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कैंसर, लीवर-किडनी सब हो रहा खराब! चमकदार भुना चना और दाल खाने वाले हो जाएं सावधान! रंग-बिरंगी खाने की चीजें दें छोड़

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नई दिल्ली: सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने बीते दिनों मार्केट में मिल रहे भुने चने में कैंसर पैदा करने वाला ऑरामाइन केमिकल इस्तेमाल करने पर चिंता जताई थी. उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र भी लिखा था. इसके बाद से मार्केट से भुना चना गायब हो गया था, लेकिन एक बार फिर से मार्केट में भुना चना आ गया है. बेहद पीला और चमकदार भुना चना मार्केट में मिल रहा है, जिस वजह से लोग इस भुने चने को लेकर अब देश की राजधानी दिल्ली में सरकार द्वारा प्रमाणित फूड टेस्टिंग लैब में इसे जांच के लिए लेकर आ रहे हैं.

ऐसे मामले दिल्ली की अलग-अलग फूड टेस्टिंग लैब के पास बढ़ गए हैं. ऐसे में जब आर्ब्रो लैब के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. सौरभ अरोड़ा से बात की गई तो उन्होंने मार्केट में मिलने वाले रंगों पर चिंता जताई और कहा कि मार्केट में ऐसे रंग मिल रहे हैं. जो एफएसएसएआई या सरकार की ओर से प्रमाणित नहीं है. उनका इस्तेमाल फूड आइटम में किया जा रहा है, जिस वजह से बीमारियां फैल रही हैं.

ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक रहे केमिकल फूड कलर

फूड टेस्टिंग लैब के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. सौरभ अरोड़ा ने बताया कि उनकी लैब बीते 36 सालों से फूड टेस्टिंग लैब इंडस्ट्री में काम कर रही है. सरकार द्वारा प्रमाणित है और एफएसएसएआई से जुड़कर लगातार काम कर रही है. उन्होंने बताया कि उनकी लैब में दूध और पानी से लेकर सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों की जांच की जाती है. अगर कोई सैंपल फेल होता है तो उसे एफएसएसएआई के पास रिपोर्ट के तौर पर भेज दिया जाता है.

उन्होंने बताया कि मार्केट में मिलने वाले केमिकल रंग का मुद्दा बहुत बड़ा है, जिस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इस पर ध्यान देने की जरूरत है. क्योंकि यह केमिकल वाले रंग मार्केट में तेजी से बिक रहे हैं. जहां लोग ऑनलाइन और ऑफलाइन इसे खरीद भी रहे हैं. वो खरीदते समय यह नहीं देख रहे हैं कि आखिर यह रंग कौन सा है, क्या ये फूड कलर सरकार द्वारा प्रमाणित रंग है या फिर किसी भी रंग को फूड कलर के नाम से बचा जा रहा है, जिसे खाने के बाद लोगों के शरीर पर इसका बुरा असर पड़ रहा है.

चमकदार मिठाइयां और दाल खरीदने से बचें

डॉ. सौरभ अरोड़ा ने बताया कि दो तरह के मामले केमिकल फूड कलर में देखे जा रहे हैं. एक तो यह जब लोग खुद जानकारी न होने की वजह से केमिकल वाले फूड कलर को खरीद कर अपने खाने में डाल रहे हैं, जिससे बीमारियां होने का खतरा बढ़ रहा है. दूसरा जो मार्केट में दाल, भुने चने और दूसरे फूड आइटम बिक रहे हैं, उनको ज्यादा चमकदार दिखाने के लिए जो दुकानदार होते हैं. वो उस पर केमिकल वाले रंग डाल देते हैं और लोगों को लगता है, जो जितना चमकदार है.वह उतना ही वह स्वादिष्ट होता है.

डॉ. सौरभ ने बताया कि लोग उसे ही असली समझते हैं. असल में हर चमकती चीज असली नहीं होती है. चमकदार मिठाइयां, चमकदार दाल या भुने चने या कोई भी खाद्य पदार्थ खरीदने से बचें. अगर कोई बहुत ज्यादा कलरफुल फूड आइटम है तो उसे न खाएं और मान लें कि अगर कोई फूड आइटम बहुत ज्यादा रंग बिरंगी है तो उसमें केमिकल जरूर डाला गया होगा. इसलिए केमिकल वाले फूड कलर को खरीदने और खाने से बचें.

केमिकल फूड कलर से होने वाली हैं ये बीमारियां

एलर्जी, पेट दर्द, दस्त, उल्टी, त्वचा पर चकत्ते, चिड़चिड़ापन, कैंसर, अस्थमा, लीवर या किडनी को नुकसान, स्किन से जुड़ी बीमारियां.

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नई दिल्ली: सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने बीते दिनों मार्केट में मिल रहे भुने चने में कैंसर पैदा करने वाला ऑरामाइन केमिकल इस्तेमाल करने पर चिंता जताई थी. उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र भी लिखा था. इसके बाद से मार्केट से भुना चना गायब हो गया था, लेकिन एक बार फिर से मार्केट में भुना चना आ गया है. बेहद पीला और चमकदार भुना चना मार्केट में मिल रहा है, जिस वजह से लोग इस भुने चने को लेकर अब देश की राजधानी दिल्ली में सरकार द्वारा प्रमाणित फूड टेस्टिंग लैब में इसे जांच के लिए लेकर आ रहे हैं.

ऐसे मामले दिल्ली की अलग-अलग फूड टेस्टिंग लैब के पास बढ़ गए हैं. ऐसे में जब आर्ब्रो लैब के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. सौरभ अरोड़ा से बात की गई तो उन्होंने मार्केट में मिलने वाले रंगों पर चिंता जताई और कहा कि मार्केट में ऐसे रंग मिल रहे हैं. जो एफएसएसएआई या सरकार की ओर से प्रमाणित नहीं है. उनका इस्तेमाल फूड आइटम में किया जा रहा है, जिस वजह से बीमारियां फैल रही हैं.

ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक रहे केमिकल फूड कलर

फूड टेस्टिंग लैब के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. सौरभ अरोड़ा ने बताया कि उनकी लैब बीते 36 सालों से फूड टेस्टिंग लैब इंडस्ट्री में काम कर रही है. सरकार द्वारा प्रमाणित है और एफएसएसएआई से जुड़कर लगातार काम कर रही है. उन्होंने बताया कि उनकी लैब में दूध और पानी से लेकर सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों की जांच की जाती है. अगर कोई सैंपल फेल होता है तो उसे एफएसएसएआई के पास रिपोर्ट के तौर पर भेज दिया जाता है.

उन्होंने बताया कि मार्केट में मिलने वाले केमिकल रंग का मुद्दा बहुत बड़ा है, जिस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इस पर ध्यान देने की जरूरत है. क्योंकि यह केमिकल वाले रंग मार्केट में तेजी से बिक रहे हैं. जहां लोग ऑनलाइन और ऑफलाइन इसे खरीद भी रहे हैं. वो खरीदते समय यह नहीं देख रहे हैं कि आखिर यह रंग कौन सा है, क्या ये फूड कलर सरकार द्वारा प्रमाणित रंग है या फिर किसी भी रंग को फूड कलर के नाम से बचा जा रहा है, जिसे खाने के बाद लोगों के शरीर पर इसका बुरा असर पड़ रहा है.

चमकदार मिठाइयां और दाल खरीदने से बचें

डॉ. सौरभ अरोड़ा ने बताया कि दो तरह के मामले केमिकल फूड कलर में देखे जा रहे हैं. एक तो यह जब लोग खुद जानकारी न होने की वजह से केमिकल वाले फूड कलर को खरीद कर अपने खाने में डाल रहे हैं, जिससे बीमारियां होने का खतरा बढ़ रहा है. दूसरा जो मार्केट में दाल, भुने चने और दूसरे फूड आइटम बिक रहे हैं, उनको ज्यादा चमकदार दिखाने के लिए जो दुकानदार होते हैं. वो उस पर केमिकल वाले रंग डाल देते हैं और लोगों को लगता है, जो जितना चमकदार है.वह उतना ही वह स्वादिष्ट होता है.

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