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- Supreme Court: Caste Status Lost On Religious Conversion | Hindu, Buddhist, Sikh Only
नई दिल्ली1 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़े लोग ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। अगर कोई ईसाई या किसी और धर्म में धर्मांतरण करता है तो वह अनुसूचित जाति का दर्जा खो देगा।
जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ईसाई धर्म अपनाने वाला दलित व्यक्ति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मिलने वाले किसी भी लाभ का दावा नहीं कर सकता है।
यह फैसला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मई 2025 के फैसले के खिलाफ सुनाया गया। धर्म परिवर्तन के बाद पादरी बने चिंथदा आनंद ने याचिका लगाई थी कि उन्हें अक्काला रामिरेड्डी समेत कुछ लोगों से जातिगत भेदभाव और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा।
चिंथदा ने SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया था। मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर इस पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। इसके बाद चिंथदा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
यह था पूरा मामला
यह मामला विशाखापट्टनम जिले के अनाकापल्ली का है, जहां मूल रूप से एससी (माला समुदाय) के चिंथदा ने ईसाई धर्म अपना लिया और पादरी बन गया। केस की जांच के दौरान पता चला था कि ईसाई धर्म अपनाने के कारण चिंथदा का अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र रद्द कर दिया गया था। चिंथदा एक चर्च में करीब 10 साल से पादरी के तौर पर काम कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी कह चुका- आरक्षण का लाभ लेने धर्म बदलना, संविधान से धोखा
कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी एक मामले में स्पष्ट किया था कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपनाने के बाद दोबारा हिंदू धर्म में लौटता है, तो उसे एससी दर्जा प्राप्त करने के लिए विश्वसनीय प्रमाण और समुदाय की स्वीकृति की जरूरत होगी। केवल लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन करने को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के साथ धोखा करार दिया।
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने क्या कहा था…
- जब पीड़ित ने खुद कहा कि वह पिछले 10 साल से ईसाई धर्म का पालन कर रहा है, तो पुलिस को आरोपियों पर एससी/एसटी अधिनियम नहीं लगाना चाहिए था।
- एससी/एसटी अधिनियम का उद्देश्य उन समूहों (अनुसूचित जातियों) से जुड़े लोगों की रक्षा करना है, न कि उन लोगों की जो दूसरे धर्मों में परिवर्तित हो गए हैं।
- केवल इस आधार पर एससी/एसटी अधिनियम लागू करना कि उसका जाति प्रमाण पत्र रद्द नहीं किया गया है, वैध आधार नहीं हो सकता।

संविधान में क्या प्रावधान है
संविधान (अनुसूचित जातियों) आदेश, 1950 के अनुसार केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुसूचित जाति समुदायों को एससी का दर्जा प्राप्त है। अगर कोई ईसाई या मुस्लिम धर्म अपना लेता है तो उनका यह दर्जा समाप्त हो जाता है।
आंध्र प्रदेश विधानसभा ने भी मार्च 2023 में एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया कि ईसाई धर्म अपना चुके दलितों को भी एससी दर्जा प्रदान किया जाए।














































