विश्व विरासत दिवस पर शनिवार को मांडू के सभी केंद्रीय संरक्षित स्मारकों में पर्यटकों का प्रवेश निशुल्क रहेगा। भारतीय पुरातत्व विभाग इस दिन पर सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विशेष आयोजन कर रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार रात जहाज महल को विद्युत रोशनी से रोशन किया गया। इंदौर कमिश्नर और धार कलेक्टर ने भेजे प्रस्ताव तत्कालीन इंदौर संभाग आयुक्त दीपक सिंह और तत्कालीन धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने मांडू को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए शासन को कई प्रस्ताव भेजे हैं। मांडू वर्तमान में यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल है। प्रशासन अब इसे पूर्ण विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए तकनीकी डोजियर तैयार करने के प्रयासों में जुटा है। मांडू में होंगी विविध गतिविधियां विश्व धरोहर दिवस पर मांडू में हेरिटेज वॉक, चित्रकला, वाद-विवाद और फोटो प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों का उद्देश्य मांडू की प्राचीन वास्तुकला, जल प्रबंधन प्रणालियों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति आमजन को जागरूक करना है। एएसआई इस बार ‘विरासत और जलवायु’ विषय पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। 61 केंद्रीय और 14 राज्य संरक्षित स्मारक मौजूद ऐतिहासिक नगरी मांडू में बाज बहादुर-रानी रूपमती महल, हिंडोला महल, अशर्फी महल और होशंगशाह के मकबरे सहित कुल 61 केंद्रीय पुरातत्व विभाग के संरक्षित स्मारक हैं। इसके अलावा राज्य पुरातत्व विभाग के भी 14 स्मारक यहां स्थित हैं। मांडू को यूनेस्को की सूची में शामिल करने के लिए वर्ष 1998 से संघर्ष जारी है। प्राचीन जल संरचनाओं के संरक्षण पर विशेष फोकस पुरातत्वविद और एएसआई भोपाल मंडल के अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार कुर्मी ने बताया कि मांडू की प्राचीन जल संरचनाएं विश्व में अद्वितीय हैं। विभाग इन जलस्रोतों और स्मारकों के समूह को आधार बनाकर एक सशक्त प्रस्तुतिकरण तैयार कर रहा है। यूनेस्को में भारत का प्रतिनिधित्व एएसआई द्वारा किया जाता है, जिससे मांडू की दावेदारी अब और मजबूत हुई है।















































