Saturday, 30 May 2026 | 10:52 PM

Trending :

सात्विक-चिराग सिंगापुर ओपन बैडमिंटन के फाइनल में पहुंचे:दुनिया की नंबर-1 जोड़ी को हराया; कोरिया के वर्ल्ड चैंपियंस को 21-19, 21-18 से हराया IPL फाइनल- टिकट बुंकिंग को लेकर फैंस ने शिकायत की:स्टेडियम के बाहर विराट की टी-शर्ट ज्यादा बिक रही; मैच से पहले मंदिर पहुंचे क्रुणाल IPL फाइनल- टिकट बुंकिंग को लेकर फैंस ने शिकायत की:स्टेडियम के बाहर विराट की टी-शर्ट ज्यादा बिक रही; मैच से पहले मंदिर पहुंचे क्रुणाल डीके शिवकुमार ने कर्नाटक के राज्यपाल से मुलाकात की, अगली सरकार बनाने का दावा पेश किया | भारत समाचार Asian Games 2026, BCCI, IOA, Suryakumar Yadav, Vaibhav Suryavanshi, Cricket India, Indian Cricket Team, Asian Games Cricket Asian Games 2026, BCCI, IOA, Suryakumar Yadav, Vaibhav Suryavanshi, Cricket India, Indian Cricket Team, Asian Games Cricket
EXCLUSIVE

पार्किंसंस डिजीज से महिलाओं की जिंदगी हो जाती है ज्यादा मुश्किल, नई स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

authorimg

Last Updated:

Parkinson’s Disease and Women: पार्किंसन एक न्यूरोलॉजिकल डिजीज है, जो बुजुर्गों को बुरी तरह प्रभावित करती है. एक रिसर्च में पता चला है कि पार्किंसंस डिजीज से महिलाओं की जिंदगी पुरुषों की तुलना में ज्यादा मुश्किल हो जाती है. इस बीमारी के कारण महिलाओं को रोज के कामकाज, रिश्तों और आत्मनिर्भरता में ज्यादा परेशानियां महसूस होती हैं.

Zoom

पार्किंसंस डिजीज के कारण लोगों की जिंदगी बहुत मुश्किल हो जाती है.

Parkinson’s Impact on Women: पार्किंसंस डिजीज धीरे-धीरे बढ़ने वाली न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो मुख्य रूप से शरीर की गति, संतुलन और मांसपेशियों के कंट्रोल को प्रभावित करती है. आमतौर पर 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है. इस बीमारी की वजह से लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित होती है और वे अपने रोज के कामकाज भी नहीं कर पाते हैं. यह एक ऐसी बीमारी है, जो समय के साथ बिगड़ती जाती है. इस बीमारी का असर सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि मरीज के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक जीवन पर भी गहरा असर होता है. पुरुषों को पार्किंसंस डिजीज का खतरा ज्यादा होता है, लेकिन महिलाएं भी इसका शिकार होती हैं. अब एक रिसर्च में इसे लेकर चौंकाने वाली बात सामने आई है.

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज की एक स्टडी में पाया गया कि महिलाओं पर पार्किंसंस डिजीज का सामाजिक और मनोवैज्ञानिक बोझ पुरुषों की तुलना में अधिक होता है. इस स्टडी में बताया गया कि पार्किंसंस के इलाज को केवल शारीरिक लक्षणों तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है. इस अध्ययन में 484 मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें 330 पुरुष और 154 महिलाएं थीं. सभी प्रतिभागियों का मूल्यांकन SCOPA-PS स्केल के माध्यम से किया गया, जो रोजमर्रा की गतिविधियों, रिश्तों, भावनात्मक स्थिति और आत्मनिर्भरता जैसे पहलुओं को मापता है.

इस स्टडी के रिजल्ट से पता चला कि समान उम्र और सेम बीमारी के बावजूद महिलाओं को दैनिक जीवन में ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. महिलाएं घरेलू काम, शौक, मनोरंजन और सामाजिक संबंधों को निभाने में अधिक परेशानी महसूस करती हैं. वे खुद को अधिक निर्भर मानती हैं और अकेलेपन की भावना भी उनमें ज्यादा पाई गई. विशेषज्ञों का मानना है कि इसका कारण केवल बीमारी की गंभीरता नहीं, बल्कि सामाजिक भूमिकाएं और पारिवारिक अपेक्षाएं भी हैं, जो महिलाओं पर अधिक जिम्मेदारी डालती हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

कुछ मानसिक और भावनात्मक चुनौतियां महिला और पुरुष दोनों में समान रूप से पाई गईं. भविष्य को लेकर चिंता, बातचीत में कठिनाई और शर्म की भावना दोनों में एक जैसी होती है. यह दर्शाता है कि पार्किंसंस केवल एक शारीरिक बीमारी नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित करती है. शोधकर्ताओं से सुझाव दिया है कि पार्किंसंस के इलाज में जेंडर-सेंसिटिव दृष्टिकोण अपनाना चाहिए. मरीजों को दवाओं के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक सहायता, काउंसलिंग और सामाजिक समर्थन की भी आवश्यकता होती है. इससे उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है और वे बीमारी के साथ बेहतर तरीके से जीवन जी सकते हैं.

इस बीच एक केस स्टडी में यह भी सामने आया कि एक महिला मरीज AI चैटबॉट पर अत्यधिक निर्भर हो गई थी, जिसे बाद में मानसिक स्थिति और दवाओं के प्रभाव से जोड़ा गया. इलाज और दवा में बदलाव के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ. यह घटना यह भी दर्शाती है कि तकनीक का उपयोग सावधानी और सीमाओं के साथ करना जरूरी है. यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि पार्किंसंस रोग का प्रभाव सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक भी होता है और महिलाओं पर इसका असर अधिक गहरा देखा गया है.

About the Author

authorimg

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
भारतीय महिला टीम ने साउथ अफ्रीका को हराया:दीप्ति ने 36 रन बनाए और 5 विकेट भी लिए, अफ्रीका सीरीज में 3-1 सं आगे

April 26, 2026/
8:01 am

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने चौथे टी-20 मैच में साउथ अफ्रीका को 14 रन से हरा दिया। हालांकि साउथ अफ्रीका...

अमेजन 100 शहरों में शुरू करेगी अपनी क्विक कॉमर्स सर्विस:1000 माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर खुलेंगे; इटरनल और स्विगी के शेयर 3% तक गिरे

April 28, 2026/
1:56 pm

अमेजन ने अपनी क्विक कॉमर्स सर्विस ‘अमेजन नाउ’ को देश के 100 शहरों में शुरू करने का प्लान बनाया है।...

'करिश्माई शब्द': कांग्रेस नेता द्वारा विजयन की सराहना के बाद केरल के मुख्यमंत्री ने मणिशंकर अय्यर से कहा | राजनीति समाचार

February 15, 2026/
11:20 pm

आखरी अपडेट:15 फरवरी, 2026, 23:20 IST मणिशंकर अय्यर ने कहा कि भारत का एकमात्र राज्य जहां “गांधीजी के निर्देशन” में...

रहमान डकैत का रोल 3 स्टार्स ने किया था रिजेक्ट:कास्टिंग डायरेक्टर बोले- मल्टीस्टारर फिल्म बताकर किया इनकार, फिर अक्षय खन्ना हुए फाइनल

April 4, 2026/
3:17 pm

फिल्म ‘धुरंधर’ की कास्टिंग को लेकर कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने बताया कि रहमान डकैत के किरदार के लिए 2-3...

इंदौर में पंपकर्मी की हत्या का मामला:कार मालिक आर्यन अब भी फरार, परिचितों को बताया- दोस्तों को दी थी कार

March 14, 2026/
12:20 am

इंदौर के सांवेर में पंपकर्मी रोहित परमार की जान कार सवार युवकों ने ले ली थी। कई फुटेज देखने के...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

पार्किंसंस डिजीज से महिलाओं की जिंदगी हो जाती है ज्यादा मुश्किल, नई स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

authorimg

Last Updated:

Parkinson’s Disease and Women: पार्किंसन एक न्यूरोलॉजिकल डिजीज है, जो बुजुर्गों को बुरी तरह प्रभावित करती है. एक रिसर्च में पता चला है कि पार्किंसंस डिजीज से महिलाओं की जिंदगी पुरुषों की तुलना में ज्यादा मुश्किल हो जाती है. इस बीमारी के कारण महिलाओं को रोज के कामकाज, रिश्तों और आत्मनिर्भरता में ज्यादा परेशानियां महसूस होती हैं.

Zoom

पार्किंसंस डिजीज के कारण लोगों की जिंदगी बहुत मुश्किल हो जाती है.

Parkinson’s Impact on Women: पार्किंसंस डिजीज धीरे-धीरे बढ़ने वाली न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो मुख्य रूप से शरीर की गति, संतुलन और मांसपेशियों के कंट्रोल को प्रभावित करती है. आमतौर पर 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है. इस बीमारी की वजह से लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित होती है और वे अपने रोज के कामकाज भी नहीं कर पाते हैं. यह एक ऐसी बीमारी है, जो समय के साथ बिगड़ती जाती है. इस बीमारी का असर सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि मरीज के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक जीवन पर भी गहरा असर होता है. पुरुषों को पार्किंसंस डिजीज का खतरा ज्यादा होता है, लेकिन महिलाएं भी इसका शिकार होती हैं. अब एक रिसर्च में इसे लेकर चौंकाने वाली बात सामने आई है.

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज की एक स्टडी में पाया गया कि महिलाओं पर पार्किंसंस डिजीज का सामाजिक और मनोवैज्ञानिक बोझ पुरुषों की तुलना में अधिक होता है. इस स्टडी में बताया गया कि पार्किंसंस के इलाज को केवल शारीरिक लक्षणों तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है. इस अध्ययन में 484 मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें 330 पुरुष और 154 महिलाएं थीं. सभी प्रतिभागियों का मूल्यांकन SCOPA-PS स्केल के माध्यम से किया गया, जो रोजमर्रा की गतिविधियों, रिश्तों, भावनात्मक स्थिति और आत्मनिर्भरता जैसे पहलुओं को मापता है.

इस स्टडी के रिजल्ट से पता चला कि समान उम्र और सेम बीमारी के बावजूद महिलाओं को दैनिक जीवन में ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. महिलाएं घरेलू काम, शौक, मनोरंजन और सामाजिक संबंधों को निभाने में अधिक परेशानी महसूस करती हैं. वे खुद को अधिक निर्भर मानती हैं और अकेलेपन की भावना भी उनमें ज्यादा पाई गई. विशेषज्ञों का मानना है कि इसका कारण केवल बीमारी की गंभीरता नहीं, बल्कि सामाजिक भूमिकाएं और पारिवारिक अपेक्षाएं भी हैं, जो महिलाओं पर अधिक जिम्मेदारी डालती हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

कुछ मानसिक और भावनात्मक चुनौतियां महिला और पुरुष दोनों में समान रूप से पाई गईं. भविष्य को लेकर चिंता, बातचीत में कठिनाई और शर्म की भावना दोनों में एक जैसी होती है. यह दर्शाता है कि पार्किंसंस केवल एक शारीरिक बीमारी नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित करती है. शोधकर्ताओं से सुझाव दिया है कि पार्किंसंस के इलाज में जेंडर-सेंसिटिव दृष्टिकोण अपनाना चाहिए. मरीजों को दवाओं के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक सहायता, काउंसलिंग और सामाजिक समर्थन की भी आवश्यकता होती है. इससे उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है और वे बीमारी के साथ बेहतर तरीके से जीवन जी सकते हैं.

इस बीच एक केस स्टडी में यह भी सामने आया कि एक महिला मरीज AI चैटबॉट पर अत्यधिक निर्भर हो गई थी, जिसे बाद में मानसिक स्थिति और दवाओं के प्रभाव से जोड़ा गया. इलाज और दवा में बदलाव के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ. यह घटना यह भी दर्शाती है कि तकनीक का उपयोग सावधानी और सीमाओं के साथ करना जरूरी है. यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि पार्किंसंस रोग का प्रभाव सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक भी होता है और महिलाओं पर इसका असर अधिक गहरा देखा गया है.

About the Author

authorimg

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.