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स्वप्निल असनोदकर ने पहले सीजन में 311 रन बनाए:10 हजार रन बनाने वाले गोवा के पहले क्रिकेटर; एक चोट ने करियर बर्बाद किया

स्वप्निल असनोदकर ने पहले सीजन में 311 रन बनाए:10 हजार रन बनाने वाले गोवा के पहले क्रिकेटर; एक चोट ने करियर बर्बाद किया

जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पंड्या, रवींद्र जडेजा और सूर्यकुमार यादव ऐसे नाम हैं, जो IPL में चमके और भारतीय टीम में जगह बनाई। लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहे, जिन्हें फैंस धीरे-धीरे भूल गए। IPL के अनसंग हीरोज सीरीज में ऐसे ही क्रिकेटर्स की स्टोरी पढ़िए… पहला नाम गोवा के स्वप्निल असनोदकर का है। स्वप्निल 2008 में पहला टाइटल जीतने वाली राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा रहे। उन्हें पहले ही मैच में प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड मिला। स्वप्निल ने कोलकाता के खिलाफ 34 गेंदों पर 60 रन बनाए, जिसमें 10 चौके और 1 सिक्स शामिल था। स्वप्निल ने उस सीजन के 9 मैचों में 311 रन बनाए और टीम को चैंपियन बनाया। वे वर्तमान में केरल की अंडर-23 टीम के मुख्य कोच हैं। स्वप्निल असनोदकर ने दैनिक भास्कर से अपनी कहानी साझा की। उन्होंने अपने सफर, IPL की चकाचौंध और टीम से बाहर किए जाने का दर्द बताया… गोवा में फुटबॉल का माहौल, पर क्रिकेट का भूत सवार था स्वप्निल गोवा से हैं, जहां फुटबॉल सबसे लोकप्रिय खेल है। उनके पिता और चाचा क्लब लेवल पर फुटबॉल और क्रिकेट खेलते थे। स्वप्निल ने बताया- मेरे परिवार में पांचों भाई स्पोर्ट्स में थे। बुआ स्टेट लेवल एथलीट थीं। घर में खेल का माहौल बचपन से ही था। स्वप्निल ने बताया- मैंने टेनिस बॉल से गली क्रिकेट शुरू किया और वहीं से क्रिकेट का भूत सवार हो गया। 9वीं क्लास में लगातार तीन मैचों में तीन शतक लगाए, तब लगा कि मैं लेदर बॉल से खेल सकता हूं। पिता ने कोचिंग कैंप भेजा और वहीं से करियर बदल गया। मैच से 4 घंटे पहले शेन वॉर्न ने कहा- ‘तुम यह मैच खेल रहे हो’ 2008 के पहले सीजन को याद करते हुए स्वप्निल ने बताया कि शुरुआती चार मैचों में मौका नहीं मिला था। लेकिन शेन वॉर्न ने कहा था- कभी न कभी मौका आएगा, तैयार रहना। 1 मई 2008 को KKR के खिलाफ दोपहर 12 बजे मीटिंग थी। वॉर्न ने अचानक कहा- ‘यू आर प्लेइंग टुडे’। स्वप्निल तैयार थे। इसी मैच में उन्होंने पहली IPL फिफ्टी लगा दी और 60 रन बनाए।
चैंपियन बनाने का क्रेडिट वॉर्न को दिया, ‘गोवा की तोप’ नाम मिला था राजस्थान रॉयल्स उस साल चैंपियन बनी। स्वप्निल को Goan Cannon नाम मिला। उन्होंने 9 मैचों में 2 फिफ्टी के साथ 311 रन बनाए। स्वप्निल और ग्रीम स्मिथ की ओपनिंग जोड़ी ने 418 रन जोड़े, जो सीजन की सबसे बेहतरीन जोड़ी थी। स्वप्निल ने कहा- टीम में बड़े स्टार नहीं थे, लेकिन शेन वॉर्न और डेरेन बेरी ने ऐसा माहौल बनाया कि हम सबने अपना बेस्ट दिया। पहले तीन मैच हारने के बाद हमने कमबैक किया। लक भी साथ रहा और हम चैंपियन बने। पूरा क्रेडिट वॉर्न और सपोर्ट स्टाफ को जाता है। उंगली की चोट से प्रदर्शन खराब हुआ, मौके मिलना कम हो गए पहला सीजन शानदार रहा, लेकिन दूसरे सीजन में इंजरी ने झटका दिया। साउथ अफ्रीका में IPL के दौरान फील्डिंग में उंगली में लिगामेंट टियर हो गया। 10 दिन के कैंप का फायदा नहीं मिला। बाउंस वाली पिचों पर एडजस्ट नहीं हो पाए और प्रदर्शन प्रभावित रहा। 2009 के सीजन में स्वप्निल को 8 मैचों में मौका मिला, लेकिन वे 98 रन ही बना सके। उसके बाद 2010 और 2011 के सीजन में उन्हें मौके कम मिले। स्वप्निल ने 2011 में अपना आखिरी मैच खेला। उन्होंने किंग्स XI पंजाब (अब पंजाब किंग्स) के खिलाफ 21 अप्रैल को खेले गए मुकाबले में 9 गेंद पर 9 रन बनाए थे। इस पारी में एक चौका शामिल रहा। स्वप्निल ने अपने IPL करियर में कुल 20 मैच खेले और इनमें दो फिफ्टी के सहारे 423 रन बनाए। स्वप्निल ने कहा- मेरी मेहनत जारी रही, लेकिन सफलता की कोई गारंटी नहीं थी। मैं पॉजिटिव माइंडेड हूं। लाखों लोग IPL खेलने का सपना देखते हैं, मैंने वहां जाकर अपना जलवा दिखाया। लोग आज भी 2008 की वजह से मुझे याद करते हैं। यही मेरे लिए संतोष की बात है। 10 हजार रन बनाए, फिर भी संभावितों में जगह नहीं मिली गोवा के लिए 17 साल खेलने वाले स्वप्निल ने बताया- 2017-18 में मैं तीनों फॉर्मेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाला बल्लेबाज था। रणजी और वनडे में शतक लगाए थे, फिर भी अगले साल संभावित खिलाड़ियों में जगह नहीं मिली। मैं गोवा का पहला खिलाड़ी था, जिसने सभी फॉर्मेट मिलाकर 10 हजार से ज्यादा रन बनाए थे। यह फैसला एसोसिएशन का था, जिसमें मैं कुछ नहीं कर सकता था। 33 साल की उम्र में यह फैसला समझ नहीं आया, लेकिन मैंने इसे पॉजिटिव तरीके से लिया। अब कोचिंग के जरिए टीम इंडिया के रडार पर हैं स्वप्निल 2019 में स्वप्निल ने खिलाड़ी के रूप में संन्यास लिया और कोचिंग शुरू की। उन्होंने गोवा की अंडर-23 टीम को 4 साल कोचिंग दी। नागालैंड की सीनियर टीम के बैटिंग कोच रहे, जहां टीम प्लेट ग्रुप से एलीट ग्रुप में पहुंची। स्वप्निल को BCCI के NCA असाइनमेंट भी मिल रहे हैं। उन्होंने कहा- क्रिकेट ने मुझे जो दिया, उसे वापस लौटाना चाहता हूं। खिलाड़ियों को अपना अनुभव शेयर करना है। मेरा लक्ष्य अंडर-19 इंडिया या उससे आगे कोचिंग करना है। मेहनत जारी रहेगी। ——————————————————————

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जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पंड्या, रवींद्र जडेजा और सूर्यकुमार यादव ऐसे नाम हैं, जो IPL में चमके और भारतीय टीम में जगह बनाई। लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहे, जिन्हें फैंस धीरे-धीरे भूल गए। IPL के अनसंग हीरोज सीरीज में ऐसे ही क्रिकेटर्स की स्टोरी पढ़िए… पहला नाम गोवा के स्वप्निल असनोदकर का है। स्वप्निल 2008 में पहला टाइटल जीतने वाली राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा रहे। उन्हें पहले ही मैच में प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड मिला। स्वप्निल ने कोलकाता के खिलाफ 34 गेंदों पर 60 रन बनाए, जिसमें 10 चौके और 1 सिक्स शामिल था। स्वप्निल ने उस सीजन के 9 मैचों में 311 रन बनाए और टीम को चैंपियन बनाया। वे वर्तमान में केरल की अंडर-23 टीम के मुख्य कोच हैं। स्वप्निल असनोदकर ने दैनिक भास्कर से अपनी कहानी साझा की। उन्होंने अपने सफर, IPL की चकाचौंध और टीम से बाहर किए जाने का दर्द बताया… गोवा में फुटबॉल का माहौल, पर क्रिकेट का भूत सवार था स्वप्निल गोवा से हैं, जहां फुटबॉल सबसे लोकप्रिय खेल है। उनके पिता और चाचा क्लब लेवल पर फुटबॉल और क्रिकेट खेलते थे। स्वप्निल ने बताया- मेरे परिवार में पांचों भाई स्पोर्ट्स में थे। बुआ स्टेट लेवल एथलीट थीं। घर में खेल का माहौल बचपन से ही था। स्वप्निल ने बताया- मैंने टेनिस बॉल से गली क्रिकेट शुरू किया और वहीं से क्रिकेट का भूत सवार हो गया। 9वीं क्लास में लगातार तीन मैचों में तीन शतक लगाए, तब लगा कि मैं लेदर बॉल से खेल सकता हूं। पिता ने कोचिंग कैंप भेजा और वहीं से करियर बदल गया। मैच से 4 घंटे पहले शेन वॉर्न ने कहा- ‘तुम यह मैच खेल रहे हो’ 2008 के पहले सीजन को याद करते हुए स्वप्निल ने बताया कि शुरुआती चार मैचों में मौका नहीं मिला था। लेकिन शेन वॉर्न ने कहा था- कभी न कभी मौका आएगा, तैयार रहना। 1 मई 2008 को KKR के खिलाफ दोपहर 12 बजे मीटिंग थी। वॉर्न ने अचानक कहा- ‘यू आर प्लेइंग टुडे’। स्वप्निल तैयार थे। इसी मैच में उन्होंने पहली IPL फिफ्टी लगा दी और 60 रन बनाए।
चैंपियन बनाने का क्रेडिट वॉर्न को दिया, ‘गोवा की तोप’ नाम मिला था राजस्थान रॉयल्स उस साल चैंपियन बनी। स्वप्निल को Goan Cannon नाम मिला। उन्होंने 9 मैचों में 2 फिफ्टी के साथ 311 रन बनाए। स्वप्निल और ग्रीम स्मिथ की ओपनिंग जोड़ी ने 418 रन जोड़े, जो सीजन की सबसे बेहतरीन जोड़ी थी। स्वप्निल ने कहा- टीम में बड़े स्टार नहीं थे, लेकिन शेन वॉर्न और डेरेन बेरी ने ऐसा माहौल बनाया कि हम सबने अपना बेस्ट दिया। पहले तीन मैच हारने के बाद हमने कमबैक किया। लक भी साथ रहा और हम चैंपियन बने। पूरा क्रेडिट वॉर्न और सपोर्ट स्टाफ को जाता है। उंगली की चोट से प्रदर्शन खराब हुआ, मौके मिलना कम हो गए पहला सीजन शानदार रहा, लेकिन दूसरे सीजन में इंजरी ने झटका दिया। साउथ अफ्रीका में IPL के दौरान फील्डिंग में उंगली में लिगामेंट टियर हो गया। 10 दिन के कैंप का फायदा नहीं मिला। बाउंस वाली पिचों पर एडजस्ट नहीं हो पाए और प्रदर्शन प्रभावित रहा। 2009 के सीजन में स्वप्निल को 8 मैचों में मौका मिला, लेकिन वे 98 रन ही बना सके। उसके बाद 2010 और 2011 के सीजन में उन्हें मौके कम मिले। स्वप्निल ने 2011 में अपना आखिरी मैच खेला। उन्होंने किंग्स XI पंजाब (अब पंजाब किंग्स) के खिलाफ 21 अप्रैल को खेले गए मुकाबले में 9 गेंद पर 9 रन बनाए थे। इस पारी में एक चौका शामिल रहा। स्वप्निल ने अपने IPL करियर में कुल 20 मैच खेले और इनमें दो फिफ्टी के सहारे 423 रन बनाए। स्वप्निल ने कहा- मेरी मेहनत जारी रही, लेकिन सफलता की कोई गारंटी नहीं थी। मैं पॉजिटिव माइंडेड हूं। लाखों लोग IPL खेलने का सपना देखते हैं, मैंने वहां जाकर अपना जलवा दिखाया। लोग आज भी 2008 की वजह से मुझे याद करते हैं। यही मेरे लिए संतोष की बात है। 10 हजार रन बनाए, फिर भी संभावितों में जगह नहीं मिली गोवा के लिए 17 साल खेलने वाले स्वप्निल ने बताया- 2017-18 में मैं तीनों फॉर्मेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाला बल्लेबाज था। रणजी और वनडे में शतक लगाए थे, फिर भी अगले साल संभावित खिलाड़ियों में जगह नहीं मिली। मैं गोवा का पहला खिलाड़ी था, जिसने सभी फॉर्मेट मिलाकर 10 हजार से ज्यादा रन बनाए थे। यह फैसला एसोसिएशन का था, जिसमें मैं कुछ नहीं कर सकता था। 33 साल की उम्र में यह फैसला समझ नहीं आया, लेकिन मैंने इसे पॉजिटिव तरीके से लिया। अब कोचिंग के जरिए टीम इंडिया के रडार पर हैं स्वप्निल 2019 में स्वप्निल ने खिलाड़ी के रूप में संन्यास लिया और कोचिंग शुरू की। उन्होंने गोवा की अंडर-23 टीम को 4 साल कोचिंग दी। नागालैंड की सीनियर टीम के बैटिंग कोच रहे, जहां टीम प्लेट ग्रुप से एलीट ग्रुप में पहुंची। स्वप्निल को BCCI के NCA असाइनमेंट भी मिल रहे हैं। उन्होंने कहा- क्रिकेट ने मुझे जो दिया, उसे वापस लौटाना चाहता हूं। खिलाड़ियों को अपना अनुभव शेयर करना है। मेरा लक्ष्य अंडर-19 इंडिया या उससे आगे कोचिंग करना है। मेहनत जारी रहेगी। ——————————————————————

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