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क्लॉकवाइज घूमना चाहिए या एंटी क्लॉकवाइज, क्या सही, साइंस और मान्यताएं क्या कहती हैं

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अक्सर जब आप किसी पार्क या ट्रैक पर एक सर्किल में घूम रहे हों तो कुछ लोग वहां क्लॉकवाइज दिशा में चलते नजर आते हैं और कुछ एंटी क्लॉकवाइज. कुछ लोग ये दावा करते हैं कि उनके घूमने की दिशा ही ठीक है, उसे लेकर वो अपने अपने तर्क भी देते हैं. आखिर किस दिशा में घूमना सही होता है. साइंस ने किसे सही माना है और इसके पीछे वजह क्या है. वैसे आपको बता दें कि अलग मान्यताएं भी इसे लेकर एकमत नहीं हैं.

नई रिसर्च बताती है कि इसका असर दिमाग और शरीर की कोशिकाओं पर पड़ता है. तो अब हम आपको बताते हैं कि कौन सी दिशा में घूमना ज्यादा नेचुरल है. साइंटिस्टों ने लोगों के दिमाग को स्कैन करके पाया कि जब हम उल्टी दिशा में यानि एंटीक्लॉकवाइज घूमते हैं तो दिमाग का बायां हिस्सा एक्टिव होता है. यह वो हिस्सा है जो अच्छा लगना यानि पॉजिटिव फीलिंग्स से जुड़ा होता है.

आपका दिमाग एंटी क्लॉकवाइज यानि उल्टी दिशा को ज्यादा आसान और अच्छा मानता है. सीधी दिशा में सोचने पर दिमाग को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. हालांकि साइंस की वर्ष 2025 में आई नई रिसर्च कहती है, जब कोशिकाएं कमज़ोर होती हैं तो वे क्लॉकवाइज घूमती हैं. जब कोशिकाएं ताकतवर या ज्यादा एनर्जी लगाती हैं, तो वे एंटी क्लॉकवाइज घूमने लगती हैं.

सुबह बहुत से लोग पार्क या मार्निंगवॉक ट्रैक पर क्लॉकवाइज वॉक करते दीखते हैं तो कई एंटी क्लॉकवाइज. (news18 ai image)

वैसे भारत की हिंदू परंपरा में क्लॉकवाइज घूमना शुभ माना जाता है. वहीं इस्लाम में एंटीक्लॉकवाइज घूमने शुभ माना जाता है.

दिमाग को क्या पसंद है

साइंस कहती है आपके दिमाग को एंटीक्लॉकवाइज चलना ज्यादा पसंद है और ये ज्यादा नेचुरल है. वैसे साइंस ये भी कहती है कि आपका दिमाग पहले से जानता है कि आपका हाथ पैर कितना घूम सकता है और किधर घूम सकता है, किधर नहीं. हालांकि विज्ञान ये भी कहता है कि ‘सही’ दिशा जैसी कोई चीज़ नहीं है. घूमने की दिशा आपकी सुविधा पर निर्भर करती है.

अगर आप उत्तरी ध्रुव के ऊपर से अंतरिक्ष में खड़े हों, तो पृथ्वी एंटी-क्लॉकवाइज घूमती है. यदि दक्षिणी ध्रुव से देखें तो क्लॉकवाइज. पंखे, स्क्रू, बोल्ट, घड़ी क्लॉककवाइज घूमती है, इसकी वजह ये होती है कि अधिकांश लोग दाएं हाथ से ज्यादा बल लगा पाते हैं. वैसे एंटी क्लॉकवाइज के समर्थन में ये भी कहा जाता है कि इस तरह वॉक करने से पृथ्वी के प्राकृतिक चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.

कौन लोग क्लॉकवाइज घूमते हैं

अगर आपने क्लॉकवाइज चलना स्वाभाविक रूप से अपनाया है, तो यह आपके शरीर के अपने ‘बैलेंसिंग मैकेनिज्म’ का हिस्सा हो सकता है. विज्ञान कहता है कि ज्यादातर लोग जिनका दाहिना पैर ज्यादा सक्रिय या मजबूत होता है, वे स्वाभाविक रूप से एंटी-क्लॉकवाइज मुड़ना पसंद करते हैं क्योंकि बायां पैर एक ‘धुरी’ का काम करता है.

यदि आप क्लॉकवाइज चल रहे हैं, तो हो सकता है कि आपका बायां पैर ज्यादा ‘डोमिनेंट’ हो…(news18 ai image)

यदि आप क्लॉकवाइज चल रहे हैं, तो हो सकता है कि आपका बायां पैर ज्यादा ‘डोमिनेंट’ हो या आपके शरीर का गुरुत्वाकर्षण केंद्र इस दिशा में खुद को बेहतर तरीके से संतुलित कर पा रहा हो. दिमाग हमेशा उस रास्ते को चुनता है जहां उसे कम ऊर्जा खर्च करनी पड़े.

वैसे नई रिसर्च और स्पोर्ट्स साइंस अब किसी एक दिशा को “परफेक्ट” मानने के बजाय विविधता पर जोर देते हैं.

अगर आप एक ही दिशा में रोज चलते हैं तो …

अगर आप रोज एक ही दिशा में चलते हैं, तो आपके दाहिने पैर के जोड़ों और मांसपेशियों पर बाएं के मुकाबले ज्यादा तनाव पड़ता है. लंबे समय में यह शरीर के एलाइनमेंट में हल्का असंतुलन पैदा कर सकता है. दिशा बदलने से दिमाग को नया ‘चैलेंज’ मिलता है. जब आप अपनी आदत के विपरीत एंटी-क्लॉकवाइज चलते हैं, तो आपका मस्तिष्क और अधिक सतर्क हो जाता है, जिससे न्यूरल पाथवेज मजबूत होते हैं

वैसे हृदय की स्थिति के कारण एंटी-क्लॉकवाइज को थोड़ा बेहतर माना गया है, लेकिन सामान्य वॉक के लिए ये अंतर इतना कम है कि इसे नजरअंदाज किया जा सकता है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं अपने वॉक के समय को दो हिस्सों में बांटें. आधा समय क्लॉकवाइज चलें और आधा एंटी-क्लॉकवाइज. इससे दोनों पैरों की मांसपेशियों पर समान जोर पड़ेगा.

अगर क्लॉकवाइज चलने में आपके घुटनों या कूल्हों में कोई दर्द नहीं है, तो आपकी बॉडी इस दिशा में अनुकूलित हो चुकी है.

हिंदू धर्म में क्या मान्यता है

हिंदू धर्म में क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा को शुभ माना जाता है. मंदिरों में देवी-देवताओं की परिक्रमा दक्षिणावर्त की जाती है. ऐसा ही बौद्ध और जैन धर्म के मंदिरों में भी है. इसका अर्थ है सूर्य की गति का अनुसरण करना. विवाह, यज्ञ, और शुभ कार्यों में दाएं से बाएं घूमना शुभ होता है. एंटी-क्लॉकवाइज को अशुभ, प्रेत-योनि या अंतिम संस्कार की क्रिया से जोड़ा जाता है.

इस्लाम में काबा की परिक्रमा एंटी-क्लॉकवाइज में की जाती है. हज के दौरान सात बार काबा का चक्कर बाईं ओर शुरू करके लगाया जाता है. यह इस्लाम की एक विशिष्ट परंपरा है जो एकेश्वरवादी आस्था का प्रतीक है.

सुबह वॉक करें या शाम को

सुबह पार्क में पैदल वाक करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. इससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है. दिनभर ऊर्जा बनी रहती है. शाम की वाक भी तनाव कम करने में अच्छी है. सुबह खाली पेट वाक करने से फैट बर्निंग बेहतर होती है. मूड अच्छा रहता है. मानसिक स्वास्थ्य मजबूत होता है पार्क में ताजी हवा मिलने से इम्युनिटी बढ़ती है. शाम को वाक से दिनभर का स्ट्रेस कम होता है. नींद अच्छी आती है. ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है. काम के बाद रिलैक्सेशन के लिए बेहतर.

40-45 मिनट तेज वाक करें, सीधी लाइन में चलें न कि गोल चक्कर लगा. मौसम के अनुसार समय चुनें—गर्मी में शाम बेहतर है.

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क्लॉकवाइज घूमना चाहिए या एंटी क्लॉकवाइज, क्या सही, साइंस और मान्यताएं क्या कहती हैं

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अक्सर जब आप किसी पार्क या ट्रैक पर एक सर्किल में घूम रहे हों तो कुछ लोग वहां क्लॉकवाइज दिशा में चलते नजर आते हैं और कुछ एंटी क्लॉकवाइज. कुछ लोग ये दावा करते हैं कि उनके घूमने की दिशा ही ठीक है, उसे लेकर वो अपने अपने तर्क भी देते हैं. आखिर किस दिशा में घूमना सही होता है. साइंस ने किसे सही माना है और इसके पीछे वजह क्या है. वैसे आपको बता दें कि अलग मान्यताएं भी इसे लेकर एकमत नहीं हैं.

नई रिसर्च बताती है कि इसका असर दिमाग और शरीर की कोशिकाओं पर पड़ता है. तो अब हम आपको बताते हैं कि कौन सी दिशा में घूमना ज्यादा नेचुरल है. साइंटिस्टों ने लोगों के दिमाग को स्कैन करके पाया कि जब हम उल्टी दिशा में यानि एंटीक्लॉकवाइज घूमते हैं तो दिमाग का बायां हिस्सा एक्टिव होता है. यह वो हिस्सा है जो अच्छा लगना यानि पॉजिटिव फीलिंग्स से जुड़ा होता है.

आपका दिमाग एंटी क्लॉकवाइज यानि उल्टी दिशा को ज्यादा आसान और अच्छा मानता है. सीधी दिशा में सोचने पर दिमाग को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. हालांकि साइंस की वर्ष 2025 में आई नई रिसर्च कहती है, जब कोशिकाएं कमज़ोर होती हैं तो वे क्लॉकवाइज घूमती हैं. जब कोशिकाएं ताकतवर या ज्यादा एनर्जी लगाती हैं, तो वे एंटी क्लॉकवाइज घूमने लगती हैं.

सुबह बहुत से लोग पार्क या मार्निंगवॉक ट्रैक पर क्लॉकवाइज वॉक करते दीखते हैं तो कई एंटी क्लॉकवाइज. (news18 ai image)

वैसे भारत की हिंदू परंपरा में क्लॉकवाइज घूमना शुभ माना जाता है. वहीं इस्लाम में एंटीक्लॉकवाइज घूमने शुभ माना जाता है.

दिमाग को क्या पसंद है

साइंस कहती है आपके दिमाग को एंटीक्लॉकवाइज चलना ज्यादा पसंद है और ये ज्यादा नेचुरल है. वैसे साइंस ये भी कहती है कि आपका दिमाग पहले से जानता है कि आपका हाथ पैर कितना घूम सकता है और किधर घूम सकता है, किधर नहीं. हालांकि विज्ञान ये भी कहता है कि ‘सही’ दिशा जैसी कोई चीज़ नहीं है. घूमने की दिशा आपकी सुविधा पर निर्भर करती है.

अगर आप उत्तरी ध्रुव के ऊपर से अंतरिक्ष में खड़े हों, तो पृथ्वी एंटी-क्लॉकवाइज घूमती है. यदि दक्षिणी ध्रुव से देखें तो क्लॉकवाइज. पंखे, स्क्रू, बोल्ट, घड़ी क्लॉककवाइज घूमती है, इसकी वजह ये होती है कि अधिकांश लोग दाएं हाथ से ज्यादा बल लगा पाते हैं. वैसे एंटी क्लॉकवाइज के समर्थन में ये भी कहा जाता है कि इस तरह वॉक करने से पृथ्वी के प्राकृतिक चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.

कौन लोग क्लॉकवाइज घूमते हैं

अगर आपने क्लॉकवाइज चलना स्वाभाविक रूप से अपनाया है, तो यह आपके शरीर के अपने ‘बैलेंसिंग मैकेनिज्म’ का हिस्सा हो सकता है. विज्ञान कहता है कि ज्यादातर लोग जिनका दाहिना पैर ज्यादा सक्रिय या मजबूत होता है, वे स्वाभाविक रूप से एंटी-क्लॉकवाइज मुड़ना पसंद करते हैं क्योंकि बायां पैर एक ‘धुरी’ का काम करता है.

यदि आप क्लॉकवाइज चल रहे हैं, तो हो सकता है कि आपका बायां पैर ज्यादा ‘डोमिनेंट’ हो…(news18 ai image)

यदि आप क्लॉकवाइज चल रहे हैं, तो हो सकता है कि आपका बायां पैर ज्यादा ‘डोमिनेंट’ हो या आपके शरीर का गुरुत्वाकर्षण केंद्र इस दिशा में खुद को बेहतर तरीके से संतुलित कर पा रहा हो. दिमाग हमेशा उस रास्ते को चुनता है जहां उसे कम ऊर्जा खर्च करनी पड़े.

वैसे नई रिसर्च और स्पोर्ट्स साइंस अब किसी एक दिशा को “परफेक्ट” मानने के बजाय विविधता पर जोर देते हैं.

अगर आप एक ही दिशा में रोज चलते हैं तो …

अगर आप रोज एक ही दिशा में चलते हैं, तो आपके दाहिने पैर के जोड़ों और मांसपेशियों पर बाएं के मुकाबले ज्यादा तनाव पड़ता है. लंबे समय में यह शरीर के एलाइनमेंट में हल्का असंतुलन पैदा कर सकता है. दिशा बदलने से दिमाग को नया ‘चैलेंज’ मिलता है. जब आप अपनी आदत के विपरीत एंटी-क्लॉकवाइज चलते हैं, तो आपका मस्तिष्क और अधिक सतर्क हो जाता है, जिससे न्यूरल पाथवेज मजबूत होते हैं

वैसे हृदय की स्थिति के कारण एंटी-क्लॉकवाइज को थोड़ा बेहतर माना गया है, लेकिन सामान्य वॉक के लिए ये अंतर इतना कम है कि इसे नजरअंदाज किया जा सकता है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं अपने वॉक के समय को दो हिस्सों में बांटें. आधा समय क्लॉकवाइज चलें और आधा एंटी-क्लॉकवाइज. इससे दोनों पैरों की मांसपेशियों पर समान जोर पड़ेगा.

अगर क्लॉकवाइज चलने में आपके घुटनों या कूल्हों में कोई दर्द नहीं है, तो आपकी बॉडी इस दिशा में अनुकूलित हो चुकी है.

हिंदू धर्म में क्या मान्यता है

हिंदू धर्म में क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा को शुभ माना जाता है. मंदिरों में देवी-देवताओं की परिक्रमा दक्षिणावर्त की जाती है. ऐसा ही बौद्ध और जैन धर्म के मंदिरों में भी है. इसका अर्थ है सूर्य की गति का अनुसरण करना. विवाह, यज्ञ, और शुभ कार्यों में दाएं से बाएं घूमना शुभ होता है. एंटी-क्लॉकवाइज को अशुभ, प्रेत-योनि या अंतिम संस्कार की क्रिया से जोड़ा जाता है.

इस्लाम में काबा की परिक्रमा एंटी-क्लॉकवाइज में की जाती है. हज के दौरान सात बार काबा का चक्कर बाईं ओर शुरू करके लगाया जाता है. यह इस्लाम की एक विशिष्ट परंपरा है जो एकेश्वरवादी आस्था का प्रतीक है.

सुबह वॉक करें या शाम को

सुबह पार्क में पैदल वाक करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. इससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है. दिनभर ऊर्जा बनी रहती है. शाम की वाक भी तनाव कम करने में अच्छी है. सुबह खाली पेट वाक करने से फैट बर्निंग बेहतर होती है. मूड अच्छा रहता है. मानसिक स्वास्थ्य मजबूत होता है पार्क में ताजी हवा मिलने से इम्युनिटी बढ़ती है. शाम को वाक से दिनभर का स्ट्रेस कम होता है. नींद अच्छी आती है. ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है. काम के बाद रिलैक्सेशन के लिए बेहतर.

40-45 मिनट तेज वाक करें, सीधी लाइन में चलें न कि गोल चक्कर लगा. मौसम के अनुसार समय चुनें—गर्मी में शाम बेहतर है.

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