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Weather Change Health Risk Precautions; Seasonal Disease Reason

Weather Change Health Risk Precautions; Seasonal Disease Reason
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36 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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एक मुहावरा है, ‘अंडर द वेदर’ यानी थोड़ा अस्वस्थ महसूस करना। अगर आपको भी मौसम में थोड़ा सा बदलाव होने पर खांसी, छींक और बुखार हो जाता है तो आप अकेले नहीं हैं।

दरअसल, मौसम बदलने पर तापमान, नमी और वायुदाब (बैरोमेट्रिक प्रेशर) में अचानक बदलाव होता है। इससे शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है और वायरस या बैक्टीरिया के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसी वजह से सर्दी-जुकाम, वायरल फीवर, एलर्जी और पाचन से जुड़ी दिक्कतें भी बढ़ जाती हैं।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि-

  • मौसम बदलने पर लोग क्यों बीमार पड़ते हैं?
  • किन लोगों को ज्यादा रिस्क रहता है?
  • इस दौरान अपनी सेहत का ख्याल कैसे रखें?

एक्सपर्ट: डॉ. अरविंद अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन एंड इन्फेक्शियस डिजीज, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली

सवाल- मौसम बदलने पर लोग बीमार क्यों पड़ते हैं?

जवाब- मौसम में अचानक बदलाव से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। शरीर को भी उतनी ही तेजी से बदलावों के साथ खुद को एडजस्ट करना पड़ता है। इससे इम्यून सिस्टम अस्थायी रूप से कमजोर पड़ जाता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। मौसम बदलने पर पॉलेन (पौधों के पराग कण) और धूल जैसे एलर्जेन्स भी बढ़ जाते हैं, जो सर्दी, साइनस और सांस की समस्याएं पैदा कर सकते हैं। गर्मियों में डिहाइड्रेशन और थकान का जोखिम भी बढ़ जाता है।

सवाल- मौसम का बदलना हमारे शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

जवाब- मौसम में बदलाव शरीर के फिजियोलॉजिकल सिस्टम (इंटरनल बॉडी सिस्टम, जो मिलकर शरीर को स्वस्थ रखते हैं) को प्रभावित करता है। तापमान में गिरावट या बढ़ोतरी होने पर शरीर को ब्लड सर्कुलेशन और मेटाबॉलिज्म को एडजस्ट करना पड़ता है, जिससे कुछ लोगों को सिरदर्द, लो एनर्जी या ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव की समस्या हो सकती है। ठंड के मौसम में ब्लड वेसल्स सिकुड़ती हैं, जिससे हार्ट पर प्रेशर बढ़ सकता है, जबकि अधिक गर्मी में शरीर पसीने के जरिए तापमान नियंत्रित करता है, जिससे इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का खतरा रहता है।

सवाल- मौसम बदलने का हमारी नींद और मूड पर क्या असर पड़ता है?

जवाब- शरीर की सर्केडियन रिद्म (बॉयलॉजिकल क्लॉक) रोशनी और तापमान से नियंत्रित होती है। जब दिन छोटे या बड़े होते हैं, तो इस कारण से मेलाटोनिन (स्लीप हॉर्मोन) और सेरोटोनिन (मूड हॉर्मोन) का संतुलन बदल सकता है।

सवाल- मौसम बदलने पर किन लोगों को बीमार पड़ने का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- मौसम बदलते ही कुछ लोग आसानी से एडजस्ट कर लेते हैं, लेकिन कुछ के लिए ये बदलाव सर्दी–जुकाम, एलर्जी या दूसरी बीमारियों की वजह बन जाता है। उन लोगों को ज्यादा समस्या होती है-

  • जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है।
  • जो पहले ही किसी बीमारी का सामना कर रहे हैं।

इसके अलावा किन लोगों को समस्या होती है, ग्राफिक में पूरी लिस्ट देखिए-

सवाल- क्या बार-बार बीमार होना इम्यून सिस्टम के कमजोर होने का संकेत है?

जवाब- साल में 2–3 बार सर्दी-जुकाम होना सामान्य माना जाता है, खासकर बच्चों में। लेकिन अगर-

  • संक्रमण बार-बार हो
  • संक्रमण लंबे समय तक ठीक न हो
  • बार-बार एंटीबायोटिक की जरूरत पड़े
  • हर छोटी बीमारी गंभीर रूप ले ले

तो यह इम्यून फंक्शन में कमी का संकेत हो सकता है।

सवाल- कमजोर इम्यूनिटी के कारण मौसम बदलने पर बच्चे ज्यादा बीमार पड़ते हैं। ऐसे में उन्हें हेल्दी रखने के लिए क्या करना चाहिए?

जवाब- मौसम बदलते ही बच्चों में सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में कुछ बेसिक, लेकिन जरूरी कदम अपनाकर उन्हें संक्रमण से काफी हद तक बचाया जा सकता है। ग्राफिक से समझते हैं कि कैसे बदलते मौसम में बच्चों को बीमारियों से बचाया जा सकता है-

सवाल- बदलते मौसम में बीमार होने से बचने के लिए हमें क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब- मौसम बदलने पर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं। पॉइंटर से समझते हैं-

इम्यूनिटी मजबूत रखें

बदलते मौसम में डाइट का खास ध्यान रखें। हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और प्रोटीन रिच फूड लें। साथ ही अदरक, हल्दी, लहसुन और शहद जैसे एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करते हैं।

हाइड्रेटेड रहें

शरीर में पानी की कमी होने पर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी पिएं।

पर्याप्त नींद लें और स्ट्रेस मैनेज करें

रोजाना 7–9 घंटे की अच्छी नींद लें, क्योंकि नींद इम्यूनिटी को मजबूत करती है। साथ ही योग, मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग जैसी एक्टिविटी तनाव कम करने में मदद करती हैं।

हाइजीन का ध्यान रखें

बदलते मौसम मेें संक्रमण से बचने के लिए नियमित रूप से हाथ धोएं। साथ ही पर्सनल हाइजीन मेंटेन करें।

शरीर के संकेतों को समझें

थकान, हल्का बुखार या कमजोरी जैसे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। समय पर आराम और सही खानपान से हेल्थ प्रॉब्लम्स को बढ़ने से रोका जा सकता है।

लेयर्ड कपड़े पहनें

तापमान में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए लेयर वाले कपड़े पहनें, ताकि जरूरत के मुताबिक लेयर हटाई या बढ़ाई जा सके।

गर्मियों में कैसे रखें सेहत का ख्याल

ये तो हो गई जेनेरिक मौसम बदलने पर बरती जाने वाली सावधानियां। लेकिन इस मौसम में, जब यह बदलाव सर्दी से गर्मी की तरफ हो रहा है, सर्दियों का मौसम जा रहा है और गर्मियां आ रही हैं तो ऐसे में कुछ खास बातों का विशेष ध्यान रखें। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें–

सवाल- मौसम चेंज होने पर हमारा खानपान कैसा होना चाहिए?

जवाब- मौसम बदलते ही इम्यूनिटी थोड़ी कमजोर पड़ सकती है। इसलिए डाइट में ऐसे फूड शामिल करना जरूरी है, जो शरीर को संक्रमण से बचाएं। ग्राफिक से समझते हैं कि इस दौरान डाइट कैसी होनी चाहिए-

सवाल- ओवरऑल किसी भी मौसम में हेल्दी रहने के लिए हमारी लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए?

जवाब- किसी भी मौसम में हेल्दी रहने के लिए लाइफस्टाइल संतुलित और नियमित होनी चाहिए। पॉइंटर्स से समझते हैं-

  • रोजाना ताजा और पौष्टिक भोजन, पर्याप्त प्रोटीन व मौसमी फल-सब्जियां लेना जरूरी है, ताकि इम्यूनिटी मजबूत रहे।
  • कम-से-कम 30–45 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी और 7–8 घंटे की अच्छी नींद शरीर की रिकवरी और हॉर्मोनल बैलेंस के लिए अहम है।
  • मौसम चाहे ठंडा हो या गर्म, पर्याप्त पानी पीना, पर्सनल हाइजीन बनाए रखना और स्ट्रेस को मैनेज करना भी उतना ही जरूरी है।
  • मेडिटेशन और योग स्ट्रेस कम करने में मददगार हैं।
  • स्क्रीन टाइम सीमित रखना और समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद करता है।

…………………………..

ये खबर भी पढ़ें…

जरूरत की खबर- युवाओं में बढ़ रहा हाई ब्लड प्रेशर:इन 9 आदतों के कारण बढ़ता रिस्क, डॉक्टर से जानें कंट्रोल करने के नेचुरल तरीके

एक समय था, जब हमारे आसपास ब्लड प्रेशर की समस्या सिर्फ उम्रदराज लोगों में होती थी। बीपी की चिंता पेरेंट्स किया करते थे। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। हाई ब्लड प्रेशर सिर्फ बुजुर्गों को होने वाली बीमारी नहीं रही। देश-दुनिया में 20–30 साल के युवाओं में भी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या कॉमन होती जा रही है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में साल 2016 में पब्लिश स्टडी के मुताबिक पूरी दुनिया में 20 से 29 साल के 10 से 15% युवा हाई ब्लड प्रेशर का शिकार हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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36 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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एक मुहावरा है, ‘अंडर द वेदर’ यानी थोड़ा अस्वस्थ महसूस करना। अगर आपको भी मौसम में थोड़ा सा बदलाव होने पर खांसी, छींक और बुखार हो जाता है तो आप अकेले नहीं हैं।

दरअसल, मौसम बदलने पर तापमान, नमी और वायुदाब (बैरोमेट्रिक प्रेशर) में अचानक बदलाव होता है। इससे शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है और वायरस या बैक्टीरिया के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसी वजह से सर्दी-जुकाम, वायरल फीवर, एलर्जी और पाचन से जुड़ी दिक्कतें भी बढ़ जाती हैं।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि-

  • मौसम बदलने पर लोग क्यों बीमार पड़ते हैं?
  • किन लोगों को ज्यादा रिस्क रहता है?
  • इस दौरान अपनी सेहत का ख्याल कैसे रखें?

एक्सपर्ट: डॉ. अरविंद अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन एंड इन्फेक्शियस डिजीज, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली

सवाल- मौसम बदलने पर लोग बीमार क्यों पड़ते हैं?

जवाब- मौसम में अचानक बदलाव से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। शरीर को भी उतनी ही तेजी से बदलावों के साथ खुद को एडजस्ट करना पड़ता है। इससे इम्यून सिस्टम अस्थायी रूप से कमजोर पड़ जाता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। मौसम बदलने पर पॉलेन (पौधों के पराग कण) और धूल जैसे एलर्जेन्स भी बढ़ जाते हैं, जो सर्दी, साइनस और सांस की समस्याएं पैदा कर सकते हैं। गर्मियों में डिहाइड्रेशन और थकान का जोखिम भी बढ़ जाता है।

सवाल- मौसम का बदलना हमारे शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

जवाब- मौसम में बदलाव शरीर के फिजियोलॉजिकल सिस्टम (इंटरनल बॉडी सिस्टम, जो मिलकर शरीर को स्वस्थ रखते हैं) को प्रभावित करता है। तापमान में गिरावट या बढ़ोतरी होने पर शरीर को ब्लड सर्कुलेशन और मेटाबॉलिज्म को एडजस्ट करना पड़ता है, जिससे कुछ लोगों को सिरदर्द, लो एनर्जी या ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव की समस्या हो सकती है। ठंड के मौसम में ब्लड वेसल्स सिकुड़ती हैं, जिससे हार्ट पर प्रेशर बढ़ सकता है, जबकि अधिक गर्मी में शरीर पसीने के जरिए तापमान नियंत्रित करता है, जिससे इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का खतरा रहता है।

सवाल- मौसम बदलने का हमारी नींद और मूड पर क्या असर पड़ता है?

जवाब- शरीर की सर्केडियन रिद्म (बॉयलॉजिकल क्लॉक) रोशनी और तापमान से नियंत्रित होती है। जब दिन छोटे या बड़े होते हैं, तो इस कारण से मेलाटोनिन (स्लीप हॉर्मोन) और सेरोटोनिन (मूड हॉर्मोन) का संतुलन बदल सकता है।

सवाल- मौसम बदलने पर किन लोगों को बीमार पड़ने का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- मौसम बदलते ही कुछ लोग आसानी से एडजस्ट कर लेते हैं, लेकिन कुछ के लिए ये बदलाव सर्दी–जुकाम, एलर्जी या दूसरी बीमारियों की वजह बन जाता है। उन लोगों को ज्यादा समस्या होती है-

  • जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है।
  • जो पहले ही किसी बीमारी का सामना कर रहे हैं।

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  • संक्रमण बार-बार हो
  • संक्रमण लंबे समय तक ठीक न हो
  • बार-बार एंटीबायोटिक की जरूरत पड़े
  • हर छोटी बीमारी गंभीर रूप ले ले

तो यह इम्यून फंक्शन में कमी का संकेत हो सकता है।

सवाल- कमजोर इम्यूनिटी के कारण मौसम बदलने पर बच्चे ज्यादा बीमार पड़ते हैं। ऐसे में उन्हें हेल्दी रखने के लिए क्या करना चाहिए?

जवाब- मौसम बदलते ही बच्चों में सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में कुछ बेसिक, लेकिन जरूरी कदम अपनाकर उन्हें संक्रमण से काफी हद तक बचाया जा सकता है। ग्राफिक से समझते हैं कि कैसे बदलते मौसम में बच्चों को बीमारियों से बचाया जा सकता है-

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पर्याप्त नींद लें और स्ट्रेस मैनेज करें

रोजाना 7–9 घंटे की अच्छी नींद लें, क्योंकि नींद इम्यूनिटी को मजबूत करती है। साथ ही योग, मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग जैसी एक्टिविटी तनाव कम करने में मदद करती हैं।

हाइजीन का ध्यान रखें

बदलते मौसम मेें संक्रमण से बचने के लिए नियमित रूप से हाथ धोएं। साथ ही पर्सनल हाइजीन मेंटेन करें।

शरीर के संकेतों को समझें

थकान, हल्का बुखार या कमजोरी जैसे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। समय पर आराम और सही खानपान से हेल्थ प्रॉब्लम्स को बढ़ने से रोका जा सकता है।

लेयर्ड कपड़े पहनें

तापमान में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए लेयर वाले कपड़े पहनें, ताकि जरूरत के मुताबिक लेयर हटाई या बढ़ाई जा सके।

गर्मियों में कैसे रखें सेहत का ख्याल

ये तो हो गई जेनेरिक मौसम बदलने पर बरती जाने वाली सावधानियां। लेकिन इस मौसम में, जब यह बदलाव सर्दी से गर्मी की तरफ हो रहा है, सर्दियों का मौसम जा रहा है और गर्मियां आ रही हैं तो ऐसे में कुछ खास बातों का विशेष ध्यान रखें। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें–

सवाल- मौसम चेंज होने पर हमारा खानपान कैसा होना चाहिए?

जवाब- मौसम बदलते ही इम्यूनिटी थोड़ी कमजोर पड़ सकती है। इसलिए डाइट में ऐसे फूड शामिल करना जरूरी है, जो शरीर को संक्रमण से बचाएं। ग्राफिक से समझते हैं कि इस दौरान डाइट कैसी होनी चाहिए-

सवाल- ओवरऑल किसी भी मौसम में हेल्दी रहने के लिए हमारी लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए?

जवाब- किसी भी मौसम में हेल्दी रहने के लिए लाइफस्टाइल संतुलित और नियमित होनी चाहिए। पॉइंटर्स से समझते हैं-

  • रोजाना ताजा और पौष्टिक भोजन, पर्याप्त प्रोटीन व मौसमी फल-सब्जियां लेना जरूरी है, ताकि इम्यूनिटी मजबूत रहे।
  • कम-से-कम 30–45 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी और 7–8 घंटे की अच्छी नींद शरीर की रिकवरी और हॉर्मोनल बैलेंस के लिए अहम है।
  • मौसम चाहे ठंडा हो या गर्म, पर्याप्त पानी पीना, पर्सनल हाइजीन बनाए रखना और स्ट्रेस को मैनेज करना भी उतना ही जरूरी है।
  • मेडिटेशन और योग स्ट्रेस कम करने में मददगार हैं।
  • स्क्रीन टाइम सीमित रखना और समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद करता है।

…………………………..

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