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बुखार के बाद कई दिनों तक खांसी क्यों करती है परेशान? यह किस बात का संकेत, कैसे पाएं इससे छुटकारा

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Post-Fever Cough Causes: बुखार ठीक होने के बाद भी कई बार खांसी बनी रहती है. इसकी वजह अक्सर श्वसन मार्ग में आई सूजन या पोस्ट-नेजल ड्रिप होती है. खांसी शरीर की एक सफाई प्रक्रिया है, लेकिन अगर यह 3-4 सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे, तो यह ब्रोंकाइटिस या अन्य समस्या का संकेत हो सकती है. ऐसे में डॉक्टर से मिलकर जांच करानी चाहिए.

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वायरल बुखार के बाद खांसी ठीक होने में कुछ सप्ताह लग सकते हैं.

Coughing After Viral Infection: अक्सर देखा जाता है कि वायरल फीवर ठीक होने के बाद भी लोगों को कई सप्ताह तक खांसी परेशान करती है. खांसी होने पर लोगों को लगता है कि वे पूरी तरह ठीक नहीं हुए हैं. कई लोग खांसी को इग्नोर करते रहते हैं, जबकि कुछ लोगों को डॉक्टर के पास जाने की जरूरत पड़ जाती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स इस खांसी को पोस्ट-वायरल कफ कहते हैं. अगर आप भी बुखार के बाद लगातार उठने वाली इस खांसी से परेशान हैं, तो यह समझना जरूरी है कि आपका शरीर इसके जरिए क्या संकेत दे रहा है और आप इससे कैसे राहत पा सकते हैं.

नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया कि बुखार के दौरान जब वायरस हमारे श्वसन तंत्र पर हमला करता है, तो यह वायुमार्ग की ऊपरी परत को क्षतिग्रस्त कर देता है. बुखार उतरने के बाद भी यह परत बेहद सेंसिटिव बनी रहती है. ऐसे में ठंडी हवा, धूल या तेज गंध के संपर्क में आते ही सांस की नलियों में जलन होने लगती है और शरीर उसे बाहर निकालने के लिए खांसी पैदा करता है. यह संकेत है कि आपके फेफड़े अभी पूरी तरह रिकवर नहीं हुए हैं.

डॉक्टर ने बताया कि कई बार बुखार के बाद नाक और साइनस में बलगम का बनना बंद नहीं होता. यह अतिरिक्त बलगम गले के पिछले हिस्से से नीचे गिरने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में पोस्ट-नेजल ड्रिप कहा जाता है. यह प्रक्रिया गले में लगातार खराश और डिसकंफर्ट पैदा करती है, जिससे बार-बार सूखी या बलगम वाली खांसी आती है. यह अक्सर लेटने पर या सुबह के समय ज्यादा परेशान करती है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

एक्सपर्ट के मुताबिक खांसी हमेशा बुरी नहीं होती है. यह वास्तव में शरीर का एक सुरक्षा तंत्र है. संक्रमण के बाद फेफड़ों और श्वासनली में मृत कोशिकाएं, वायरस के अवशेष और अतिरिक्त बलगम जमा हो जाता है. खांसी के जरिए शरीर इन तत्वों को बाहर निकालने की कोशिश करता है. अगर खांसी के साथ बहुत अधिक बलगम आ रहा है, तो यह इस बात का संकेत है कि आपका शरीर अंदरूनी सफाई कर रहा है.

डॉक्टर की मानें तो वायरल फीवर के बाद आमतौर पर खांसी अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन अगर खांसी 2-3 हफ्तों से ज्यादा बनी रहे और साथ में फिर से हल्का बुखार, सीने में दर्द या सांस फूलने जैसे लक्षण दिखें, तो यह ब्रोंकाइटिस या बैक्टीरियिल संक्रमण का संकेत हो सकता है. वायरस के हमले के बाद शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे बैक्टीरिया के लिए हमला करना आसान हो जाता है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी होता है. बुखार के बाद की खांसी से राहत पाने के लिए हाइड्रेशन सबसे महत्वपूर्ण है. खूब गुनगुना पानी पिएं, अदरक-तुलसी का काढ़ा लें और शहद का सेवन करें, जो गले की परत पर एक सुरक्षा कवच बनाता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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वायरल बुखार के बाद खांसी ठीक होने में कुछ सप्ताह लग सकते हैं.

Coughing After Viral Infection: अक्सर देखा जाता है कि वायरल फीवर ठीक होने के बाद भी लोगों को कई सप्ताह तक खांसी परेशान करती है. खांसी होने पर लोगों को लगता है कि वे पूरी तरह ठीक नहीं हुए हैं. कई लोग खांसी को इग्नोर करते रहते हैं, जबकि कुछ लोगों को डॉक्टर के पास जाने की जरूरत पड़ जाती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स इस खांसी को पोस्ट-वायरल कफ कहते हैं. अगर आप भी बुखार के बाद लगातार उठने वाली इस खांसी से परेशान हैं, तो यह समझना जरूरी है कि आपका शरीर इसके जरिए क्या संकेत दे रहा है और आप इससे कैसे राहत पा सकते हैं.

नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया कि बुखार के दौरान जब वायरस हमारे श्वसन तंत्र पर हमला करता है, तो यह वायुमार्ग की ऊपरी परत को क्षतिग्रस्त कर देता है. बुखार उतरने के बाद भी यह परत बेहद सेंसिटिव बनी रहती है. ऐसे में ठंडी हवा, धूल या तेज गंध के संपर्क में आते ही सांस की नलियों में जलन होने लगती है और शरीर उसे बाहर निकालने के लिए खांसी पैदा करता है. यह संकेत है कि आपके फेफड़े अभी पूरी तरह रिकवर नहीं हुए हैं.

डॉक्टर ने बताया कि कई बार बुखार के बाद नाक और साइनस में बलगम का बनना बंद नहीं होता. यह अतिरिक्त बलगम गले के पिछले हिस्से से नीचे गिरने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में पोस्ट-नेजल ड्रिप कहा जाता है. यह प्रक्रिया गले में लगातार खराश और डिसकंफर्ट पैदा करती है, जिससे बार-बार सूखी या बलगम वाली खांसी आती है. यह अक्सर लेटने पर या सुबह के समय ज्यादा परेशान करती है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

एक्सपर्ट के मुताबिक खांसी हमेशा बुरी नहीं होती है. यह वास्तव में शरीर का एक सुरक्षा तंत्र है. संक्रमण के बाद फेफड़ों और श्वासनली में मृत कोशिकाएं, वायरस के अवशेष और अतिरिक्त बलगम जमा हो जाता है. खांसी के जरिए शरीर इन तत्वों को बाहर निकालने की कोशिश करता है. अगर खांसी के साथ बहुत अधिक बलगम आ रहा है, तो यह इस बात का संकेत है कि आपका शरीर अंदरूनी सफाई कर रहा है.

डॉक्टर की मानें तो वायरल फीवर के बाद आमतौर पर खांसी अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन अगर खांसी 2-3 हफ्तों से ज्यादा बनी रहे और साथ में फिर से हल्का बुखार, सीने में दर्द या सांस फूलने जैसे लक्षण दिखें, तो यह ब्रोंकाइटिस या बैक्टीरियिल संक्रमण का संकेत हो सकता है. वायरस के हमले के बाद शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे बैक्टीरिया के लिए हमला करना आसान हो जाता है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी होता है. बुखार के बाद की खांसी से राहत पाने के लिए हाइड्रेशन सबसे महत्वपूर्ण है. खूब गुनगुना पानी पिएं, अदरक-तुलसी का काढ़ा लें और शहद का सेवन करें, जो गले की परत पर एक सुरक्षा कवच बनाता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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