का पूरा ध्यान इस बात पर है कि मतदान के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी या हिंसा न हो और लोग बिना डर के वोट डाल सकें। इसी बात पर ध्यान देते हुए बड़ी संख्या में अर्धसैनिक संरचनाओं को नष्ट कर दिया गया है। जहां जरूरत होगी, वहां और अधिक बल भी भेज दिया जाएगा। इनका काम केवल सुरक्षा देना ही नहीं होगा, बल्कि लोगों में विश्वास पैदा करना भी होगा ताकि वे बिना किसी डर के मतदान केंद्र तक जा सकें।
चुनाव आयोग इस बार होटलिंग और फ़ायर वोटिंग को लेकर भी बहुत सतर्क है। हर मतदान केंद्र पर वेब ग्राहकों की व्यवस्था की गई है। इसका मतलब यह है कि मतदान की पूरी प्रक्रिया कैमरों से निगरानी में रहेगी। यदि एक सेकंड के दौरान भी वेब साइट का कैमरा बंद हो जाता है या कोई तकनीकी समस्या आती है, तो उस बूथ पर FILM वोटिंग यानी री-पोल की अनुमति दी जा सकती है।
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री-पोल की व्यवस्था
पहले चरण के चुनाव में 25 और 27 तारीख को नामांकन की आवश्यकता हो सकती है। वहीं दूसरे चरण के लिए 1 और 3 तारीख को री-पोल की व्यवस्था जारी की गई है। इसका मकसद यही है कि जहां भी आपदा की आशंका हो, वहां पर कार्यकर्ताओं का चुनाव सुनिश्चित किया जा सके।
विधानसभा के नतीजे हो सकते हैं असरदार
यदि इसके बाद भी चुनाव आयोग को लगता है कि किसी भी सीट पर सही तरीके से मतदान नहीं हुआ है या धांधली हुई है, तो वह उस सीट का नतीजा रोक सकता है। इतना ही नहीं, अगर कई प्रक्षेपास्त्रों पर गंभीर कैथेड्रल हैं तो पूरी विधानसभा के नतीजे भी रोके जा सकते हैं। इन सभी गरीबों के बीच सुरक्षा बल यह सुनिश्चित करना चाहता है कि हर सुरक्षित मोरक्को में अपने वोट का इस्तेमाल किया जा सके। आप सभी को जानकारी के लिए बता दें कि बुलेट सेंटर तक जाने की तैयारी में जुटा हुआ है।
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