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ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं:प्रोबेशन में ही शहर चले गए 158 डॉक्टर, इलाज के बजाय कर रहे बाबूगीरी

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं:प्रोबेशन में ही शहर चले गए 158 डॉक्टर, इलाज के बजाय कर रहे बाबूगीरी

2 फरवरी… पचमढ़ी में गैस सिलेंडर ब्लास्ट के बाद 6-7 झुलसे लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। यहां डॉक्टर नहीं मिले। सबको पिपरिया रेफर कर दिया। 15 मार्च… लीवर सिरोसिस का मरीज तड़पता हुआ यहां लाया गया। इस बार भी रेफर करना पड़ा।
यह तस्वीर प्रदेश के अकेले हिल स्टेशन पचमढ़ी की है। यहां अस्पताल तो है, लेकिन डॉक्टर एक भी नहीं। जो एक डॉक्टर यहां आए भी थे, उन्हें नियम विरुद्ध तरीके से दूसरे अपस्ताल में अटैच कर दिया गया। प्रदेश के 43 सामुदायिक और 445 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं, जहां मरीज पहुंचते हैं… लेकिन डॉक्टर नहीं मिलते। मप्र में डॉक्टरों के अटैचमेंट और गैर-चिकित्सीय कार्य लेने से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं हैं। प्रदेश में 158 डॉक्टरों को जिलों और ब्लॉक अस्पतालों से हटाकर बड़े शहरों में अटैच कर दिया गया जबकि प्रोबेशन में अटैचमेंट का प्रावधान नहीं है। पचमढ़ी के अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं, सिर्फ एक नर्स 12 हजार की आबादी वाले पचमढ़ी के 30 बिस्तरों वाले सामुदायिक अस्पताल में एक भी डॉक्टर नहीं है। सभी के अटैचमेंट हो चुके हैं। सिर्फ एक स्टॉफ नर्स अशोका वर्मा हैं। वे सिर्फ रेफर करती हैं। वे कहती हैं- डॉक्टर नहीं है, इसलिए न ओपीडी पर्ची बनेंगी और ना दवाएं दी जाएंगी। छतरपुर के बारीगढ़ में बस पैरामेडिकल स्टाफ छतरपुर के 30 पलंग वाले बारीगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक भी डॉक्टर नहीं बचा। यहां पदस्थ डॉ. ललिता यादव को अटैच कर राष्ट्रीय कार्यक्रम में लगा दिया है। अब मरीज आते हैं तो उन्हें पैरामेडिकल स्टाफ देखता है और छतरपुर रेफर कर देता है। “अभी हमारे यहां चिकित्सकों की भर्ती होने वाली है, उसमें पूर्ति की जाएगी। अटैचमेंट को लेकर भी जानकारी मंगाई जा रही है। यदि ऐसी स्थिति है तो कार्रवाई की जाएगी।” – एस. धनराजू, आयुक्त स्वास्थ्य

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