Saturday, 23 May 2026 | 09:05 PM

Trending :

EXCLUSIVE

The return of football’s ‘lost’ generation

The return of football's 'lost' generation
  • Hindi News
  • Sports
  • Veteran Women’s Club: The Return Of Football’s ‘lost’ Generation

लंदन29 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

फीफा की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 के बाद से संगठित रूप से फुटबॉल खेलने वाली महिलाओं और लड़कियों की संख्या 24% बढ़कर 1.66 करोड़ के पार पहुंच गई है।- प्रतीकात्मक फोटो

मौजूदा दौर में जब लड़कियां टीवी पर महिला वर्ल्ड कप और यूरोपियन चैम्पियनशिप जैसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट देख रही हैं, तब एक पीढ़ी ऐसी भी है जिसके दिल में एक गहरी टीस है। यह उन महिलाओं की ‘खोई हुई’ पीढ़ी है जो 70, 80 और 90 के दशक में फुटबॉल के जुनून के साथ बड़ी तो हुईं, लेकिन उन्हें खेलने का कोई मंच नहीं मिला।

अब जब यही महिलाएं 40 या 50 की उम्र पार कर चुकी हैं, तो वे अपने उस छूटे हुए ख्वाब को फिर से जी रही हैं। भावनाएं इस कदर जुड़ी हैं कि जब एक 46 साल की महिला ने जिंदगी में पहली बार पूरी किट (बूट्स, शिन पैड्स और जर्सी) पहनकर मैदान पर कदम रखा, तो आंखों से आंसू छलक पड़े।

फीफा की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 के बाद से संगठित रूप से फुटबॉल खेलने वाली महिलाओं और लड़कियों की संख्या 24% बढ़कर 1.66 करोड़ के पार पहुंच गई है। 2027 तक इसे 6 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य है। लेकिन, ग्रासरूट लेवल पर उन महिलाओं की एक बड़ी तादाद है, जिन्हें उनके दौर में सुविधाओं और सामाजिक नजरिए के अभाव में पीछे छोड़ दिया गया था।

करीब 40-50 साल पहले, लड़कियों के लिए शौक के तौर पर भी फुटबॉल खेलना एक बड़ा संघर्ष था। जो लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थीं, उन्हें अक्सर ‘टॉमबॉय’ कहकर चिढ़ाया जाता था। स्कूलों में भी खेल बंटे हुए थे। लड़कियों को नेटबॉल और हॉकी की तरफ भेज दिया जाता था, जबकि फुटबॉल और रग्बी लड़कों के लिए आरक्षित माने जाते थे। महिलाओं की कोई स्थानीय टीम या क्लब नहीं होते थे। ऐसे में लड़कियों को ऊबड़-खाबड़ मैदानों पर लड़कों की टीमों के बीच अपना खेल साबित करना पड़ता था।

वर्षों बाद अब यह पीढ़ी अपने उस छूटे हुए खेल को दोबारा गले लगा रही है। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में ‘वेटरन विमंस क्लब’ बन रहे हैं, जहां उम्रदराज महिलाएं प्रतिस्पर्धी फुटबॉल खेल रही हैं। 2015 में कैरल बेट्स ने 25 से 80 साल की महिलाओं के लिए ‘क्रॉली ओल्ड गर्ल्स’ नाम से एक क्लब बनाया। बेट्स खुद उसी पीढ़ी से आती हैं, जिनसे उनका खेल छिन गया था। इसी तर्ज पर जो ट्रेहर्न ने उन महिलाओं के लिए ‘कैंटरबरी ओल्ड बैग्स’ की शुरुआत की, जो जिंदगी के इस पड़ाव पर खेल का हिस्सा बनना चाहती हैं।

35 से 50 साल की उम्र में मैदान पर लौट रहीं इन महिलाओं की कहानियां भावुक करने वाली हैं। इनमें से कई ने बचपन में बिना गोलपोस्ट या बुनियादी सुविधाओं के खेला था। अब जब ये महिलाएं पूरी किट पहनकर मैदान पर उतरती हैं, तो यह उनके लिए सिर्फ एक खेल नहीं रह जाता, बल्कि एक तरह का सशक्तिकरण बन जाता है। जो महिलाएं खेल नहीं पा रही हैं, वे अब लड़कियों की टीमों को कोचिंग देकर अपना सपना पूरा कर रही हैं। यह केवल फुटबॉल की वापसी नहीं है, बल्कि उस पीढ़ी की जीत है जिसने अपने खेल से कभी हार नहीं मानी।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
JAC 10th Result 2026 LIVE: Jharkhand Board Matric Students can check results at jacresults.com.

April 23, 2026/
1:50 pm

आखरी अपडेट:23 अप्रैल, 2026, 13:50 IST पीएम मोदी ने ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए बीजेपी की जीत का भरोसा...

New Zealand vs South Africa Live Score, 5th T20I: Follow latest updates from the 5th match of the series from Christchurch's Hagley Oval. (X)

March 25, 2026/
4:57 pm

आखरी अपडेट:मार्च 25, 2026, 16:57 IST कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की टिप्पणी तब आई जब विपक्ष ने बताया कि उन्होंने...

हिमाचल में चिट्टा तस्करों के पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक:प्रधान की जाएगी कुर्सी, सरकार ने कानून बदला; डिफाल्टर-ऑडिट रिकवरी वाले भी अयोग्य

April 2, 2026/
9:02 am

हिमाचल प्रदेश में चिट्टा तस्करी में शामिल लोग पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। विधानसभा में आज (गुरुवार को) हिमाचल प्रदेश...

यूपी- मिर्जापुर में सड़क हादसा, 8 जिंदा जले:ट्रक की टक्कर से बोलेरो ट्रॉले से टकराई और आग लगी, लोग गाड़ी से निकल नहीं पाए

April 22, 2026/
9:44 pm

मिर्जापुर में बुधवार रात भीषण सड़क हादसा हो गया। बोलेरो-ट्रक की टक्कर में 8 लोग जिंदा जल गए। एक अन्य...

जाह्नवी बोलीं- मैं पूरी तरह से मां पर निर्भर थी:उनके जाने के बाद कई गलत फैसले लिए, कई लोगों ने निजी जिंदगी में दखल दिया

April 6, 2026/
9:46 am

बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपनी मां और सुपरस्टार श्रीदेवी के निधन और उसके...

हेल्थ समर टिप्स: गर्मी में सीने में जलन, बुखार और चक्कर आना जैसा जरूरी दूर, बस रोजना कर लें ये काम; सबसे पुराना सबसे ठंडा

April 20, 2026/
1:02 pm

20 अप्रैल 2026 को 13:02 IST पर अपडेट किया गया स्वास्थ्य सारांश युक्तियाँ: भीषण गर्मी और बढ़ती तापमान का सीधा...

A black plume of smoke rises from a warehouse in the industrial area of Sharjah City following reports of Iranian strikes in Dubai. (Photo: AP/File)

March 9, 2026/
11:12 am

आखरी अपडेट:मार्च 09, 2026, 11:12 IST पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए टीएमसी ने एक तस्वीर साझा की जिसमें राष्ट्रपति...

राजनीति

The return of football’s ‘lost’ generation

The return of football's 'lost' generation
  • Hindi News
  • Sports
  • Veteran Women’s Club: The Return Of Football’s ‘lost’ Generation

लंदन29 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

फीफा की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 के बाद से संगठित रूप से फुटबॉल खेलने वाली महिलाओं और लड़कियों की संख्या 24% बढ़कर 1.66 करोड़ के पार पहुंच गई है।- प्रतीकात्मक फोटो

मौजूदा दौर में जब लड़कियां टीवी पर महिला वर्ल्ड कप और यूरोपियन चैम्पियनशिप जैसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट देख रही हैं, तब एक पीढ़ी ऐसी भी है जिसके दिल में एक गहरी टीस है। यह उन महिलाओं की ‘खोई हुई’ पीढ़ी है जो 70, 80 और 90 के दशक में फुटबॉल के जुनून के साथ बड़ी तो हुईं, लेकिन उन्हें खेलने का कोई मंच नहीं मिला।

अब जब यही महिलाएं 40 या 50 की उम्र पार कर चुकी हैं, तो वे अपने उस छूटे हुए ख्वाब को फिर से जी रही हैं। भावनाएं इस कदर जुड़ी हैं कि जब एक 46 साल की महिला ने जिंदगी में पहली बार पूरी किट (बूट्स, शिन पैड्स और जर्सी) पहनकर मैदान पर कदम रखा, तो आंखों से आंसू छलक पड़े।

फीफा की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 के बाद से संगठित रूप से फुटबॉल खेलने वाली महिलाओं और लड़कियों की संख्या 24% बढ़कर 1.66 करोड़ के पार पहुंच गई है। 2027 तक इसे 6 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य है। लेकिन, ग्रासरूट लेवल पर उन महिलाओं की एक बड़ी तादाद है, जिन्हें उनके दौर में सुविधाओं और सामाजिक नजरिए के अभाव में पीछे छोड़ दिया गया था।

करीब 40-50 साल पहले, लड़कियों के लिए शौक के तौर पर भी फुटबॉल खेलना एक बड़ा संघर्ष था। जो लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थीं, उन्हें अक्सर ‘टॉमबॉय’ कहकर चिढ़ाया जाता था। स्कूलों में भी खेल बंटे हुए थे। लड़कियों को नेटबॉल और हॉकी की तरफ भेज दिया जाता था, जबकि फुटबॉल और रग्बी लड़कों के लिए आरक्षित माने जाते थे। महिलाओं की कोई स्थानीय टीम या क्लब नहीं होते थे। ऐसे में लड़कियों को ऊबड़-खाबड़ मैदानों पर लड़कों की टीमों के बीच अपना खेल साबित करना पड़ता था।

वर्षों बाद अब यह पीढ़ी अपने उस छूटे हुए खेल को दोबारा गले लगा रही है। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में ‘वेटरन विमंस क्लब’ बन रहे हैं, जहां उम्रदराज महिलाएं प्रतिस्पर्धी फुटबॉल खेल रही हैं। 2015 में कैरल बेट्स ने 25 से 80 साल की महिलाओं के लिए ‘क्रॉली ओल्ड गर्ल्स’ नाम से एक क्लब बनाया। बेट्स खुद उसी पीढ़ी से आती हैं, जिनसे उनका खेल छिन गया था। इसी तर्ज पर जो ट्रेहर्न ने उन महिलाओं के लिए ‘कैंटरबरी ओल्ड बैग्स’ की शुरुआत की, जो जिंदगी के इस पड़ाव पर खेल का हिस्सा बनना चाहती हैं।

35 से 50 साल की उम्र में मैदान पर लौट रहीं इन महिलाओं की कहानियां भावुक करने वाली हैं। इनमें से कई ने बचपन में बिना गोलपोस्ट या बुनियादी सुविधाओं के खेला था। अब जब ये महिलाएं पूरी किट पहनकर मैदान पर उतरती हैं, तो यह उनके लिए सिर्फ एक खेल नहीं रह जाता, बल्कि एक तरह का सशक्तिकरण बन जाता है। जो महिलाएं खेल नहीं पा रही हैं, वे अब लड़कियों की टीमों को कोचिंग देकर अपना सपना पूरा कर रही हैं। यह केवल फुटबॉल की वापसी नहीं है, बल्कि उस पीढ़ी की जीत है जिसने अपने खेल से कभी हार नहीं मानी।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.