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dehydration symptoms and prevention: भीषण गर्मी, कैसे पहचानें शरीर से खत्म हो रहा पानी? शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए डॉक्टर रेड्डी के टिप्स हैं रामबाण

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Dehydration Symptoms and Prevention: अप्रैल में ही आसमान से आग के शोले बरस रहे हैं. तापमान 40 के ऊपर पहुंच गया है. भीषण गर्मी के चलते शरीर से पानी सूखने लगता है. हालांकि इस दौरान लोगों को लगता है कि पानी पीते रहने से शरीर में पानी की कमी की पूर्ति की जा सकती है और शरीर हाइड्रेट रह सकता है लेकिन डॉक्टरों की मानें तो शरीर को निर्जलीकरण से बचाने के लिए सिर्फ पानी काफी नहीं है बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी की पूर्ति बहुत जरूरी है.

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और जनरल सर्जरी में 28 साल से ज्यादा अनुभव रखने वाले और वर्तमान में केयर हॉस्पिटल्स, बंजारा हिल्स, हैदराबाद से जुड़े डॉ. बी रविंदर रेड्डी कहते हैं कि उत्तर भारत में तापमान जब नियमित रूप से 40°C से ऊपर पहुंच जाता है, तब डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) एक ऐसा स्वास्थ्य जोखिम बन जाता है, जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, जबकि इसे रोका जा सकता है. आमतौर पर इसे केवल अत्यधिक प्यास लगने की स्थिति माना जाता है, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि प्यास एक देर से मिलने वाला संकेत है, जो तब महसूस होती है जब शरीर पहले ही काफी मात्रा में तरल खो चुका होता है. यही अंतर शरीर की वास्तविक जरूरत और व्यक्ति की समझ के बीच डिहाइड्रेशन के खतरे को बढ़ाता है.

डिहाइड्रेशन का सबसे प्रारंभिक और विश्वसनीय संकेत मूत्र (यूरिन) का रंग होता है. वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि मूत्र का रंग शरीर की हाइड्रेशन स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है. हल्का या फीका पीला रंग पर्याप्त हाइड्रेशन का संकेत है, जबकि गहरा रंग शरीर में तरल की कमी को दर्शाता है. सरल होने के बावजूद, यह एक ऐसा संकेत है जिसका लोग दैनिक जीवन में कम उपयोग करते हैं.

डॉ. रव‍िंद्र रेड्डी ने द‍िए ड‍िहाइड्रेशन से बचने के ट‍िप्‍स.

ये हैं डिहाइड्रेशन के लक्षण
जब किसी के शरीर के अंदर पानी की कमी होती है तो उसके कुछ लक्षण सामने आते हैं. डिहाइड्रेशन कई सूक्ष्म लेकिन बेहद महत्वपूर्ण लक्षण ये हो सकते हैं.

  • • सिरदर्द
  • • थकान
  • • चक्कर आना
  • • मुंह का सूखना

पेशाब के दौरान जलन को अक्सर संक्रमण समझ लिया जाता है, जबकि कई मामलों में यह कम पानी पीने के कारण मूत्र के अधिक सघन और अम्लीय हो जाने से होता है. कम पानी का सेवन न केवल इस असुविधा को बढ़ाता है, बल्कि गर्म मौसम में मूत्र संक्रमण (UTI) का खतरा भी बढ़ाता है.

जैसे-जैसे डिहाइड्रेशन बढ़ता है, इसका प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ने लगता है. चक्कर आना और हल्का महसूस होना सामान्य लक्षण हैं, जो रक्त की मात्रा कम होने और रक्तचाप गिरने के कारण होते हैं. शरीर हार्मोनल तंत्र के माध्यम से पानी को बचाने की कोशिश करता है, लेकिन अगर तरल की कमी जारी रहती है, तो यह संतुलन बिगड़ सकता है और महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.

मानसिक हेल्थ पर असर डालता है डिहाइड्रेशन
डिहाइड्रेशन का एक कम दिखाई देने वाला लेकिन महत्वपूर्ण प्रभाव मानसिक कार्यक्षमता पर भी पड़ता है. हल्की कमी भी ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, थकान, मानसिक धुंध (ब्रेन फॉग) और मनोदशा में गिरावट का कारण बन सकती है. गर्मियों में अक्सर लोग एयर-कंडीशंड वातावरण में भी दोपहर तक थकान और कमजोरी महसूस करते हैं, यह भी डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट की कमी का संकेत हो सकता है.

मांसपेशियों में ऐंठन (मसल क्रैम्प्स) भी डिहाइड्रेशन का एक प्रमुख उदाहरण है. जब शरीर तरल खोता है, तो वह सोडियम और पोटैशियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी खो देता है. यह असंतुलन मांसपेशियों के सामान्य कार्य को बाधित करता है और दर्दनाक ऐंठन पैदा करता है, विशेष रूप से गर्म वातावरण या शारीरिक गतिविधि के दौरान.

इलेक्ट्रोलाइट्स क्यों जरूरी हैं?
डिहाइड्रेशन केवल पानी की कमी नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. केवल पानी पीने से कभी-कभी समस्या पूरी तरह हल नहीं होती, क्योंकि यह इलेक्ट्रोलाइट्स को और पतला कर सकता है, बिना उनकी भरपाई किए. इसलिए, विशेषकर गर्मी या अधिक पसीना आने की स्थिति में, संतुलित हाइड्रेशन आवश्यक है.

गर्मियों में सही हाइड्रेशन का तरीका
डॉ. रेड्डी कहते हैं कि डिहाइड्रेशन से बचने के लिए एक संतुलित और नियमित रणनीति जरूरी है. इसके लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए.

  1. •पानी पीना जरूरी है, लेकिन केवल उसी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं.
  2. •इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए.
  3. •नारियल पानी और नींबू पानी जैसे पारंपरिक विकल्प मदद कर सकते हैं, लेकिन इनमें इलेक्ट्रोलाइट्स की सटीक मात्रा पता नहीं चलती.
  4. •अधिक चीनी या कैफीन वाले पेय से बचना चाहिए.

ऐसे में, वैज्ञानिक रूप से तैयार किए गए रेडी-टू-ड्रिंक इलेक्ट्रोलाइट पेय (टेट्रा पैक आदि) बेहतर विकल्प हो सकते हैं, जिनमें आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स की निश्चित मात्रा और कम शुगर होती है. ये न केवल सुविधाजनक होते हैं, बल्कि स्वाद के कारण नियमित सेवन में भी मदद करते हैं.

डिहाइड्रेशन अस्थाई समस्या नहीं
डॉ. रेड्डी की मानें तो डिहाइड्रेशन को केवल एक अस्थायी समस्या या जीवनशैली से जुड़ी स्थिति नहीं मानना चाहिए, बल्कि इसे एक गंभीर स्वास्थ्य विषय के रूप में देखना चाहिए. इसके लिए…

  1. • नियमित रूप से तरल और इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन करें.
  2. • मूत्र के रंग जैसे सरल संकेतों की निगरानी करें.
  3. • शुरुआती लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें.

गर्मी से बचना हमेशा संभव नहीं है, लेकिन सही हाइड्रेशन अपनाकर उसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और जनरल सर्जरी में 28 साल से ज्यादा अनुभव रखने वाले और वर्तमान में केयर हॉस्पिटल्स, बंजारा हिल्स, हैदराबाद से जुड़े डॉ. बी रविंदर रेड्डी कहते हैं कि उत्तर भारत में तापमान जब नियमित रूप से 40°C से ऊपर पहुंच जाता है, तब डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) एक ऐसा स्वास्थ्य जोखिम बन जाता है, जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, जबकि इसे रोका जा सकता है. आमतौर पर इसे केवल अत्यधिक प्यास लगने की स्थिति माना जाता है, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि प्यास एक देर से मिलने वाला संकेत है, जो तब महसूस होती है जब शरीर पहले ही काफी मात्रा में तरल खो चुका होता है. यही अंतर शरीर की वास्तविक जरूरत और व्यक्ति की समझ के बीच डिहाइड्रेशन के खतरे को बढ़ाता है.

डिहाइड्रेशन का सबसे प्रारंभिक और विश्वसनीय संकेत मूत्र (यूरिन) का रंग होता है. वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि मूत्र का रंग शरीर की हाइड्रेशन स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है. हल्का या फीका पीला रंग पर्याप्त हाइड्रेशन का संकेत है, जबकि गहरा रंग शरीर में तरल की कमी को दर्शाता है. सरल होने के बावजूद, यह एक ऐसा संकेत है जिसका लोग दैनिक जीवन में कम उपयोग करते हैं.

डॉ. रव‍िंद्र रेड्डी ने द‍िए ड‍िहाइड्रेशन से बचने के ट‍िप्‍स.

ये हैं डिहाइड्रेशन के लक्षण
जब किसी के शरीर के अंदर पानी की कमी होती है तो उसके कुछ लक्षण सामने आते हैं. डिहाइड्रेशन कई सूक्ष्म लेकिन बेहद महत्वपूर्ण लक्षण ये हो सकते हैं.

  • • सिरदर्द
  • • थकान
  • • चक्कर आना
  • • मुंह का सूखना

पेशाब के दौरान जलन को अक्सर संक्रमण समझ लिया जाता है, जबकि कई मामलों में यह कम पानी पीने के कारण मूत्र के अधिक सघन और अम्लीय हो जाने से होता है. कम पानी का सेवन न केवल इस असुविधा को बढ़ाता है, बल्कि गर्म मौसम में मूत्र संक्रमण (UTI) का खतरा भी बढ़ाता है.

जैसे-जैसे डिहाइड्रेशन बढ़ता है, इसका प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ने लगता है. चक्कर आना और हल्का महसूस होना सामान्य लक्षण हैं, जो रक्त की मात्रा कम होने और रक्तचाप गिरने के कारण होते हैं. शरीर हार्मोनल तंत्र के माध्यम से पानी को बचाने की कोशिश करता है, लेकिन अगर तरल की कमी जारी रहती है, तो यह संतुलन बिगड़ सकता है और महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.

मानसिक हेल्थ पर असर डालता है डिहाइड्रेशन
डिहाइड्रेशन का एक कम दिखाई देने वाला लेकिन महत्वपूर्ण प्रभाव मानसिक कार्यक्षमता पर भी पड़ता है. हल्की कमी भी ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, थकान, मानसिक धुंध (ब्रेन फॉग) और मनोदशा में गिरावट का कारण बन सकती है. गर्मियों में अक्सर लोग एयर-कंडीशंड वातावरण में भी दोपहर तक थकान और कमजोरी महसूस करते हैं, यह भी डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट की कमी का संकेत हो सकता है.

मांसपेशियों में ऐंठन (मसल क्रैम्प्स) भी डिहाइड्रेशन का एक प्रमुख उदाहरण है. जब शरीर तरल खोता है, तो वह सोडियम और पोटैशियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी खो देता है. यह असंतुलन मांसपेशियों के सामान्य कार्य को बाधित करता है और दर्दनाक ऐंठन पैदा करता है, विशेष रूप से गर्म वातावरण या शारीरिक गतिविधि के दौरान.

इलेक्ट्रोलाइट्स क्यों जरूरी हैं?
डिहाइड्रेशन केवल पानी की कमी नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. केवल पानी पीने से कभी-कभी समस्या पूरी तरह हल नहीं होती, क्योंकि यह इलेक्ट्रोलाइट्स को और पतला कर सकता है, बिना उनकी भरपाई किए. इसलिए, विशेषकर गर्मी या अधिक पसीना आने की स्थिति में, संतुलित हाइड्रेशन आवश्यक है.

गर्मियों में सही हाइड्रेशन का तरीका
डॉ. रेड्डी कहते हैं कि डिहाइड्रेशन से बचने के लिए एक संतुलित और नियमित रणनीति जरूरी है. इसके लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए.

  1. •पानी पीना जरूरी है, लेकिन केवल उसी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं.
  2. •इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए.
  3. •नारियल पानी और नींबू पानी जैसे पारंपरिक विकल्प मदद कर सकते हैं, लेकिन इनमें इलेक्ट्रोलाइट्स की सटीक मात्रा पता नहीं चलती.
  4. •अधिक चीनी या कैफीन वाले पेय से बचना चाहिए.

ऐसे में, वैज्ञानिक रूप से तैयार किए गए रेडी-टू-ड्रिंक इलेक्ट्रोलाइट पेय (टेट्रा पैक आदि) बेहतर विकल्प हो सकते हैं, जिनमें आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स की निश्चित मात्रा और कम शुगर होती है. ये न केवल सुविधाजनक होते हैं, बल्कि स्वाद के कारण नियमित सेवन में भी मदद करते हैं.

डिहाइड्रेशन अस्थाई समस्या नहीं
डॉ. रेड्डी की मानें तो डिहाइड्रेशन को केवल एक अस्थायी समस्या या जीवनशैली से जुड़ी स्थिति नहीं मानना चाहिए, बल्कि इसे एक गंभीर स्वास्थ्य विषय के रूप में देखना चाहिए. इसके लिए…

  1. • नियमित रूप से तरल और इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन करें.
  2. • मूत्र के रंग जैसे सरल संकेतों की निगरानी करें.
  3. • शुरुआती लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें.

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