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Himalaya Sadhu Story; Thirteen Months In The Himalayas Review

Himalaya Sadhu Story; Thirteen Months In The Himalayas Review
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2 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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किताब का नाम: हिमालय में तेरह मास: एक भिक्षु का साधना-वृत्तांत

(‘थर्टीन मंथ्स इन द हिमालयाज’ का हिंदी अनुवाद)

लेखक: ओम स्वामी

अनुवाद: आशुतोष गर्ग

प्रकाशक: मंजुल प्रकाशन

मूल्य: 350 रुपए

आमतौर पर लोग रिटायरमेंट के बाद शांति की तलाश करते हैं। इसके लिए ‘एकांतवास’ चुनते हैं। लेकिन क्या हो, जब एक अरबपति बिजनेसमैन अपना सब कुछ छोड़कर हिमालय पर तपस्या करने चला जाए? मशहूर आध्यात्मिक गुरु और लेखक ओम स्वामी की किताब ‘हिमालय में तेरह मास: एक भिक्षु का साधना-वृत्तांत’ इसी असाधारण यात्रा का जीवंत दस्तावेज है।

यह किताब केवल एक यात्रा वृत्तांत नहीं है। यह उस कठिन साधना की यात्रा है, जिसे पूरा करने का साहस आधुनिक युग में बहुत कम लोग जुटा पाते हैं। लेखक ने इसमें बताया है कि कैसे उन्होंने 12,000 फीट की ऊंचाई पर शून्य से नीचे के तापमान, भूख और जंगली जानवरों के डर के बीच 13 महीने बिताए। यह किताब हमें बताती है कि साधना या आत्म-साक्षात्कार कोई जादुई घटना नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत, अनुशासन और अटूट श्रद्धा का परिणाम है।

किताब का मकसद और अहमियत

इस किताब का मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिकता के पीछे छिपे रहस्य को हटाकर उसकी कठोर वास्तविकता को सामने लाना है। किताब हमें सिखाती है कि अगर लक्ष्य बड़ा हो तो ‘पागलपन की हद तक’ समर्पण जरूरी है।

सोशल मीडिया और इंस्टेंट खुशी के दौर में यह किताब ‘धैर्य’ और ‘मौन’ की शक्ति को पुनर्स्थापित करती है। यह उन लोगों के लिए एक गाइड की तरह है, जो यह जानना चाहते हैं कि क्या आज के इस वैज्ञानिक युग में भी प्राचीन वैदिक पद्धतियों से ‘सत्य’ को पाया जा सकता है। नीचे दिए ग्राफिक से किताब के मुख्य सूत्र समझिए-

लेखक ने अपनी इस 13 महीने की हिमालय की यात्रा को बहुत ही ईमानदारी से लिखा है। ऐसे में किताब के इन 4 प्रमुख पहलुओं को समझना हर पाठक के लिए जरूरी है।

1. सुख-सुविधाओं का पूर्ण त्याग

किताब में ओम स्वामी गुफा में रहने का अपना अनुभव लिखते हैं, ‘’वह गुफा इतनी छोटी थी कि उसमें सीधे खड़े भी नहीं हुआ जा सकता था। वहां न बिजली थी, न ही बिस्तर।’’

लेखक ने अपने गुरु ‘नागा बाबा’ के आदेश पर सिले हुए कपड़े पहनना छोड़ दिया था और हाड़ कंपाने वाली ठंड में भी केवल एक लंगोट में साधना की। यह हिस्सा हमें सिखाता है कि जब हम बाहरी दुनिया की जरूरतों को कम करते हैं, तभी आंतरिक दुनिया के द्वार खुलते हैं।

2. डर पर विजय: जंगली जानवर और अकेलापन

हिमालय की ऊंचाइयों पर अकेले रहना मौत को दावत देने जैसा है। लेखक ने स्वीकार किया है कि उन्हें भी डर लगता था कि कहीं कोई तेंदुआ या भालू उन्हें अपना निवाला न बना ले। उन्होंने एक गहरी बात कही है कि “अगर जीवन पूरी सजगता, शांति और स्वीकार भाव में जिया जाए, तो मृत्यु भी बिना डर और घबराहट के स्वाभाविक रूप से स्वीकार्य हो जाती है।” ओम स्वामी ने अपने अहंकार को चुनौती दी और डर को अपनी हिम्मत में बदल दिया।

3. साधना की बारीकियां और ‘क्राइंग मेडिटेशन’

किताब में केवल दार्शनिक बातें नहीं हैं, बल्कि मंत्र योग और साधना की सटीक प्रक्रियाएं भी हैं। ओम स्वामी बताते हैं कि कैसे घंटों एक ही मुद्रा में बैठने से शरीर जवाब देने लगता था, लेकिन संकल्प उन्हें थामे रखता था।

उन्होंने ‘क्राइंग मेडिटेशन’ का जिक्र किया है, जहां ईश्वर के प्रेम में आंसू बहते हैं। यह किताब के सबसे भावुक हिस्सों में से एक है, जो पाठक की आंखों को भी नम कर देता है।

4. अनुशासन बनाम संदेह

साधु होने का मतलब यह नहीं कि मन में शंकाएं नहीं आती हैं। ओम स्वामी बड़ी ईमानदारी से बताते हैं कि कई बार उनके मन में भी संदेह उठा कि क्या ये सब सच है? क्या मां भगवती वास्तव में दर्शन देंगी? लेकिन उन्होंने सीखा कि ‘संदेह’ आने पर साधना छोड़नी नहीं है, बल्कि उस पर और फोकस करना है। यही वो ‘स्पार्क’ है, जो एक साधारण साधक को सिद्ध बनाता है।

यह किताब किसे पढ़नी चाहिए?

यह किताब केवल संन्यासियों के लिए नहीं है। अगर आप एक कॉर्पोरेट प्रोफेशनल हैं और तनाव में रहते हैं तो यह आपको मानसिक मजबूती सिखाएगी। अगर आप स्टूडेंट हैं तो यह आपको एकाग्रता का महत्व बताएगी। नीचे दिए ग्राफिक से समझिए कि ये किताब किन लोगों के लिए बेहतर है।

किताब के बारे में मेरी राय

यह किताब एक ‘अनुभव’ है। ओम स्वामी की लेखनी में एक अद्भुत सादगी और गहराई है। वह किसी उपदेशक की तरह नहीं, बल्कि एक दोस्त की तरह अपनी कमियां और अपनी जीत साझा करते हैं।

ओम स्वामी अपनी 13 महीनों की साधना के जरिए बताते हैं कि कैसे कठिनाइयों से गुजरकर आंतरिक शांति मिलती है। सबसे अच्छी बात यह है कि लेखक ने कभी भी आध्यात्मिकता का महिमामंडन नहीं किया।

उन्होंने भूख, दर्द और अकेलेपन की कड़वी सच्चाई को वैसे ही पेश किया, जैसे वह महसूस होता है। किताब का 18वां अध्याय इतना भावुक है कि वह किसी भी पत्थर दिल इंसान को झकझोर सकता है। यह किताब हमें याद दिलाती है कि सबसे कठिन और सबसे खूबसूरत यात्रा हमारे भीतर ही होती है।

………………

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Himalaya Sadhu Story; Thirteen Months In The Himalayas Review

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2 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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किताब का नाम: हिमालय में तेरह मास: एक भिक्षु का साधना-वृत्तांत

(‘थर्टीन मंथ्स इन द हिमालयाज’ का हिंदी अनुवाद)

लेखक: ओम स्वामी

अनुवाद: आशुतोष गर्ग

प्रकाशक: मंजुल प्रकाशन

मूल्य: 350 रुपए

आमतौर पर लोग रिटायरमेंट के बाद शांति की तलाश करते हैं। इसके लिए ‘एकांतवास’ चुनते हैं। लेकिन क्या हो, जब एक अरबपति बिजनेसमैन अपना सब कुछ छोड़कर हिमालय पर तपस्या करने चला जाए? मशहूर आध्यात्मिक गुरु और लेखक ओम स्वामी की किताब ‘हिमालय में तेरह मास: एक भिक्षु का साधना-वृत्तांत’ इसी असाधारण यात्रा का जीवंत दस्तावेज है।

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लेखक ने अपनी इस 13 महीने की हिमालय की यात्रा को बहुत ही ईमानदारी से लिखा है। ऐसे में किताब के इन 4 प्रमुख पहलुओं को समझना हर पाठक के लिए जरूरी है।

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किताब में ओम स्वामी गुफा में रहने का अपना अनुभव लिखते हैं, ‘’वह गुफा इतनी छोटी थी कि उसमें सीधे खड़े भी नहीं हुआ जा सकता था। वहां न बिजली थी, न ही बिस्तर।’’

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