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7 महीने में कुपोषण से 3 बच्चों की मौत:मृत बच्ची के पिता बोले- टीकाकरण के बाद हालत बिगड़ी, बेटे का इलाज रीवा में जारी

7 महीने में कुपोषण से 3 बच्चों की मौत:मृत बच्ची के पिता बोले- टीकाकरण के बाद हालत बिगड़ी, बेटे का इलाज रीवा में जारी

सतना जिले के माथे से कुपोषण का कलंक मिटने का नाम ही नहीं ले रहा है। कुपोषण की गंभीर स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मझगवां ब्लॉक अंतर्गत पिछले 7 माह में 3 बच्चों की कुपोषण ने जान ले ली है। इसे महिला बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले की नाकामी नहीं तो और क्या कहेंगे? हर बार एक मासूम का जीवन लीलने के बाद नोटिसों का दौर कुछ दिन तक चलता है, या फिर किसी छोटे कर्मचारी पर गाज गिरा कर सब अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते है जबकि धरातल पर कुपोषण उसी तरह अकड़ कर खड़ा रहता है। अक्टूबर 2025 में मरवा नयागांव के हुसैन रजा की अति कुपोषण से मौत के बाद सतना से ले कर भोपाल तक खूब शोर मचा और सरकारी संवेदनाएं सुनाई दी। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने तो यहां तक कहा कि सरकार इस विषय में काफी गंभीर है। जमीनी स्तर पर कुपोषण से लड़ने का मास्टर प्लान बनाया जा रहा है ताकि फिर किसी मासूम की कुपोषण से मौत न हो। 7 माह बाद भी अभी तक उस मास्टर प्लान का कही पता नहीं है। दैनिक भास्कर की टीम ने मझगवां विकासखंड अंतर्गत 7 माह में कुपोषण से हुई तीनों मौतों पर बारीकी से पड़ताल की। यह जानने का प्रयास किया कि आखिर स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभागों की जमीनी स्तर तक पहुंच के बावजूद चूक कहा हो रही है? लेकिन उससे पहले जान लेते है तीनों मासूमों की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई। पढ़िए रिपोर्ट… केस-1 : सुरांगी में मिले जुड़वा कुपोषित, एक की मौत
मझगवां ब्लॉक के पथरा सुरांगी निवासी विमला पति नत्थू प्रजापति के महज 4 माह के जुड़वा कुपोषित बच्चों नैतिक और सुप्रांशी को तबियत बिगड़ने पर 21 अप्रैल की देर शाम जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती कराया गया था। जहां सुप्रांशी की इलाज के दौरान 22 अप्रैल की शाम मौत हो गई। जबकि उसके भाई नैतिक को रीवा रेफर कर दिया गया है। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की लापरवाही आई सामने
इस मामले की पड़ताल करने में पता चला कि कुपोषित जुड़वा बच्चों की मां विमला की ये चौथी डिलेवरी थी। बच्चों के जन्म के साथ ही मां ने ब्रेस्ट फीडिंग नहीं कराई। बल्कि गाय और बकरी का दूध बच्चों को पिलाया गया। ऐसे में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने घोर लापरवाही बरती। जन्म के बाद मां से मिलकर उचित सलाह नहीं दी गई। जिस कारण बच्चों की हालत बिगड़ती चली गई। केस-2 : श्वास नली में दूध फंसने से मौत का दावा
मझगवां ब्लॉक की महतैन ग्राम पंचायत के कैमहा गांव में राजललन की 11 माह 20 दिन की बेटी भारती मवासी की 5-6 अप्रैल की दरमियानी रात मौत हो गई। भारती को तीन दिन से बुखार था, जिसका इलाज परिजन गांव के कथित डॉक्टर लालबहादुर से करा रहे थे। बच्ची की मौत की खबर मिलते ही सुबह प्रशासनिक, स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम कैमहा गांव पहुंची। टीम ने प्रारंभिक जांच में पाया कि इलाज के बाद बच्ची को आराम मिल रहा था। कुपोषण से मौत की आशंका को टीम ने खारिज कर दिया था। टीम ने बच्ची की मौत का कारण श्वास नली में मां के दूध का फंसना बताया। टीम के इस तर्क ने बच्ची की मौत पर कई सवाल खड़े कर दिए? क्योंकि जब टीम मौके पर पहुंची थी तब तक शव का पीएम भी नहीं हुआ था। जिसके आधार पर यह कारण बताया जा सके। दबाव में पिता अपने बयान से मुकरा
इस मामले की पड़ताल में यह बात सामने आई कि जांच टीम के मौके पर पहुंचने के पहले पिता ने एक अखबार के रिपोर्टर से बच्ची को सूखा रोग होने की बात बताई। पिता ने बताया था कि गांव के ही एक डाक्टर से इलाज कराते रहे और इसी दौरान बच्ची भारती मवासी की मौत हो गई। जांच टीम के पहुंचने पर भारती के पिता के सुर बदल गए और वह पूरी तरह प्रशासनिक भाषा बोलने लगे। समझ में भी आता है कि एक गरीब आदिवासी कर भी क्या सकता था? केस-3 : जन्म के बाद वजन घटता चला गया
मझगवां ब्लॉक के नयागांव पंचायत का छोटा-सा गांव है मरवा। यहीं के आमिर खान और आसमां बानो ने 3 जुलाई 2025 को जैतवारा के सरकारी अस्पताल में बेटे हुसैन रजा को जन्म दिया था। जन्म के समय उसका वजन 3 किलो था, जो एक स्वस्थ शिशु का संकेत है। महज चार महीनों में ही वजन 2.5 किलो हो गया और उसकी मौत तक हो गई थी। परिजनों के अनुसार जन्म के 10 दिन बाद ही हुसैन बीमार पड़ गया। वे पहले जैतवारा, फिर जिला अस्पताल, उसके बाद आयुष्मान और निजी अस्पतालों में इलाज कराते रहे। निमोनिया ने उसके शरीर को बार-बार तोड़ा। 18 अक्टूबर को हालत बेहद बिगड़ गई। उसे फिर जिला अस्पताल लाया गया। पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती किया गया, लेकिन दो दिन बाद यानी 20 अक्टूबर 2025 को हुसैन की मौत हो गई। पड़ताल में सामने आई लापरवाही
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ विभाग ने जांच दल बनाया। जिसकी रिपोर्ट में आशा कार्यकर्ता सोनू गर्ग और प्रियंका श्रीवास्तव को दोषी पाया गया। इनकी मॉनिटरिंग और फॉलोअप में गंभीर चूक सामने आई। सुप्रांशी की मौत के बाद इस मामले में कौन क्या बोला पिता बोले- टीका लगवाने के बाद बिगड़ी हालत
रीवा के संजय गांधी अस्पताल के पीडियाट्रिक आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे नैतिक के पिता नत्थू ने बताया कि जन्म के बाद बच्चों का वजन बढ़कर 4 किलो हो गया था लेकिन बुखार के कारण वजन घट गया। डॉक्टर बोले- ब्रेस्ट फीडिंग न होने से बिगड़ी हालत
पीकू में भर्ती कराते समय नैतिक का वजन 2 किलो 953 और सुप्रांशी का वजन 2 किलो 862 ग्राम था। संजय गांधी अस्पताल के सीनियर शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ नरेश बजाज ने बताया कि सामान्य तौर पर 4 माह के बच्चों का वजन 4 से 5 किलो होना चाहिए। डॉक्टरों की मानें तो जन्म से 6 माह के बीच बच्चे को सिर्फ ब्रेस्ट फीडिंग कराना चाहिए। बेस्ट फीडिंग से बच्चे को पूरा पोषण आहार मिलता है। ब्रेस्ट फीडिंग नहीं होने की वजह से दोनों बच्चों की हालत ऐसी हुई है। उन्होंने बताया कि बच्चों को गाय, भैंस और बकरी का दूध दिया गया जो नुकसानदेह होता है। उन्होंने नैतिक के जल्द स्वस्थ्य होने की बात कही।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने कहा- ऐसे मामले व्यवस्था पर सवाल खड़े करते है
प्रदेश विधानसभा की सदन में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने इस मामले में ट्वीट कर कहा कि सतना से आई यह खबर बेहद पीड़ादायक और झकझोर देने वाली है, कुपोषण के कारण मात्र 4 माह की मासूम बच्ची की मौत हो जाना सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता है। जब आंगनवाड़ी, पोषण अभियान और स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, तब ऐसे मामले यह सवाल खड़े करते हैं कि आखिर जमीनी स्तर पर योजनाएं पहुंच क्यों नहीं पा रहीं? एक मासूम जिंदगी समय पर इलाज और पोषण के अभाव में खत्म हो गई यह केवल एक परिवार का दुःख नहीं, बल्कि पूरे समाज और सरकार की जिम्मेदारी है। जानें इस मामले में अभी तक क्या कुछ हुआ सुपरवाइजर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को नोटिस
मझगवां ब्लॉक के सुरांगी गांव की 4 माह की मासूम सुप्रांशी की कुपोषण से 22 अप्रैल को हुई मौत के मामले में महिला बाल विकास अधिकारी राजीव सिंह द्वारा प्रथम दृष्टया दोषी माना। सेक्टर सुपरवाइजर करुणा पांडेय और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पूजा पांडेय को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया गया है। फर्जी दवा खाना सीज, एफआईआर दर्ज
उधर कलेक्टर के निर्देश पर मझगवां एससीएम महिपाल सिंग गुर्जर के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने बुधवार को जुगुलपुर गांव में झोलाछाप डॉ. पे्रमलाल अनुरागी के दवाखाने में दबिश दी। दवाखाने में अलग-अलग बीमारियों के इलाज में उपयोग की जाने वाली लगभग 100 प्रकार की दवाइयां मिलीं। बीएमओ डॉ. रुपेश सोनी ने बताया कि प्रेमलाल अनुरागी के पास लायसेंस भी नहीं था। प्रेमलाल अनुरागी पिछले 15 दिनों से गंभीर कुपोषित सुप्रांशी और नैतिक का इलाज करते रहे। इन्होंने दोनों बच्चों को मझगवां सीएचसी नहीं भेजा था। टीम ने फर्जी दवाखाना सीज कर दवाइयां जब्त कर ली है। इस मामले में बीएमओ की रिपोर्ट पर आरोपी प्रेमलाल अनुरागी पिता गया प्रसाद निवासी जुगुलपुर के खिलाफ बीएनएस और मप्र रूजोपचार अधिनियम की अलग-अलग धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। महिला बाल विकास अधिकारी राजीव से ने बताया कि बच्चों की मां विमला एनीमिक थी और बच्चे जन्म के साथ कम वजन के थे। उन्हें जब पहला टीका लगाया गया तो बुखार आ गया था। बच्चों के परिजनों ने दूसरा टीका बाद में लगाने की बात कह कर मना कर दिया था। फिर भी एक बच्चे को दूसरा टीका लगाया गया जबकि एक बच्चे को नहीं लग पाया।

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7 महीने में कुपोषण से 3 बच्चों की मौत:मृत बच्ची के पिता बोले- टीकाकरण के बाद हालत बिगड़ी, बेटे का इलाज रीवा में जारी

7 महीने में कुपोषण से 3 बच्चों की मौत:मृत बच्ची के पिता बोले- टीकाकरण के बाद हालत बिगड़ी, बेटे का इलाज रीवा में जारी

सतना जिले के माथे से कुपोषण का कलंक मिटने का नाम ही नहीं ले रहा है। कुपोषण की गंभीर स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मझगवां ब्लॉक अंतर्गत पिछले 7 माह में 3 बच्चों की कुपोषण ने जान ले ली है। इसे महिला बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले की नाकामी नहीं तो और क्या कहेंगे? हर बार एक मासूम का जीवन लीलने के बाद नोटिसों का दौर कुछ दिन तक चलता है, या फिर किसी छोटे कर्मचारी पर गाज गिरा कर सब अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते है जबकि धरातल पर कुपोषण उसी तरह अकड़ कर खड़ा रहता है। अक्टूबर 2025 में मरवा नयागांव के हुसैन रजा की अति कुपोषण से मौत के बाद सतना से ले कर भोपाल तक खूब शोर मचा और सरकारी संवेदनाएं सुनाई दी। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने तो यहां तक कहा कि सरकार इस विषय में काफी गंभीर है। जमीनी स्तर पर कुपोषण से लड़ने का मास्टर प्लान बनाया जा रहा है ताकि फिर किसी मासूम की कुपोषण से मौत न हो। 7 माह बाद भी अभी तक उस मास्टर प्लान का कही पता नहीं है। दैनिक भास्कर की टीम ने मझगवां विकासखंड अंतर्गत 7 माह में कुपोषण से हुई तीनों मौतों पर बारीकी से पड़ताल की। यह जानने का प्रयास किया कि आखिर स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभागों की जमीनी स्तर तक पहुंच के बावजूद चूक कहा हो रही है? लेकिन उससे पहले जान लेते है तीनों मासूमों की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई। पढ़िए रिपोर्ट… केस-1 : सुरांगी में मिले जुड़वा कुपोषित, एक की मौत
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मझगवां ब्लॉक की महतैन ग्राम पंचायत के कैमहा गांव में राजललन की 11 माह 20 दिन की बेटी भारती मवासी की 5-6 अप्रैल की दरमियानी रात मौत हो गई। भारती को तीन दिन से बुखार था, जिसका इलाज परिजन गांव के कथित डॉक्टर लालबहादुर से करा रहे थे। बच्ची की मौत की खबर मिलते ही सुबह प्रशासनिक, स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम कैमहा गांव पहुंची। टीम ने प्रारंभिक जांच में पाया कि इलाज के बाद बच्ची को आराम मिल रहा था। कुपोषण से मौत की आशंका को टीम ने खारिज कर दिया था। टीम ने बच्ची की मौत का कारण श्वास नली में मां के दूध का फंसना बताया। टीम के इस तर्क ने बच्ची की मौत पर कई सवाल खड़े कर दिए? क्योंकि जब टीम मौके पर पहुंची थी तब तक शव का पीएम भी नहीं हुआ था। जिसके आधार पर यह कारण बताया जा सके। दबाव में पिता अपने बयान से मुकरा
इस मामले की पड़ताल में यह बात सामने आई कि जांच टीम के मौके पर पहुंचने के पहले पिता ने एक अखबार के रिपोर्टर से बच्ची को सूखा रोग होने की बात बताई। पिता ने बताया था कि गांव के ही एक डाक्टर से इलाज कराते रहे और इसी दौरान बच्ची भारती मवासी की मौत हो गई। जांच टीम के पहुंचने पर भारती के पिता के सुर बदल गए और वह पूरी तरह प्रशासनिक भाषा बोलने लगे। समझ में भी आता है कि एक गरीब आदिवासी कर भी क्या सकता था? केस-3 : जन्म के बाद वजन घटता चला गया
मझगवां ब्लॉक के नयागांव पंचायत का छोटा-सा गांव है मरवा। यहीं के आमिर खान और आसमां बानो ने 3 जुलाई 2025 को जैतवारा के सरकारी अस्पताल में बेटे हुसैन रजा को जन्म दिया था। जन्म के समय उसका वजन 3 किलो था, जो एक स्वस्थ शिशु का संकेत है। महज चार महीनों में ही वजन 2.5 किलो हो गया और उसकी मौत तक हो गई थी। परिजनों के अनुसार जन्म के 10 दिन बाद ही हुसैन बीमार पड़ गया। वे पहले जैतवारा, फिर जिला अस्पताल, उसके बाद आयुष्मान और निजी अस्पतालों में इलाज कराते रहे। निमोनिया ने उसके शरीर को बार-बार तोड़ा। 18 अक्टूबर को हालत बेहद बिगड़ गई। उसे फिर जिला अस्पताल लाया गया। पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती किया गया, लेकिन दो दिन बाद यानी 20 अक्टूबर 2025 को हुसैन की मौत हो गई। पड़ताल में सामने आई लापरवाही
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ विभाग ने जांच दल बनाया। जिसकी रिपोर्ट में आशा कार्यकर्ता सोनू गर्ग और प्रियंका श्रीवास्तव को दोषी पाया गया। इनकी मॉनिटरिंग और फॉलोअप में गंभीर चूक सामने आई। सुप्रांशी की मौत के बाद इस मामले में कौन क्या बोला पिता बोले- टीका लगवाने के बाद बिगड़ी हालत
रीवा के संजय गांधी अस्पताल के पीडियाट्रिक आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे नैतिक के पिता नत्थू ने बताया कि जन्म के बाद बच्चों का वजन बढ़कर 4 किलो हो गया था लेकिन बुखार के कारण वजन घट गया। डॉक्टर बोले- ब्रेस्ट फीडिंग न होने से बिगड़ी हालत
पीकू में भर्ती कराते समय नैतिक का वजन 2 किलो 953 और सुप्रांशी का वजन 2 किलो 862 ग्राम था। संजय गांधी अस्पताल के सीनियर शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ नरेश बजाज ने बताया कि सामान्य तौर पर 4 माह के बच्चों का वजन 4 से 5 किलो होना चाहिए। डॉक्टरों की मानें तो जन्म से 6 माह के बीच बच्चे को सिर्फ ब्रेस्ट फीडिंग कराना चाहिए। बेस्ट फीडिंग से बच्चे को पूरा पोषण आहार मिलता है। ब्रेस्ट फीडिंग नहीं होने की वजह से दोनों बच्चों की हालत ऐसी हुई है। उन्होंने बताया कि बच्चों को गाय, भैंस और बकरी का दूध दिया गया जो नुकसानदेह होता है। उन्होंने नैतिक के जल्द स्वस्थ्य होने की बात कही।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने कहा- ऐसे मामले व्यवस्था पर सवाल खड़े करते है
प्रदेश विधानसभा की सदन में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने इस मामले में ट्वीट कर कहा कि सतना से आई यह खबर बेहद पीड़ादायक और झकझोर देने वाली है, कुपोषण के कारण मात्र 4 माह की मासूम बच्ची की मौत हो जाना सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता है। जब आंगनवाड़ी, पोषण अभियान और स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, तब ऐसे मामले यह सवाल खड़े करते हैं कि आखिर जमीनी स्तर पर योजनाएं पहुंच क्यों नहीं पा रहीं? एक मासूम जिंदगी समय पर इलाज और पोषण के अभाव में खत्म हो गई यह केवल एक परिवार का दुःख नहीं, बल्कि पूरे समाज और सरकार की जिम्मेदारी है। जानें इस मामले में अभी तक क्या कुछ हुआ सुपरवाइजर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को नोटिस
मझगवां ब्लॉक के सुरांगी गांव की 4 माह की मासूम सुप्रांशी की कुपोषण से 22 अप्रैल को हुई मौत के मामले में महिला बाल विकास अधिकारी राजीव सिंह द्वारा प्रथम दृष्टया दोषी माना। सेक्टर सुपरवाइजर करुणा पांडेय और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पूजा पांडेय को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया गया है। फर्जी दवा खाना सीज, एफआईआर दर्ज
उधर कलेक्टर के निर्देश पर मझगवां एससीएम महिपाल सिंग गुर्जर के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने बुधवार को जुगुलपुर गांव में झोलाछाप डॉ. पे्रमलाल अनुरागी के दवाखाने में दबिश दी। दवाखाने में अलग-अलग बीमारियों के इलाज में उपयोग की जाने वाली लगभग 100 प्रकार की दवाइयां मिलीं। बीएमओ डॉ. रुपेश सोनी ने बताया कि प्रेमलाल अनुरागी के पास लायसेंस भी नहीं था। प्रेमलाल अनुरागी पिछले 15 दिनों से गंभीर कुपोषित सुप्रांशी और नैतिक का इलाज करते रहे। इन्होंने दोनों बच्चों को मझगवां सीएचसी नहीं भेजा था। टीम ने फर्जी दवाखाना सीज कर दवाइयां जब्त कर ली है। इस मामले में बीएमओ की रिपोर्ट पर आरोपी प्रेमलाल अनुरागी पिता गया प्रसाद निवासी जुगुलपुर के खिलाफ बीएनएस और मप्र रूजोपचार अधिनियम की अलग-अलग धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। महिला बाल विकास अधिकारी राजीव से ने बताया कि बच्चों की मां विमला एनीमिक थी और बच्चे जन्म के साथ कम वजन के थे। उन्हें जब पहला टीका लगाया गया तो बुखार आ गया था। बच्चों के परिजनों ने दूसरा टीका बाद में लगाने की बात कह कर मना कर दिया था। फिर भी एक बच्चे को दूसरा टीका लगाया गया जबकि एक बच्चे को नहीं लग पाया।

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