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मां बनना और भी आसान और सस्ता, भारत के IVF में पहली बार AI की हुई एंट्री, इन कारणों से बढ़ रहा बांझपन

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब आईवीएफ में भी आ गया है. एआई की सहायता से अब मां बनाना और भी आसान हो जाएगा. यह जानकारी गौडियम आईवीएफ की निदेशक डॉ. मनिका खन्ना न दी है. इस उपलब्धि का औपचारिक उद्घाटन भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सैयद शाहनवाज हुसैन ने किया. इस टेक्नोलॉजी के बाद इलाज की कीमत लगभग 15 से 20% तक कम हो जाएगी.

नई दिल्ली. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब आईवीएफ में भी आ गया है. इसके जरिए मां बनना अब पहले से ज्यादा आसान हो गया है. सरल होने के साथ-साथ अब आईवीएफ का इलाज सस्ता भी होने जा रहा है. लगभग 15 से 20% तक आईवीएफ का इलाज सस्ता हो जाएगा. यह जानकारी दी है देश में पहली बार आईवीएफ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दो टूल्स जोकि एसआईडी यानी स्पर्म आइडेंटिफिकेशन डिवाइस और एरिका यानी एम्ब्रियो रैंकिंग इंटेलिजेंट क्लासिफिकेशन असिस्टेंट को लॉन्च करने वाले सेंटर गौडियम आईवीएफ की निदेशक डॉ. मनिका खन्ना ने. गौडियम आईवीएफ की इस उपलब्धि का औपचारिक उद्घाटन भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सैयद शाहनवाज हुसैन जोकि पूर्व लोकसभा सदस्य हैं उन्होंने किया. आईवीएफ 2.0 के क्लीनिक साइंटिस्ट और ग्लोबल कम्युनिकेशंस के निदेशक जाइल्स पामर ने भी इस कदम की सराहना की.

निदेशक डॉ. मनिका खन्ना ने खास बातचीत में बताया कि स्पर्म आइडेंटिफिकेशन डिवाइस और एम्ब्रियो रैंकिंग इंटेलिजेंट क्लासिफिकेशन असिस्टेंट के जरिए सही एम्ब्रियो को चुनना आसान हो जाएगा जिससे सक्सेस रेट बढ़ेगा. इसकी कीमत भी घट जाएगी. इलाज की कीमत लगभग 15 से 20% तक कम हो जाएगी. बात करें इसके दुष्प्रभाव की तो इसका दुष्प्रभाव कोई भी नहीं है, क्योंकि हम शरीर के अंदर इसके जरिए कोई सुई या कुछ डाल नहीं रहे हैं. ऐसे में यह एकदम सुरक्षित है. तमाम रिसर्च और टेस्टिंग के बाद ही इसे लाया गया है. उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इन दो टूल्स को आईवीएफ में लाने वाला उनका सेंटर देश का पहला सेंटर है. यकीनन इसके जरिए आईवीएफ पर लोगों का विश्वास और बढ़ेगा क्योंकि इलाज सरल, सस्ता और आसान हो जाएगा. उन्होंने बताया कि यूनाइटेड स्टेट में इसके जरिए ट्रीटमेंट चल रहा है जोकि सफल है.

भारत में 15% लोग बांझपन का शिकार
निदेशक डॉ. मनिका खन्ना ने खास बातचीत में बताया कि भारत देश में 15% लोग बांझपन का शिकार है. सबसे हैरानी की बात यह है कि उसमें सिर्फ दो प्रतिशत लोग ही आगे आकर आईवीएफ का इलाज करवा रहे हैं, ताकि वो मां-बाप बनने का सुख प्राप्त कर सकें. उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं है कि बांझपन सिर्फ महिला में ही है, बांझपन पुरुषों में भी है. शादी के बाद अगर बच्चा नहीं हो रहा है तो 2009 से लेकर अब तक उन्होंने देखा है कि ऐसे मामलों में 40% महिलाएं और 40% पुरुष में बांझपन पाया जाता है. जबकि 20% मामलों में दोनों ही बांझपन का शिकार होते हैं, जिस वजह से यह कहना गलत है कि सिर्फ महिला में ही कमी है. कमी दोनों तरफ से होती है.

इन कारणों से बढ़ रहा बांझपन
डॉ. मनिका खन्ना ने बताया कि बांझपन जेनेटिक नहीं होता है. बल्कि इसका प्रमुख कारण तनाव है और मिलावट खाना है. इसके अलावा प्रदूषण और बढ़ता हुआ नशा भी इसके कारण बन रहे हैं. आजकल महिलाएं और लड़कियां देर से शादी कर रही है जोकि अच्छा फैसला है क्योंकि वो पहले आत्मनिर्भर बनकर ही शादी करना चाह रही है. इसके लिए एक अच्छा विकल्प है कि वह अपने आगे यानी अंडों को फ्रिज करवा लें. अंडों को 10 साल तक फ्रीजिंग में रखा जा सकता है. इसके लिए मामूली सा मेंटेनेंस चार्ज देना होता है. इसके बाद दोबारा अपने अंडों के जरिए लड़कियां मां बन सकती हैं.

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Mohd Majid

with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें

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नई दिल्ली. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब आईवीएफ में भी आ गया है. इसके जरिए मां बनना अब पहले से ज्यादा आसान हो गया है. सरल होने के साथ-साथ अब आईवीएफ का इलाज सस्ता भी होने जा रहा है. लगभग 15 से 20% तक आईवीएफ का इलाज सस्ता हो जाएगा. यह जानकारी दी है देश में पहली बार आईवीएफ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दो टूल्स जोकि एसआईडी यानी स्पर्म आइडेंटिफिकेशन डिवाइस और एरिका यानी एम्ब्रियो रैंकिंग इंटेलिजेंट क्लासिफिकेशन असिस्टेंट को लॉन्च करने वाले सेंटर गौडियम आईवीएफ की निदेशक डॉ. मनिका खन्ना ने. गौडियम आईवीएफ की इस उपलब्धि का औपचारिक उद्घाटन भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सैयद शाहनवाज हुसैन जोकि पूर्व लोकसभा सदस्य हैं उन्होंने किया. आईवीएफ 2.0 के क्लीनिक साइंटिस्ट और ग्लोबल कम्युनिकेशंस के निदेशक जाइल्स पामर ने भी इस कदम की सराहना की.

निदेशक डॉ. मनिका खन्ना ने खास बातचीत में बताया कि स्पर्म आइडेंटिफिकेशन डिवाइस और एम्ब्रियो रैंकिंग इंटेलिजेंट क्लासिफिकेशन असिस्टेंट के जरिए सही एम्ब्रियो को चुनना आसान हो जाएगा जिससे सक्सेस रेट बढ़ेगा. इसकी कीमत भी घट जाएगी. इलाज की कीमत लगभग 15 से 20% तक कम हो जाएगी. बात करें इसके दुष्प्रभाव की तो इसका दुष्प्रभाव कोई भी नहीं है, क्योंकि हम शरीर के अंदर इसके जरिए कोई सुई या कुछ डाल नहीं रहे हैं. ऐसे में यह एकदम सुरक्षित है. तमाम रिसर्च और टेस्टिंग के बाद ही इसे लाया गया है. उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इन दो टूल्स को आईवीएफ में लाने वाला उनका सेंटर देश का पहला सेंटर है. यकीनन इसके जरिए आईवीएफ पर लोगों का विश्वास और बढ़ेगा क्योंकि इलाज सरल, सस्ता और आसान हो जाएगा. उन्होंने बताया कि यूनाइटेड स्टेट में इसके जरिए ट्रीटमेंट चल रहा है जोकि सफल है.

भारत में 15% लोग बांझपन का शिकार
निदेशक डॉ. मनिका खन्ना ने खास बातचीत में बताया कि भारत देश में 15% लोग बांझपन का शिकार है. सबसे हैरानी की बात यह है कि उसमें सिर्फ दो प्रतिशत लोग ही आगे आकर आईवीएफ का इलाज करवा रहे हैं, ताकि वो मां-बाप बनने का सुख प्राप्त कर सकें. उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं है कि बांझपन सिर्फ महिला में ही है, बांझपन पुरुषों में भी है. शादी के बाद अगर बच्चा नहीं हो रहा है तो 2009 से लेकर अब तक उन्होंने देखा है कि ऐसे मामलों में 40% महिलाएं और 40% पुरुष में बांझपन पाया जाता है. जबकि 20% मामलों में दोनों ही बांझपन का शिकार होते हैं, जिस वजह से यह कहना गलत है कि सिर्फ महिला में ही कमी है. कमी दोनों तरफ से होती है.

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डॉ. मनिका खन्ना ने बताया कि बांझपन जेनेटिक नहीं होता है. बल्कि इसका प्रमुख कारण तनाव है और मिलावट खाना है. इसके अलावा प्रदूषण और बढ़ता हुआ नशा भी इसके कारण बन रहे हैं. आजकल महिलाएं और लड़कियां देर से शादी कर रही है जोकि अच्छा फैसला है क्योंकि वो पहले आत्मनिर्भर बनकर ही शादी करना चाह रही है. इसके लिए एक अच्छा विकल्प है कि वह अपने आगे यानी अंडों को फ्रिज करवा लें. अंडों को 10 साल तक फ्रीजिंग में रखा जा सकता है. इसके लिए मामूली सा मेंटेनेंस चार्ज देना होता है. इसके बाद दोबारा अपने अंडों के जरिए लड़कियां मां बन सकती हैं.

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