मध्य प्रदेश में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति के बिना संचालित अस्पताल, क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब की संख्या 1640 है। इनमें ग्वालियर में सबसे ज्यादा 530 हेल्थ फैसिलिटी बिना अनुमति संचालित हो रही हैं। जबकि भोपाल और जबलपुर में एक भी ऐसा अस्पताल या क्लीनिक नहीं है, जिसके पास बोर्ड की अनुमति न हो। प्रदेश में सबसे ज्यादा हेल्थ केयर फैसिलिटी इंदौर में हैं। यहां 44 संस्थान बिना अनुमति संचालित हो रहे हैं। यह जानकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में पेश की है।
नोट: ये आंकड़ा 2024 का है। इसमें प्रदेश की कुल हेल्थ केयर फैसिलिटी की संख्या 12261 बताई गई है। कार्रवाई के दावे, पर समस्या बरकरार
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी में दो तरह का डेटा पेश किया है। एक डेटा 2024 का है, जिसमें बिना अनुमति (ऑथोराइजेशन) संचालित फैसिलिटी की संख्या 1640 बताई है। जबकि दूसरा डेटा 2016 का है, जिसमें फरवरी महीने इनकी संख्या 1196 पहुंची और वर्तमान में घटकर 845 पर पहुंच गई है। प्रभावी कार्रवाई के दावे के बावजूद बोर्ड ने एनजीटी से अनुरोध किया है कि सीएमएचओ को निर्देश दें, ताकि बिना अनुमति चल रहे संस्थाओं के रजिस्ट्रेशन निरस्त करें।
दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर पर एनजीटी ने लिया था संज्ञान
ग्वालियर क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से बताया गया है कि 9 फैसिलिटी को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि 391 को नोटिस जारी किया गया है। एनजीटी ने दैनिक भास्कर की उस खबर पर संज्ञान लिया था, जिसमें मेडिकल वेस्ट खुले में फेंके जाने का खुलासा हुआ था। इसके बाद से मामला एनजीटी में विचाराधीन है।















































