Tuesday, 02 Jun 2026 | 02:02 AM

Trending :

EXCLUSIVE

दिखने में साधारण…. लेकिन असर चौंकाने वाला, क्या है बनमारा पौधे का सच? वैज्ञानिक भी कर रहे हैं रिसर्च

ask search icon

Last Updated:

हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला बनमारा, जिसे स्थानीय भाषा में काला बांसा कहा जाता है, एक ऐसा जंगली पौधा है जो तेजी से फैलता है. यह जहां एक ओर पारंपरिक चिकित्सा में उपयोगी माना जाता है, वहीं दूसरी ओर इसके आक्रामक स्वभाव के कारण यह पर्यावरण के लिए चुनौती भी बन जाता है.

बागेश्वर: बनमारा जिसे स्थानीय भाषा में काला बांसा भी कहा जाता है, पहाड़ी क्षेत्रों में तेजी से फैलने वाला एक जंगली पौधा है. यह मुख्य रूप से उत्तराखंड, दार्जिलिंग और हिमालयी इलाकों में पाया जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम एगेराटिना एडेनोफोरा है. यह पौधा देखने में साधारण झाड़ी जैसा होता है, जिसमें छोटे सफेद फूल खिलते हैं. यह तेजी से फैलता है, कई बार खेती योग्य जमीन और जंगलों पर कब्जा कर लेता है. हालांकि, इसके औषधीय गुणों के कारण ग्रामीण इलाकों में इसका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है. पारंपरिक ज्ञान में इसे एक उपयोगी जड़ी-बूटी माना जाता है, लेकिन इसकी सही पहचान और उपयोग की जानकारी होना बेहद जरूरी है.

Useful in wound healing

बनमारा के पत्तों और तने का रस पारंपरिक रूप से घाव भरने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. ग्रामीण लोग इसे छोटे कट, खरोंच या जख्म पर लगाते हैं, जिससे खून बहना कम होता है, घाव जल्दी भरने में मदद मिलती है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व त्वचा को सुरक्षित रखने और संक्रमण से बचाने में सहायक माने जाते हैं. कई लोग इसे एंटीसेप्टिक की तरह इस्तेमाल करते हैं, खासकर तब जब आसपास कोई दवा उपलब्ध नहीं होती है. हालांकि, इसका उपयोग केवल बाहरी रूप से ही करना सुरक्षित माना जाता है.

Relief from swelling and pain

डॉ. ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि इस पौधे में सूजन कम करने वाले गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण इसे दर्द और सूजन में राहत के लिए भी उपयोग किया जाता है. बनमारा के पत्तों को पीसकर प्रभावित जगह पर लगाने से सूजन में कमी आ सकती है. इसके प्राकृतिक तत्व शरीर की सूजन प्रतिक्रिया को कम करने में मदद करते हैं. हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए इसे लगाने से पहले थोड़ी मात्रा में परीक्षण करना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार की एलर्जी या जलन की समस्या न हो.

Add News18 as
Preferred Source on Google

Potential benefits for skin diseases

बनमारा का उपयोग कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे खुजली, दाद या हल्के संक्रमण में भी किया जाता है. इसमें मौजूद एंटी-माइक्रोबियल गुण त्वचा पर बैक्टीरिया और फंगस के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसके पत्तों का लेप बनाकर त्वचा पर लगाते हैं. इससे त्वचा को ठंडक मिलती है, जलन में राहत मिल सकती है. हालांकि, यह कोई प्रमाणित चिकित्सा उपचार नहीं है, इसलिए गंभीर त्वचा रोगों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. गलत उपयोग से समस्या बढ़ भी सकती है.

Rich in anti-oxidant properties

कुछ शोधों में पाया गया है कि बनमारा पौधे में एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व मौजूद होते हैं. ये तत्व शरीर को फ्री-रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं. एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं. इस पौधे के इन गुणों पर अभी और वैज्ञानिक शोध की जरूरत है. पारंपरिक उपयोग के आधार पर इसे लाभकारी माना जाता है, लेकिन इसे औषधि के रूप में अपनाने से पहले विशेषज्ञ सलाह लेना जरूरी है.

Traditional uses and beliefs

दार्जिलिंग और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में बनमारा का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में सांप के काटने और मानसिक समस्याओं के इलाज में भी किया जाता रहा है. इन दावों के पीछे ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं. यह अधिकतर लोक मान्यताओं और पुराने अनुभवों पर आधारित है. कई ग्रामीण आज भी इन परंपराओं का पालन करते हैं, लेकिन आधुनिक चिकित्सा के अनुसार ऐसे मामलों में डॉक्टर की सहायता लेना बेहद जरूरी है. केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है, खासकर जब मामला गंभीर हो.

Dangerous to animals

बनमारा पौधा जहां इंसानों के लिए सीमित उपयोग में लाभकारी माना जाता है, वहीं यह पशुओं के लिए हानिकारक हो सकता है. खासकर घोड़े और अन्य पालतू जानवर अगर इसे खा लें तो उनके लिए यह विषैला साबित हो सकता है. इससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है. इसलिए जिन क्षेत्रों में यह पौधा अधिक मात्रा में उगता है, वहां पशुपालकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. जानवरों को इससे दूर रखना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार की बीमारी या नुकसान से बचा जा सके.

environmental hazard

बनमारा एक आक्रामक खरपतवार है, जो बहुत तेजी से फैलता है, स्थानीय पौधों को नुकसान पहुंचाता है. यह जमीन की उर्वरता को प्रभावित करता है और जैव विविधता के लिए खतरा बन सकता है. जंगलों और खेती की जमीन में फैलकर यह अन्य उपयोगी पौधों की वृद्धि को रोक देता है. इसलिए कई क्षेत्रों में इसे नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इसके नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयास और जागरूकता जरूरी है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
मेरे बच्चों को हिंदू धर्म के खिलाफ भड़काया जा रहा:सेलिना जेटली बोलीं- उन्हें कहीं छिपा दिया गया; पति पर घरेलू हिंसा और धोखे का आरोप

May 10, 2026/
8:30 pm

बॉलीवुड एक्ट्रेस सेलिना जेटली ने मदर्स डे के मौके पर सेलिना ने एक बेहद इमोशनल नोट शेयर किया है। उन्होंने...

गौहर खान ने छोटे बेटे फरवान की पहली झलक दिखाई:मक्का यात्रा की तस्वीरें शेयर कीं, पति जैद दरबार और दोनों बच्चे साथ नजर आए

February 27, 2026/
9:38 am

टीवी एक्ट्रेस गौहर खान ने गुरुवार को अपने छोटे बेटे की पहली झलक शेयर की है। उन्होंने यह तस्वीरें इंस्टाग्राम...

Jalebi ₹300kg, Samosa Price Hike in Jabalpur

April 1, 2026/
12:27 pm

जबलपुर में समोसा अब 15 रुपए का हो गया है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण जबलपुर...

इंपैक्ट फीचर:मलाबार गोल्ड एंड डायमंड्स ने पटना के कंकड़बाग में नए शोरूम का उद्घाटन किया

February 24, 2026/
5:19 pm

मलाबार गोल्ड एंड डायमंड्स ने कंकड़बाग, पटना में अपने नए शोरूम का उद्घाटन किया, जिससे बिहार के सबसे प्रतिष्ठित आवासीय...

एमपी के 6 जिलों में नए मेडिकल कॉलेज को मंजूरी:सागर में 286 करोड़ की सिंचाई परियोजना को मंजूरी; 12.44 लाख लीटर पहुंचा दुग्ध प्रोडक्शन

April 13, 2026/
1:39 pm

आज भोपाल में मध्यप्रदेश मंत्रीमंडल की बैठक हुई। इसमें लोक निर्माण विभाग की परियोजनाएं जारी रखने, 6 नए मेडिकल कॉलेजों...

वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में टीमों की संख्या बढ़ाने की तैयारी:9 से 12 हो सकती है, अफगानिस्तान-जिम्बाब्वे को मौका संभव; जुलाई में आखिरी फैसला

May 16, 2026/
8:16 am

भविष्य में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) में 9 की बजाय सभी 12 फुल मेंबर देशों की टीमें खेल सकती हैं।...

राजनीति

दिखने में साधारण…. लेकिन असर चौंकाने वाला, क्या है बनमारा पौधे का सच? वैज्ञानिक भी कर रहे हैं रिसर्च

ask search icon

Last Updated:

हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला बनमारा, जिसे स्थानीय भाषा में काला बांसा कहा जाता है, एक ऐसा जंगली पौधा है जो तेजी से फैलता है. यह जहां एक ओर पारंपरिक चिकित्सा में उपयोगी माना जाता है, वहीं दूसरी ओर इसके आक्रामक स्वभाव के कारण यह पर्यावरण के लिए चुनौती भी बन जाता है.

बागेश्वर: बनमारा जिसे स्थानीय भाषा में काला बांसा भी कहा जाता है, पहाड़ी क्षेत्रों में तेजी से फैलने वाला एक जंगली पौधा है. यह मुख्य रूप से उत्तराखंड, दार्जिलिंग और हिमालयी इलाकों में पाया जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम एगेराटिना एडेनोफोरा है. यह पौधा देखने में साधारण झाड़ी जैसा होता है, जिसमें छोटे सफेद फूल खिलते हैं. यह तेजी से फैलता है, कई बार खेती योग्य जमीन और जंगलों पर कब्जा कर लेता है. हालांकि, इसके औषधीय गुणों के कारण ग्रामीण इलाकों में इसका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है. पारंपरिक ज्ञान में इसे एक उपयोगी जड़ी-बूटी माना जाता है, लेकिन इसकी सही पहचान और उपयोग की जानकारी होना बेहद जरूरी है.

Useful in wound healing

बनमारा के पत्तों और तने का रस पारंपरिक रूप से घाव भरने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. ग्रामीण लोग इसे छोटे कट, खरोंच या जख्म पर लगाते हैं, जिससे खून बहना कम होता है, घाव जल्दी भरने में मदद मिलती है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व त्वचा को सुरक्षित रखने और संक्रमण से बचाने में सहायक माने जाते हैं. कई लोग इसे एंटीसेप्टिक की तरह इस्तेमाल करते हैं, खासकर तब जब आसपास कोई दवा उपलब्ध नहीं होती है. हालांकि, इसका उपयोग केवल बाहरी रूप से ही करना सुरक्षित माना जाता है.

Relief from swelling and pain

डॉ. ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि इस पौधे में सूजन कम करने वाले गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण इसे दर्द और सूजन में राहत के लिए भी उपयोग किया जाता है. बनमारा के पत्तों को पीसकर प्रभावित जगह पर लगाने से सूजन में कमी आ सकती है. इसके प्राकृतिक तत्व शरीर की सूजन प्रतिक्रिया को कम करने में मदद करते हैं. हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए इसे लगाने से पहले थोड़ी मात्रा में परीक्षण करना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार की एलर्जी या जलन की समस्या न हो.

Add News18 as
Preferred Source on Google

Potential benefits for skin diseases

बनमारा का उपयोग कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे खुजली, दाद या हल्के संक्रमण में भी किया जाता है. इसमें मौजूद एंटी-माइक्रोबियल गुण त्वचा पर बैक्टीरिया और फंगस के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसके पत्तों का लेप बनाकर त्वचा पर लगाते हैं. इससे त्वचा को ठंडक मिलती है, जलन में राहत मिल सकती है. हालांकि, यह कोई प्रमाणित चिकित्सा उपचार नहीं है, इसलिए गंभीर त्वचा रोगों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. गलत उपयोग से समस्या बढ़ भी सकती है.

Rich in anti-oxidant properties

कुछ शोधों में पाया गया है कि बनमारा पौधे में एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व मौजूद होते हैं. ये तत्व शरीर को फ्री-रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं. एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं. इस पौधे के इन गुणों पर अभी और वैज्ञानिक शोध की जरूरत है. पारंपरिक उपयोग के आधार पर इसे लाभकारी माना जाता है, लेकिन इसे औषधि के रूप में अपनाने से पहले विशेषज्ञ सलाह लेना जरूरी है.

Traditional uses and beliefs

दार्जिलिंग और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में बनमारा का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में सांप के काटने और मानसिक समस्याओं के इलाज में भी किया जाता रहा है. इन दावों के पीछे ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं. यह अधिकतर लोक मान्यताओं और पुराने अनुभवों पर आधारित है. कई ग्रामीण आज भी इन परंपराओं का पालन करते हैं, लेकिन आधुनिक चिकित्सा के अनुसार ऐसे मामलों में डॉक्टर की सहायता लेना बेहद जरूरी है. केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है, खासकर जब मामला गंभीर हो.

Dangerous to animals

बनमारा पौधा जहां इंसानों के लिए सीमित उपयोग में लाभकारी माना जाता है, वहीं यह पशुओं के लिए हानिकारक हो सकता है. खासकर घोड़े और अन्य पालतू जानवर अगर इसे खा लें तो उनके लिए यह विषैला साबित हो सकता है. इससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है. इसलिए जिन क्षेत्रों में यह पौधा अधिक मात्रा में उगता है, वहां पशुपालकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. जानवरों को इससे दूर रखना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार की बीमारी या नुकसान से बचा जा सके.

environmental hazard

बनमारा एक आक्रामक खरपतवार है, जो बहुत तेजी से फैलता है, स्थानीय पौधों को नुकसान पहुंचाता है. यह जमीन की उर्वरता को प्रभावित करता है और जैव विविधता के लिए खतरा बन सकता है. जंगलों और खेती की जमीन में फैलकर यह अन्य उपयोगी पौधों की वृद्धि को रोक देता है. इसलिए कई क्षेत्रों में इसे नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इसके नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयास और जागरूकता जरूरी है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.