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आमिर खान बोले- बच्चों को वक्त नहीं दे पाया:फिल्म ‘एक दिन’ से पूरी हुई कमी, जुनैद की इंडिपेंडेंस पर गर्व, कहानी पर जताया भरोसा

आमिर खान बोले- बच्चों को वक्त नहीं दे पाया:फिल्म ‘एक दिन’ से पूरी हुई कमी, जुनैद की इंडिपेंडेंस पर गर्व, कहानी पर जताया भरोसा

आमिर खान इन दिनों अपनी प्रोड्यूस की गई फिल्म ‘एक दिन’ को लेकर सुर्खियों में हैं। इसमें उनके बेटे जुनैद खान और साईं पल्लवी लीड रोल में नजर आएंगे। दैनिक भास्कर से बातचीत में आमिर ने फिल्म से अपने इमोशनल कनेक्शन और एक पिता के तौर पर भावनाएं साझा कीं। उन्होंने माना कि व्यस्त करियर के चलते वह बच्चों को ज्यादा वक्त नहीं दे पाए, लेकिन इस फिल्म ने बेटे के साथ काम करने और करीब आने का मौका दिया। आमिर ने जुनैद की इंडिपेंडेंट सोच और अपने दम पर पहचान बनाने के जज्बे की तारीफ की। उन्होंने बदलते सिनेमाई ट्रेंड्स, मजबूत कहानियों की अहमियत और रोमांटिक फिल्मों की कमी पर राय रखी। साथ ही अरिजीत सिंह के साथ काम करने का अनुभव साझा किया। पेश हैं बातचीत के खास अंश। सवाल: ‘एक दिन’ आपके लिए कितनी खास फिल्म है? जवाब: मेरे लिए यह कई वजहों से खास फिल्म है। सबसे बड़ी वजह यह है कि इसमें जुनैद हैं और मुझे प्रोड्यूसर के तौर पर उनके साथ काम करने का मौका मिला। यह सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि मेरे लिए पर्सनल जर्नी भी है। सवाल: एक पिता के तौर पर यह अनुभव कैसा रहा? जवाब: सच कहूं तो मैंने अपनी जिंदगी में काम को ज्यादा समय दिया। जब बच्चे बड़े हो रहे थे, तब मैं उन्हें उतना वक्त नहीं दे पाया, जितना देना चाहिए था। यह बात मेरे अंदर हमेशा रहती है। सवाल: क्या इस फिल्म से आपको वह कमी पूरी करने का मौका मिला? जवाब: हां, बिल्कुल। जुनैद हमेशा से इंडिपेंडेंट रहे हैं। उन्होंने कभी मुझसे कुछ नहीं मांगा, न गाड़ी, न कोई सुविधा। वो हर चीज अपने दम पर करना चाहते हैं। ऐसे में एक पिता के तौर पर जो करने की इच्छा होती है, वह मुझे इस फिल्म के जरिए करने का मौका मिला। यह मेरे लिए इमोशनल अनुभव है। सवाल: कहानी ने आपको कितना प्रभावित किया? जवाब: जब मैंने फिल्म की कहानी सुनी, तो वह सीधे मेरे दिल को छू गई। मैं खुद रोमांटिक इंसान हूं और मुझे ऐसी कहानियां पसंद हैं। इसकी सादगी और भावनाएं मुझे ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ और ‘कुछ कुछ होता है’ की याद दिलाती हैं। सवाल: क्या आपको लगता है जुनैद का किरदार उनसे मिलता-जुलता है? जवाब: हां, काफी हद तक। जुनैद बचपन से शाय और रिजर्व नेचर के रहे हैं। वो ज्यादा खुलकर बात नहीं करते थे, और मैं भी स्कूल-कॉलेज के दिनों में ऐसा ही था। सवाल: क्या आपके और जुनैद के स्वभाव में समानता है? जवाब: बिल्कुल। जब मैंने एक्टिंग शुरू करने का फैसला लिया था, तब लोग हैरान हो गए थे कि यह चुप-चाप रहने वाला लड़का एक्टिंग कैसे करेगा। उसी तरह जुनैद भी शांत स्वभाव के हैं। इस लिहाज से हम दोनों में समानता है। सवाल: जुनैद की एक्टिंग में आपको क्या खास लगता है? जवाब: उनकी सबसे बड़ी खूबी है कि वो जिस किरदार को निभाते हैं, उसमें पूरी तरह ढल जाते हैं। ‘महाराज’ में वो वही किरदार लगते हैं। ‘लवयापा’ में उनका अलग शेड दिखता है। वो ईमानदारी और सच्चाई से एक्टिंग करते हैं, जो बड़ी बात है। सवाल: आजकल एक्शन फिल्मों का दौर है, ऐसे में ‘एक दिन’ जैसी सॉफ्ट फिल्म को लेकर डर है? जवाब: हां, डर है। जब ‘कयामत से कयामत तक’ रिलीज हो रही थी, तब भी एक्शन फिल्मों का दौर था। उस समय भी लगता था कि हमारी सॉफ्ट फिल्म लोगों को पसंद आएगी या नहीं। आज 35 साल बाद भी वही डर है। सवाल: फिर भी आपको क्या भरोसा देता है? जवाब: मेरा मानना है कि टेक्नोलॉजी और ट्रेंड बदल सकते हैं, लेकिन कहानी की ताकत नहीं बदलती। अगर कहानी सच्चाई से कही गई है, तो वह दर्शकों तक जरूर पहुंचेगी। सवाल: क्या आपको लगता है दर्शक इस तरह की लव स्टोरी मिस कर रहे हैं? जवाब: हां, मुझे लगता है कि काफी समय से ऐसी मासूम, सच्ची लव स्टोरी नहीं आई है। आजकल ज्यादातर फिल्मों में या तो बड़ा स्केल होता है या ज्यादा ड्रामा। ऐसे में यह फिल्म अलग है। सवाल: ‘कयामत से कयामत तक’ और ‘एक दिन’ में कोई कनेक्शन देखते हैं? जवाब: कुछ दिलचस्प समानताएं हैं। जैसे दोनों फिल्मों की रिलीज टाइमिंग काफी करीब है। ‘कयामत से कयामत तक’ 29 अप्रैल को आई थी और यह फिल्म भी एक मई को लगभग उसी समय रिलीज हो रही है, करीब 38 साल बाद। सवाल: क्या फिल्म की एंडिंग में बदलाव किया गया? जवाब: हां, शुरुआत में शूट की गई एंडिंग से हम पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। इसलिए आखिरी हिस्से पर दोबारा काम किया और उसे बेहतर बनाने की कोशिश की। सवाल: क्या एंडिंग का इमोशन बदला? जवाब: नहीं, इमोशन वही रखा गया है। बस उसे प्रभावशाली बनाने के लिए ट्रीटमेंट में बदलाव किया गया है। सवाल: अरिजीत सिंह के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: बहुत शानदार रहा। उन्होंने पहले हमारे गाने के लिए हां कर दी थी, लेकिन बाद में सोशल मीडिया पर गाने छोड़ने की घोषणा कर दी। उस समय हम घबरा गए थे। सवाल: फिर क्या हुआ? जवाब: मैंने उन्हें फोन कर पूछा कि क्या हम आएं या नहीं। उन्होंने प्यार से कहा कि वो हमारा गाना जरूर गाएंगे। उनके साथ काम करना घर जैसा अनुभव था। सवाल: अरिजीत के साथ आपकी केमिस्ट्री कैसी रही? जवाब: बहुत अच्छी। वो ब्रिलिएंट और गिफ्टेड आर्टिस्ट हैं। साथ ही सिंपल और अच्छे इंसान हैं। उनके साथ बना कनेक्शन हमेशा रहेगा। सवाल: नए टैलेंट को मौका देने के पीछे आपकी सोच क्या है? जवाब: मुझे लगता है कि अगर किसी में जुनून और मेहनत है, तो उसे मौका मिलना चाहिए। इंडस्ट्री को नए लोगों की जरूरत होती है। सवाल: डायरेक्टर सुनील पांडे में आपको क्या खास लगा? जवाब: वो हार्डवर्किंग और पैशनेट हैं। हर छोटी-बड़ी डिटेल पर उनकी नजर रहती है और वो काम में पूरी तरह डूब जाते हैं। सवाल: क्या उन्होंने आपकी उम्मीदों पर खरा उतरा? जवाब: हां, बिल्कुल। जो हमने कागज पर सोचा था, वो उन्होंने स्क्रीन पर अच्छे से उतारा है। पूरी टीम फिल्म से खुश है। सवाल: आप खुद को पुशी मानते हैं? जवाब: हां, मैं काम को लेकर सख्त हूं। लेकिन जब आप ऐसे लोगों के साथ काम करते हैं जो उतने ही डेडिकेटेड हों, तो काम आसान और मजेदार हो जाता है। सवाल: आप इतने चूजी क्यों हैं फिल्मों को लेकर? जवाब: मैं हमेशा से ऐसा ही रहा हूं। मैं सोच-समझकर फिल्में चुनता हूं। पिछले कुछ महीनों में कई कहानियां सुनी हैं। सवाल: क्या जल्द ही आपको फिर स्क्रीन पर देख पाएंगे? जवाब: हां, बिल्कुल। बहुत जल्द मैं अपनी अगली फिल्म अनाउंस करूंगा। बस एक-दो महीने का इंतजार और करिए।

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आमिर खान बोले- बच्चों को वक्त नहीं दे पाया:फिल्म ‘एक दिन’ से पूरी हुई कमी, जुनैद की इंडिपेंडेंस पर गर्व, कहानी पर जताया भरोसा

आमिर खान इन दिनों अपनी प्रोड्यूस की गई फिल्म ‘एक दिन’ को लेकर सुर्खियों में हैं। इसमें उनके बेटे जुनैद खान और साईं पल्लवी लीड रोल में नजर आएंगे। दैनिक भास्कर से बातचीत में आमिर ने फिल्म से अपने इमोशनल कनेक्शन और एक पिता के तौर पर भावनाएं साझा कीं। उन्होंने माना कि व्यस्त करियर के चलते वह बच्चों को ज्यादा वक्त नहीं दे पाए, लेकिन इस फिल्म ने बेटे के साथ काम करने और करीब आने का मौका दिया। आमिर ने जुनैद की इंडिपेंडेंट सोच और अपने दम पर पहचान बनाने के जज्बे की तारीफ की। उन्होंने बदलते सिनेमाई ट्रेंड्स, मजबूत कहानियों की अहमियत और रोमांटिक फिल्मों की कमी पर राय रखी। साथ ही अरिजीत सिंह के साथ काम करने का अनुभव साझा किया। पेश हैं बातचीत के खास अंश। सवाल: ‘एक दिन’ आपके लिए कितनी खास फिल्म है? जवाब: मेरे लिए यह कई वजहों से खास फिल्म है। सबसे बड़ी वजह यह है कि इसमें जुनैद हैं और मुझे प्रोड्यूसर के तौर पर उनके साथ काम करने का मौका मिला। यह सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि मेरे लिए पर्सनल जर्नी भी है। सवाल: एक पिता के तौर पर यह अनुभव कैसा रहा? जवाब: सच कहूं तो मैंने अपनी जिंदगी में काम को ज्यादा समय दिया। जब बच्चे बड़े हो रहे थे, तब मैं उन्हें उतना वक्त नहीं दे पाया, जितना देना चाहिए था। यह बात मेरे अंदर हमेशा रहती है। सवाल: क्या इस फिल्म से आपको वह कमी पूरी करने का मौका मिला? जवाब: हां, बिल्कुल। जुनैद हमेशा से इंडिपेंडेंट रहे हैं। उन्होंने कभी मुझसे कुछ नहीं मांगा, न गाड़ी, न कोई सुविधा। वो हर चीज अपने दम पर करना चाहते हैं। ऐसे में एक पिता के तौर पर जो करने की इच्छा होती है, वह मुझे इस फिल्म के जरिए करने का मौका मिला। यह मेरे लिए इमोशनल अनुभव है। सवाल: कहानी ने आपको कितना प्रभावित किया? जवाब: जब मैंने फिल्म की कहानी सुनी, तो वह सीधे मेरे दिल को छू गई। मैं खुद रोमांटिक इंसान हूं और मुझे ऐसी कहानियां पसंद हैं। इसकी सादगी और भावनाएं मुझे ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ और ‘कुछ कुछ होता है’ की याद दिलाती हैं। सवाल: क्या आपको लगता है जुनैद का किरदार उनसे मिलता-जुलता है? जवाब: हां, काफी हद तक। जुनैद बचपन से शाय और रिजर्व नेचर के रहे हैं। वो ज्यादा खुलकर बात नहीं करते थे, और मैं भी स्कूल-कॉलेज के दिनों में ऐसा ही था। सवाल: क्या आपके और जुनैद के स्वभाव में समानता है? जवाब: बिल्कुल। जब मैंने एक्टिंग शुरू करने का फैसला लिया था, तब लोग हैरान हो गए थे कि यह चुप-चाप रहने वाला लड़का एक्टिंग कैसे करेगा। उसी तरह जुनैद भी शांत स्वभाव के हैं। इस लिहाज से हम दोनों में समानता है। सवाल: जुनैद की एक्टिंग में आपको क्या खास लगता है? जवाब: उनकी सबसे बड़ी खूबी है कि वो जिस किरदार को निभाते हैं, उसमें पूरी तरह ढल जाते हैं। ‘महाराज’ में वो वही किरदार लगते हैं। ‘लवयापा’ में उनका अलग शेड दिखता है। वो ईमानदारी और सच्चाई से एक्टिंग करते हैं, जो बड़ी बात है। सवाल: आजकल एक्शन फिल्मों का दौर है, ऐसे में ‘एक दिन’ जैसी सॉफ्ट फिल्म को लेकर डर है? जवाब: हां, डर है। जब ‘कयामत से कयामत तक’ रिलीज हो रही थी, तब भी एक्शन फिल्मों का दौर था। उस समय भी लगता था कि हमारी सॉफ्ट फिल्म लोगों को पसंद आएगी या नहीं। आज 35 साल बाद भी वही डर है। सवाल: फिर भी आपको क्या भरोसा देता है? जवाब: मेरा मानना है कि टेक्नोलॉजी और ट्रेंड बदल सकते हैं, लेकिन कहानी की ताकत नहीं बदलती। अगर कहानी सच्चाई से कही गई है, तो वह दर्शकों तक जरूर पहुंचेगी। सवाल: क्या आपको लगता है दर्शक इस तरह की लव स्टोरी मिस कर रहे हैं? जवाब: हां, मुझे लगता है कि काफी समय से ऐसी मासूम, सच्ची लव स्टोरी नहीं आई है। आजकल ज्यादातर फिल्मों में या तो बड़ा स्केल होता है या ज्यादा ड्रामा। ऐसे में यह फिल्म अलग है। सवाल: ‘कयामत से कयामत तक’ और ‘एक दिन’ में कोई कनेक्शन देखते हैं? जवाब: कुछ दिलचस्प समानताएं हैं। जैसे दोनों फिल्मों की रिलीज टाइमिंग काफी करीब है। ‘कयामत से कयामत तक’ 29 अप्रैल को आई थी और यह फिल्म भी एक मई को लगभग उसी समय रिलीज हो रही है, करीब 38 साल बाद। सवाल: क्या फिल्म की एंडिंग में बदलाव किया गया? जवाब: हां, शुरुआत में शूट की गई एंडिंग से हम पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। इसलिए आखिरी हिस्से पर दोबारा काम किया और उसे बेहतर बनाने की कोशिश की। सवाल: क्या एंडिंग का इमोशन बदला? जवाब: नहीं, इमोशन वही रखा गया है। बस उसे प्रभावशाली बनाने के लिए ट्रीटमेंट में बदलाव किया गया है। सवाल: अरिजीत सिंह के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: बहुत शानदार रहा। उन्होंने पहले हमारे गाने के लिए हां कर दी थी, लेकिन बाद में सोशल मीडिया पर गाने छोड़ने की घोषणा कर दी। उस समय हम घबरा गए थे। सवाल: फिर क्या हुआ? जवाब: मैंने उन्हें फोन कर पूछा कि क्या हम आएं या नहीं। उन्होंने प्यार से कहा कि वो हमारा गाना जरूर गाएंगे। उनके साथ काम करना घर जैसा अनुभव था। सवाल: अरिजीत के साथ आपकी केमिस्ट्री कैसी रही? जवाब: बहुत अच्छी। वो ब्रिलिएंट और गिफ्टेड आर्टिस्ट हैं। साथ ही सिंपल और अच्छे इंसान हैं। उनके साथ बना कनेक्शन हमेशा रहेगा। सवाल: नए टैलेंट को मौका देने के पीछे आपकी सोच क्या है? जवाब: मुझे लगता है कि अगर किसी में जुनून और मेहनत है, तो उसे मौका मिलना चाहिए। इंडस्ट्री को नए लोगों की जरूरत होती है। सवाल: डायरेक्टर सुनील पांडे में आपको क्या खास लगा? जवाब: वो हार्डवर्किंग और पैशनेट हैं। हर छोटी-बड़ी डिटेल पर उनकी नजर रहती है और वो काम में पूरी तरह डूब जाते हैं। सवाल: क्या उन्होंने आपकी उम्मीदों पर खरा उतरा? जवाब: हां, बिल्कुल। जो हमने कागज पर सोचा था, वो उन्होंने स्क्रीन पर अच्छे से उतारा है। पूरी टीम फिल्म से खुश है। सवाल: आप खुद को पुशी मानते हैं? जवाब: हां, मैं काम को लेकर सख्त हूं। लेकिन जब आप ऐसे लोगों के साथ काम करते हैं जो उतने ही डेडिकेटेड हों, तो काम आसान और मजेदार हो जाता है। सवाल: आप इतने चूजी क्यों हैं फिल्मों को लेकर? जवाब: मैं हमेशा से ऐसा ही रहा हूं। मैं सोच-समझकर फिल्में चुनता हूं। पिछले कुछ महीनों में कई कहानियां सुनी हैं। सवाल: क्या जल्द ही आपको फिर स्क्रीन पर देख पाएंगे? जवाब: हां, बिल्कुल। बहुत जल्द मैं अपनी अगली फिल्म अनाउंस करूंगा। बस एक-दो महीने का इंतजार और करिए।

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