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Trump Skeptical of Iran Peace Proposal; Crime Price Not Paid

Trump Skeptical of Iran Peace Proposal; Crime Price Not Paid

वॉशिंगटन डीसी22 मिनट पहले

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव की समीक्षा करने की बात कही है, लेकिन इसकी सफलता पर संदेह जताया। उन्होंने कहा कि ईरान ने अभी तक अपने अपराधों की कीमत नहीं चुकाई है।

ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि वे ईरान के भेजे गए प्रस्ताव को जल्द देखेंगे, लेकिन इसके स्वीकार होने की संभावना कम है। उनका कहना है कि पिछले 47 साल में ईरान ने जो किया, उसके लिए उसे बड़ी कीमत चुकानी बाकी है।

दरअसल ईरान की एजेंसियों के मुताबिक, तेहरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को 14-पॉइंट प्रस्ताव भेजा है। इसमें सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया फ्रेमवर्क बनाने की बात शामिल है।

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अब अमेरिका को तय करना है कि वह बातचीत चाहता है या टकराव। ईरान दोनों विकल्पों के लिए तैयार है।

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका को तय करना है कि वो शांति चाहता है या जंग।

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका को तय करना है कि वो शांति चाहता है या जंग।

ईरानी अधिकारी बोले- अमेरिका पर भरोसा नहीं

ईरानी सेना के सीनियर अधिकारी मोहम्मद जाफर असदी ने कल कहा कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता और दोनों देशों के बीच फिर से युद्ध हो सकता है।

उन्होंने कहा कि ईरान की सेना पूरी तरह तैयार है और अगर अमेरिका कोई गलत कदम उठाता है, तो जवाब दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका किसी भी समझौते या वादे का पालन नहीं करता।

असदी ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों के बयान और कदम ज्यादातर दिखावटी और मीडिया के लिए होते हैं। उनका मकसद पहले तेल की कीमतों को गिरने से रोकना और दूसरा अपनी बनाई हुई मुश्किल स्थिति से बाहर निकलना है।

ईरान का आरोप- अमेरिका परमाणु संधि का पालन नहीं कर रहा

ईरान ने अमेरिका पर परमाणु समझौते का पालन न करने का आरोप लगाया है। ईरान ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र में कहा कि अमेरिका परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के नियमों का पालन नहीं कर रहा और उसका व्यवहार दोहरे मापदंड वाला है।

ईरान ने बयान में कहा कि पिछले 56 सालों से अमेरिका इस संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं कर रहा है। जबकि उसके पास हजारों परमाणु हथियार हैं।

साथ ही ईरान ने यह भी कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में काम किया जाए, तो यूरेनियम संवर्धन पर कोई कानूनी रोक नहीं है, जैसा कि ईरान के मामले में था।

ईरान होर्मुज को लेकर नया कानून लाने की तैयारी कर रहा

अमेरिका के साथ सीजफायर वार्ता को लेकर जारी चर्चा के बीच ईरान होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नया कानून लाने की तैयारी कर रहा है।

ईरानी संसद के उपाध्यक्ष हमीदरेजा हाजी-बाबाई ने कहा कि इस कानून के तहत इजराइल के जहाजों को इस समुद्री रास्ते से गुजरने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित बिल में यह भी कहा गया है कि दुश्मन देशों के जहाज तभी गुजर पाएंगे, जब वे युद्ध का मुआवजा देंगे।

इसके अलावा, दूसरे देशों के जहाजों को भी ईरान से अनुमति लेनी होगी, तभी वे इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकेंगे। हाजी-बाबाई ने कहा कि अब होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पहले जैसी नहीं रहेगी और युद्ध के बाद हालात बदल जाएंगे।

ईरान जंग से दुनिया पर फूड संकट का खतरा

संयुक्त राष्ट्र (UN) की संस्था FAO के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने चेतावनी दी है कि दुनिया एक बड़े खाद्य संकट की ओर बढ़ रही है।

उन्होंने बताया कि होर्मुज बंद होने से खाद (फर्टिलाइजर) की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। युद्ध शुरू होने के बाद से इसकी सप्लाई लगभग रुक गई है, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं और कमी भी हो रही है।

इसका असर खेती पर पड़ेगा और फसलों की पैदावार 30% तक घट सकती है। इससे खाने-पीने की चीजें और महंगी हो सकती हैं। टोरेरो ने अल जजीरा से कहा कि हालात इसलिए और खराब हो रहे हैं क्योंकि एशिया में बुआई का समय निकल चुका है।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और ब्राजील जैसे बड़े देश अपनी फसलें बदल सकते हैं और गेहूं- मक्का की जगह सोयाबीन उगा सकते हैं, जिससे बाजार पर और असर पड़ेगा।

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यह खबर भी पढ़ें…

ईरान जंग के 2 महीने, दुनिया में मंदी का संकट:दावा- अमेरिका ने ₹95 लाख करोड़ खर्चे, ईरान में 3,600+ मौतें; चीन-रूस फायदे में रहे

अमेरिका की ईरान के खिलाफ 28 फरवरी को शुरू हुई जंग को दो महीने हो चुके हैं, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे छोटी और निर्णायक लड़ाई बताया था, लेकिन अब हालात उलट दिख रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि वे ईरान के भेजे गए प्रस्ताव को जल्द देखेंगे, लेकिन इसके स्वीकार होने की संभावना कम है। उनका कहना है कि पिछले 47 साल में ईरान ने जो किया, उसके लिए उसे बड़ी कीमत चुकानी बाकी है।

दरअसल ईरान की एजेंसियों के मुताबिक, तेहरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को 14-पॉइंट प्रस्ताव भेजा है। इसमें सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया फ्रेमवर्क बनाने की बात शामिल है।

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अब अमेरिका को तय करना है कि वह बातचीत चाहता है या टकराव। ईरान दोनों विकल्पों के लिए तैयार है।

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका को तय करना है कि वो शांति चाहता है या जंग।

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका को तय करना है कि वो शांति चाहता है या जंग।

ईरानी अधिकारी बोले- अमेरिका पर भरोसा नहीं

ईरानी सेना के सीनियर अधिकारी मोहम्मद जाफर असदी ने कल कहा कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता और दोनों देशों के बीच फिर से युद्ध हो सकता है।

उन्होंने कहा कि ईरान की सेना पूरी तरह तैयार है और अगर अमेरिका कोई गलत कदम उठाता है, तो जवाब दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका किसी भी समझौते या वादे का पालन नहीं करता।

असदी ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों के बयान और कदम ज्यादातर दिखावटी और मीडिया के लिए होते हैं। उनका मकसद पहले तेल की कीमतों को गिरने से रोकना और दूसरा अपनी बनाई हुई मुश्किल स्थिति से बाहर निकलना है।

ईरान का आरोप- अमेरिका परमाणु संधि का पालन नहीं कर रहा

ईरान ने अमेरिका पर परमाणु समझौते का पालन न करने का आरोप लगाया है। ईरान ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र में कहा कि अमेरिका परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के नियमों का पालन नहीं कर रहा और उसका व्यवहार दोहरे मापदंड वाला है।

ईरान ने बयान में कहा कि पिछले 56 सालों से अमेरिका इस संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं कर रहा है। जबकि उसके पास हजारों परमाणु हथियार हैं।

साथ ही ईरान ने यह भी कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में काम किया जाए, तो यूरेनियम संवर्धन पर कोई कानूनी रोक नहीं है, जैसा कि ईरान के मामले में था।

ईरान होर्मुज को लेकर नया कानून लाने की तैयारी कर रहा

अमेरिका के साथ सीजफायर वार्ता को लेकर जारी चर्चा के बीच ईरान होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नया कानून लाने की तैयारी कर रहा है।

ईरानी संसद के उपाध्यक्ष हमीदरेजा हाजी-बाबाई ने कहा कि इस कानून के तहत इजराइल के जहाजों को इस समुद्री रास्ते से गुजरने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित बिल में यह भी कहा गया है कि दुश्मन देशों के जहाज तभी गुजर पाएंगे, जब वे युद्ध का मुआवजा देंगे।

इसके अलावा, दूसरे देशों के जहाजों को भी ईरान से अनुमति लेनी होगी, तभी वे इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकेंगे। हाजी-बाबाई ने कहा कि अब होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पहले जैसी नहीं रहेगी और युद्ध के बाद हालात बदल जाएंगे।

ईरान जंग से दुनिया पर फूड संकट का खतरा

संयुक्त राष्ट्र (UN) की संस्था FAO के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने चेतावनी दी है कि दुनिया एक बड़े खाद्य संकट की ओर बढ़ रही है।

उन्होंने बताया कि होर्मुज बंद होने से खाद (फर्टिलाइजर) की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। युद्ध शुरू होने के बाद से इसकी सप्लाई लगभग रुक गई है, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं और कमी भी हो रही है।

इसका असर खेती पर पड़ेगा और फसलों की पैदावार 30% तक घट सकती है। इससे खाने-पीने की चीजें और महंगी हो सकती हैं। टोरेरो ने अल जजीरा से कहा कि हालात इसलिए और खराब हो रहे हैं क्योंकि एशिया में बुआई का समय निकल चुका है।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और ब्राजील जैसे बड़े देश अपनी फसलें बदल सकते हैं और गेहूं- मक्का की जगह सोयाबीन उगा सकते हैं, जिससे बाजार पर और असर पड़ेगा।

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