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रविंद्र शांडिल्य.नई दिल्ली/कैथल20 मिनट पहले
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एजेंटों ने झांसा देकर युवाओं को स्टडी, वर्क, टूरिस्ट वीसा पर रूस भेजा।
हरियाणा के रेवाड़ी का अंशु पढ़ाई के लिए रूस गया था। वहां उसे सैनिक बनाकर यूक्रेन युद्ध में उतार दिया गया। वार जोन में उसकी मौत हो गई। करीब 6 महीने बाद 17 अप्रैल को उसका शव घर पहुंचा। परिवार पर दर्द का पहाड़ टूट पड़ा है।
ऐसा ही दर्द हरियाणा, पंजाब, राजस्थान जैसे देश के कई राज्यों के कई परिवारों का है। जवान बेटों को रूस भेजने के लिए किसी ने जमीन बेची तो किसी ने कर्ज लिया। अब वहां किसी की मौत हो गई तो कोई लापता है। डेढ़ साल में 4 राज्यों के 13 युवाओं के शव घर आ चुके हैं। देशभर के सैकड़ों युवा अभी भी लापता हैं।
दैनिक भास्कर ने ऐसे युवाओं के परिवारों से बात की। पता चला कि एजेंटों ने झांसा देकर युवाओं को स्टडी, वर्क, टूरिस्ट वीसा पर रूस भेजा। वहां पैसों का लालच देकर या डरा-धमकाकर जबरन आर्मी में भर्ती का कॉन्ट्रैक्ट साइन कराया। फिर 10-15 दिन की ट्रेनिंग देकर युद्ध में फ्रंट लाइन पर भेज दिया। अब कई युवाओं के शव रूसी झंडे में लिपटकर घर पहुंच रहे हैं।
किसी का शव घर आया तो किसी की कोई खबर नहीं…
ये वे युवा हैं, जिनके परिवारों से भास्कर ने बात की है। इसके अलावा कई राज्यों के युवक महीनों से लापता हैं, कोई पता नहीं चल रहा।
हरियाणा- विकास, अनुज (करनाल), अंशु (रेवाड़ी), अंकित(फतेहाबाद), रवि, गीतिक शर्मा, कर्मचंद (कैथल), सोनू (हिसार), अंकित (सोनीपत)
पंजाब – समरजीत (लुधियाना), मनदीप (जालंधर)
राजस्थान – अजय (बीकानेर)
जम्मू-कश्मीर – सचिन, खाऊर पालनवाला (जम्मू)

4 राज्यों के 26 परिवारों की सुप्रीम कोर्ट से गुहार
इस पूरे मामले में 4 राज्यों के 26 युवाओं के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस पर 24 अप्रैल को सुनवाई है। रोहतक के श्रीभगवान व हिसार के विकास ने बताया कि उन परिवारों से संपर्क किया गया, जिनके बच्चे रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे हैं या मौत हो गई। याचिका में मांग की गई है कि जबरन युद्ध में धकेले गए युवाओं की स्थिति बताई जाए। मरने वाले के परिवारों को मुआवजा दिया जाए। झांसा देकर सेना में भेजने वाले एजेंटों पर कार्रवाई की जाए।
















































