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Azam Khan Rampur Politics; SP Leadership Change

Azam Khan Rampur Politics; SP Leadership Change

7 नवंबर 2025, आजम खान के जेल से रिहा होने के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव उनसे मिलने रामपुर पहुंचे थे। इस मुलाकात के बाद आजम थोड़ा तल्ख दिखे। अखिलेश से बढ़ती दूरी पर उनसे सवाल पूछा गया, तो बोले- ‘अब दिल ही कहां रह गया है, बगैर दिल के काम कर रहे हैं। इस र

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इस बयान ने साफ कर दिया कि आजम को रामपुर में अपने और पार्टी के बीच ‘किसी और’ का आना पसंद नहीं है। शायद उन्हें अंदाजा था कि सपा रामपुर में बड़ा फेरबदल कर सकती है। 2 मार्च को ऐसा ही हुआ। अखिलेश यादव ने BSP से आए पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्र सागर को प्रदेश सचिव बना दिया।

सुरेंद्र रामपुर के कद्दावर नेता रहे हैं। उन्हें प्रदेश सचिव बनाने का फैसला आजम खान की गैरमौजूदगी में हुआ। फैसले को 20 दिन हो गए, लेकिन रामपुर में आजम के समर्थक अब भी नाराज हैं। उनका कहना है कि आजम 7 साल की सजा काट रहे हैं, नहीं पता कब चुनाव लड़ पाएंगे। इसलिए उन्हें पार्टी में तवज्जो नहीं मिल रही।

लखनऊ में 2 मार्च को सपा कार्यालय में अखिलेश ने सुरेंद्र सागर (काली सदरी में) को पार्टी का प्रदेश सचिव बनाया। 2022 में सुरेंद्र ने रामपुर की मिलक सीट से चुनाव लड़ा था।

अब तीन सवाल हैं 1. सुरेंद्र सागर को लाना अखिलेश यादव की 2027 विधानसभा चुनाव की नई रणनीति का हिस्सा है? 2. क्या सपा रामपुर में आजम खान से अलग नई लीडरशिप तलाश रही है? 3. रामपुर में आजम समर्थकों और सुरेंद्र सागर का इस फेरबदल पर क्या कहना है?

4 पॉइंट्स में जानिए, रामपुर में सुरेंद्र सागर को कमान देने की वजह 1. दलित-पिछड़ा-अल्पसंख्यक, यानी PDA मॉडल को मजबूत करना 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सपा का फोकस PDA फॉर्मूले पर है। सुरेंद्र सागर को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर अखिलेश रामपुर और मुरादाबाद मंडल के दलित वोटर्स को पॉजिटिव मैसेज देना चाहते हैं।

2. आजम की गैरमौजूदगी में नया विकल्प आजम फर्जी पैन कार्ड मामले में सजा काट रहे हैं। वे 2027 में चुनाव नहीं लड़ सकते। उनकी गैरमौजूदगी में सपा रामपुर में एक खालीपन महसूस कर रही थी। इसकी भरपाई के लिए सुरेंद्र सागर को प्रदेश सचिव बनाकर रामपुर की जिम्मेदारी दी गई।

3. बसपा के कोर वोट बैंक में सेंधमारी सुरेंद्र सागर की बसपा के कैडर वोटरों और यादव-जाटव बिरादरी में अच्छी पकड़ मानी जाती है। सपा ने उनके जरिए BSP के पारंपरिक वोट बैंक को अपनी ओर खींचने का दांव चला है।

4. लोकल गुटबाजी को बैलेंस करना रामपुर में सपा की लीडरशिप में पहले भी गुटबाजी रही है। सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी आजम खान के खिलाफ बयान देते रहते हैं। लिहाजा पार्टी ने ऐसे नेता को जिम्मेदारी दी, जो बाहर से (BSP से) आए हैं। इससे पुराने समीकरणों को बैलेंस करने की कोशिश की गई है।

वो दौर, जब रामपुर में आजम के बिना पत्ता नहीं हिलता था रामपुर के सीनियर जर्नलिस्ट विवेक गुप्ता कहते हैं, ‘आजम के दबदबे की शुरुआत 2003 में मुलायम सरकार से हुई। वे यूपी सरकार में शहरी विकास मंत्री बनाए गए। 2012 से 2017 तक रामपुर में जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी सुबह उठकर सबसे पहले आजम के घर हाजिरी लगाने जाते थे। जिले का DM या SP कौन होगा, ये लखनऊ से नहीं बल्कि आजम की पसंद से तय होता था।‘

‘2005 में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव रामपुर में आजम की जौहर यूनिवर्सिटी का शिलान्यास करने आए थे। तब आजम की मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता था। आज वे सलाखों के पीछे हैं। उनकी गैरमौजूदगी में सपा ने सुरेंद्र सागर पर दांव चला है। ये बताता है कि अब सपा रामपुर को एक चेहरे के भरोसे नहीं छोड़ना चाहती।‘

2017 में योगी सरकार आने के बाद से आजम खान तीन बार जेल जा चुके हैं। पहली बार फरवरी 2020 से मई 2022 तक और फिर अक्टूबर 2023 से सितंबर 2025 तक जेल में रहे। बीते 5 साल में उन्होंने 50 महीने जेल में काटे। 23 सितंबर 2025 को सीतापुर जेल से रिहा होकर रामपुर आए। 54 दिनों तक बाहर रहे, लेकिन 17 नवंबर 2025 को फर्जी पैन कार्ड मामले में उन्हें फिर 7 साल की सजा हो गई।

सुरेंद्र सागर बोले- रामपुर में सपा का हर वोटर मेरे साथ रामपुर सीट पर आजम खान 9 बार विधायक और 2 बार सांसद रहे। 4 बार यूपी सरकार में मंत्री रहे। फिलहाल बेटे अब्दुल्ला के साथ रामपुर जेल में बंद हैं। रामपुर की सियासत में बीते 40 साल से आजम फैमिली का दबदबा रहा है। उनकी गैरमौजूदगी में सुरेंद्र सागर रामपुर की कमान कैसे संभालेंगे, ये जानने के लिए हम उनके दफ्तर पहुंचे। यहां मिले सुरेंद्र सागर के बेटे अंकुर सागर ने बताया कि वे पार्टी के काम से बाहर गए हैं।

हमने सुरेंद्र से फोन पर बात की। सपा में मिली जिम्मेदारी पर उन्होंने कहा, ‘रामपुर के लोग हमारे साथ है। आजम खान साहब ने रामपुर को सपा का गढ़ बनाया है। उनके संघर्ष के दिनों में पार्टी को जमीन पर मजबूत रखना हमारी प्राथमिकता है।‘

क्या रामपुर में आजम खान के समर्थक आपको वोट देंगे? सुरेंद्र जवाब देते हैं, ‘सिर्फ रामपुर में ही नहीं बल्कि पूरे यूपी में सपा PDA मॉडल पर काम रही है। पार्टी का टारगेट है कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों को एकजुट किया जाए। यही लक्ष्य लेकर हम रामपुर में गांव-गांव का दौरा कर रहे हैं। हमें हर वर्ग के लोगों का सपोर्ट है।‘

BSP में रहते हुए सुरेंद्र सागर 5 बार रामपुर के जिला अध्यक्ष बने थे। वे BSP के टिकट पर 2 बार मिलक विधानसभा सीट से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। मायावती ने उन्हें राज्यमंत्री भी बनाया। मायावती ने 24 दिसंबर, 2024 को उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। वे इस बात से नाराज थीं कि सुरेंद सागर ने अपने बेटे की शादी सपा नेता की बेटी से कर दी थी। इस शादी में अखिलेश यादव भी पहुंचे थे।

सपा को ‘खामोश’ आजम खान की जरुरत रामपुर में नवाबों के दौर से लेकर मौजूदा सियासत पर रिसर्च कर चुके पॉलिटिकल एनालिस्ट तमकीन फयाज खान कहते हैं, ‘सपा में आजम खान का कद तो बरकरार है, लेकिन पार्टी को उनकी दखलंदाजी और बयान बर्दाश्त नहीं हो रहे। सपा को अब एक खामोश आजम खान चाहिए।‘

‘आजम जेल में रहते हैं, तो पार्टी के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह काम करते हैं। बाहर आकर अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाते हैं कि PDA का नारा देने वाले अल्पसंख्यकों को स्टेज पर क्यों नहीं जाने देते। इससे सपा असहज हो जाती है।‘

तमकीन आगे कहते हैं, ‘सपा का सुरेंद्र को प्रदेश सचिव बनाकर रामपुर में नई लीडरशिप तैयार करना चौंकाने वाला फैसला है। PDA मॉडल पर रामपुर में सुरेंद्र सागर का अपॉइंटमेंट हुआ, लेकिन बड़ी अजीब बात है कि उन्हीं की बिरादरी के अजय सागर को पार्टी ने दरकिनार कर दिया है। इन्हें कभी आजम खान की सिफारिश पर सपा का जिलाध्यक्ष बनाए गया था। इससे ये मैसेज गया कि बड़े फैसलों में सपा आजम खान की मर्जी नहीं देख रही।’

क्या सपा आजम फैमिली से जानबूझकर कट रही है? तमकीन इसका जवाब एक सियासी घटना से देते हैं। उन्होंने बताया, ‘पिछले साल आजम खान की जमानत से लगभग 5 महीने पहले उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की जमानत हुई थी। अब्दुल्ला ने बाहर आने के बाद अपने वालिद को बेल दिलवाने के लिए बहुत कोशिशें की। इसके बाद सितंबर में आजम रिहा हो गए।’

’अब्दुल्ला जमानत पर बाहर थे, तब उसी समय सपा ने रामपुर में अल्पसंख्यकों का बड़ा सम्मेलन करवाया। इसमें अब्दुल्ला को न्योता तक नहीं दिया गया। आजम फैमिली का कोई सदस्य इसमें शामिल नहीं हुआ। ये सब देखकर लगता है कि सपा में रहते हुए आजम खान को सियासत में बड़ा मौका मिलना मुश्किल होगा।’

भड़काऊ भाषण के मामले में 2022 में आजम को सजा हुई और उनकी विधायकी चली गई। वे 2028 तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकते। यही हाल अब्दुल्ला का भी है। 2023 में अब्दुल्ला की विधायकी चली गई। वो स्वार सीट से विधायक थे। वे 2029 तक चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।

लोग बोले- अखिलेश बुरे वक्त में आजम को धोखा दे रहे रामपुर के शाहबाद गेट पर बेकरी चलाने वाले जाहिद का मानना है कि रामपुर की लीडरशिप में फेरबदल करने से सपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। जाहिद सपा प्रमुख अखिलेश यादव से नाराजगी जताते हुए कहते हैं, ‘मीडिया सुरेंद्र सागर को नेता बना रही है, जबकि वे खुद बहन जी (मायावती) की मेहरबानी से जिलाध्यक्ष बने थे। आजम खान के मुकाबले उनकी कोई हैसियत नहीं है।‘

‘रामपुर में सुरेंद्र सागर क्या, अगर अखिलेश यादव भी आजम के मुकाबले चुनाव लड़ लें तो हार जाएंगे। आजम खान की वजह से सपा उत्तर प्रदेश में इतनी बड़ी पार्टी बन पाई। जाटव समाज को छोड़ दें, तो सुरेंद्र सागर को रामपुर में कोई नहीं जानता।‘

आदर्श कॉलोनी के रहने वाले गोविंद यादव सुरेंद्र सागर का समर्थन करते हैं। वे कहते हैं, ‘ यादव और जाटव बिरादरी के बीच उनकी अच्छी पकड़ है। हमने वो दौर देखा है, जब रामपुर में एक ही परिवार की चलती थी। सुरेंद्र के आने से राजनीति जौहर यूनिवर्सिटी की दीवारों से निकलकर खेतों और गांवों तक पहुंचेगी।‘

‘आजम के आगे सागर कमजोर विकल्प’ सीनियर जर्नलिस्ट सुहैल जैदी कहते हैं, ‘आजम खान का कद आज भी अपनी जगह है। वे अपनी सियासत के ऐसे मुकाम पर आ चुके हैं कि उसमें कुछ भी फेरबदल होना नामुमकिन है। बात रही सुरेंद्र सागर की, तो उन्होंने मंत्री रहते हुए रामपुर में ऐसा कोई काम नहीं करवाया, जिससे उनका प्रभाव दिखता हो।‘

‘दूसरी तरफ आजम खान ने बतौर मंत्री यहां के रोड इंफ्रास्ट्रक्चर, अस्पताल, स्कूल और बस स्टॉप जैसी सुविधाएं दीं। भले ही वे जेल में हैं, लेकिन उनके लिए इज्जत बरकरार है। आजम खान और सुरेंद्र सागर के बीच कोई बराबरी नहीं है। सबको पता है आजम खान की मर्जी के बिना रामपुर का विधायक नहीं तय हो सकता।‘

………………. ये खबर भी पढ़ें…

धुरंधर-2 में अतीक अहमद की कहानी सच या प्रोपेगैंडा

इलाहाबाद का चकिया। सफेद कुर्ता, सिर पर साफा पहने, चेहरे पर मुस्कान लिए एक माफिया। फिल्म धुरंधर-2 शुरुआती सीन से ही आपको सीधे यूपी के माफिया और सांसद रहे अतीक अहमद के दौर में ले जाएगी। फिल्म में भले ही डिस्क्लेमर है, लेकिन आतिफ का किरदार हूबहू अतीक अहमद से मिल रहा है। ये कहानी सच है या प्रोपेगैंडा, पढ़िए पूरी खबर…

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जॉब - शिक्षा

राजनीति

Azam Khan Rampur Politics; SP Leadership Change

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7 नवंबर 2025, आजम खान के जेल से रिहा होने के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव उनसे मिलने रामपुर पहुंचे थे। इस मुलाकात के बाद आजम थोड़ा तल्ख दिखे। अखिलेश से बढ़ती दूरी पर उनसे सवाल पूछा गया, तो बोले- ‘अब दिल ही कहां रह गया है, बगैर दिल के काम कर रहे हैं। इस र

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इस बयान ने साफ कर दिया कि आजम को रामपुर में अपने और पार्टी के बीच ‘किसी और’ का आना पसंद नहीं है। शायद उन्हें अंदाजा था कि सपा रामपुर में बड़ा फेरबदल कर सकती है। 2 मार्च को ऐसा ही हुआ। अखिलेश यादव ने BSP से आए पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्र सागर को प्रदेश सचिव बना दिया।

सुरेंद्र रामपुर के कद्दावर नेता रहे हैं। उन्हें प्रदेश सचिव बनाने का फैसला आजम खान की गैरमौजूदगी में हुआ। फैसले को 20 दिन हो गए, लेकिन रामपुर में आजम के समर्थक अब भी नाराज हैं। उनका कहना है कि आजम 7 साल की सजा काट रहे हैं, नहीं पता कब चुनाव लड़ पाएंगे। इसलिए उन्हें पार्टी में तवज्जो नहीं मिल रही।

लखनऊ में 2 मार्च को सपा कार्यालय में अखिलेश ने सुरेंद्र सागर (काली सदरी में) को पार्टी का प्रदेश सचिव बनाया। 2022 में सुरेंद्र ने रामपुर की मिलक सीट से चुनाव लड़ा था।

अब तीन सवाल हैं 1. सुरेंद्र सागर को लाना अखिलेश यादव की 2027 विधानसभा चुनाव की नई रणनीति का हिस्सा है? 2. क्या सपा रामपुर में आजम खान से अलग नई लीडरशिप तलाश रही है? 3. रामपुर में आजम समर्थकों और सुरेंद्र सागर का इस फेरबदल पर क्या कहना है?

4 पॉइंट्स में जानिए, रामपुर में सुरेंद्र सागर को कमान देने की वजह 1. दलित-पिछड़ा-अल्पसंख्यक, यानी PDA मॉडल को मजबूत करना 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सपा का फोकस PDA फॉर्मूले पर है। सुरेंद्र सागर को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर अखिलेश रामपुर और मुरादाबाद मंडल के दलित वोटर्स को पॉजिटिव मैसेज देना चाहते हैं।

2. आजम की गैरमौजूदगी में नया विकल्प आजम फर्जी पैन कार्ड मामले में सजा काट रहे हैं। वे 2027 में चुनाव नहीं लड़ सकते। उनकी गैरमौजूदगी में सपा रामपुर में एक खालीपन महसूस कर रही थी। इसकी भरपाई के लिए सुरेंद्र सागर को प्रदेश सचिव बनाकर रामपुर की जिम्मेदारी दी गई।

3. बसपा के कोर वोट बैंक में सेंधमारी सुरेंद्र सागर की बसपा के कैडर वोटरों और यादव-जाटव बिरादरी में अच्छी पकड़ मानी जाती है। सपा ने उनके जरिए BSP के पारंपरिक वोट बैंक को अपनी ओर खींचने का दांव चला है।

4. लोकल गुटबाजी को बैलेंस करना रामपुर में सपा की लीडरशिप में पहले भी गुटबाजी रही है। सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी आजम खान के खिलाफ बयान देते रहते हैं। लिहाजा पार्टी ने ऐसे नेता को जिम्मेदारी दी, जो बाहर से (BSP से) आए हैं। इससे पुराने समीकरणों को बैलेंस करने की कोशिश की गई है।

वो दौर, जब रामपुर में आजम के बिना पत्ता नहीं हिलता था रामपुर के सीनियर जर्नलिस्ट विवेक गुप्ता कहते हैं, ‘आजम के दबदबे की शुरुआत 2003 में मुलायम सरकार से हुई। वे यूपी सरकार में शहरी विकास मंत्री बनाए गए। 2012 से 2017 तक रामपुर में जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी सुबह उठकर सबसे पहले आजम के घर हाजिरी लगाने जाते थे। जिले का DM या SP कौन होगा, ये लखनऊ से नहीं बल्कि आजम की पसंद से तय होता था।‘

‘2005 में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव रामपुर में आजम की जौहर यूनिवर्सिटी का शिलान्यास करने आए थे। तब आजम की मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता था। आज वे सलाखों के पीछे हैं। उनकी गैरमौजूदगी में सपा ने सुरेंद्र सागर पर दांव चला है। ये बताता है कि अब सपा रामपुर को एक चेहरे के भरोसे नहीं छोड़ना चाहती।‘

2017 में योगी सरकार आने के बाद से आजम खान तीन बार जेल जा चुके हैं। पहली बार फरवरी 2020 से मई 2022 तक और फिर अक्टूबर 2023 से सितंबर 2025 तक जेल में रहे। बीते 5 साल में उन्होंने 50 महीने जेल में काटे। 23 सितंबर 2025 को सीतापुर जेल से रिहा होकर रामपुर आए। 54 दिनों तक बाहर रहे, लेकिन 17 नवंबर 2025 को फर्जी पैन कार्ड मामले में उन्हें फिर 7 साल की सजा हो गई।

सुरेंद्र सागर बोले- रामपुर में सपा का हर वोटर मेरे साथ रामपुर सीट पर आजम खान 9 बार विधायक और 2 बार सांसद रहे। 4 बार यूपी सरकार में मंत्री रहे। फिलहाल बेटे अब्दुल्ला के साथ रामपुर जेल में बंद हैं। रामपुर की सियासत में बीते 40 साल से आजम फैमिली का दबदबा रहा है। उनकी गैरमौजूदगी में सुरेंद्र सागर रामपुर की कमान कैसे संभालेंगे, ये जानने के लिए हम उनके दफ्तर पहुंचे। यहां मिले सुरेंद्र सागर के बेटे अंकुर सागर ने बताया कि वे पार्टी के काम से बाहर गए हैं।

हमने सुरेंद्र से फोन पर बात की। सपा में मिली जिम्मेदारी पर उन्होंने कहा, ‘रामपुर के लोग हमारे साथ है। आजम खान साहब ने रामपुर को सपा का गढ़ बनाया है। उनके संघर्ष के दिनों में पार्टी को जमीन पर मजबूत रखना हमारी प्राथमिकता है।‘

क्या रामपुर में आजम खान के समर्थक आपको वोट देंगे? सुरेंद्र जवाब देते हैं, ‘सिर्फ रामपुर में ही नहीं बल्कि पूरे यूपी में सपा PDA मॉडल पर काम रही है। पार्टी का टारगेट है कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों को एकजुट किया जाए। यही लक्ष्य लेकर हम रामपुर में गांव-गांव का दौरा कर रहे हैं। हमें हर वर्ग के लोगों का सपोर्ट है।‘

BSP में रहते हुए सुरेंद्र सागर 5 बार रामपुर के जिला अध्यक्ष बने थे। वे BSP के टिकट पर 2 बार मिलक विधानसभा सीट से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। मायावती ने उन्हें राज्यमंत्री भी बनाया। मायावती ने 24 दिसंबर, 2024 को उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। वे इस बात से नाराज थीं कि सुरेंद सागर ने अपने बेटे की शादी सपा नेता की बेटी से कर दी थी। इस शादी में अखिलेश यादव भी पहुंचे थे।

सपा को ‘खामोश’ आजम खान की जरुरत रामपुर में नवाबों के दौर से लेकर मौजूदा सियासत पर रिसर्च कर चुके पॉलिटिकल एनालिस्ट तमकीन फयाज खान कहते हैं, ‘सपा में आजम खान का कद तो बरकरार है, लेकिन पार्टी को उनकी दखलंदाजी और बयान बर्दाश्त नहीं हो रहे। सपा को अब एक खामोश आजम खान चाहिए।‘

‘आजम जेल में रहते हैं, तो पार्टी के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह काम करते हैं। बाहर आकर अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाते हैं कि PDA का नारा देने वाले अल्पसंख्यकों को स्टेज पर क्यों नहीं जाने देते। इससे सपा असहज हो जाती है।‘

तमकीन आगे कहते हैं, ‘सपा का सुरेंद्र को प्रदेश सचिव बनाकर रामपुर में नई लीडरशिप तैयार करना चौंकाने वाला फैसला है। PDA मॉडल पर रामपुर में सुरेंद्र सागर का अपॉइंटमेंट हुआ, लेकिन बड़ी अजीब बात है कि उन्हीं की बिरादरी के अजय सागर को पार्टी ने दरकिनार कर दिया है। इन्हें कभी आजम खान की सिफारिश पर सपा का जिलाध्यक्ष बनाए गया था। इससे ये मैसेज गया कि बड़े फैसलों में सपा आजम खान की मर्जी नहीं देख रही।’

क्या सपा आजम फैमिली से जानबूझकर कट रही है? तमकीन इसका जवाब एक सियासी घटना से देते हैं। उन्होंने बताया, ‘पिछले साल आजम खान की जमानत से लगभग 5 महीने पहले उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की जमानत हुई थी। अब्दुल्ला ने बाहर आने के बाद अपने वालिद को बेल दिलवाने के लिए बहुत कोशिशें की। इसके बाद सितंबर में आजम रिहा हो गए।’

’अब्दुल्ला जमानत पर बाहर थे, तब उसी समय सपा ने रामपुर में अल्पसंख्यकों का बड़ा सम्मेलन करवाया। इसमें अब्दुल्ला को न्योता तक नहीं दिया गया। आजम फैमिली का कोई सदस्य इसमें शामिल नहीं हुआ। ये सब देखकर लगता है कि सपा में रहते हुए आजम खान को सियासत में बड़ा मौका मिलना मुश्किल होगा।’

भड़काऊ भाषण के मामले में 2022 में आजम को सजा हुई और उनकी विधायकी चली गई। वे 2028 तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकते। यही हाल अब्दुल्ला का भी है। 2023 में अब्दुल्ला की विधायकी चली गई। वो स्वार सीट से विधायक थे। वे 2029 तक चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।

लोग बोले- अखिलेश बुरे वक्त में आजम को धोखा दे रहे रामपुर के शाहबाद गेट पर बेकरी चलाने वाले जाहिद का मानना है कि रामपुर की लीडरशिप में फेरबदल करने से सपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। जाहिद सपा प्रमुख अखिलेश यादव से नाराजगी जताते हुए कहते हैं, ‘मीडिया सुरेंद्र सागर को नेता बना रही है, जबकि वे खुद बहन जी (मायावती) की मेहरबानी से जिलाध्यक्ष बने थे। आजम खान के मुकाबले उनकी कोई हैसियत नहीं है।‘

‘रामपुर में सुरेंद्र सागर क्या, अगर अखिलेश यादव भी आजम के मुकाबले चुनाव लड़ लें तो हार जाएंगे। आजम खान की वजह से सपा उत्तर प्रदेश में इतनी बड़ी पार्टी बन पाई। जाटव समाज को छोड़ दें, तो सुरेंद्र सागर को रामपुर में कोई नहीं जानता।‘

आदर्श कॉलोनी के रहने वाले गोविंद यादव सुरेंद्र सागर का समर्थन करते हैं। वे कहते हैं, ‘ यादव और जाटव बिरादरी के बीच उनकी अच्छी पकड़ है। हमने वो दौर देखा है, जब रामपुर में एक ही परिवार की चलती थी। सुरेंद्र के आने से राजनीति जौहर यूनिवर्सिटी की दीवारों से निकलकर खेतों और गांवों तक पहुंचेगी।‘

‘आजम के आगे सागर कमजोर विकल्प’ सीनियर जर्नलिस्ट सुहैल जैदी कहते हैं, ‘आजम खान का कद आज भी अपनी जगह है। वे अपनी सियासत के ऐसे मुकाम पर आ चुके हैं कि उसमें कुछ भी फेरबदल होना नामुमकिन है। बात रही सुरेंद्र सागर की, तो उन्होंने मंत्री रहते हुए रामपुर में ऐसा कोई काम नहीं करवाया, जिससे उनका प्रभाव दिखता हो।‘

‘दूसरी तरफ आजम खान ने बतौर मंत्री यहां के रोड इंफ्रास्ट्रक्चर, अस्पताल, स्कूल और बस स्टॉप जैसी सुविधाएं दीं। भले ही वे जेल में हैं, लेकिन उनके लिए इज्जत बरकरार है। आजम खान और सुरेंद्र सागर के बीच कोई बराबरी नहीं है। सबको पता है आजम खान की मर्जी के बिना रामपुर का विधायक नहीं तय हो सकता।‘

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धुरंधर-2 में अतीक अहमद की कहानी सच या प्रोपेगैंडा

इलाहाबाद का चकिया। सफेद कुर्ता, सिर पर साफा पहने, चेहरे पर मुस्कान लिए एक माफिया। फिल्म धुरंधर-2 शुरुआती सीन से ही आपको सीधे यूपी के माफिया और सांसद रहे अतीक अहमद के दौर में ले जाएगी। फिल्म में भले ही डिस्क्लेमर है, लेकिन आतिफ का किरदार हूबहू अतीक अहमद से मिल रहा है। ये कहानी सच है या प्रोपेगैंडा, पढ़िए पूरी खबर…

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