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High Cholesterol Vs High Blood Pressure: हाई कोलेस्ट्रॉल या हाई बीपी? दिल को किससे ज्यादा खतरा

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आज के समय में हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बहुत ही कॉमन हो गयी है. दोनों ही दिल की गंभीर और जानलेवा कंडीशन के मेन रिस्क फैक्टर भी हैं. खराब जीवनशैली, खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी, तनाव के कारण इन दोनों समस्याओं के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है. लेकिन क्या आप जानते हैं हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर में से कौन हार्ट हेल्थ के लिए ज्यादा जानलेवा साबित होता है?

वैसे तो अगर समय पर जरूरी कदम न उठाया जाए और कंट्रोल किया जाए तो दोनों ही दिल के लिए बेहद हानिकारक हो सकते हैं. लेकिन डॉ. पवन पारसनाथ सिंह, सलाहकार – कार्डियो थोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी, यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आगरा बताते हैं कि हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई बीपी एक दूसरे सपोर्ट करते हैं. यानी कि यदि आपको हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है तो धीरे-धीरे आपको हाई बीपी की शिकायत भी होने लगेगी. इसलिए हेल्दी हार्ट के लिए जरूरी है कि दोनों के लक्षणों को समय रहते पहचानें और इन्हें कंट्रोल रखें.

हाई कोलेस्ट्रॉल में क्या होता है?
हाई कोलेस्ट्रॉल तब होता है जब शरीर में लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL), जिसे “बैड कोलेस्ट्रॉल” कहा जाता है, का स्तर बढ़ जाता है. समय के साथ यह LDL धमनियों की अंदरूनी दीवारों पर जमने लगता है और धीरे-धीरे प्लाक का निर्माण करता है. इस प्रक्रिया के कारण धमनियां संकरी हो जाती हैं और रक्त का प्रवाह बाधित होने लगता है. इस स्थिति को “एथेरोस्क्लेरोसिस” कहा जाता है. जैसे-जैसे धमनियां सख्त और संकरी होती जाती हैं, दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है. हाई कोलेस्ट्रॉल को अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योंकि इसके कोई स्पष्ट शुरुआती लक्षण नहीं होते, और व्यक्ति को तब तक पता नहीं चलता जब तक कोई गंभीर समस्या, जैसे हार्ट अटैक, सामने नहीं आ जाती.

हाई ब्लड प्रेशर में क्या समस्या होती है?
हाई ब्लड प्रेशर भी दिल और रक्त वाहिकाओं पर लगातार दबाव डालता है. जब ब्लड प्रेशर लंबे समय तक अधिक रहता है, तो दिल को शरीर में खून पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है. समय के साथ यह अतिरिक्त दबाव दिल की मांसपेशियों को मोटा और कमजोर बना सकता है, जिससे हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा, हाई ब्लड प्रेशर किडनी और मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे किडनी की बीमारी और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. कई लोगों को इसके लक्षण जैसे सिरदर्द, चक्कर आना या धुंधला दिखना महसूस हो सकता है, लेकिन अधिकतर मामलों में यह बिना किसी स्पष्ट संकेत के भी बढ़ता रहता है.

डॉक्टर से कब मिलना जरूरी
अगर किसी व्यक्ति को सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक थकान या अचानक बेहोशी जैसा महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाना बहुत जरूरी है ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता चल सके और उचित इलाज किया जा सके.

इन बातों का ध्यान रखें
अच्छी बात यह है कि हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर दोनों को जीवनशैली में बदलाव करके कंट्रोल किया जा सकता है. ऐसे में संतुलित आहार जिसमें ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और स्वस्थ वसा शामिल हों, दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है. नियमित शारीरिक गतिविधियां जैसे पैदल चलना, योग या व्यायाम भी दिल को मजबूत बनाती हैं. इसके साथ ही धूम्रपान से बचना, शराब का सीमित सेवन करना, तनाव को कंट्रोल करना और शरीर का स्वस्थ वजन बनाए रखना भी बेहद जरूरी है.

FAQ
हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर में कौन ज्यादा खतरनाक है?
दोनों ही स्थितियां दिल के लिए खतरनाक हैं. अगर इनका समय पर इलाज न किया जाए, तो दोनों ही हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती हैं.

हाई कोलेस्ट्रॉल के लक्षण क्या होते हैं?
हाई कोलेस्ट्रॉल के आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते. इसे “साइलेंट किलर” कहा जाता है और अक्सर इसका पता जांच के दौरान ही चलता है.

हाई ब्लड प्रेशर के सामान्य लक्षण क्या हैं?
कुछ लोगों में सिरदर्द, चक्कर आना, धुंधला दिखना जैसे लक्षण हो सकते हैं, लेकिन कई मामलों में इसके कोई लक्षण नहीं होते.

क्या जीवनशैली में बदलाव से कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर कंट्रोल हो सकता है?
हां, हेल्दी डाइट, नियमित व्यायाम, तनाव कम करना और धूम्रपान से बचना इन दोनों समस्याओं को कंट्रोल करने में मदद करता है.

कितनी उम्र के बाद ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए?
30 साल की उम्र के बाद नियमित रूप से इनकी जांच करानी चाहिए, ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता चल सके.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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वैसे तो अगर समय पर जरूरी कदम न उठाया जाए और कंट्रोल किया जाए तो दोनों ही दिल के लिए बेहद हानिकारक हो सकते हैं. लेकिन डॉ. पवन पारसनाथ सिंह, सलाहकार – कार्डियो थोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी, यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आगरा बताते हैं कि हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई बीपी एक दूसरे सपोर्ट करते हैं. यानी कि यदि आपको हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है तो धीरे-धीरे आपको हाई बीपी की शिकायत भी होने लगेगी. इसलिए हेल्दी हार्ट के लिए जरूरी है कि दोनों के लक्षणों को समय रहते पहचानें और इन्हें कंट्रोल रखें.

हाई कोलेस्ट्रॉल में क्या होता है?
हाई कोलेस्ट्रॉल तब होता है जब शरीर में लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL), जिसे “बैड कोलेस्ट्रॉल” कहा जाता है, का स्तर बढ़ जाता है. समय के साथ यह LDL धमनियों की अंदरूनी दीवारों पर जमने लगता है और धीरे-धीरे प्लाक का निर्माण करता है. इस प्रक्रिया के कारण धमनियां संकरी हो जाती हैं और रक्त का प्रवाह बाधित होने लगता है. इस स्थिति को “एथेरोस्क्लेरोसिस” कहा जाता है. जैसे-जैसे धमनियां सख्त और संकरी होती जाती हैं, दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है. हाई कोलेस्ट्रॉल को अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योंकि इसके कोई स्पष्ट शुरुआती लक्षण नहीं होते, और व्यक्ति को तब तक पता नहीं चलता जब तक कोई गंभीर समस्या, जैसे हार्ट अटैक, सामने नहीं आ जाती.

हाई ब्लड प्रेशर में क्या समस्या होती है?
हाई ब्लड प्रेशर भी दिल और रक्त वाहिकाओं पर लगातार दबाव डालता है. जब ब्लड प्रेशर लंबे समय तक अधिक रहता है, तो दिल को शरीर में खून पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है. समय के साथ यह अतिरिक्त दबाव दिल की मांसपेशियों को मोटा और कमजोर बना सकता है, जिससे हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा, हाई ब्लड प्रेशर किडनी और मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे किडनी की बीमारी और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. कई लोगों को इसके लक्षण जैसे सिरदर्द, चक्कर आना या धुंधला दिखना महसूस हो सकता है, लेकिन अधिकतर मामलों में यह बिना किसी स्पष्ट संकेत के भी बढ़ता रहता है.

डॉक्टर से कब मिलना जरूरी
अगर किसी व्यक्ति को सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक थकान या अचानक बेहोशी जैसा महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाना बहुत जरूरी है ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता चल सके और उचित इलाज किया जा सके.

इन बातों का ध्यान रखें
अच्छी बात यह है कि हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर दोनों को जीवनशैली में बदलाव करके कंट्रोल किया जा सकता है. ऐसे में संतुलित आहार जिसमें ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और स्वस्थ वसा शामिल हों, दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है. नियमित शारीरिक गतिविधियां जैसे पैदल चलना, योग या व्यायाम भी दिल को मजबूत बनाती हैं. इसके साथ ही धूम्रपान से बचना, शराब का सीमित सेवन करना, तनाव को कंट्रोल करना और शरीर का स्वस्थ वजन बनाए रखना भी बेहद जरूरी है.

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हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर में कौन ज्यादा खतरनाक है?
दोनों ही स्थितियां दिल के लिए खतरनाक हैं. अगर इनका समय पर इलाज न किया जाए, तो दोनों ही हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती हैं.

हाई कोलेस्ट्रॉल के लक्षण क्या होते हैं?
हाई कोलेस्ट्रॉल के आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते. इसे “साइलेंट किलर” कहा जाता है और अक्सर इसका पता जांच के दौरान ही चलता है.

हाई ब्लड प्रेशर के सामान्य लक्षण क्या हैं?
कुछ लोगों में सिरदर्द, चक्कर आना, धुंधला दिखना जैसे लक्षण हो सकते हैं, लेकिन कई मामलों में इसके कोई लक्षण नहीं होते.

क्या जीवनशैली में बदलाव से कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर कंट्रोल हो सकता है?
हां, हेल्दी डाइट, नियमित व्यायाम, तनाव कम करना और धूम्रपान से बचना इन दोनों समस्याओं को कंट्रोल करने में मदद करता है.

कितनी उम्र के बाद ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए?
30 साल की उम्र के बाद नियमित रूप से इनकी जांच करानी चाहिए, ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता चल सके.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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