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सतना में मेयर-कमिश्नर टकराव में फंसा नगर निगम बजट:13 दिन बाद रिमाइंडर पत्र, 31 मार्च डेडलाइन पर संशय, विकास कार्य प्रभावित होने के आसार

सतना में मेयर-कमिश्नर टकराव में फंसा नगर निगम बजट:13 दिन बाद रिमाइंडर पत्र, 31 मार्च डेडलाइन पर संशय, विकास कार्य प्रभावित होने के आसार

सतना नगर निगम का वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट 31 मार्च तक परिषद में पेश हो कर पास हो जाना चाहिए लेकिन अभी तक बजट प्रस्ताव का ही पता नहीं है। दरअसल, नगर निगम कमिश्नर शेर सिंह मीना और मेयर योगेश ताम्रकार के बीच पिछले लगभग एक माह से खुलकर चल रही नाराजगी और टकराहट के इस दौर में नगर सरकार पत्राचार से चल रही है। आमतौर पर शहर विकास से जुड़े मसलों पर कमिश्नर और मेयर के बीच पहले की तरह टेबल टॉक न होकर दोनों के बीच चिट्ठी-पत्री के जरिए संवाद चल रहा है। मार्च माह में नगर निगम का बजट पेश हो जाना चाहिए। लेकिन अब तक बजट प्रस्ताव को ले कर दोनों के बीच कोई चर्चा ही नहीं हुई है। जबकि महापौर योगेश ताम्रकार ने 10 मार्च को पत्र लिख कर कमिश्नर शेर सिंह मीना से सभी संबंधित विभागों से चर्चा कर प्रस्ताव तैयार कर अंतिम रूप देते हुए अवगत कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन 13 दिन हो जाने के बाद भी कमिश्नर द्वारा बजट के प्रस्ताव को लेकर कोई जानकारी नहीं दिए जाने से महापौर नाराज हैं। उन्होंने 23 मार्च को एक बार फिर रिमाइंडर पत्र लिख कर कमिश्नर के इस रवैए पर खेद प्रगट किया है। इसके साथ महापौर ने कमिश्नर को स्पष्ट किया है कि यदि शहर विकास के लिए पेश होने वाले बजट की प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उनकी (कमिश्नर) होगी। एक माह पहले खुल कर खोला था मोर्चा
दरअसल, महापौर और कमिश्नर के बीच छोटी छोटी अनबन की शुरुआत वैसे तो दिसंबर 2025 से शुरू हो गई थी। इस दौरान एमआईसी की बैठक भी बीच में छोड़कर महापौर चले गए थे। तब महापौर ने आरोप लगाया था कि विकास कार्यों के औचक निरीक्षण के दौरान सामने आए भ्रष्टाचारों पर दोषी इंजीनियरों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्यवाही किए जाने के निर्देश निगम प्रशासन को दिए जाते हैं जिन्हें अनदेखा किया जाता है। कमिश्नर से लगातार इन्हीं शिकायतों के बीच 18 फरवरी को महापौर के नेतृत्व में कुछ पार्षदों ने कमिश्नर शेर सिंह मीना के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलते हुए कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस से मिलकर पूरी बात रखी थी। इतना ही नहीं 45 पार्षद वाली नगर निगम में कमिश्नर की कार्यशैली से नाराज 30 पार्षदों के हस्ताक्षर वाली सूची भी सौंपी गई थी। इसी दिन मेयर और कुछ पार्षद भोपाल भी रवाना हो गए थे। इसके बाद से महापौर और कमिश्नर के मध्य फेस टू फेस कोई बात नहीं हुई। सिर्फ पत्राचार के माध्यम से बजट और बैठक बुलाए जाने को ले कर संवाद चल रहा है। बजट को लेकर मेयर ने क्या लिखा है पत्र में
23 मार्च को मेयर योगेश ताम्रकार द्वारा एक बार फिर कमिश्नर शेर सिंह मीना को बजट प्रस्ताव को ले कर पत्र लिखा गया। पत्र में लिखा कि 10 मार्च 2026 को आगामी बजट के संबंध में आवश्यक निर्देश प्रदान किए गए थे, जिसमें स्पष्ट रूप से अपेक्षा की गई थी कि आप सभी संबंधित विभागों के साथ समुचित चर्चा कर प्रस्तावों को अंतिम रूप देते हुए मुझे अवगत कराएंगे। आज दिनांक 23 मार्च 2026 तक इस संबंध में न तो आपकी ओर से कोई जवाब प्राप्त हुआ है और न ही इस विषय पर कोई चर्चा की गई है, जो अत्यंत खेदजनक एवं चिंताजनक है। यह विषय शहर के समग्र विकास से जुड़ा हुआ है। यदि बजट संबंधी प्रक्रिया में विलंब होता है अथवा पर्याप्त विचार-विमर्श के बिना निर्णय लिए जाते हैं, तो इससे भविष्य में विभिन्न विकास कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। आपके द्वारा चर्चा न करने के कारण मेयर-इन-काउंसिल की बैठक नहीं कर पा रहे हैं। अतः आपको निर्देशित किया जाता है कि इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए शीघ्रातिशीघ्र सभी संबंधित विभागों के साथ बैठक कर विस्तृत चर्चा सुनिश्चित करें तथा उसकी प्रगति से मुझे तत्काल अवगत कराएं। यदि बजट प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी होती है, तो उसकी पूर्ण जिम्मेदारी आपकी होगी। महापौर बोले- IAS अधिकारी हैं और इतने गैर जिम्मेदार
दैनिक भास्कर से बातचीत में महापौर योगेश ताम्रकार ने बताया कि बजट पेश होने के पहले आयुक्त द्वारा सभी संबंधित विभाग की बैठक कर प्रस्ताव तैयार किया जाता है। प्रस्ताव पर मुझसे चर्चा के बाद मेयर इन काउंसिल में रखा जाता है। वहां बजट प्रस्ताव में शहर के विकास को देखते हुए संशोधन कर परिषद में पेश किया जाता है। मेयर ने बताया कि अभी तक कमिश्नर द्वारा बजट को लेकर एक भी बिंदु पर मेरे साथ चर्चा नहीं की है। एक फाइल मेरे पास आई थी। मुझे समझ में नहीं आया तो मैंने फाइल लौटाते हुए 10 मार्च को पत्र लिखा था और कहा था आयुक्त मुझसे चर्चा करेंगे लेकिन आज 23 तारीख हो गई मेरे से कोई चर्चा नहीं की गई। अगर शहर का बजट समय पर पास नहीं होता है तो कहीं न कहीं अगले वर्ष के काम करने में असुविधा होगी। इसी लिए आज पत्र लिखकर रिमाइंडर किया है कि अगर समय पर बजट प्रस्तुत नहीं होगा तो संपूर्ण जवाबदारी आयुक्त की होगी। महापौर ने कहा कि मुझे आश्चर्य होता है, हमारे आयुक्त महोदय एक आईएएस अधिकारी है और इतना गैरजिम्मेदाराना इनका व्यवहार है मुझे सोच कर ही बड़ा कष्ट होता है। कमिश्नर ने कहा- कॉर्डिनेशन कर बैठक बुलाएं
इस मामले में नगर निगम कमिश्नर शेर सिंह मीना ने बताया कि लगभग 2 हफ्ते पहले हमने बजट प्रस्ताव बना कर मेयर इन काउंसिल के कार्यालय को भेज दिया था। अब एमआईसी कार्यालय की जिम्मेदारी होती है कि कॉर्डिनेशन कर बैठक बुलाएं और चर्चा करें। लेकिन एमआईसी अब क्या कर रही है उन्हें जानकारी नहीं है।

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सतना में मेयर-कमिश्नर टकराव में फंसा नगर निगम बजट:13 दिन बाद रिमाइंडर पत्र, 31 मार्च डेडलाइन पर संशय, विकास कार्य प्रभावित होने के आसार

सतना नगर निगम का वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट 31 मार्च तक परिषद में पेश हो कर पास हो जाना चाहिए लेकिन अभी तक बजट प्रस्ताव का ही पता नहीं है। दरअसल, नगर निगम कमिश्नर शेर सिंह मीना और मेयर योगेश ताम्रकार के बीच पिछले लगभग एक माह से खुलकर चल रही नाराजगी और टकराहट के इस दौर में नगर सरकार पत्राचार से चल रही है। आमतौर पर शहर विकास से जुड़े मसलों पर कमिश्नर और मेयर के बीच पहले की तरह टेबल टॉक न होकर दोनों के बीच चिट्ठी-पत्री के जरिए संवाद चल रहा है। मार्च माह में नगर निगम का बजट पेश हो जाना चाहिए। लेकिन अब तक बजट प्रस्ताव को ले कर दोनों के बीच कोई चर्चा ही नहीं हुई है। जबकि महापौर योगेश ताम्रकार ने 10 मार्च को पत्र लिख कर कमिश्नर शेर सिंह मीना से सभी संबंधित विभागों से चर्चा कर प्रस्ताव तैयार कर अंतिम रूप देते हुए अवगत कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन 13 दिन हो जाने के बाद भी कमिश्नर द्वारा बजट के प्रस्ताव को लेकर कोई जानकारी नहीं दिए जाने से महापौर नाराज हैं। उन्होंने 23 मार्च को एक बार फिर रिमाइंडर पत्र लिख कर कमिश्नर के इस रवैए पर खेद प्रगट किया है। इसके साथ महापौर ने कमिश्नर को स्पष्ट किया है कि यदि शहर विकास के लिए पेश होने वाले बजट की प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उनकी (कमिश्नर) होगी। एक माह पहले खुल कर खोला था मोर्चा
दरअसल, महापौर और कमिश्नर के बीच छोटी छोटी अनबन की शुरुआत वैसे तो दिसंबर 2025 से शुरू हो गई थी। इस दौरान एमआईसी की बैठक भी बीच में छोड़कर महापौर चले गए थे। तब महापौर ने आरोप लगाया था कि विकास कार्यों के औचक निरीक्षण के दौरान सामने आए भ्रष्टाचारों पर दोषी इंजीनियरों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्यवाही किए जाने के निर्देश निगम प्रशासन को दिए जाते हैं जिन्हें अनदेखा किया जाता है। कमिश्नर से लगातार इन्हीं शिकायतों के बीच 18 फरवरी को महापौर के नेतृत्व में कुछ पार्षदों ने कमिश्नर शेर सिंह मीना के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलते हुए कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस से मिलकर पूरी बात रखी थी। इतना ही नहीं 45 पार्षद वाली नगर निगम में कमिश्नर की कार्यशैली से नाराज 30 पार्षदों के हस्ताक्षर वाली सूची भी सौंपी गई थी। इसी दिन मेयर और कुछ पार्षद भोपाल भी रवाना हो गए थे। इसके बाद से महापौर और कमिश्नर के मध्य फेस टू फेस कोई बात नहीं हुई। सिर्फ पत्राचार के माध्यम से बजट और बैठक बुलाए जाने को ले कर संवाद चल रहा है। बजट को लेकर मेयर ने क्या लिखा है पत्र में
23 मार्च को मेयर योगेश ताम्रकार द्वारा एक बार फिर कमिश्नर शेर सिंह मीना को बजट प्रस्ताव को ले कर पत्र लिखा गया। पत्र में लिखा कि 10 मार्च 2026 को आगामी बजट के संबंध में आवश्यक निर्देश प्रदान किए गए थे, जिसमें स्पष्ट रूप से अपेक्षा की गई थी कि आप सभी संबंधित विभागों के साथ समुचित चर्चा कर प्रस्तावों को अंतिम रूप देते हुए मुझे अवगत कराएंगे। आज दिनांक 23 मार्च 2026 तक इस संबंध में न तो आपकी ओर से कोई जवाब प्राप्त हुआ है और न ही इस विषय पर कोई चर्चा की गई है, जो अत्यंत खेदजनक एवं चिंताजनक है। यह विषय शहर के समग्र विकास से जुड़ा हुआ है। यदि बजट संबंधी प्रक्रिया में विलंब होता है अथवा पर्याप्त विचार-विमर्श के बिना निर्णय लिए जाते हैं, तो इससे भविष्य में विभिन्न विकास कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। आपके द्वारा चर्चा न करने के कारण मेयर-इन-काउंसिल की बैठक नहीं कर पा रहे हैं। अतः आपको निर्देशित किया जाता है कि इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए शीघ्रातिशीघ्र सभी संबंधित विभागों के साथ बैठक कर विस्तृत चर्चा सुनिश्चित करें तथा उसकी प्रगति से मुझे तत्काल अवगत कराएं। यदि बजट प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी होती है, तो उसकी पूर्ण जिम्मेदारी आपकी होगी। महापौर बोले- IAS अधिकारी हैं और इतने गैर जिम्मेदार
दैनिक भास्कर से बातचीत में महापौर योगेश ताम्रकार ने बताया कि बजट पेश होने के पहले आयुक्त द्वारा सभी संबंधित विभाग की बैठक कर प्रस्ताव तैयार किया जाता है। प्रस्ताव पर मुझसे चर्चा के बाद मेयर इन काउंसिल में रखा जाता है। वहां बजट प्रस्ताव में शहर के विकास को देखते हुए संशोधन कर परिषद में पेश किया जाता है। मेयर ने बताया कि अभी तक कमिश्नर द्वारा बजट को लेकर एक भी बिंदु पर मेरे साथ चर्चा नहीं की है। एक फाइल मेरे पास आई थी। मुझे समझ में नहीं आया तो मैंने फाइल लौटाते हुए 10 मार्च को पत्र लिखा था और कहा था आयुक्त मुझसे चर्चा करेंगे लेकिन आज 23 तारीख हो गई मेरे से कोई चर्चा नहीं की गई। अगर शहर का बजट समय पर पास नहीं होता है तो कहीं न कहीं अगले वर्ष के काम करने में असुविधा होगी। इसी लिए आज पत्र लिखकर रिमाइंडर किया है कि अगर समय पर बजट प्रस्तुत नहीं होगा तो संपूर्ण जवाबदारी आयुक्त की होगी। महापौर ने कहा कि मुझे आश्चर्य होता है, हमारे आयुक्त महोदय एक आईएएस अधिकारी है और इतना गैरजिम्मेदाराना इनका व्यवहार है मुझे सोच कर ही बड़ा कष्ट होता है। कमिश्नर ने कहा- कॉर्डिनेशन कर बैठक बुलाएं
इस मामले में नगर निगम कमिश्नर शेर सिंह मीना ने बताया कि लगभग 2 हफ्ते पहले हमने बजट प्रस्ताव बना कर मेयर इन काउंसिल के कार्यालय को भेज दिया था। अब एमआईसी कार्यालय की जिम्मेदारी होती है कि कॉर्डिनेशन कर बैठक बुलाएं और चर्चा करें। लेकिन एमआईसी अब क्या कर रही है उन्हें जानकारी नहीं है।

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