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Arthritis Joint Pain Relief Home Remedies; Giloy Turmeric Ginger

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  • Arthritis Joint Pain Relief Home Remedies; Giloy Turmeric Ginger | Diabetes BP Precautions

46 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनिया में 50 करोड़ से ज्यादा लोगों को आर्थराइटिस है। किसी की समस्या मॉडरेट है तो किसी की गंभीर।

आर्थराइटिस के कारण शुरू हुआ जॉइंट पेन लगभग पूरी जिंदगी बना रहता है। कुछ लोग इससे राहत के लिए पेन किलर खाते हैं। ये खतरनाक साबित हो सकता है। इससे किडनी तक डैमेज हो सकती है।

ऐसे में सवाल है कि क्या पेन किलर के बिना भी इस दर्द से राहत मिल सकती है? जवाब है– ‘हां’। जॉइंट पेन में घरेलू नुस्खों से राहत मिलती है।

‘जरूरत की खबर’ में आज आर्थराइटिस पेन से राहत के घरेलू नुस्खों की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • आर्थराइटिस क्यों होता है?
  • क्या डायबिटिक और बीपी पेशेंट भी ये घरेलू नुस्खे ले सकते हैं?

एक्सपर्ट: डॉ. पी.के. श्रीवास्तव, पूर्व सीनियर कंसल्टेंट, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, लखनऊ

सवाल- आर्थराइटिस क्या है?

जवाब- आर्थराइटिस में जॉइंट्स में क्रॉनिक इंफ्लेमेशन हो जाता है। इसके कारण अकड़न बनी रहती है और दर्द होता है।

हमारे शरीर में जहां भी दो हड्डियां मिलती हैं, उसे जॉइंट कहते हैं। इन जॉइंट्स में दोनों हड्डियों के बीच एक मुलायम लेयर होती है, जिसे ‘कार्टिलेज’ कहते हैं। जब ये लेयर खराब होने लगती है या इम्यून सिस्टम खुद जॉइंट्स पर हमला करने लगता है (ऑटोइम्यून डिजीज) तो आर्थराइटिस होता है।

सवाल- आर्थराइटिस क्यों होता है?

जवाब- आर्थराइटिस में कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगता है या उनमें सूजन आ जाती है।

  • इसकी सबसे कॉमन वजह उम्र बढ़ना है, क्योंकि समय के साथ जोड़ों की फ्लैक्सिबिलिटी कम हो जाती है।
  • मोटापा यानी ज्यादा वजन भी जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे कार्टिलेज डैमेज होता है।
  • पुरानी चोट, गलत तरीके से बैठने-उठने की आदतें, ज्यादा मेहनत वाले काम और विटामिन D या कैल्शियम की कमी भी आर्थराइटिस का कारण बन सकती है।
  • कुछ मामलों में ऑटोइम्यून कंडीशन के कारण भी आर्थराइटिस हो सकता है। इसे रूमेटॉइड आर्थराइटिस कहते हैं।

सवाल- आर्थराइटिस के दर्द से राहत के लिए लोग अक्सर पेनकिलर ले लेते हैं? इसमें रोज पेन किलर खाना क्यों खतरनाक है?

जवाब- आर्थराइटिस के दर्द में पेनकिलर तुरंत राहत तो देते हैं, लेकिन इन्हें रोज खाने से बहुत नुकसान हो सकता है। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या पेन किलर के बिना भी आर्थराइटिस के दर्द से राहत मिल सकती है?

जवाब- हां, कई मामलों में पेन किलर के बिना भी आर्थराइटिस के दर्द को कंट्रोल किया जा सकता है। इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि-

  • नियमित हल्की एक्सरसाइज करें।
  • फिजियोथेरेपी लें।
  • वजन कंट्रोल में रखें।
  • पौष्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट लें।
  • योग और स्ट्रेचिंग करें।
  • जोड़ों की सिंकाई करें।

इसके अलावा कुछ हर्ब्स में प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सूजन कम कर सकते हैं।

सवाल- आर्थराइटिस पेन का घरेलू इलाज क्या है?

जवाब- घरेलू इलाज का मकसद जोड़ों की सूजन को कम करना और जोड़ों को पोषण देना है। कुछ प्रभावी घरेलू नुस्खे ग्राफिक में देखिए-

ऊपर ग्राफिक में दिए घरेलू नुस्खों के अलावा हल्का योग, गुनगुने पानी से स्नान, पर्याप्त नींद और संतुलित डाइट भी घरेलू इलाज का अहम हिस्सा हैं।

आइए, अब इन सभी नुस्खे के बारे में विस्तार से समझिए-

1. गिलोय और हल्दी

  • दोनों में एंटी-इंफ्लेमेटरी कंपाउंड्स (जैसे करक्यूमिन) सूजन को कम करते हैं।
  • इम्यून सिस्टम को मॉड्यूलेट करके इंफ्लेमेशन कंट्रोल करते हैं।
  • जोड़ों के दर्द और स्टिफनेस को कम करने में मदद करते हैं।
  • इसके एंटीऑक्सिडेंट गुण सेल डैमेज को कम करते हैं।

2. गिलोय और अदरक

  • अदरक के जिंजरोल्स दर्द और सूजन को कम करते हैं।
  • ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाकर जकड़न घटाते हैं।
  • गिलोय इम्यून बैलेंस और टॉक्सिन क्लियरेंस में मदद करता है।
  • दोनों मिलकर इंफ्लेमेशन और पेन सिग्नल्स को कम करते हैं।

3. गिलोय और अश्वगंधा

  • अश्वगंधा का एडाप्टोजेनिक प्रभाव स्ट्रेस-इंफ्लेमेशन को घटाता है।
  • मसल्स और जॉइंट स्ट्रेंथ को सपोर्ट करता है।
  • गिलोय इम्यून-रिलेटेड सूजन को कंट्रोल करता है।
  • दर्द और जॉइंट स्टिफनेस में राहत मिलती है।

4. गिलोय और गुग्गुल

  • गुग्गुल इंफ्लेमेटरी मार्कर्स (जैसे साइटोकाइन्स) को कम करता है।
  • क्रॉनिक जॉइंट पेन और सूजन को कम करता है।
  • गिलोय डिटॉक्स और इम्यून रेगुलेशन में मदद करता है।
  • आर्थराइटिस में सूजन और अकड़न कम करने में सहायक है।

5. गिलोय और निर्गुंडी

  • निर्गुंडी में एनाल्जेसिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।
  • नसों और मांसपेशियों के दर्द को कम करने में मदद मिलती है।
  • गिलोय इम्यून रिस्पॉन्स और सूजन को कंट्रोल करता है।
  • दोनों मिलकर जॉइंट पेन, सूजन और स्टिफनेस घटाते हैं।

सवाल- इन दर्द निवारक घरेलू नुस्खों को कैसे तैयार करें?

जवाब- ये दर्द निवारक घरेलू नुस्खे ऐसे तैयार करें-

गिलोय+हल्दी/अदरक: आधा चम्मच गिलोय पाउडर में चुटकी भर हल्दी या अदरक मिलाकर गुनगुने पानी के साथ लें।

गिलोय+अश्वगंधा: दोनों का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर लें।

गिलोय+गुग्गुल: यह आमतौर पर टैबलेट या पाउडर के रूप में लिया जाता है।

गिलोय+निर्गुंडी: काढ़े के रूप में या तेल से मालिश के लिए इस्तेमाल करें।

  • सभी नुस्खे साफ-सफाई का ध्यान रखकर और सीमित मात्रा में ही तैयार करें।
  • गिलोय को काढ़े या पाउडर के रूप में लिया जा सकता है।

सवाल- ये नुस्खे दिन में कितनी बार और कितने दिन तक लेने चाहिए?

जवाब- आमतौर पर दिन में 1-2 बार लिया जा सकता है।

  • गिलोय वाले नुस्खे सुबह या शाम लेना बेहतर माना जाता है।
  • इन्हें 4-8 हफ्ते तक लगातार लिया जा सकता है।
  • आयुर्वेदिक उपाय धीरे असर करते हैं, इसलिए धैर्य बनाए रखें।
  • लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

सवाल- इन्हें खाली पेट लेना सही है या खाने के बाद लेना ठीक है?

जवाब- इसका सही समय आपकी पाचन क्षमता और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

  • गिलोय और हल्दी जैसे नुस्खे खाली पेट लेने से बेहतर अवशोषित होते हैं।
  • अगर गैस, एसिडिटी या कमजोर पाचन है, तो खाने के बाद लें।
  • अश्वगंधा और गुग्गुल भोजन के बाद लेना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
  • कोई परेशानी हो तो डॉक्टर की सलाह लें।

सवाल- क्या इन दर्द-निवारक घरेलू नुस्खों का कोई साइड इफेक्ट भी हो सकता है?

जवाब- ज्यादा मात्रा या लंबे समय तक लेने पर कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।

  • ज्यादा गिलोय से लो ब्लड शुगर, कमजोरी हो सकती है।
  • गुग्गुल से कुछ लोगों में पेट की जलन या एलर्जी हो सकती है।
  • अश्वगंधा से नींद या थकान बढ़ सकती है।
  • इसलिए सही मात्रा और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

सवाल- घरेलू नुस्खे लेते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?

जवाब- जड़ी-बूटियां हमेशा भरोसेमंद सोर्स से लें और शुद्धता का ध्यान रखें।

  • सही मात्रा में और रेगुलर खाएं।
  • एक साथ कई नुस्खे न अपनाएं।
  • अगर कोई बीमारी है या दवा चल रही है तो पहले डॉक्टर से सलाह लें।
  • दर्द, सूजन बढ़े या कोई समस्या दिखे तो तुरंत बंद करें और डॉक्टर से कंसल्ट करें।

सवाल- अगर बीपी, डायबिटीज या थायरॉइड की दवा चल रही है, तब भी ये नुस्खे ले सकते हैं?

जवाब- सावधानी के साथ ही लें। ये बातें ध्यान रखें-

  • कोई भी हर्बल नुस्खा शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
  • गिलोय और अश्वगंधा ब्लड शुगर कम कर सकते हैं, इसलिए डायबिटीज में सावधानी रखें।
  • कुछ जड़ी-बूटियां BP को प्रभावित कर सकती हैं, दवा के साथ लेने पर असंतुलन हो सकता है।
  • अश्वगंधा थायरॉइड हॉॅर्मोन को प्रभावित कर सकती है।
  • हर्बल चीजें दवाओं के असर को बढ़ा या घटा सकती हैं।
  • सही मात्रा और समय का ध्यान रखें।
  • बिना सलाह के ज्यादा या लंबे समय तक न लें।
  • शुगर, BP और थायरॉइड की नियमित जांच कराएं।
  • कोई भी अलार्मिंग लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

सवाल- आर्थराइटिस के केस में किन लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए? कब डॉक्टर को दिखाना अनिवार्य है?

जवाब- इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें-

  • लगातार या बढ़ता हुआ दर्द हो।
  • जोड़ों में सूजन और अकड़न हो।
  • जॉइंट्स लाल या गर्म हो रहे हों।
  • चलने-फिरने में दिक्कत हो।
  • जोड़ों से आवाज (क्रैकिंग) आए।
  • अचानक तेज दर्द या सूजन बढ़े।
  • बुखार के साथ जॉइंट पेन हो।
  • वजन कम हो या बढ़े।

इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं-

  • दर्द 2-3 हफ्ते से ज्यादा बना रहे।
  • सूजन और दर्द लगातार बढ़ रहा हो।
  • जॉइंट का शेप बदलने लगे।
  • हाथ-पैर सुन्न या बहुत कमजोर लगे।
  • दवाओं/घरेलू नुस्खों से राहत न मिले।

……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- फर्मेंटेड फूड खाने से बच्ची की मौत:गर्मियों में ओवर फर्मेंटेशन से इन हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क, बरतें 5 सावधानियां

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46 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनिया में 50 करोड़ से ज्यादा लोगों को आर्थराइटिस है। किसी की समस्या मॉडरेट है तो किसी की गंभीर।

आर्थराइटिस के कारण शुरू हुआ जॉइंट पेन लगभग पूरी जिंदगी बना रहता है। कुछ लोग इससे राहत के लिए पेन किलर खाते हैं। ये खतरनाक साबित हो सकता है। इससे किडनी तक डैमेज हो सकती है।

ऐसे में सवाल है कि क्या पेन किलर के बिना भी इस दर्द से राहत मिल सकती है? जवाब है– ‘हां’। जॉइंट पेन में घरेलू नुस्खों से राहत मिलती है।

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  • क्या डायबिटिक और बीपी पेशेंट भी ये घरेलू नुस्खे ले सकते हैं?

एक्सपर्ट: डॉ. पी.के. श्रीवास्तव, पूर्व सीनियर कंसल्टेंट, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, लखनऊ

सवाल- आर्थराइटिस क्या है?

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सवाल- आर्थराइटिस क्यों होता है?

जवाब- आर्थराइटिस में कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगता है या उनमें सूजन आ जाती है।

  • इसकी सबसे कॉमन वजह उम्र बढ़ना है, क्योंकि समय के साथ जोड़ों की फ्लैक्सिबिलिटी कम हो जाती है।
  • मोटापा यानी ज्यादा वजन भी जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे कार्टिलेज डैमेज होता है।
  • पुरानी चोट, गलत तरीके से बैठने-उठने की आदतें, ज्यादा मेहनत वाले काम और विटामिन D या कैल्शियम की कमी भी आर्थराइटिस का कारण बन सकती है।
  • कुछ मामलों में ऑटोइम्यून कंडीशन के कारण भी आर्थराइटिस हो सकता है। इसे रूमेटॉइड आर्थराइटिस कहते हैं।

सवाल- आर्थराइटिस के दर्द से राहत के लिए लोग अक्सर पेनकिलर ले लेते हैं? इसमें रोज पेन किलर खाना क्यों खतरनाक है?

जवाब- आर्थराइटिस के दर्द में पेनकिलर तुरंत राहत तो देते हैं, लेकिन इन्हें रोज खाने से बहुत नुकसान हो सकता है। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या पेन किलर के बिना भी आर्थराइटिस के दर्द से राहत मिल सकती है?

जवाब- हां, कई मामलों में पेन किलर के बिना भी आर्थराइटिस के दर्द को कंट्रोल किया जा सकता है। इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि-

  • नियमित हल्की एक्सरसाइज करें।
  • फिजियोथेरेपी लें।
  • वजन कंट्रोल में रखें।
  • पौष्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट लें।
  • योग और स्ट्रेचिंग करें।
  • जोड़ों की सिंकाई करें।

इसके अलावा कुछ हर्ब्स में प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सूजन कम कर सकते हैं।

सवाल- आर्थराइटिस पेन का घरेलू इलाज क्या है?

जवाब- घरेलू इलाज का मकसद जोड़ों की सूजन को कम करना और जोड़ों को पोषण देना है। कुछ प्रभावी घरेलू नुस्खे ग्राफिक में देखिए-

ऊपर ग्राफिक में दिए घरेलू नुस्खों के अलावा हल्का योग, गुनगुने पानी से स्नान, पर्याप्त नींद और संतुलित डाइट भी घरेलू इलाज का अहम हिस्सा हैं।

आइए, अब इन सभी नुस्खे के बारे में विस्तार से समझिए-

1. गिलोय और हल्दी

  • दोनों में एंटी-इंफ्लेमेटरी कंपाउंड्स (जैसे करक्यूमिन) सूजन को कम करते हैं।
  • इम्यून सिस्टम को मॉड्यूलेट करके इंफ्लेमेशन कंट्रोल करते हैं।
  • जोड़ों के दर्द और स्टिफनेस को कम करने में मदद करते हैं।
  • इसके एंटीऑक्सिडेंट गुण सेल डैमेज को कम करते हैं।

2. गिलोय और अदरक

  • अदरक के जिंजरोल्स दर्द और सूजन को कम करते हैं।
  • ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाकर जकड़न घटाते हैं।
  • गिलोय इम्यून बैलेंस और टॉक्सिन क्लियरेंस में मदद करता है।
  • दोनों मिलकर इंफ्लेमेशन और पेन सिग्नल्स को कम करते हैं।

3. गिलोय और अश्वगंधा

  • अश्वगंधा का एडाप्टोजेनिक प्रभाव स्ट्रेस-इंफ्लेमेशन को घटाता है।
  • मसल्स और जॉइंट स्ट्रेंथ को सपोर्ट करता है।
  • गिलोय इम्यून-रिलेटेड सूजन को कंट्रोल करता है।
  • दर्द और जॉइंट स्टिफनेस में राहत मिलती है।

4. गिलोय और गुग्गुल

  • गुग्गुल इंफ्लेमेटरी मार्कर्स (जैसे साइटोकाइन्स) को कम करता है।
  • क्रॉनिक जॉइंट पेन और सूजन को कम करता है।
  • गिलोय डिटॉक्स और इम्यून रेगुलेशन में मदद करता है।
  • आर्थराइटिस में सूजन और अकड़न कम करने में सहायक है।

5. गिलोय और निर्गुंडी

  • निर्गुंडी में एनाल्जेसिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।
  • नसों और मांसपेशियों के दर्द को कम करने में मदद मिलती है।
  • गिलोय इम्यून रिस्पॉन्स और सूजन को कंट्रोल करता है।
  • दोनों मिलकर जॉइंट पेन, सूजन और स्टिफनेस घटाते हैं।

सवाल- इन दर्द निवारक घरेलू नुस्खों को कैसे तैयार करें?

जवाब- ये दर्द निवारक घरेलू नुस्खे ऐसे तैयार करें-

गिलोय+हल्दी/अदरक: आधा चम्मच गिलोय पाउडर में चुटकी भर हल्दी या अदरक मिलाकर गुनगुने पानी के साथ लें।

गिलोय+अश्वगंधा: दोनों का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर लें।

गिलोय+गुग्गुल: यह आमतौर पर टैबलेट या पाउडर के रूप में लिया जाता है।

गिलोय+निर्गुंडी: काढ़े के रूप में या तेल से मालिश के लिए इस्तेमाल करें।

  • सभी नुस्खे साफ-सफाई का ध्यान रखकर और सीमित मात्रा में ही तैयार करें।
  • गिलोय को काढ़े या पाउडर के रूप में लिया जा सकता है।

सवाल- ये नुस्खे दिन में कितनी बार और कितने दिन तक लेने चाहिए?

जवाब- आमतौर पर दिन में 1-2 बार लिया जा सकता है।

  • गिलोय वाले नुस्खे सुबह या शाम लेना बेहतर माना जाता है।
  • इन्हें 4-8 हफ्ते तक लगातार लिया जा सकता है।
  • आयुर्वेदिक उपाय धीरे असर करते हैं, इसलिए धैर्य बनाए रखें।
  • लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

सवाल- इन्हें खाली पेट लेना सही है या खाने के बाद लेना ठीक है?

जवाब- इसका सही समय आपकी पाचन क्षमता और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

  • गिलोय और हल्दी जैसे नुस्खे खाली पेट लेने से बेहतर अवशोषित होते हैं।
  • अगर गैस, एसिडिटी या कमजोर पाचन है, तो खाने के बाद लें।
  • अश्वगंधा और गुग्गुल भोजन के बाद लेना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
  • कोई परेशानी हो तो डॉक्टर की सलाह लें।

सवाल- क्या इन दर्द-निवारक घरेलू नुस्खों का कोई साइड इफेक्ट भी हो सकता है?

जवाब- ज्यादा मात्रा या लंबे समय तक लेने पर कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।

  • ज्यादा गिलोय से लो ब्लड शुगर, कमजोरी हो सकती है।
  • गुग्गुल से कुछ लोगों में पेट की जलन या एलर्जी हो सकती है।
  • अश्वगंधा से नींद या थकान बढ़ सकती है।
  • इसलिए सही मात्रा और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

सवाल- घरेलू नुस्खे लेते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?

जवाब- जड़ी-बूटियां हमेशा भरोसेमंद सोर्स से लें और शुद्धता का ध्यान रखें।

  • सही मात्रा में और रेगुलर खाएं।
  • एक साथ कई नुस्खे न अपनाएं।
  • अगर कोई बीमारी है या दवा चल रही है तो पहले डॉक्टर से सलाह लें।
  • दर्द, सूजन बढ़े या कोई समस्या दिखे तो तुरंत बंद करें और डॉक्टर से कंसल्ट करें।

सवाल- अगर बीपी, डायबिटीज या थायरॉइड की दवा चल रही है, तब भी ये नुस्खे ले सकते हैं?

जवाब- सावधानी के साथ ही लें। ये बातें ध्यान रखें-

  • कोई भी हर्बल नुस्खा शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
  • गिलोय और अश्वगंधा ब्लड शुगर कम कर सकते हैं, इसलिए डायबिटीज में सावधानी रखें।
  • कुछ जड़ी-बूटियां BP को प्रभावित कर सकती हैं, दवा के साथ लेने पर असंतुलन हो सकता है।
  • अश्वगंधा थायरॉइड हॉॅर्मोन को प्रभावित कर सकती है।
  • हर्बल चीजें दवाओं के असर को बढ़ा या घटा सकती हैं।
  • सही मात्रा और समय का ध्यान रखें।
  • बिना सलाह के ज्यादा या लंबे समय तक न लें।
  • शुगर, BP और थायरॉइड की नियमित जांच कराएं।
  • कोई भी अलार्मिंग लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

सवाल- आर्थराइटिस के केस में किन लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए? कब डॉक्टर को दिखाना अनिवार्य है?

जवाब- इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें-

  • लगातार या बढ़ता हुआ दर्द हो।
  • जोड़ों में सूजन और अकड़न हो।
  • जॉइंट्स लाल या गर्म हो रहे हों।
  • चलने-फिरने में दिक्कत हो।
  • जोड़ों से आवाज (क्रैकिंग) आए।
  • अचानक तेज दर्द या सूजन बढ़े।
  • बुखार के साथ जॉइंट पेन हो।
  • वजन कम हो या बढ़े।

इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं-

  • दर्द 2-3 हफ्ते से ज्यादा बना रहे।
  • सूजन और दर्द लगातार बढ़ रहा हो।
  • जॉइंट का शेप बदलने लगे।
  • हाथ-पैर सुन्न या बहुत कमजोर लगे।
  • दवाओं/घरेलू नुस्खों से राहत न मिले।

……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- फर्मेंटेड फूड खाने से बच्ची की मौत:गर्मियों में ओवर फर्मेंटेशन से इन हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क, बरतें 5 सावधानियां

ओडिशा के मयूरभंज जिले के एक सरकारी स्कूल में फर्मेंटेड चावल खाने के बाद एक 12 साल की बच्ची की मौत हो गई। वहीं 150 से ज्यादा बच्चे बीमार पड़ गए। बच्चों ने पखाला भात (फर्मेंटेड चावल), आलू भरता और आम की चटनी खाई थी। आगे पढ़िए…

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