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Arjun Rampal Struggle Success Story; Dhurandhar ISI Major

Arjun Rampal Struggle Success Story; Dhurandhar ISI Major

5 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र

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अर्जुन रामपाल ने 17 साल की उम्र में मॉडलिंग शुरू की और 20 साल की उम्र में सुपरमॉडल बन गए।

एक समय बॉलीवुड में अपनी स्टाइल और शानदार स्क्रीन प्रेजेंस के लिए पहचाने जाने वाले अर्जुन रामपाल का करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा। मॉडलिंग से फिल्मों में आए अर्जुन ने शुरुआत में पहचान बनाई, लेकिन लंबे समय तक उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं।

इस दौर में उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा और घर का किराया भरना भी मुश्किल हो गया था। करीब 14 फिल्मों की असफलता ने उनके करियर पर सवाल खड़े किए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। संघर्ष के दौर में उन्होंने खुद को तराशा और अभिनय पर काम जारी रखा।

समय के साथ उन्हें ‘रॉक ऑन’ जैसी फिल्मों से सराहना मिली और अब ‘धुरंधर’ के जरिए उनकी किस्मत फिर चमकती नजर आ रही है।

आज की सक्सेस स्टोरी में अर्जुन रामपाल के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें जानते हैं।

सेना का अनुशासन और मां के संस्कारों का उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव

अर्जुन रामपाल का जन्म 26 नवंबर 1972 को जबलपुर, मध्य प्रदेश में हुआ था। उनका शुरुआती जीवन दिल्ली में बीता, जहां उन्होंने पढ़ाई पूरी की। उनके पिता अमरजीत रामपाल भारतीय सेना में अधिकारी थे, जबकि उनकी मां ग्वेन रामपाल स्कूल टीचर थीं।

सेना के अनुशासन और मां के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व पर गहरा असर डाला। इसी वजह से उनमें अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना बचपन से ही मजबूत होती गई।

अर्जुन रामपाल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक किया। पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि फैशन और विज्ञापनों की ओर बढ़ी। शुरुआत में उनका इरादा मॉडलिंग में आने का नहीं था, लेकिन उनकी पर्सनालिटी और लुक्स ने उन्हें इस ओर खींच लिया।

मिस इंडिया और मॉडल मेहर जेसिया ने मॉडलिंग इंडस्ट्री से परिचित कराया

दरअसल एक पार्टी में उनकी मुलाकात पूर्व मिस इंडिया और मॉडल मेहर जेसिया से हुई। उन्होंने उन्हें मॉडलिंग इंडस्ट्री से परिचित कराया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने बड़े फैशन डिजाइनर्स और ब्रांड्स के लिए रैंप वॉक शुरू किया और जल्द ही भारत के वे प्रमुख मेल मॉडल्स में शामिल हो गए।

1990 के दशक में वे कई विज्ञापनों और फैशन शोज का हिस्सा बने। इससे उनकी पहचान तेजी से बढ़ी और बॉलीवुड में आने से पहले ही उन्होंने मॉडलिंग में मजबूत नाम बना लिया।

अर्जुन रामपाल और मेहर जेसिया की शादी 1998 में हुई थी। बाद में दोनों ने 19 नवंबर 2019 को तलाक ले लिया।

अर्जुन रामपाल और मेहर जेसिया की शादी 1998 में हुई थी। बाद में दोनों ने 19 नवंबर 2019 को तलाक ले लिया।

पहली फिल्म में मनीषा कोइराला के साथ मौका मिला

मॉडलिंग के दौरान उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और विज्ञापनों की लोकप्रियता ने फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान खींचा। इसी दौरान अशोक मेहता ने उन्हें फिल्म ‘मोक्ष’ (2001) में मनीषा कोइराला के अपोजिट कास्ट किया। दूसरी फिल्म ‘प्यार इश्क और मोहब्बत’ में निर्देशक राजीव राय ने उन्हें एक विज्ञापन में देखा और प्रभावित होकर कास्ट किया।

हालांकि यह फिल्म ‘मोक्ष’ से पहले रिलीज हुई थी। इसमें अर्जुन रामपाल के साथ सुनील शेट्टी, आफताब शिवदासनी और कीर्ति रेड्डी नजर आए।

घर का किराया भरने के भी पैसे नहीं थे

पॉप डायरीज को दिए इंटरव्यू में अर्जुन ने बताया था- मैं अपने करियर की शुरुआत में एक बेहद सफल मॉडल था। उसी दौरान अशोक मेहता मेरे पास फिल्म ‘मोक्ष’ लेकर आए, जिसमें मुझे शानदार अभिनेत्री मनीषा कोइराला के साथ काम करने का मौका मिला। उस समय वह अपने करियर के शिखर पर थीं।

मुझे याद है, हम चंबल घाटी में एक सीन शूट कर रहे थे। जब मैंने शूटिंग का फुटेज देखा, तो खुद को देखकर मुझे खुद से ही नफरत हो गई। मैंने सोचा, ‘हे भगवान, मैं कितना खराब दिख रहा हूं।’ उसी वक्त मैंने फैसला किया कि अब मैं मॉडलिंग नहीं करूंगा। लेकिन मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि इस फिल्म को बनने में छह साल लग जाएंगे।

उस दौरान मेरे पास आय का कोई स्रोत नहीं था। मैं मुंबई के अंधेरी स्थित सेवन बंगलों में रहता था। मेरे मकान मालिक सरदारजी बहुत अच्छे इंसान थे। हर महीने की पहली तारीख को वे आते, मुझे देखते और मैं उन्हें देखता। वे मुस्कुराकर पूछते, ‘नहीं है ना?’ और मैं सिर हिला देता। तब वे कहते, ‘कोई बात नहीं, तू दे देगा।’

जिंदगी में ऐसे अच्छे लोग और ऐसे पल बहुत मायने रखते हैं।”

फेस ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया

बहरहाल, ‘मोक्ष’ और ‘प्यार इश्क और मोहब्बत’ बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकीं, लेकिन आलोचकों ने अर्जुन रामपाल के अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस की सराहना की। इससे उन्हें इंडस्ट्री में संभावनाशील अभिनेता के रूप में देखा जाने लगा।

2002 में अर्जुन रामपाल को IIFA (इंटरनेशनल इंडियन फिल्म एकेडमी) की ओर से फेस ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

2002 में अर्जुन रामपाल को IIFA (इंटरनेशनल इंडियन फिल्म एकेडमी) की ओर से फेस ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

बैक टू बैक 14 फ्लॉप फिल्में दीं

‘मोक्ष’ और ‘प्यार इश्क और मोहब्बत’ के बाद अर्जुन रामपाल ने ‘दीवानापन’, ‘तहजीब’, ‘दिल है तुम्हारा’, ‘दिल का रिश्ता’, ‘असंभव’, ‘वादा’, ‘आंखें’, ‘हमको तुमसे प्यार है’, ‘यकीन’, ‘डरना जरूरी है’, ‘ऐलान’ और ‘एक अजनबी’ जैसी फिल्मों में काम किया। लेकिन इन फिल्मों को कमर्शियल सफलता नहीं मिली।

‘दिल है तुम्हारा’ की कहानी और संगीत को पसंद किया गया था। अर्जुन रामपाल को अक्सर स्टाइलिश हीरो के तौर पर देखा गया, न कि गंभीर अभिनेता के रूप में। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और अलग-अलग किरदारों में खुद को आजमाते रहे।

अर्जुन रामपाल ने फिल्म डॉन में जसजीत और ओम शांति ओम में मुकेश “मिकी” मेहरा का निगेटिव रोल किया था।

अर्जुन रामपाल ने फिल्म डॉन में जसजीत और ओम शांति ओम में मुकेश “मिकी” मेहरा का निगेटिव रोल किया था।

विलेन अवतार ने स्टारडम दिलाया

शाहरुख खान की ‘डॉन’ (2006) में अर्जुन रामपाल ने अपने निगेटिव किरदार से दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान खींचा। इस फिल्म में उन्होंने सख्त और प्रभावशाली किरदार निभाया, जिसने उनकी स्टाइलिश हीरो वाली छवि से अलग एक गंभीर अभिनेता की पहचान मजबूत की।

इसके बाद ‘ओम शांति ओम’ (2007) में उनका विलेन अवतार और ज्यादा चर्चा में रहा। इस फिल्म में उनके किरदार की स्क्रीन प्रेजेंस, डायलॉग डिलीवरी और खलनायक वाली ऊर्जा को पसंद किया गया। इसी वजह से उन्हें सिर्फ मॉडल-टर्न-एक्टर नहीं, बल्कि ऐसे अभिनेता के तौर पर देखा जाने लगा जो निगेटिव भूमिकाओं में मजबूत असर छोड़ सकता है। उनके विलेन अवतार ने उन्हें स्टारडम दिलाया।

रॉक ऑन के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला

रॉक ऑन’ अर्जुन रामपाल के करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म में फरहान अख्तर, प्राची देसाई, ल्यूक केनी और पूरब कोहली भी थे, लेकिन अर्जुन रामपाल ने अपने गहरे किरदार से खास पहचान बनाई।

इस फिल्म से पहले तक उन्हें अक्सर स्टाइलिश चेहरे के रूप में देखा जाता था, लेकिन ‘रॉक ऑन’ ने यह धारणा बदल दी। फिल्म में उनके अभिनय ने दिखाया कि वे ग्लैमर या निगेटिव रोल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भावनात्मक और परिपक्व किरदार भी असरदार तरीके से निभा सकते हैं।

‘रॉक ऑन’ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और दर्शकों ने इसकी कहानी, संगीत और कलाकारों की परफॉर्मेंस को सराहा। इसी फिल्म के लिए अर्जुन रामपाल को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला, जिससे वे एक गंभीर और प्रतिभाशाली अभिनेता के रूप में स्थापित हो गए।

मल्टीस्टारर फिल्मों का अहम चेहरा बने

अर्जुन रामपाल को ‘रॉक ऑन’ के लिए नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद मजबूत अभिनेता के तौर पर देखा जाने लगा। इस फिल्म ने उनके करियर को नई दिशा दी, लेकिन इसके बाद उनका सफर लगातार सफल नहीं रहा। ‘हाउसफुल’ और ‘राजनीति’ सफल रहीं, जबकि ‘वी आर फेमिली’ और ‘रा: वन’ औसत रहीं। हालांकि इस दौर में वे मल्टीस्टारर फिल्मों का अहम चेहरा बने और इंडस्ट्री में उनकी मांग बढ़ी।

लेकिन 2012 के बाद उनकी फिल्मों का प्रदर्शन गिरता गया। कई बड़े प्रोजेक्ट्स बॉक्स ऑफिस पर नहीं चले। ‘इनकार’, ‘डी-डे’, ‘सत्याग्रह’, ‘रॉक ऑन 2’, ‘डैडी’ और ‘पलटन’ असफल रहीं। ‘डैडी’ के प्रोड्यूसर अर्जुन रामपाल खुद थे। लगातार असफल फिल्मों ने उनके स्टारडम को कमजोर कर दिया और वह बॉक्स ऑफिस पर भरोसेमंद नाम नहीं रह पाए। बहरहाल, असफल फिल्मों पर अर्जुन रामपाल का नजरिया कुछ अलग ही है। उनका मानना है कि हर असफलता केवल एक रुकावट नहीं होती है।

फ्लॉप फिल्मों के बाद OTT प्लेटफॉर्म की ओर कदम बढ़ाया

फिल्मों में ग्राफ नीचे जाने के बाद अर्जुन रामपाल ने ओटीटी पर अपनी नई शुरुआत की, जहां उन्हें नए तरह के किरदार निभाने का मौका मिला। ‘द फाइनल कॉल’ में उन्होंने पायलट का इमोशनल और साइकॉलॉजिकल किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने सराहा। ‘लंदन फाइल्स’ में उन्होंने जांच अधिकारी की भूमिका निभाई, जिसमें उनकी इंटेंस एक्टिंग की तारीफ हुई। OTT पर उन्हें फिल्मों के मुकाबले ज्यादा सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

‘धुरंधर’ में अर्जुन रामपाल ने मेजर इकबाल का किरदार निभाया है,

‘धुरंधर’ में अर्जुन रामपाल ने मेजर इकबाल का किरदार निभाया है,

‘धुरंधर’ से मिली बड़ी पहचान

इंडस्ट्री में माना जाता है कि OTT पर काम करने के बाद कलाकारों को नए और मजबूत किरदारों के ऑफर मिलते हैं। अर्जुन रामपाल के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनकी हालिया स्क्रीन प्रेजेंस और गंभीर भूमिकाओं ने फिल्ममेकर्स का ध्यान खींचा। इसके बाद उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स में शामिल किया गया। इसी कड़ी में उनका नाम फिल्म ‘धुरंधर’ से जुड़ा, जो उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

‘धुरंधर’ में अर्जुन रामपाल ने मेजर इकबाल का किरदार निभाया है, जिसे 26/11 हमलों के मास्टरमाइंड के रूप में दिखाया गया है। इस किरदार के जरिए उन्होंने उस दर्द को अभिनय में उतारा, जिसे वे सालों से महसूस कर रहे थे।

अर्जुन रामपाल कहते हैं कि जब निर्देशक आदित्य दर ने उन्हें ‘धुरंधर’ की कहानी सुनाई, तो 26/11 से जुड़ा सीन सुनते ही उन्होंने फिल्म करने का फैसला कर लिया। उनके मुताबिक, उसी समय उन्हें लगा कि यह उनके अंदर की पीड़ा और गुस्से को बाहर निकालने का मौका है।

अर्जुन रामपाल ने कहा कि 26 नवंबर 2008 का दिन उनकी जिंदगी का सबसे डरावना दिन था। यह उनका 36वां जन्मदिन था और वह दोस्तों के साथ जश्न मनाने निकले थे। वे वर्ली के एक होटल में रुके, जहां अचानक धमाके की आवाज सुनाई दी। शुरुआत में लगा कि गैंगवार हुआ है, लेकिन कुछ ही देर में पूरे शहर में आतंक फैल गया।

उन्होंने बताया कि होटल को तुरंत बंद कर दिया गया और सभी को अंदर रहने के निर्देश दिए गए। बाहर हालात बेहद खराब थे। रामपाल ने कहा, “मेरे जन्मदिन पर मैंने 26/11 की भयावहता अपनी आंखों से देखी।” इस घटना का उन पर गहरा मानसिक असर पड़ा। अगले दिन घर लौटते समय उन्हें कई बार गाड़ी रोकनी पड़ी, क्योंकि उनकी तबीयत खराब हो रही थी।

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अर्जुन रामपाल ने 17 साल की उम्र में मॉडलिंग शुरू की और 20 साल की उम्र में सुपरमॉडल बन गए।

एक समय बॉलीवुड में अपनी स्टाइल और शानदार स्क्रीन प्रेजेंस के लिए पहचाने जाने वाले अर्जुन रामपाल का करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा। मॉडलिंग से फिल्मों में आए अर्जुन ने शुरुआत में पहचान बनाई, लेकिन लंबे समय तक उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं।

इस दौर में उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा और घर का किराया भरना भी मुश्किल हो गया था। करीब 14 फिल्मों की असफलता ने उनके करियर पर सवाल खड़े किए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। संघर्ष के दौर में उन्होंने खुद को तराशा और अभिनय पर काम जारी रखा।

समय के साथ उन्हें ‘रॉक ऑन’ जैसी फिल्मों से सराहना मिली और अब ‘धुरंधर’ के जरिए उनकी किस्मत फिर चमकती नजर आ रही है।

आज की सक्सेस स्टोरी में अर्जुन रामपाल के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें जानते हैं।

सेना का अनुशासन और मां के संस्कारों का उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव

अर्जुन रामपाल का जन्म 26 नवंबर 1972 को जबलपुर, मध्य प्रदेश में हुआ था। उनका शुरुआती जीवन दिल्ली में बीता, जहां उन्होंने पढ़ाई पूरी की। उनके पिता अमरजीत रामपाल भारतीय सेना में अधिकारी थे, जबकि उनकी मां ग्वेन रामपाल स्कूल टीचर थीं।

सेना के अनुशासन और मां के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व पर गहरा असर डाला। इसी वजह से उनमें अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना बचपन से ही मजबूत होती गई।

अर्जुन रामपाल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक किया। पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि फैशन और विज्ञापनों की ओर बढ़ी। शुरुआत में उनका इरादा मॉडलिंग में आने का नहीं था, लेकिन उनकी पर्सनालिटी और लुक्स ने उन्हें इस ओर खींच लिया।

मिस इंडिया और मॉडल मेहर जेसिया ने मॉडलिंग इंडस्ट्री से परिचित कराया

दरअसल एक पार्टी में उनकी मुलाकात पूर्व मिस इंडिया और मॉडल मेहर जेसिया से हुई। उन्होंने उन्हें मॉडलिंग इंडस्ट्री से परिचित कराया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने बड़े फैशन डिजाइनर्स और ब्रांड्स के लिए रैंप वॉक शुरू किया और जल्द ही भारत के वे प्रमुख मेल मॉडल्स में शामिल हो गए।

1990 के दशक में वे कई विज्ञापनों और फैशन शोज का हिस्सा बने। इससे उनकी पहचान तेजी से बढ़ी और बॉलीवुड में आने से पहले ही उन्होंने मॉडलिंग में मजबूत नाम बना लिया।

अर्जुन रामपाल और मेहर जेसिया की शादी 1998 में हुई थी। बाद में दोनों ने 19 नवंबर 2019 को तलाक ले लिया।

अर्जुन रामपाल और मेहर जेसिया की शादी 1998 में हुई थी। बाद में दोनों ने 19 नवंबर 2019 को तलाक ले लिया।

पहली फिल्म में मनीषा कोइराला के साथ मौका मिला

मॉडलिंग के दौरान उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और विज्ञापनों की लोकप्रियता ने फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान खींचा। इसी दौरान अशोक मेहता ने उन्हें फिल्म ‘मोक्ष’ (2001) में मनीषा कोइराला के अपोजिट कास्ट किया। दूसरी फिल्म ‘प्यार इश्क और मोहब्बत’ में निर्देशक राजीव राय ने उन्हें एक विज्ञापन में देखा और प्रभावित होकर कास्ट किया।

हालांकि यह फिल्म ‘मोक्ष’ से पहले रिलीज हुई थी। इसमें अर्जुन रामपाल के साथ सुनील शेट्टी, आफताब शिवदासनी और कीर्ति रेड्डी नजर आए।

घर का किराया भरने के भी पैसे नहीं थे

पॉप डायरीज को दिए इंटरव्यू में अर्जुन ने बताया था- मैं अपने करियर की शुरुआत में एक बेहद सफल मॉडल था। उसी दौरान अशोक मेहता मेरे पास फिल्म ‘मोक्ष’ लेकर आए, जिसमें मुझे शानदार अभिनेत्री मनीषा कोइराला के साथ काम करने का मौका मिला। उस समय वह अपने करियर के शिखर पर थीं।

मुझे याद है, हम चंबल घाटी में एक सीन शूट कर रहे थे। जब मैंने शूटिंग का फुटेज देखा, तो खुद को देखकर मुझे खुद से ही नफरत हो गई। मैंने सोचा, ‘हे भगवान, मैं कितना खराब दिख रहा हूं।’ उसी वक्त मैंने फैसला किया कि अब मैं मॉडलिंग नहीं करूंगा। लेकिन मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि इस फिल्म को बनने में छह साल लग जाएंगे।

उस दौरान मेरे पास आय का कोई स्रोत नहीं था। मैं मुंबई के अंधेरी स्थित सेवन बंगलों में रहता था। मेरे मकान मालिक सरदारजी बहुत अच्छे इंसान थे। हर महीने की पहली तारीख को वे आते, मुझे देखते और मैं उन्हें देखता। वे मुस्कुराकर पूछते, ‘नहीं है ना?’ और मैं सिर हिला देता। तब वे कहते, ‘कोई बात नहीं, तू दे देगा।’

जिंदगी में ऐसे अच्छे लोग और ऐसे पल बहुत मायने रखते हैं।”

फेस ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया

बहरहाल, ‘मोक्ष’ और ‘प्यार इश्क और मोहब्बत’ बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकीं, लेकिन आलोचकों ने अर्जुन रामपाल के अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस की सराहना की। इससे उन्हें इंडस्ट्री में संभावनाशील अभिनेता के रूप में देखा जाने लगा।

2002 में अर्जुन रामपाल को IIFA (इंटरनेशनल इंडियन फिल्म एकेडमी) की ओर से फेस ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

2002 में अर्जुन रामपाल को IIFA (इंटरनेशनल इंडियन फिल्म एकेडमी) की ओर से फेस ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

बैक टू बैक 14 फ्लॉप फिल्में दीं

‘मोक्ष’ और ‘प्यार इश्क और मोहब्बत’ के बाद अर्जुन रामपाल ने ‘दीवानापन’, ‘तहजीब’, ‘दिल है तुम्हारा’, ‘दिल का रिश्ता’, ‘असंभव’, ‘वादा’, ‘आंखें’, ‘हमको तुमसे प्यार है’, ‘यकीन’, ‘डरना जरूरी है’, ‘ऐलान’ और ‘एक अजनबी’ जैसी फिल्मों में काम किया। लेकिन इन फिल्मों को कमर्शियल सफलता नहीं मिली।

‘दिल है तुम्हारा’ की कहानी और संगीत को पसंद किया गया था। अर्जुन रामपाल को अक्सर स्टाइलिश हीरो के तौर पर देखा गया, न कि गंभीर अभिनेता के रूप में। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और अलग-अलग किरदारों में खुद को आजमाते रहे।

अर्जुन रामपाल ने फिल्म डॉन में जसजीत और ओम शांति ओम में मुकेश “मिकी” मेहरा का निगेटिव रोल किया था।

अर्जुन रामपाल ने फिल्म डॉन में जसजीत और ओम शांति ओम में मुकेश “मिकी” मेहरा का निगेटिव रोल किया था।

विलेन अवतार ने स्टारडम दिलाया

शाहरुख खान की ‘डॉन’ (2006) में अर्जुन रामपाल ने अपने निगेटिव किरदार से दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान खींचा। इस फिल्म में उन्होंने सख्त और प्रभावशाली किरदार निभाया, जिसने उनकी स्टाइलिश हीरो वाली छवि से अलग एक गंभीर अभिनेता की पहचान मजबूत की।

इसके बाद ‘ओम शांति ओम’ (2007) में उनका विलेन अवतार और ज्यादा चर्चा में रहा। इस फिल्म में उनके किरदार की स्क्रीन प्रेजेंस, डायलॉग डिलीवरी और खलनायक वाली ऊर्जा को पसंद किया गया। इसी वजह से उन्हें सिर्फ मॉडल-टर्न-एक्टर नहीं, बल्कि ऐसे अभिनेता के तौर पर देखा जाने लगा जो निगेटिव भूमिकाओं में मजबूत असर छोड़ सकता है। उनके विलेन अवतार ने उन्हें स्टारडम दिलाया।

रॉक ऑन के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला

रॉक ऑन’ अर्जुन रामपाल के करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म में फरहान अख्तर, प्राची देसाई, ल्यूक केनी और पूरब कोहली भी थे, लेकिन अर्जुन रामपाल ने अपने गहरे किरदार से खास पहचान बनाई।

इस फिल्म से पहले तक उन्हें अक्सर स्टाइलिश चेहरे के रूप में देखा जाता था, लेकिन ‘रॉक ऑन’ ने यह धारणा बदल दी। फिल्म में उनके अभिनय ने दिखाया कि वे ग्लैमर या निगेटिव रोल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भावनात्मक और परिपक्व किरदार भी असरदार तरीके से निभा सकते हैं।

‘रॉक ऑन’ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और दर्शकों ने इसकी कहानी, संगीत और कलाकारों की परफॉर्मेंस को सराहा। इसी फिल्म के लिए अर्जुन रामपाल को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला, जिससे वे एक गंभीर और प्रतिभाशाली अभिनेता के रूप में स्थापित हो गए।

मल्टीस्टारर फिल्मों का अहम चेहरा बने

अर्जुन रामपाल को ‘रॉक ऑन’ के लिए नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद मजबूत अभिनेता के तौर पर देखा जाने लगा। इस फिल्म ने उनके करियर को नई दिशा दी, लेकिन इसके बाद उनका सफर लगातार सफल नहीं रहा। ‘हाउसफुल’ और ‘राजनीति’ सफल रहीं, जबकि ‘वी आर फेमिली’ और ‘रा: वन’ औसत रहीं। हालांकि इस दौर में वे मल्टीस्टारर फिल्मों का अहम चेहरा बने और इंडस्ट्री में उनकी मांग बढ़ी।

लेकिन 2012 के बाद उनकी फिल्मों का प्रदर्शन गिरता गया। कई बड़े प्रोजेक्ट्स बॉक्स ऑफिस पर नहीं चले। ‘इनकार’, ‘डी-डे’, ‘सत्याग्रह’, ‘रॉक ऑन 2’, ‘डैडी’ और ‘पलटन’ असफल रहीं। ‘डैडी’ के प्रोड्यूसर अर्जुन रामपाल खुद थे। लगातार असफल फिल्मों ने उनके स्टारडम को कमजोर कर दिया और वह बॉक्स ऑफिस पर भरोसेमंद नाम नहीं रह पाए। बहरहाल, असफल फिल्मों पर अर्जुन रामपाल का नजरिया कुछ अलग ही है। उनका मानना है कि हर असफलता केवल एक रुकावट नहीं होती है।

फ्लॉप फिल्मों के बाद OTT प्लेटफॉर्म की ओर कदम बढ़ाया

फिल्मों में ग्राफ नीचे जाने के बाद अर्जुन रामपाल ने ओटीटी पर अपनी नई शुरुआत की, जहां उन्हें नए तरह के किरदार निभाने का मौका मिला। ‘द फाइनल कॉल’ में उन्होंने पायलट का इमोशनल और साइकॉलॉजिकल किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने सराहा। ‘लंदन फाइल्स’ में उन्होंने जांच अधिकारी की भूमिका निभाई, जिसमें उनकी इंटेंस एक्टिंग की तारीफ हुई। OTT पर उन्हें फिल्मों के मुकाबले ज्यादा सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

‘धुरंधर’ में अर्जुन रामपाल ने मेजर इकबाल का किरदार निभाया है,

‘धुरंधर’ में अर्जुन रामपाल ने मेजर इकबाल का किरदार निभाया है,

‘धुरंधर’ से मिली बड़ी पहचान

इंडस्ट्री में माना जाता है कि OTT पर काम करने के बाद कलाकारों को नए और मजबूत किरदारों के ऑफर मिलते हैं। अर्जुन रामपाल के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनकी हालिया स्क्रीन प्रेजेंस और गंभीर भूमिकाओं ने फिल्ममेकर्स का ध्यान खींचा। इसके बाद उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स में शामिल किया गया। इसी कड़ी में उनका नाम फिल्म ‘धुरंधर’ से जुड़ा, जो उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

‘धुरंधर’ में अर्जुन रामपाल ने मेजर इकबाल का किरदार निभाया है, जिसे 26/11 हमलों के मास्टरमाइंड के रूप में दिखाया गया है। इस किरदार के जरिए उन्होंने उस दर्द को अभिनय में उतारा, जिसे वे सालों से महसूस कर रहे थे।

अर्जुन रामपाल कहते हैं कि जब निर्देशक आदित्य दर ने उन्हें ‘धुरंधर’ की कहानी सुनाई, तो 26/11 से जुड़ा सीन सुनते ही उन्होंने फिल्म करने का फैसला कर लिया। उनके मुताबिक, उसी समय उन्हें लगा कि यह उनके अंदर की पीड़ा और गुस्से को बाहर निकालने का मौका है।

अर्जुन रामपाल ने कहा कि 26 नवंबर 2008 का दिन उनकी जिंदगी का सबसे डरावना दिन था। यह उनका 36वां जन्मदिन था और वह दोस्तों के साथ जश्न मनाने निकले थे। वे वर्ली के एक होटल में रुके, जहां अचानक धमाके की आवाज सुनाई दी। शुरुआत में लगा कि गैंगवार हुआ है, लेकिन कुछ ही देर में पूरे शहर में आतंक फैल गया।

उन्होंने बताया कि होटल को तुरंत बंद कर दिया गया और सभी को अंदर रहने के निर्देश दिए गए। बाहर हालात बेहद खराब थे। रामपाल ने कहा, “मेरे जन्मदिन पर मैंने 26/11 की भयावहता अपनी आंखों से देखी।” इस घटना का उन पर गहरा मानसिक असर पड़ा। अगले दिन घर लौटते समय उन्हें कई बार गाड़ी रोकनी पड़ी, क्योंकि उनकी तबीयत खराब हो रही थी।

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