Wednesday, 29 Jul 2026 | 10:29 PM

Trending :

EXCLUSIVE

कभी काला कोट पहनते थे डॉक्टर, फिर एक घटना ने बदल दिया मेडिकल जगत का संसार, आज सफेद लिबास है प्रतीक

authorimg

Last Updated:

Why doctors wear white coat: आपको जानकर हैरानी होगी जिस डॉक्टर को आप सफेद कोट में देखकर झट से पहचान लेते हैं वही डॉक्टर पहले काला कोट पहनते थे. 19वीं सदी के मध्य तक डॉक्टरों की पहचान सफेद नहीं, बल्कि काला कोट हुआ करती थी. लेकिन फिर एक आविष्कार ने पूरे मेडिकल जगत के इतिहास को बदल दिया. इसके बाद डॉक्टरों के लिए सफेद कोट और स्वच्छता प्रतीक बन गया. पढिए दिलचस्प कहानी.

Zoom

डॉक्टर सफेद कोट क्यों पहनते हैं.

Doctor’s White Coat : आज जैसे ही आप किसी अस्पताल में जाएंगे कई लोग उपर से सफेद लिबास में दिख जाएंगे. इन सफेद लिबास को देखते ही हम पहचान जाते हैं कि ये डॉक्टर होंगे. लेकिन आपको जानकर ताज्जुब होगा कि एक समय यह सफेद कोट डॉक्टरों का लिबास नहीं था. डॉक्टर पहले काला कोट पहनते थे. मजे की बात यह है कि इस काले कोट पर खून के धब्बे या जितनी अधिक गंदगी रहती थी, उन्हें उतना अधिक काबिल डॉक्टर माना जाता था. लेकिन अचानक समय का पहिया घूमा और मेडिकल जगत का संसार ही बदल गया. फिर डॉक्टरों ने स्वच्छता का प्रतीक सफेद कोट पहनने की शुरुआत की. आइए जानते हैं कि इसके पीछे की कहानी के बारे में.

डॉक्टर क्यों पहनते थे काला कोट
17वीं सदी की शुरुआत में जब मेडिकल जगत का विकास हो रहा था तब डॉक्टरी के पेशे को उतना सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता था. जिस व्यक्ति को कोई बीमारी हो जाती थी तो उसे ईश्वर का प्रकोप ही माना जाता था. तब तक डॉक्टरों के लिबास का कोई तय मानक नहीं था. 18वीं सदी में मेडिकल जगत का विकास होने लगा. इसके बाद कई तरह की सर्जरी भी की जाने लगी. इस दौरान डॉक्टरों के कपड़े पर खून के छींटें और गंदगी लग जाती थी. इससे कपड़े गंदे दिखते थे. इसलिए डॉक्टरों ने उपर से काला कोट पहनना शुरू कर दिया. उस समय तक हमें यह पता नहीं था कि सूक्ष्म जीवाणुओं से इंफेक्शन होता है. इसलिए जिस डॉक्टर के कपड़े में ज्यादा गंदगी दिखती थी, उसे माना जाता था कि वह बहुत ही काबिल डॉक्टर है. पहले यह भी माना जाता था कि यदि कहीं की हवा खराब हो तो उससे बीमारियां होती हैं. लेकिन 1860 में लुई पाश्चर नाम के वैज्ञानिक ने यह साबित किया कि बीमारियां खराब हवा से नहीं बल्कि सूक्ष्मजीवों से होती है.

इसके बाद मेडिकल जगत सोच में पड़ गया. फिर रॉबर्ट कोच ने एंथ्रेक्स, डायरिया और टीबी के कीटाणुओं की पहचान की जिससे यह सिद्ध हो गया कि ये विशिष्ट सूक्ष्मजीव ही बीमारियों का कारण है. इस खोज को आगे बढ़ाते हुए जोसेफ लिस्टर ने मेडिकल जगत की पूरी अवधारणा को ही बदल दिया. उन्होंने पहली बार एंटीसेप्टिक सर्जरी की शुरुआत की. लिस्टर ने यह साबित किया कि सर्जरी के बाद इसलिए मौत हो जाती है क्योंकि घाव में कीटाणुओं का प्रवेश हो जाता है जिससे बीमारियां बढ़ जाती है. इसलिए इन कीटाणुओं को मारना जरूरी है. इसके लिए साफ-सफाई की बहुत जरूरी है ताकि ऑपरेशन वाली जगहों पर किसी तरह की गंदगी न हो. तब से उन्होंने वहां कार्बोलिक एसिड का छिड़काव करना शुरू कर दिया. इस महान खोज के बाद चिकित्सा जगत में क्रांतिकारी बदलाव हुआ. जिस गंदगी को पहले काबिलियत की निशानी मानी जाती थी, अब उसे बीमारियों का कारण माने जाने लगा. इसके बाद मेडिकल जगत में स्वच्छता को नया मानक माने जाने लगा.

फिर सफेट कोट क्यों पहनने लगे
जब पूरी दुनिया में इन महान वैज्ञानिकों का काम गया तो चिकित्सा जगत में यह बात सर्वमान्य हो गई है गंदगियों में कीटाणु रहते हैं और इनसे बीमारियां फैलती है. फिर स्वच्छता को चिकित्सा जगत का मानक माने जाने लगा. अब काले कोट डॉक्टरों की काबिलियत का प्रतीक नहीं रहा और डॉक्टरों ने इसे उतार फेंक दिया. उस समय लैबोरेट्री में वैज्ञानिक सफेद कोट पहनते थे ताकि उन पर गंदगी आसानी से दिख सके. डॉक्टरों ने खुद को वैज्ञानिकों के तरह सफेद कोट अपना लिया क्योंकि तब तक स्वच्छता को सेहत का प्रतीक स्वीकार कर लिया गया. माना जाता है कि 1889 में डॉ. जॉर्ज आर्मस्ट्रांग ने सबसे पहले आधुनिक मेडिकल कोट की अवधारणा को लोकप्रिय बनाया.धीरे-धीरे पूरी दुनिया के डॉक्टर सफेद कोट को अपना डॉक्टरी लिबास बना लिया.

सफेद कोट ही क्यों
1800 के दशक के अंत में जब यह समझ आया कि गंदगी से बीमारियां फैलती हैं, तब ‘सफेद’ को एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण के मानक के रूप में चुना गया. सफेद कोट पहनने के पीछे आज कई तर्क दिए जाते हैं. सबसे पहले तो सफेद रंग स्वच्छता का प्रतीक है. मेडिकल जगत में स्वच्छता का खास मतलब है, इसलिए सफेद रंग को अपना लिया गया. इसके अलावा सफेद रंग शांति और ईमानदारी का भी प्रतीक है. इससे मरीजों का डॉक्टर पर भरोसा बढ़ता है. वहीं सफेद रंग पर गंदगी और खून के धब्बे तुरंत नजर आते हैं, जिससे डॉक्टरों को अपनी स्वच्छता और स्टरलाइजेशन का ध्यान रखने में आसानी होती है. सफेद रंग में पवित्रता का भाव भी छुपा है. आजकल मेडिकल कॉलेजों में व्हाइट कोट सेरेमनी एक महत्वपूर्ण परंपरा बन गई है. जब छात्र अपनी मेडिकल की पढ़ाई शुरू करते हैं, तो उन्हें औपचारिक रूप से सफेद कोट पहनाया जाता है. यह इस बात का प्रतीक है कि अब वे एक जिम्मेदारी भरे और पवित्र पेशे में प्रवेश कर रहे हैं जहां स्वच्छता और सेवा सर्वोपरि है. हालांकि सफेद कोट आज डॉक्टरों की पहचान है, लेकिन कई ऑपरेशन के समय सर्जन अक्सर नीले, हरे रंग के स्क्रब्स पहनते है क्योंकि ये रंग आंखों को सुकून दें और खून के लाल रंग के प्रभाव को कम करे.

About the Author

authorimg

Lakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
धुरंधर 2 पर सेना की जानकारी लीक करने का आरोप:हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से जांच करने को कहा; SSB जवान ने याचिका दायर की

May 20, 2026/
5:35 pm

रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर 2’ कानूनी विवाद में घिर गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार...

खुम्बु आइसफॉल पर रुका एवरेस्ट पर्वता​रोहियों का मिशन:गाइड्स को एयरलिफ्ट कराने की तैयारी; ‘एवरेस्ट की सेहत’ सुधारने में जुटे आइसफॉल डॉक्टर

April 28, 2026/
12:41 pm

समुद्र तल से 17 हजार फीट की ऊंचाई, एवरेस्ट की कठिन डगर और चारों तरफ पसरा मौत सा सन्नाटा… यहां...

रायसेन मंडी में नई फसल की खरीद शुरू:व्यापारियों ने चना 4300 और गेहूं 2400 रुपए प्रति क्विंटल तक बिका

March 18, 2026/
8:39 am

रायसेन की कृषि उपज मंडी में नई फसल की आवक शुरू हो गई है। मंगलवार को मंडी में नया गेहूं...

authorimg

March 31, 2026/
7:55 pm

Last Updated:March 31, 2026, 19:55 IST दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ने आईसीयू से डिस्चार्ज मरीजों के लिए ई संजीवनी ओपीडी...

नॉर्वे चेस- वर्ल्ड चैंपियन गुकेश लगातार तीसरा मैच हारे:चौथे राउंड में कार्लसन ने हराया, स्टैंडिंग में सबसे निचले स्थान पर आए

May 29, 2026/
10:40 am

भारतीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश का नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में खराब दौर जारी है। उन्हें दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन...

UP Banda Heatwave Alert; Temperature Increase Reason

April 30, 2026/
5:36 am

यूपी के बांदा की चर्चा इन दिनों देश-दुनिया में है। कारण है, भीषण गर्मी। 27 अप्रैल को यहां का तापमान...

Chhattisgarh Temple Ropeway Accident | Khallari Temple

March 22, 2026/
12:25 pm

महासमुंद जिले में स्थित प्रसिद्ध खल्लारी मंदिर में रोप-पे केबल टूटने से ट्रॉली नीचे गिर गई। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

कभी काला कोट पहनते थे डॉक्टर, फिर एक घटना ने बदल दिया मेडिकल जगत का संसार, आज सफेद लिबास है प्रतीक

authorimg

Last Updated:

Why doctors wear white coat: आपको जानकर हैरानी होगी जिस डॉक्टर को आप सफेद कोट में देखकर झट से पहचान लेते हैं वही डॉक्टर पहले काला कोट पहनते थे. 19वीं सदी के मध्य तक डॉक्टरों की पहचान सफेद नहीं, बल्कि काला कोट हुआ करती थी. लेकिन फिर एक आविष्कार ने पूरे मेडिकल जगत के इतिहास को बदल दिया. इसके बाद डॉक्टरों के लिए सफेद कोट और स्वच्छता प्रतीक बन गया. पढिए दिलचस्प कहानी.

Zoom

डॉक्टर सफेद कोट क्यों पहनते हैं.

Doctor’s White Coat : आज जैसे ही आप किसी अस्पताल में जाएंगे कई लोग उपर से सफेद लिबास में दिख जाएंगे. इन सफेद लिबास को देखते ही हम पहचान जाते हैं कि ये डॉक्टर होंगे. लेकिन आपको जानकर ताज्जुब होगा कि एक समय यह सफेद कोट डॉक्टरों का लिबास नहीं था. डॉक्टर पहले काला कोट पहनते थे. मजे की बात यह है कि इस काले कोट पर खून के धब्बे या जितनी अधिक गंदगी रहती थी, उन्हें उतना अधिक काबिल डॉक्टर माना जाता था. लेकिन अचानक समय का पहिया घूमा और मेडिकल जगत का संसार ही बदल गया. फिर डॉक्टरों ने स्वच्छता का प्रतीक सफेद कोट पहनने की शुरुआत की. आइए जानते हैं कि इसके पीछे की कहानी के बारे में.

डॉक्टर क्यों पहनते थे काला कोट
17वीं सदी की शुरुआत में जब मेडिकल जगत का विकास हो रहा था तब डॉक्टरी के पेशे को उतना सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता था. जिस व्यक्ति को कोई बीमारी हो जाती थी तो उसे ईश्वर का प्रकोप ही माना जाता था. तब तक डॉक्टरों के लिबास का कोई तय मानक नहीं था. 18वीं सदी में मेडिकल जगत का विकास होने लगा. इसके बाद कई तरह की सर्जरी भी की जाने लगी. इस दौरान डॉक्टरों के कपड़े पर खून के छींटें और गंदगी लग जाती थी. इससे कपड़े गंदे दिखते थे. इसलिए डॉक्टरों ने उपर से काला कोट पहनना शुरू कर दिया. उस समय तक हमें यह पता नहीं था कि सूक्ष्म जीवाणुओं से इंफेक्शन होता है. इसलिए जिस डॉक्टर के कपड़े में ज्यादा गंदगी दिखती थी, उसे माना जाता था कि वह बहुत ही काबिल डॉक्टर है. पहले यह भी माना जाता था कि यदि कहीं की हवा खराब हो तो उससे बीमारियां होती हैं. लेकिन 1860 में लुई पाश्चर नाम के वैज्ञानिक ने यह साबित किया कि बीमारियां खराब हवा से नहीं बल्कि सूक्ष्मजीवों से होती है.

इसके बाद मेडिकल जगत सोच में पड़ गया. फिर रॉबर्ट कोच ने एंथ्रेक्स, डायरिया और टीबी के कीटाणुओं की पहचान की जिससे यह सिद्ध हो गया कि ये विशिष्ट सूक्ष्मजीव ही बीमारियों का कारण है. इस खोज को आगे बढ़ाते हुए जोसेफ लिस्टर ने मेडिकल जगत की पूरी अवधारणा को ही बदल दिया. उन्होंने पहली बार एंटीसेप्टिक सर्जरी की शुरुआत की. लिस्टर ने यह साबित किया कि सर्जरी के बाद इसलिए मौत हो जाती है क्योंकि घाव में कीटाणुओं का प्रवेश हो जाता है जिससे बीमारियां बढ़ जाती है. इसलिए इन कीटाणुओं को मारना जरूरी है. इसके लिए साफ-सफाई की बहुत जरूरी है ताकि ऑपरेशन वाली जगहों पर किसी तरह की गंदगी न हो. तब से उन्होंने वहां कार्बोलिक एसिड का छिड़काव करना शुरू कर दिया. इस महान खोज के बाद चिकित्सा जगत में क्रांतिकारी बदलाव हुआ. जिस गंदगी को पहले काबिलियत की निशानी मानी जाती थी, अब उसे बीमारियों का कारण माने जाने लगा. इसके बाद मेडिकल जगत में स्वच्छता को नया मानक माने जाने लगा.

फिर सफेट कोट क्यों पहनने लगे
जब पूरी दुनिया में इन महान वैज्ञानिकों का काम गया तो चिकित्सा जगत में यह बात सर्वमान्य हो गई है गंदगियों में कीटाणु रहते हैं और इनसे बीमारियां फैलती है. फिर स्वच्छता को चिकित्सा जगत का मानक माने जाने लगा. अब काले कोट डॉक्टरों की काबिलियत का प्रतीक नहीं रहा और डॉक्टरों ने इसे उतार फेंक दिया. उस समय लैबोरेट्री में वैज्ञानिक सफेद कोट पहनते थे ताकि उन पर गंदगी आसानी से दिख सके. डॉक्टरों ने खुद को वैज्ञानिकों के तरह सफेद कोट अपना लिया क्योंकि तब तक स्वच्छता को सेहत का प्रतीक स्वीकार कर लिया गया. माना जाता है कि 1889 में डॉ. जॉर्ज आर्मस्ट्रांग ने सबसे पहले आधुनिक मेडिकल कोट की अवधारणा को लोकप्रिय बनाया.धीरे-धीरे पूरी दुनिया के डॉक्टर सफेद कोट को अपना डॉक्टरी लिबास बना लिया.

सफेद कोट ही क्यों
1800 के दशक के अंत में जब यह समझ आया कि गंदगी से बीमारियां फैलती हैं, तब ‘सफेद’ को एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण के मानक के रूप में चुना गया. सफेद कोट पहनने के पीछे आज कई तर्क दिए जाते हैं. सबसे पहले तो सफेद रंग स्वच्छता का प्रतीक है. मेडिकल जगत में स्वच्छता का खास मतलब है, इसलिए सफेद रंग को अपना लिया गया. इसके अलावा सफेद रंग शांति और ईमानदारी का भी प्रतीक है. इससे मरीजों का डॉक्टर पर भरोसा बढ़ता है. वहीं सफेद रंग पर गंदगी और खून के धब्बे तुरंत नजर आते हैं, जिससे डॉक्टरों को अपनी स्वच्छता और स्टरलाइजेशन का ध्यान रखने में आसानी होती है. सफेद रंग में पवित्रता का भाव भी छुपा है. आजकल मेडिकल कॉलेजों में व्हाइट कोट सेरेमनी एक महत्वपूर्ण परंपरा बन गई है. जब छात्र अपनी मेडिकल की पढ़ाई शुरू करते हैं, तो उन्हें औपचारिक रूप से सफेद कोट पहनाया जाता है. यह इस बात का प्रतीक है कि अब वे एक जिम्मेदारी भरे और पवित्र पेशे में प्रवेश कर रहे हैं जहां स्वच्छता और सेवा सर्वोपरि है. हालांकि सफेद कोट आज डॉक्टरों की पहचान है, लेकिन कई ऑपरेशन के समय सर्जन अक्सर नीले, हरे रंग के स्क्रब्स पहनते है क्योंकि ये रंग आंखों को सुकून दें और खून के लाल रंग के प्रभाव को कम करे.

About the Author

authorimg

Lakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.