Sunday, 19 Apr 2026 | 06:49 PM

Trending :

EXCLUSIVE

पद्मश्री भगवानदास रायकवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई:अखाड़ा कला के उस्ताद को शिष्यों ने करतब से श्रद्धांजलि दी

पद्मश्री भगवानदास रायकवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई:अखाड़ा कला के उस्ताद को शिष्यों ने करतब से श्रद्धांजलि दी

सागर के पद्मश्री भगवानदास रायकवार का भोपाल में इलाज के दौरान शनिवार को निधन हो गया। निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को सागर लाया गया। रविवार को सागर में अंतिम यात्रा निकाली गई। उनकी अंतिम यात्रा सागर के रामपुरा स्थित छत्रसाल अखाड़ा से शुरू हुई। यात्रा में बुंदेलखंड के अखाड़े शामिल हुए। अखाड़ों में कलाकारों ने करतब दिखाए। रास्तेभर लोगों की भीड़ उमड़ती चली गई। शिष्यों, समर्थकों और आम नागरिकों ने नम आंखों से दाऊ भगवानदास रायकवार को विदाई दी। अंतिम यात्रा नरयावली नाका स्थित मुक्तिधाम पहुंची। जहां राजकीय सम्मान गार्ड ऑफ ऑनर के साथ वे पंचतत्व में विलीन हुए। इस दौरान एक भावुक दृश्य तब देखने को मिला। जब उनके बेटे सहित शिष्यों ने अपने गुरु को श्रद्धांजलि देने के लिए पारंपरिक बुंदेली अखाड़ा मार्शल आर्ट का प्रदर्शन किया। लेजम और लाठी के साथ किए गए, इस प्रदर्शन ने सभी को भावुक कर दिया। यह वही कला थी, जिसे भगवानदास रायकवार ने जीवनभर सहेजा और नई पीढ़ी तक पहुंचाया। इसी कला में उन्हें पद्मश्री सम्मान मिला है। पिता जी गए नहीं, वे कला के रूप में हमारे बीच हैं
अंतिम संस्कार में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और शहर के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। उनके बेटे राजकुमार रायकवार ने कहा कि उनके पिता का जाना सिर्फ परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड और देश के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने बताया कि पिता ने अपना पूरा जीवन अखाड़ा कला को समर्पित कर दिया और उसे नई पहचान दिलाई। पिताजी गए नहीं है, वह हमारे बीच हैं। उनकी कला को जिंदा रखेंगे। उन्होंने अपना पूरा जीवन इस कला के लिए दिया। नौकरी छोड़ी, परिवार पर ध्यान नहीं दिया। वे हमेशा कला के लिए काम करते रहे। वह बुंदेलखंड के कलाकारों और अखाड़ों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। उन्होंने अखाड़े को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई
नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने कहा कि पद्मश्री से सम्मानित भगवानदास रायकवार दाऊ ने मार्शल ऑर्ट्स के क्षेत्र में अलख जगाई थी। उन्होंने पूरा जीवन इसके लिए समर्पित किया। बच्चों को आगे लाने की दिशा में काम किया है। वह प्रेरणा के केंद्र हैं। प्राचीन विधा को बुंदेलखंड के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। उनके जाने से हमसब दुखी हैं।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Ranveer Singh returns as Hamza in Dhurandhar 2: The Revenge, one of the biggest Bollywood releases of 2026.

March 18, 2026/
3:51 pm

आखरी अपडेट:मार्च 18, 2026, 15:51 IST राज्यसभा चुनावों ने कांग्रेस की खामियां उजागर कर दी हैं, वरिष्ठों ने राहुल गांधी...

Badshahs Titteri Phirse Song Released

April 15, 2026/
8:49 am

सोनीपत3 मिनट पहले कॉपी लिंक टटीरी फिर से सॉन्ग में लड़कियों को एक अंडरपास में नाचते हुए दिखाया गया है।...

40 की उम्र में सोनम कपूर दूसरी बार मां बनीं:बेटे को जन्म दिया, खुशखबरी शेयर कर कहा- हमारा परिवार बड़ा हो गया है

March 30, 2026/
9:28 am

बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर दूसरी बार मां बनी हैं। उन्होंने 29 मार्च को मुंबई में बेटे को जन्म दिया। इससे...

ग्वालियर में प्लास्टिक के लालच में फैक्ट्री में घुसा नाबालिग:सिक्योरिटी इंचार्ज ने बंधक बनाकर पीटा, कुर्सी से बांध दिया, रात को पुलिस पहुंची तो छोड़ा

March 21, 2026/
12:50 am

ग्वालियर में यूनीपेच फैक्ट्री की बाउंड्री वॉल फांदकर एक नाबालिग प्लास्टिक चोरी कर बेचने के लालच में अंदर दाखिल हो...

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

पद्मश्री भगवानदास रायकवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई:अखाड़ा कला के उस्ताद को शिष्यों ने करतब से श्रद्धांजलि दी

पद्मश्री भगवानदास रायकवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई:अखाड़ा कला के उस्ताद को शिष्यों ने करतब से श्रद्धांजलि दी

सागर के पद्मश्री भगवानदास रायकवार का भोपाल में इलाज के दौरान शनिवार को निधन हो गया। निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को सागर लाया गया। रविवार को सागर में अंतिम यात्रा निकाली गई। उनकी अंतिम यात्रा सागर के रामपुरा स्थित छत्रसाल अखाड़ा से शुरू हुई। यात्रा में बुंदेलखंड के अखाड़े शामिल हुए। अखाड़ों में कलाकारों ने करतब दिखाए। रास्तेभर लोगों की भीड़ उमड़ती चली गई। शिष्यों, समर्थकों और आम नागरिकों ने नम आंखों से दाऊ भगवानदास रायकवार को विदाई दी। अंतिम यात्रा नरयावली नाका स्थित मुक्तिधाम पहुंची। जहां राजकीय सम्मान गार्ड ऑफ ऑनर के साथ वे पंचतत्व में विलीन हुए। इस दौरान एक भावुक दृश्य तब देखने को मिला। जब उनके बेटे सहित शिष्यों ने अपने गुरु को श्रद्धांजलि देने के लिए पारंपरिक बुंदेली अखाड़ा मार्शल आर्ट का प्रदर्शन किया। लेजम और लाठी के साथ किए गए, इस प्रदर्शन ने सभी को भावुक कर दिया। यह वही कला थी, जिसे भगवानदास रायकवार ने जीवनभर सहेजा और नई पीढ़ी तक पहुंचाया। इसी कला में उन्हें पद्मश्री सम्मान मिला है। पिता जी गए नहीं, वे कला के रूप में हमारे बीच हैं
अंतिम संस्कार में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और शहर के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। उनके बेटे राजकुमार रायकवार ने कहा कि उनके पिता का जाना सिर्फ परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड और देश के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने बताया कि पिता ने अपना पूरा जीवन अखाड़ा कला को समर्पित कर दिया और उसे नई पहचान दिलाई। पिताजी गए नहीं है, वह हमारे बीच हैं। उनकी कला को जिंदा रखेंगे। उन्होंने अपना पूरा जीवन इस कला के लिए दिया। नौकरी छोड़ी, परिवार पर ध्यान नहीं दिया। वे हमेशा कला के लिए काम करते रहे। वह बुंदेलखंड के कलाकारों और अखाड़ों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। उन्होंने अखाड़े को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई
नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने कहा कि पद्मश्री से सम्मानित भगवानदास रायकवार दाऊ ने मार्शल ऑर्ट्स के क्षेत्र में अलख जगाई थी। उन्होंने पूरा जीवन इसके लिए समर्पित किया। बच्चों को आगे लाने की दिशा में काम किया है। वह प्रेरणा के केंद्र हैं। प्राचीन विधा को बुंदेलखंड के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। उनके जाने से हमसब दुखी हैं।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.