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IMF Predicts India GDP 2026 $4.15 Trillion, UK Regains 5th Spot

IMF Predicts India GDP 2026 $4.15 Trillion, UK Regains 5th Spot

नई दिल्ली15 मिनट पहले

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भारत की दुनिया की छठी सबसे बड़ी इकोनॉमी के पायदान पर खिसक गया है। पिछले तीन साल से भारत 5वें स्थान पर बना हुआ था। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के ताजा डेटा के अनुसार अब ब्रिटेन (UK) एक बार फिर भारत से आगे निकल गया है। भारत की GDP में ये गिरावट डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने से आई है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा कीमतों पर भारत की GDP 2025 में 3.92 ट्रिलियन डॉलर और 2026 में 4.15 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है। वहीं, ब्रिटेन की GDP 2025 में 4 ट्रिलियन डॉलर और 2026 में 4.26 ट्रिलियन डॉलर रहने की उम्मीद है। जापान भी भारत से आगे है, जिसकी इकोनॉमी 202 में 4.38 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है।

भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

देश GDP (₹ लाख करोड़) GDP (ट्रिलियन डॉलर)
अमेरिका 3,023 32.38
चीन 1,947 20.85
जर्मनी 508 5.45
जापान 409 4.38
UK 397 4.26
भारत 387 4.15

सोर्स: इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF)

रैंकिंग में गिरावट की 2 मुख्य वजहें

भारत की ग्लोबल रैंकिंग में इस बदलाव के पीछे 2 बड़े कारण माने जा रहे हैं:

  1. बेस ईयर में बदलाव: सरकार ने GDP के बेस ईयर को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। इस बदलाव और नए पेटर्न की वजह से इकोनॉमी के साइज में 2.8% से 3.8% तक की कमी आई है।
  2. रुपए की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत में आई गिरावट ने भी असर डाला है। FY26 में रुपए में करीब 10% की गिरावट देखी गई, जिससे डॉलर में आंकी जाने वाली GDP कम हो गई। इसके उलट ब्रिटिश पाउंड मजबूत हुआ है, जिससे उनकी इकोनॉमी का डॉलर वैल्यू बढ़ गया है।

2027 में बनेगा चौथी बड़ी इकोनॉमी, जापान को छोड़ेंगे पीछे

यह गिरावट केवल अस्थायी साबित हो सकती है। IMF का अनुमान है कि भारत 2027 (FY28) तक एक लंबी छलांग लगाएगा और जापान-ब्रिटेन दोनों को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा।

नॉलेज पार्ट

GDP क्या होती है?

GDP का पूरा नाम ग्रोस डॉमेस्टिक प्रोडक्शन है, जिसे हिंदी में कुल घरेलू उत्पाद कहते हैं।

सरल भाषा में: GDP = एक देश में एक साल में कुल कितना सामान और सेवाएँ बनाई गईं (उनकी कीमत के हिसाब से)।

  • उदाहरण: कारखाने में बनी कारें
  • किसान का गेहूँ-चावल
  • डॉक्टर-इंजीनियर की सेवाएँ
  • दुकानदार का सामान
  • सरकारी सड़क-स्कूल का काम

ये सब मिलाकर एक साल में जितनी श्कुल वैल्यू’ बनी, वही देश की GDP है।

GDP बढ़ने के फायदे

  • नौकरियाँ बढ़ती हैं
  • सैलरी/मजदूरी बढ़ती है
  • दुकान-बिजनेस अच्छा चलता है
  • सरकार ज्यादा टैक्स पाती है इससे सड़क, स्कूल, अस्पताल बनते हैं
  • शेयर मार्केट ऊपर जाता है (जो म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं उन्हें फायदा)

GDP घटने के नुकसान

  • नौकरियाँ कम होती हैं / छंटनी होती है।
  • सैलरी नहीं बढ़ती या कटती है।
  • दुकानदार का सामान नहीं बिकता।
  • किसान का माल सस्ता हो जाता है।
  • बेरोजगारी बढ़ती है।लोग खर्च कम कर देते हैं इससे मंदी की संभावना रहती है।

बेस ईयर क्या होता है?: बेस ईयर वो साल होता है जिसकी कीमतों को आधार (बेस) माना जाता है। यानी, उसी साल की चीजों की औसत कीमत को 100 का मान देते हैं। फिर, दूसरे सालों की कीमतों की तुलना इसी बेस ईयर से की जाती है। इससे पता चलता है कि महंगाई कितनी बढ़ी या घटी है।

उदाहरण: मान लीजिए 2020 बेस ईयर है। उस साल एक किलो टमाटर ₹50 का था। अब 2025 में वो ₹80 का हो गया। तो महंगाई = (80 – 50) / 50 × 100 = 60% बढ़ी। यही फॉर्मूला CPI में यूज होता है, लेकिन ये पूरे बाजार की चीजों पर लागू होता है।

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IMF Predicts India GDP 2026 $4.15 Trillion, UK Regains 5th Spot

नई दिल्ली15 मिनट पहले

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भारत की दुनिया की छठी सबसे बड़ी इकोनॉमी के पायदान पर खिसक गया है। पिछले तीन साल से भारत 5वें स्थान पर बना हुआ था। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के ताजा डेटा के अनुसार अब ब्रिटेन (UK) एक बार फिर भारत से आगे निकल गया है। भारत की GDP में ये गिरावट डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने से आई है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा कीमतों पर भारत की GDP 2025 में 3.92 ट्रिलियन डॉलर और 2026 में 4.15 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है। वहीं, ब्रिटेन की GDP 2025 में 4 ट्रिलियन डॉलर और 2026 में 4.26 ट्रिलियन डॉलर रहने की उम्मीद है। जापान भी भारत से आगे है, जिसकी इकोनॉमी 202 में 4.38 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है।

भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

देश GDP (₹ लाख करोड़) GDP (ट्रिलियन डॉलर)
अमेरिका 3,023 32.38
चीन 1,947 20.85
जर्मनी 508 5.45
जापान 409 4.38
UK 397 4.26
भारत 387 4.15

सोर्स: इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF)

रैंकिंग में गिरावट की 2 मुख्य वजहें

भारत की ग्लोबल रैंकिंग में इस बदलाव के पीछे 2 बड़े कारण माने जा रहे हैं:

  1. बेस ईयर में बदलाव: सरकार ने GDP के बेस ईयर को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। इस बदलाव और नए पेटर्न की वजह से इकोनॉमी के साइज में 2.8% से 3.8% तक की कमी आई है।
  2. रुपए की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत में आई गिरावट ने भी असर डाला है। FY26 में रुपए में करीब 10% की गिरावट देखी गई, जिससे डॉलर में आंकी जाने वाली GDP कम हो गई। इसके उलट ब्रिटिश पाउंड मजबूत हुआ है, जिससे उनकी इकोनॉमी का डॉलर वैल्यू बढ़ गया है।

2027 में बनेगा चौथी बड़ी इकोनॉमी, जापान को छोड़ेंगे पीछे

यह गिरावट केवल अस्थायी साबित हो सकती है। IMF का अनुमान है कि भारत 2027 (FY28) तक एक लंबी छलांग लगाएगा और जापान-ब्रिटेन दोनों को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा।

नॉलेज पार्ट

GDP क्या होती है?

GDP का पूरा नाम ग्रोस डॉमेस्टिक प्रोडक्शन है, जिसे हिंदी में कुल घरेलू उत्पाद कहते हैं।

सरल भाषा में: GDP = एक देश में एक साल में कुल कितना सामान और सेवाएँ बनाई गईं (उनकी कीमत के हिसाब से)।

  • उदाहरण: कारखाने में बनी कारें
  • किसान का गेहूँ-चावल
  • डॉक्टर-इंजीनियर की सेवाएँ
  • दुकानदार का सामान
  • सरकारी सड़क-स्कूल का काम

ये सब मिलाकर एक साल में जितनी श्कुल वैल्यू’ बनी, वही देश की GDP है।

GDP बढ़ने के फायदे

  • नौकरियाँ बढ़ती हैं
  • सैलरी/मजदूरी बढ़ती है
  • दुकान-बिजनेस अच्छा चलता है
  • सरकार ज्यादा टैक्स पाती है इससे सड़क, स्कूल, अस्पताल बनते हैं
  • शेयर मार्केट ऊपर जाता है (जो म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं उन्हें फायदा)

GDP घटने के नुकसान

  • नौकरियाँ कम होती हैं / छंटनी होती है।
  • सैलरी नहीं बढ़ती या कटती है।
  • दुकानदार का सामान नहीं बिकता।
  • किसान का माल सस्ता हो जाता है।
  • बेरोजगारी बढ़ती है।लोग खर्च कम कर देते हैं इससे मंदी की संभावना रहती है।

बेस ईयर क्या होता है?: बेस ईयर वो साल होता है जिसकी कीमतों को आधार (बेस) माना जाता है। यानी, उसी साल की चीजों की औसत कीमत को 100 का मान देते हैं। फिर, दूसरे सालों की कीमतों की तुलना इसी बेस ईयर से की जाती है। इससे पता चलता है कि महंगाई कितनी बढ़ी या घटी है।

उदाहरण: मान लीजिए 2020 बेस ईयर है। उस साल एक किलो टमाटर ₹50 का था। अब 2025 में वो ₹80 का हो गया। तो महंगाई = (80 – 50) / 50 × 100 = 60% बढ़ी। यही फॉर्मूला CPI में यूज होता है, लेकिन ये पूरे बाजार की चीजों पर लागू होता है।

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