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मोटापा बना साइलेंट खतरा, आंखों से दिल तक हमला! कानपुर मेडिकल कॉलेज की स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

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Kanpur News: बढ़ता मोटापा शरीर के लिए काफी घातक हो सकता है. कानपुर के मेडिसिन विभाग के सीनियर डॉक्टर एसके गौतम ने 196 मरीजों पर शोध किया, जिसमें सामने आया कि मोटापा आंखों, किडनी, लीवर और दिल पर असर डाल रहा है.

कानपुर: बढ़ता वजन सिर्फ शरीर का आकार नहीं बदलता, यह धीरे-धीरे अंदर से कई अंगों को नुकसान भी पहुंचा सकता है. कानपुर के GSVM Medical College में हुई एक स्टडी ने यही संकेत दिए हैं. यहां मेडिसिन विभाग के सीनियर डॉक्टर एसके गौतम ने 196 मरीजों पर शोध किया, जिसमें सामने आया कि मोटापा आंखों, किडनी, लीवर और दिल पर असर डाल रहा है.

डॉक्टरों के मुताबिक, कई लोग वजन बढ़ने को सामान्य बात मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर बड़ी बीमारी की वजह बन सकती है. स्टडी में शामिल ज्यादातर मरीजों का बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई तय मानक से ज्यादा मिला. इसका मतलब था कि शरीर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो चुका था और इसका असर सेहत पर दिखने लगा था.

सबसे ज्यादा असर किडनी और दिल पर मिला
करीब डेढ़ साल तक चली इस रिसर्च में पाया गया कि 37 प्रतिशत मरीजों की किडनी प्रभावित थी. 23.38 प्रतिशत लोगों में आंखों से जुड़ी दिक्कतें शुरू हो चुकी थीं. 55 प्रतिशत मरीज हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे थे, जबकि 40 प्रतिशत मरीजों में दिल से जुड़ी बीमारियों के संकेत मिले. डॉक्टरों का कहना है कि मोटापा शरीर में सूजन, ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है. यही वजह है कि धीरे-धीरे दिल, किडनी और आंखों पर असर पड़ने लगता है.

समय रहते संभले तो बचाव संभव
डॉ. गौतम ने बताया कि जिन मरीजों की समय पर जांच हुई, उन्हें शुरुआती स्तर पर इलाज दिया गया. दवाएं, खानपान में बदलाव, वजन कम करने की सलाह और नियमित जांच से काफी मरीजों की हालत में सुधार हुआ. कई मरीज पूरी तरह सामान्य स्थिति में लौट आए. उन्होंने कहा कि अगर वजन तेजी से बढ़ रहा है, थकान रहती है, सांस फूलती है या ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है, तो इसे हल्के में न लें बल्कि तुरंत जांच कराएं.

ऐसे समझें अपना बीएमआई
बीएमआई यानी बॉडी मास इंडेक्स से पता चलता है कि आपका वजन आपकी लंबाई के हिसाब से सही है या नहीं है. इसे वजन और लंबाई से निकाला जाता है. आजकल मोबाइल पर भी आसानी से बीएमआई कैलकुलेटर मिल जाते हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, पश्चिमी देशों में 25 से कम बीएमआई सामान्य माना जाता है, लेकिन भारतीयों के लिए 23 से कम बेहतर माना जाता है. अगर बीएमआई 23 से ऊपर है, तो सतर्क हो जाना चाहिए.

अप्रैल 2024 से अक्टूबर 2025 तक चला शोध
यह शोध कार्य अप्रैल 2024 में शुरू हुआ था और अक्टूबर 2025 तक चला. इस दौरान मरीजों की जांच, रिपोर्ट और इलाज के आधार पर निष्कर्ष निकाले गए. डॉक्टरों की साफ सलाह है कि रोज थोड़ा चलें, तला-भुना कम खाएं, मीठा नियंत्रित रखें और वजन को बढ़ने न दें, क्योंकि मोटापा दिखने में भले सामान्य लगे, लेकिन अंदर ही अंदर बड़ा खतरा बन सकता है.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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कानपुर: बढ़ता वजन सिर्फ शरीर का आकार नहीं बदलता, यह धीरे-धीरे अंदर से कई अंगों को नुकसान भी पहुंचा सकता है. कानपुर के GSVM Medical College में हुई एक स्टडी ने यही संकेत दिए हैं. यहां मेडिसिन विभाग के सीनियर डॉक्टर एसके गौतम ने 196 मरीजों पर शोध किया, जिसमें सामने आया कि मोटापा आंखों, किडनी, लीवर और दिल पर असर डाल रहा है.

डॉक्टरों के मुताबिक, कई लोग वजन बढ़ने को सामान्य बात मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर बड़ी बीमारी की वजह बन सकती है. स्टडी में शामिल ज्यादातर मरीजों का बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई तय मानक से ज्यादा मिला. इसका मतलब था कि शरीर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो चुका था और इसका असर सेहत पर दिखने लगा था.

सबसे ज्यादा असर किडनी और दिल पर मिला
करीब डेढ़ साल तक चली इस रिसर्च में पाया गया कि 37 प्रतिशत मरीजों की किडनी प्रभावित थी. 23.38 प्रतिशत लोगों में आंखों से जुड़ी दिक्कतें शुरू हो चुकी थीं. 55 प्रतिशत मरीज हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे थे, जबकि 40 प्रतिशत मरीजों में दिल से जुड़ी बीमारियों के संकेत मिले. डॉक्टरों का कहना है कि मोटापा शरीर में सूजन, ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है. यही वजह है कि धीरे-धीरे दिल, किडनी और आंखों पर असर पड़ने लगता है.

समय रहते संभले तो बचाव संभव
डॉ. गौतम ने बताया कि जिन मरीजों की समय पर जांच हुई, उन्हें शुरुआती स्तर पर इलाज दिया गया. दवाएं, खानपान में बदलाव, वजन कम करने की सलाह और नियमित जांच से काफी मरीजों की हालत में सुधार हुआ. कई मरीज पूरी तरह सामान्य स्थिति में लौट आए. उन्होंने कहा कि अगर वजन तेजी से बढ़ रहा है, थकान रहती है, सांस फूलती है या ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है, तो इसे हल्के में न लें बल्कि तुरंत जांच कराएं.

ऐसे समझें अपना बीएमआई
बीएमआई यानी बॉडी मास इंडेक्स से पता चलता है कि आपका वजन आपकी लंबाई के हिसाब से सही है या नहीं है. इसे वजन और लंबाई से निकाला जाता है. आजकल मोबाइल पर भी आसानी से बीएमआई कैलकुलेटर मिल जाते हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, पश्चिमी देशों में 25 से कम बीएमआई सामान्य माना जाता है, लेकिन भारतीयों के लिए 23 से कम बेहतर माना जाता है. अगर बीएमआई 23 से ऊपर है, तो सतर्क हो जाना चाहिए.

अप्रैल 2024 से अक्टूबर 2025 तक चला शोध
यह शोध कार्य अप्रैल 2024 में शुरू हुआ था और अक्टूबर 2025 तक चला. इस दौरान मरीजों की जांच, रिपोर्ट और इलाज के आधार पर निष्कर्ष निकाले गए. डॉक्टरों की साफ सलाह है कि रोज थोड़ा चलें, तला-भुना कम खाएं, मीठा नियंत्रित रखें और वजन को बढ़ने न दें, क्योंकि मोटापा दिखने में भले सामान्य लगे, लेकिन अंदर ही अंदर बड़ा खतरा बन सकता है.

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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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