केंद्र सरकार की ओर से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाए जा रहे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर बालाघाट में विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं ने अपनी राय साझा की। शनिवार को आयोजित एक प्रेसवार्ता में सांसद भारती पारधी सहित अन्य महिला प्रतिनिधियों ने इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर बताया। 16 से 18 अप्रैल तक चलेगा संसद का विशेष सत्र सांसद भारती पारधी ने जानकारी दी कि केंद्र की मोदी सरकार 16 से 18 अप्रैल तक तीन दिवसीय विशेष सत्र आयोजित करने जा रही है। इस सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पेश किया जाएगा, जिससे देश की आधी आबादी को विधायी संस्थाओं में सीधा प्रतिनिधित्व प्राप्त होगा। स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर बढ़ेगा फोकस महिला चिकित्सक डॉ. अर्चना शुक्ला ने कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने से जब महिलाएं सदन में पहुंचेंगी, तो वे महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वरोजगार जैसे विषयों पर अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगी। अधिवक्ता साधना शुक्ला ने इसे नारियों के राजनीतिक उत्थान पर लगने वाली अंतिम मुहर करार दिया। समाज में संतुलन और अधिकारों में होगी वृद्धि शिक्षाविद लता एलकर ने विश्वास जताया कि इस अधिनियम से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ने के साथ-साथ उनकी आत्मनिर्भरता और अधिकारों में वृद्धि होगी, जिससे समाज में बेहतर संतुलन स्थापित होगा। प्रेसवार्ता के दौरान भाजपा अध्यक्ष रामकिशोर कावरे और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा बिसेन सहित कई समाजसेवियों ने भी बिल की सराहना की। महिला प्रतिनिधियों ने किया केंद्र सरकार का समर्थन नगरपालिका अध्यक्ष भारती ठाकुर, जिला पंचायत सदस्य अनुपमा नेताम और स्कूल प्राचार्य अलका चौधरी सहित उपस्थित सभी महिलाओं ने एक स्वर में आरक्षण बिल का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इस कदम से महिलाएं समाज के निर्माण में अपनी भूमिका को और अधिक मजबूती से निभा सकेंगी।














































