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कैंसर सेल खत्म करने में कारगर?, पटना की लैब में हल्दी पर बड़ी रिसर्च

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Nanoparticle Grinding Machine Patna: पटना स्थित आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर में वैज्ञानिकों ने एक अनोखी खोज की है, जहां सामान्य हल्दी को खास मशीन से पीसकर नैनो पार्टिकल में बदलने पर उसका रंग पीले से लाल हो गया. इस बदलाव के साथ उसके मॉलिक्यूल स्तर में भी परिवर्तन देखने को मिला, जो कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों की रोकथाम में उपयोगी हो सकता है. शुरुआती परीक्षणों में यह पाया गया कि यह नैनो पाउडर कैंसर सेल को नष्ट करने में प्रभावी है, वहीं इसी तकनीक से तैयार किए गए करेले के नैनोपार्टिकल भी कई गंभीर बीमारियों के इलाज में नई संभावनाएं दिखा रहे हैं. रिपोर्ट- सच्चिदानंद

अमूमन हल्दी को पीसने पर वह पीले रंग का पाउडर बन जाता है. पटना के वैज्ञानिकों ने हल्दी को स्पेशल चक्की में पीस कर नैनो पार्टिकल में तोड़ा तो उसका कलर लाल हो गया है. इस लाल रंग वाले हल्दी का ऐसा मॉलिक्यूल तैयार हुआ जो कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों के रोकथाम के लिए उपयोग किया जा सकता है.

हेल्थ

आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर में यह खास चक्की मौजूद है. इसका उपयोग नॉर्मल चीजों को नैनो पार्टिकल में तोड़ने के लिए किया जाता है. इस बारे में जानकारी देते हुए नैनो साइंस विभाग के एचओडी डॉ. राकेश कुमार सिंह ने लोकल 18 को बताया कि यह सामान्य चक्की का ही एडवांस्ड वर्जन है.

हेल्थ

चीजों को नैनो पार्टिकल में बदलने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है. इसका उपयोग रिसर्च के लिए किया जाता है. नैनो साइंस विभाग की एमटेक की छात्रा श्वेता सिन्हा ने बताया कि इस मशीन के जरिए नैनो पार्टिकल तैयार किया जाता है.

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हेल्थ

नॉर्मल हल्दी के टुकड़े को जब इस मशीन में डालकर अलग अलग टाइम के लिए पिसा गया तो इसका रंग पीला की जगह लाल हो गया. इस सुपर फाइन पाउडर यानी नैनो पाउडर का जब अध्ययन किया गया तो यह पाया गया कि मॉलिक्यूल लेवल बदलने से इसका रंग बदला है.

हेल्थ

नैनो साइज की वजह से हल्दी का रंग पीला से लाल हो गया. इसके सैंपल को महावीर कैंसर संस्थान और पीजीआई लखनऊ में भेजा गया. इसकी टेस्टिंग चूहों के कैंसर सेल पर की गई. इसमें यह पता चला कि यह कैंसर सेल नष्ट करने में कारगर है.

हेल्थ

एमटेक स्टूडेंट श्वेता सिन्हा ने आगे बताया कि इसी मशीन से करेले को टुकड़ों में काटकर ऊपर मौजूद क्लॉज्ड चैंबर में डालकर थोड़ी देर तक मशीन चालू रखा तो करेले का सुपर फाइन पाउडर यानी नैनोपार्टिकल डेवलप हुआ. यह सामान्य करेले के मॉलीक्यूल स्ट्रक्चर से बिल्कुल अलग पाया गया.

हेल्थ

इसके नैनी पार्टिकल कैंसर के सेल की ग्रोथ रोकने में सहायक हैं. इसके अलावा मधुमेह सहित अन्य बीमारियों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है. रिसर्च के दौरान जैसे-जैसे इसका पार्टिकल छोटा किया गया तो पता चला कि इसकी चुम्बकीय शक्ति बढ़ती गई. हालांकि, नॉर्मल करेले में कोई चुम्बकीय शक्ति नहीं होती है. चुंबकीय गुण की वजह से शरीर इस पाउडर को तुरंत अवशोषित कर लेगा. यह कई बीमारियों पर कारगर साबित होगा.

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अमूमन हल्दी को पीसने पर वह पीले रंग का पाउडर बन जाता है. पटना के वैज्ञानिकों ने हल्दी को स्पेशल चक्की में पीस कर नैनो पार्टिकल में तोड़ा तो उसका कलर लाल हो गया है. इस लाल रंग वाले हल्दी का ऐसा मॉलिक्यूल तैयार हुआ जो कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों के रोकथाम के लिए उपयोग किया जा सकता है.

हेल्थ

आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर में यह खास चक्की मौजूद है. इसका उपयोग नॉर्मल चीजों को नैनो पार्टिकल में तोड़ने के लिए किया जाता है. इस बारे में जानकारी देते हुए नैनो साइंस विभाग के एचओडी डॉ. राकेश कुमार सिंह ने लोकल 18 को बताया कि यह सामान्य चक्की का ही एडवांस्ड वर्जन है.

हेल्थ

चीजों को नैनो पार्टिकल में बदलने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है. इसका उपयोग रिसर्च के लिए किया जाता है. नैनो साइंस विभाग की एमटेक की छात्रा श्वेता सिन्हा ने बताया कि इस मशीन के जरिए नैनो पार्टिकल तैयार किया जाता है.

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नॉर्मल हल्दी के टुकड़े को जब इस मशीन में डालकर अलग अलग टाइम के लिए पिसा गया तो इसका रंग पीला की जगह लाल हो गया. इस सुपर फाइन पाउडर यानी नैनो पाउडर का जब अध्ययन किया गया तो यह पाया गया कि मॉलिक्यूल लेवल बदलने से इसका रंग बदला है.

हेल्थ

नैनो साइज की वजह से हल्दी का रंग पीला से लाल हो गया. इसके सैंपल को महावीर कैंसर संस्थान और पीजीआई लखनऊ में भेजा गया. इसकी टेस्टिंग चूहों के कैंसर सेल पर की गई. इसमें यह पता चला कि यह कैंसर सेल नष्ट करने में कारगर है.

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एमटेक स्टूडेंट श्वेता सिन्हा ने आगे बताया कि इसी मशीन से करेले को टुकड़ों में काटकर ऊपर मौजूद क्लॉज्ड चैंबर में डालकर थोड़ी देर तक मशीन चालू रखा तो करेले का सुपर फाइन पाउडर यानी नैनोपार्टिकल डेवलप हुआ. यह सामान्य करेले के मॉलीक्यूल स्ट्रक्चर से बिल्कुल अलग पाया गया.

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इसके नैनी पार्टिकल कैंसर के सेल की ग्रोथ रोकने में सहायक हैं. इसके अलावा मधुमेह सहित अन्य बीमारियों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है. रिसर्च के दौरान जैसे-जैसे इसका पार्टिकल छोटा किया गया तो पता चला कि इसकी चुम्बकीय शक्ति बढ़ती गई. हालांकि, नॉर्मल करेले में कोई चुम्बकीय शक्ति नहीं होती है. चुंबकीय गुण की वजह से शरीर इस पाउडर को तुरंत अवशोषित कर लेगा. यह कई बीमारियों पर कारगर साबित होगा.

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