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बाजार से इंस्टाग्राम तक छाया ये देसी फल, आखिर क्यों लोग दे रहे हैं 250 रुपये तक? जानिए इसके लाजवाब फायदे

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हैदराबाद की तपती गर्मी में एक देसी फल लोगों के बीच खासा लोकप्रिय हो रहा है. आइस एप्पल, जिसे ताती मुंजालु भी कहा जाता है, न सिर्फ सेहत के लिए फायदेमंद है बल्कि अब यह सोशल मीडिया और बाजार दोनों में ट्रेंड बन चुका है. आइए जानते है इसके फायदे…

अप्रैल और मई के महीने में हैदराबाद का पारा जब 40 डिग्री सेल्सियस को पार करने लगता है, तो शहर की सड़कें आग उगलने लगती हैं. कंक्रीट के इस जंगल में लू के थपेड़ों से बचने के लिए लोग अक्सर ठंडे पेय पदार्थों की तलाश करते हैं. ऐसे में शहर के कोनों-कोनों पर बिकने वाला आइस एप्पल यानी ताती मुंजालु हैदराबाद के निवासियों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है. यह फल न केवल प्यास बुझाता है, बल्कि गर्मी से लड़ने की प्राकृतिक शक्ति भी देता है.

ताती मुंजालु तेलंगाना की संस्कृति में ताड़ के फल का विशेष स्थान है। इसे स्थानीय भाषा में ताती मुंजालु और हिंदी के कुछ क्षेत्रों मे ताड़गोला कहा जाता है। पारभासी, नरम और जेली जैसा यह फल असल में ताड़ के पेड़ का कच्चा बीज है। इसकी तासीर बेहद ठंडी होती है जो इसे गर्मियों का सबसे बेहतरीन सुपरफूड बनाती है। हैदराबाद की विरासत में इस फल का जुड़ाव दशकों पुराना है।

तेलंगाना की संस्कृति में ताड़ के फल का विशेष स्थान है. इसे स्थानीय भाषा में ताती मुंजालु और हिंदी के कुछ क्षेत्रों में ताड़गोला कहा जाता है. पारभासी, नरम और जेली जैसा यह फल असल में ताड़ के पेड़ का कच्चा बीज है. इसकी तासीर बेहद ठंडी होती है, जो इसे गर्मियों का सबसे बेहतरीन सुपरफूड बनाती है. हैदराबाद की विरासत में इस फल का जुड़ाव दशकों पुराना है;

सेहत का खजाना आइस एप्पल केवल स्वाद में ही लाजवाब नहीं है बल्कि यह पोषक तत्वों का पावरहाउस भी है। इसमें 90% से अधिक जल तत्व होता है जो शरीर को हाइड्रेटेड रखता है। इसमें विटामिन-A, B, C, आयरन, पोटेशियम और जिंक प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह न केवल शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है बल्कि पाचन संबंधी समस्याओं, थकान और मतली को दूर करने में भी सहायक होता है।

आइस एप्पल केवल स्वाद में ही लाजवाब नहीं है, बल्कि यह पोषक तत्वों का पावरहाउस भी है. इसमें 90% से अधिक जल तत्व होता है, जो शरीर को हाइड्रेटेड रखता है. इसमें विटामिन-A, B, C, आयरन, पोटेशियम और जिंक प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. यह न केवल शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है, बल्कि पाचन संबंधी समस्याओं, थकान और मतली को दूर करने में भी सहायक होता है.

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इस फल को हम तक पहुँचाने के पीछे विक्रेताओं की जानलेवा मेहनत छिपी होती है। ताड़ के पेड़ अक्सर 60 से 80 फीट ऊंचे होते हैं और बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उन पर चढ़ना एक कला और जोखिम भरा काम है। कई विक्रेता खम्मम, नलगोंडा और पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश से आकर यहाँ डेरा डालते हैं। उनके लिए यह केवल व्यापार नहीं बल्कि जीवन यापन का एकमात्र साधन है।

इस फल को हम तक पहुंचाने के पीछे विक्रेताओं की जानलेवा मेहनत छिपी होती है. ताड़ के पेड़ अक्सर 60 से 80 फीट ऊंचे होते हैं और बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उन पर चढ़ना एक कला और जोखिम भरा काम है. कई विक्रेता खम्मम, नलगोंडा और पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश से आकर यहां डेरा डालते हैं. उनके लिए यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि जीवन यापन का एकमात्र साधन है.

इस साल बढ़ती मांग और परिवहन खर्च के कारण कीमतों में वृद्धि देखी गई है। वर्तमान में हैदराबाद के पॉश इलाकों जैसे जुबली हिल्स और बंजारा हिल्स में एक दर्जन आइस एप्पल की कीमत 150 से 250 रुपये तक पहुँच गई है। वहीं नामपल्ली और चारमीनार जैसे इलाकों में यह थोड़ा किफायती मिल जाता है। महंगाई के बावजूद सेहत के प्रति जागरूक लोग इसे कोल्ड ड्रिंक्स से बेहतर मान रहे हैं।

इस साल बढ़ती मांग और परिवहन खर्च के कारण कीमतों में वृद्धि देखी गई है. वर्तमान में हैदराबाद के पॉश इलाकों जैसे जुबली हिल्स और बंजारा हिल्स में एक दर्जन आइस एप्पल की कीमत 150 से 250 रुपये तक पहुंच गई है. वहीं नामपल्ली और चारमीनार जैसे इलाकों में यह थोड़ा किफायती मिल जाता है. महंगाई के बावजूद सेहत के प्रति जागरूक लोग इसे कोल्ड ड्रिंक्स से बेहतर विकल्प मान रहे हैं.

आज का युवा वर्ग भी इस पारंपरिक फल का दीवाना हो रहा है। शहर के कई जूस सेंटर्स और कैफे अब आइस एप्पल मिल्कशेख, मुंजालु पायसम और आइस एप्पल फ्लेवर्ड आइसक्रीम पेश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी समर रिफ्रेशमेंट के रूप में इसकी तस्वीरें खूब ट्रेंड कर रही हैं, जिससे इसकी लोकप्रियता नई पीढ़ी के बीच भी बढ़ गई है।

आज का युवा वर्ग भी इस पारंपरिक फल का दीवाना हो रहा है. शहर के कई जूस सेंटर्स और कैफे अब आइस एप्पल मिल्कशेक, मुंजालु पायसम और आइस एप्पल फ्लेवर्ड आइसक्रीम पेश कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी समर रिफ्रेशमेंट के रूप में इसकी तस्वीरें खूब ट्रेंड कर रही हैं, जिससे इसकी लोकप्रियता नई पीढ़ी के बीच भी बढ़ गई है.

आइस एप्पल का बढ़ता चलन यह दर्शाता है कि आधुनिकता के दौर में भी लोग अपनी जड़ों और प्राकृतिक खान-पान की ओर लौट रहे हैं। जहाँ कार्बोनेटेड ड्रिंक्स शरीर को नुकसान पहुँचाते हैं वहीं यह फल बिना किसी मिलावट के शुद्ध ठंडक प्रदान करता है। हैदराबाद की इस तपती धूप में ताती मुंजालु का एक टुकड़ा न केवल राहत देता है

आइस एप्पल का बढ़ता चलन यह दर्शाता है कि आधुनिकता के दौर में भी लोग अपनी जड़ों और प्राकृतिक खान-पान की ओर लौट रहे हैं. जहां कार्बोनेटेड ड्रिंक्स शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं यह फल बिना किसी मिलावट के शुद्ध ठंडक प्रदान करता है. हैदराबाद की इस तपती धूप में ताती मुंजालु का एक टुकड़ा न केवल राहत देता है.

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हैदराबाद की तपती गर्मी में एक देसी फल लोगों के बीच खासा लोकप्रिय हो रहा है. आइस एप्पल, जिसे ताती मुंजालु भी कहा जाता है, न सिर्फ सेहत के लिए फायदेमंद है बल्कि अब यह सोशल मीडिया और बाजार दोनों में ट्रेंड बन चुका है. आइए जानते है इसके फायदे…

अप्रैल और मई के महीने में हैदराबाद का पारा जब 40 डिग्री सेल्सियस को पार करने लगता है, तो शहर की सड़कें आग उगलने लगती हैं. कंक्रीट के इस जंगल में लू के थपेड़ों से बचने के लिए लोग अक्सर ठंडे पेय पदार्थों की तलाश करते हैं. ऐसे में शहर के कोनों-कोनों पर बिकने वाला आइस एप्पल यानी ताती मुंजालु हैदराबाद के निवासियों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है. यह फल न केवल प्यास बुझाता है, बल्कि गर्मी से लड़ने की प्राकृतिक शक्ति भी देता है.

ताती मुंजालु तेलंगाना की संस्कृति में ताड़ के फल का विशेष स्थान है। इसे स्थानीय भाषा में ताती मुंजालु और हिंदी के कुछ क्षेत्रों मे ताड़गोला कहा जाता है। पारभासी, नरम और जेली जैसा यह फल असल में ताड़ के पेड़ का कच्चा बीज है। इसकी तासीर बेहद ठंडी होती है जो इसे गर्मियों का सबसे बेहतरीन सुपरफूड बनाती है। हैदराबाद की विरासत में इस फल का जुड़ाव दशकों पुराना है।

तेलंगाना की संस्कृति में ताड़ के फल का विशेष स्थान है. इसे स्थानीय भाषा में ताती मुंजालु और हिंदी के कुछ क्षेत्रों में ताड़गोला कहा जाता है. पारभासी, नरम और जेली जैसा यह फल असल में ताड़ के पेड़ का कच्चा बीज है. इसकी तासीर बेहद ठंडी होती है, जो इसे गर्मियों का सबसे बेहतरीन सुपरफूड बनाती है. हैदराबाद की विरासत में इस फल का जुड़ाव दशकों पुराना है;

सेहत का खजाना आइस एप्पल केवल स्वाद में ही लाजवाब नहीं है बल्कि यह पोषक तत्वों का पावरहाउस भी है। इसमें 90% से अधिक जल तत्व होता है जो शरीर को हाइड्रेटेड रखता है। इसमें विटामिन-A, B, C, आयरन, पोटेशियम और जिंक प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह न केवल शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है बल्कि पाचन संबंधी समस्याओं, थकान और मतली को दूर करने में भी सहायक होता है।

आइस एप्पल केवल स्वाद में ही लाजवाब नहीं है, बल्कि यह पोषक तत्वों का पावरहाउस भी है. इसमें 90% से अधिक जल तत्व होता है, जो शरीर को हाइड्रेटेड रखता है. इसमें विटामिन-A, B, C, आयरन, पोटेशियम और जिंक प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. यह न केवल शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है, बल्कि पाचन संबंधी समस्याओं, थकान और मतली को दूर करने में भी सहायक होता है.

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इस फल को हम तक पहुंचाने के पीछे विक्रेताओं की जानलेवा मेहनत छिपी होती है. ताड़ के पेड़ अक्सर 60 से 80 फीट ऊंचे होते हैं और बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उन पर चढ़ना एक कला और जोखिम भरा काम है. कई विक्रेता खम्मम, नलगोंडा और पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश से आकर यहां डेरा डालते हैं. उनके लिए यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि जीवन यापन का एकमात्र साधन है.

इस साल बढ़ती मांग और परिवहन खर्च के कारण कीमतों में वृद्धि देखी गई है। वर्तमान में हैदराबाद के पॉश इलाकों जैसे जुबली हिल्स और बंजारा हिल्स में एक दर्जन आइस एप्पल की कीमत 150 से 250 रुपये तक पहुँच गई है। वहीं नामपल्ली और चारमीनार जैसे इलाकों में यह थोड़ा किफायती मिल जाता है। महंगाई के बावजूद सेहत के प्रति जागरूक लोग इसे कोल्ड ड्रिंक्स से बेहतर मान रहे हैं।

इस साल बढ़ती मांग और परिवहन खर्च के कारण कीमतों में वृद्धि देखी गई है. वर्तमान में हैदराबाद के पॉश इलाकों जैसे जुबली हिल्स और बंजारा हिल्स में एक दर्जन आइस एप्पल की कीमत 150 से 250 रुपये तक पहुंच गई है. वहीं नामपल्ली और चारमीनार जैसे इलाकों में यह थोड़ा किफायती मिल जाता है. महंगाई के बावजूद सेहत के प्रति जागरूक लोग इसे कोल्ड ड्रिंक्स से बेहतर विकल्प मान रहे हैं.

आज का युवा वर्ग भी इस पारंपरिक फल का दीवाना हो रहा है। शहर के कई जूस सेंटर्स और कैफे अब आइस एप्पल मिल्कशेख, मुंजालु पायसम और आइस एप्पल फ्लेवर्ड आइसक्रीम पेश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी समर रिफ्रेशमेंट के रूप में इसकी तस्वीरें खूब ट्रेंड कर रही हैं, जिससे इसकी लोकप्रियता नई पीढ़ी के बीच भी बढ़ गई है।

आज का युवा वर्ग भी इस पारंपरिक फल का दीवाना हो रहा है. शहर के कई जूस सेंटर्स और कैफे अब आइस एप्पल मिल्कशेक, मुंजालु पायसम और आइस एप्पल फ्लेवर्ड आइसक्रीम पेश कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी समर रिफ्रेशमेंट के रूप में इसकी तस्वीरें खूब ट्रेंड कर रही हैं, जिससे इसकी लोकप्रियता नई पीढ़ी के बीच भी बढ़ गई है.

आइस एप्पल का बढ़ता चलन यह दर्शाता है कि आधुनिकता के दौर में भी लोग अपनी जड़ों और प्राकृतिक खान-पान की ओर लौट रहे हैं। जहाँ कार्बोनेटेड ड्रिंक्स शरीर को नुकसान पहुँचाते हैं वहीं यह फल बिना किसी मिलावट के शुद्ध ठंडक प्रदान करता है। हैदराबाद की इस तपती धूप में ताती मुंजालु का एक टुकड़ा न केवल राहत देता है

आइस एप्पल का बढ़ता चलन यह दर्शाता है कि आधुनिकता के दौर में भी लोग अपनी जड़ों और प्राकृतिक खान-पान की ओर लौट रहे हैं. जहां कार्बोनेटेड ड्रिंक्स शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं यह फल बिना किसी मिलावट के शुद्ध ठंडक प्रदान करता है. हैदराबाद की इस तपती धूप में ताती मुंजालु का एक टुकड़ा न केवल राहत देता है.

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