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सर्वे- 29 में से 23 देश भविष्य को लेकर चिंतित:भारत के 65 फीसदी लोग मानते हैं कि देश सही दिशा में – इप्सोस

सर्वे- 29 में से 23 देश भविष्य को लेकर चिंतित:भारत के 65 फीसदी लोग मानते हैं कि देश सही दिशा में - इप्सोस

इस साल दुनियाभर में कई महत्वपूर्ण व्यवधान देखने को मिले हैं, जिनमें पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष भी शामिल है। वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। पूरी दुनिया के लोग भविष्य को लेकर चिंतित है और निराशा बढ़ रही है। इसके बीच भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों में उम्मीद की किरण बरकरार है। ग्लोबल रिसर्च फर्म इप्सोस ने मार्च 2026 की एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट का शीर्षक है ‘वाट वरीज द वर्ल्ड’ यानी पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा क्या चितिंत करता है। रिपोर्ट में सर्वे किए गए 29 में से 23 देशों के अधिकांश लोग अपने भविष्य को लेकर नकारात्मक सोच रखते हैं लेकिन भारत, सिंगापुर, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड जैसे देश इस ट्रेंड से अलग खड़े हैं। सर्वे में शामिल भारत के 65% लोगों का मानना है कि देश सही दिशा में जा रहा है। दुनिया में यह औसत महज 39% है। सर्वे में उन प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर नागरिकों की राय भी शामिल की गई है जो उनके दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं। सर्वे में कई लोगों ने माना है कि तेल और गैस आपूर्ति पर बढ़ता दबाव भविष्य में चुनौती बन सकता है। अपराध-हिंसा-बेरोजगारी सबसे बड़ी चिंताएं वैश्विक चिंताओं में अपराध, हिंसा, बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी और सामाजिक असमानता, वितीय और राजनीतिक भ्रष्टाचार प्रमुख हैं। भारत में भी इसी तरह की चिंताएं देखने को मिलती हैं, लेकिन प्राथमिकताओं का क्रम अलग है। महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, अपराध और हिंसा के अलावा वित्तीय और राजनतिक भ्रष्टाचार भारतीयों की सबसे बड़ी चिंताएं हैं।
भारत की तटस्थ स्थिति ने बढ़ाई सकारात्मकता इप्सोस इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के लोगों को सकारात्मक सोच के पीछे कई कारण हैं। भारत की तटस्थ भू राजनीतिक स्थिति और वैश्विक ईंधन संकट के प्रभाव को कम करने के लिए किए गए सक्रिय प्रयासों ने अर्थव्यवस्था को अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखा है। पूरी दुनिया में एक सी चिंता- लगातार बढ़ रहे भू-राजनीतिक तनावों से बन रहीं कठिन परिस्थितियां ये सभी चिंताएं एक साझा वैश्विक चिंता की ओर इशारा करते है। यह बैचेनी काफी हद तक लगातार हो रहे भू-राजनीतिक तनावों की वजह से पैदा हुई है। बीते कुछ वर्षों में इन तनाव और संघर्षों ने दुनियभर की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव डाला है और नागरिकों के लिए कठिन परिस्थितियां पैदा की – सुरेश रामलिंगम, सीईओ, इप्सोस इंडिया

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इस साल दुनियाभर में कई महत्वपूर्ण व्यवधान देखने को मिले हैं, जिनमें पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष भी शामिल है। वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। पूरी दुनिया के लोग भविष्य को लेकर चिंतित है और निराशा बढ़ रही है। इसके बीच भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों में उम्मीद की किरण बरकरार है। ग्लोबल रिसर्च फर्म इप्सोस ने मार्च 2026 की एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट का शीर्षक है ‘वाट वरीज द वर्ल्ड’ यानी पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा क्या चितिंत करता है। रिपोर्ट में सर्वे किए गए 29 में से 23 देशों के अधिकांश लोग अपने भविष्य को लेकर नकारात्मक सोच रखते हैं लेकिन भारत, सिंगापुर, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड जैसे देश इस ट्रेंड से अलग खड़े हैं। सर्वे में शामिल भारत के 65% लोगों का मानना है कि देश सही दिशा में जा रहा है। दुनिया में यह औसत महज 39% है। सर्वे में उन प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर नागरिकों की राय भी शामिल की गई है जो उनके दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं। सर्वे में कई लोगों ने माना है कि तेल और गैस आपूर्ति पर बढ़ता दबाव भविष्य में चुनौती बन सकता है। अपराध-हिंसा-बेरोजगारी सबसे बड़ी चिंताएं वैश्विक चिंताओं में अपराध, हिंसा, बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी और सामाजिक असमानता, वितीय और राजनीतिक भ्रष्टाचार प्रमुख हैं। भारत में भी इसी तरह की चिंताएं देखने को मिलती हैं, लेकिन प्राथमिकताओं का क्रम अलग है। महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, अपराध और हिंसा के अलावा वित्तीय और राजनतिक भ्रष्टाचार भारतीयों की सबसे बड़ी चिंताएं हैं।
भारत की तटस्थ स्थिति ने बढ़ाई सकारात्मकता इप्सोस इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के लोगों को सकारात्मक सोच के पीछे कई कारण हैं। भारत की तटस्थ भू राजनीतिक स्थिति और वैश्विक ईंधन संकट के प्रभाव को कम करने के लिए किए गए सक्रिय प्रयासों ने अर्थव्यवस्था को अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखा है। पूरी दुनिया में एक सी चिंता- लगातार बढ़ रहे भू-राजनीतिक तनावों से बन रहीं कठिन परिस्थितियां ये सभी चिंताएं एक साझा वैश्विक चिंता की ओर इशारा करते है। यह बैचेनी काफी हद तक लगातार हो रहे भू-राजनीतिक तनावों की वजह से पैदा हुई है। बीते कुछ वर्षों में इन तनाव और संघर्षों ने दुनियभर की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव डाला है और नागरिकों के लिए कठिन परिस्थितियां पैदा की – सुरेश रामलिंगम, सीईओ, इप्सोस इंडिया

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