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भोपाल-त्रासदी की यह तस्वीर लेने वाले रघु राय का निधन:कहा था- उस मासूम चेहरे में जो सन्नाटा था, वो किसी भी चीख से ज्यादा तेज था

भोपाल-त्रासदी की यह तस्वीर लेने वाले रघु राय का निधन:कहा था- उस मासूम चेहरे में जो सन्नाटा था, वो किसी भी चीख से ज्यादा तेज था

देश के सबसे प्रतिष्ठित फोटोग्राफर में शुमार रघु राय का रविवार सुबह एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। 83 वर्षीय राय कैंसर से जूझ रहे थे। परिवार में पत्नी, एक बेटा व 3 बेटियां हैं। 1966 में ‘द स्टेट्समैन’ से करियर शुरू करने वाले राय ने 6 दशक तक कई अविस्मरणीय पलों को लेंस में कैद किया। उनकी सबसे चर्चित और मार्मिक फोटो 3 दिसंबर, 1984 को हुई भोपाल गैस त्रासदी की है, जिसमें एक बच्चे को दफनाया जा रहा है। इस तस्वीर के बारे में जैसा फोटोग्राफर रघु राय ने खुद कहा था- जब मैं कब्रिस्तान पहुंचा, तो देखा कि एक व्यक्ति अपने हाथों से मिट्टी हटाकर एक बच्चे को दफना रहा था। बच्चे की आंखें खुली थीं और वे मानों पूरी दुनिया से सवाल पूछ रही थीं। उस मासूम चेहरे में जो सन्नाटा था, वो किसी भी चीख से ज्यादा तेज था। उस वक्त मुझे लगा कि क्या यह तस्वीर खींचना नैतिक है? लेकिन फिर महसूस किया कि अगर मैंने इसे कैद नहीं किया, तो दुनिया कभी नहीं जान पाएगी कि वहां वास्तव में क्या हुआ था। फोटोग्राफी एक जिम्मेदारी है और उस पल मेरा काम उस अन्याय को दर्ज करना था। इस तस्वीर के साथ शुरू हुआ था रघु राय की फोटोग्राफी का सफर यह हमारे प्रिय मित्र योग जॉय का गांव था, जहां मैंने अपनी पहली फिल्म शूट की थी। मैं गांव के बच्चों की तस्वीरें ले रहा ​था। एक बुजुर्ग महिला ये सब देख रही थीं। मैंने उनके चेहरे पर एक खुशमिजाज और आत्मीय मुस्कान देखी, तो मैंने सिर्फ उन्हीं की तस्वीर लेने का फैसला किया, लेकिन बच्चे उस फ्रेम में घुस आए और एक-दूसरे पर गिरने लगे। वह दादी जैसी बुजुर्ग महिला कौतूहल से यह सब देखती रहीं। जब मैं बच्चों को ऐसा करने से नहीं रोक सका, तो उस बुजुर्ग महिला ने कहा, ‘तुम में से जो भी या तुम सब जो मेरे साथ फोटो खिंचवाना चाहते हो, वे ऐसा सिर्फ एक शर्त पर कर सकते हैं कि तुम सब मेरे बच्चे बन जाओगे और मैं तुम्हें अपने घर ले जाऊंगी। उनका यह जवाब सुनकर मैं खुशी से भर गया। इस तरह यह तस्वीर अस्तित्व में आई।’
– इंस्टाग्राम पर रघु राय ने 5 मार्च 2021 को ये किस्सा शेयर किया था। रघु राय की क्लिक की गईं 10 ऐतिहासिक तस्वीरें… 1972 में पद्म श्री और 2009 में फ्रांसीसी नागरिक सम्मान से नवाजा गया भारत को कैमरे में उतारने वाले दिग्गज फोटोग्राफर और दुनिया के प्रतिष्ठित फोटो-जर्नलिस्ट रघु की तस्वीरें सिर्फ फोटो नहीं, बल्कि वक्त की कहानी कहती हैं। उनकी तस्वीरों में भारत की सादगी, संघर्ष, संस्कृति और अध्यात्म साफ नजर आता है। चाहे सड़क पर चलता आम आदमी हो या कुम्भ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन, रघु राय हर फ्रेम में गहराई पकड़ लेते थे। उनकी फोटो में भावनाएं इतनी मजबूत होती थीं कि देखने वाला खुद उस माहौल का हिस्सा महसूस करता था। यही वजह है कि उनकी तस्वीरें देश-विदेश में सराही जाती हैं और फोटो-जर्नलिज्म के लिए एक मिसाल मानी जाती हैं। स्व. रघु राय को 1972 में पद्म श्री और 2009 में फ्रांसीसी नागरिक सम्मान से नवाजा गया था। 56 से अधिक पुस्तकों के लेखक राय कहते थे- विजुअल हिस्ट्री यानी तस्वीरें ‘सबसे सच्चा दस्तावेज’ होती हैं। उनके निधन के बाद आज उनकी उन तस्वीरों के लिए पूरे देश में उन्हें याद किया जा रहा है।

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देश के सबसे प्रतिष्ठित फोटोग्राफर में शुमार रघु राय का रविवार सुबह एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। 83 वर्षीय राय कैंसर से जूझ रहे थे। परिवार में पत्नी, एक बेटा व 3 बेटियां हैं। 1966 में ‘द स्टेट्समैन’ से करियर शुरू करने वाले राय ने 6 दशक तक कई अविस्मरणीय पलों को लेंस में कैद किया। उनकी सबसे चर्चित और मार्मिक फोटो 3 दिसंबर, 1984 को हुई भोपाल गैस त्रासदी की है, जिसमें एक बच्चे को दफनाया जा रहा है। इस तस्वीर के बारे में जैसा फोटोग्राफर रघु राय ने खुद कहा था- जब मैं कब्रिस्तान पहुंचा, तो देखा कि एक व्यक्ति अपने हाथों से मिट्टी हटाकर एक बच्चे को दफना रहा था। बच्चे की आंखें खुली थीं और वे मानों पूरी दुनिया से सवाल पूछ रही थीं। उस मासूम चेहरे में जो सन्नाटा था, वो किसी भी चीख से ज्यादा तेज था। उस वक्त मुझे लगा कि क्या यह तस्वीर खींचना नैतिक है? लेकिन फिर महसूस किया कि अगर मैंने इसे कैद नहीं किया, तो दुनिया कभी नहीं जान पाएगी कि वहां वास्तव में क्या हुआ था। फोटोग्राफी एक जिम्मेदारी है और उस पल मेरा काम उस अन्याय को दर्ज करना था। इस तस्वीर के साथ शुरू हुआ था रघु राय की फोटोग्राफी का सफर यह हमारे प्रिय मित्र योग जॉय का गांव था, जहां मैंने अपनी पहली फिल्म शूट की थी। मैं गांव के बच्चों की तस्वीरें ले रहा ​था। एक बुजुर्ग महिला ये सब देख रही थीं। मैंने उनके चेहरे पर एक खुशमिजाज और आत्मीय मुस्कान देखी, तो मैंने सिर्फ उन्हीं की तस्वीर लेने का फैसला किया, लेकिन बच्चे उस फ्रेम में घुस आए और एक-दूसरे पर गिरने लगे। वह दादी जैसी बुजुर्ग महिला कौतूहल से यह सब देखती रहीं। जब मैं बच्चों को ऐसा करने से नहीं रोक सका, तो उस बुजुर्ग महिला ने कहा, ‘तुम में से जो भी या तुम सब जो मेरे साथ फोटो खिंचवाना चाहते हो, वे ऐसा सिर्फ एक शर्त पर कर सकते हैं कि तुम सब मेरे बच्चे बन जाओगे और मैं तुम्हें अपने घर ले जाऊंगी। उनका यह जवाब सुनकर मैं खुशी से भर गया। इस तरह यह तस्वीर अस्तित्व में आई।’
– इंस्टाग्राम पर रघु राय ने 5 मार्च 2021 को ये किस्सा शेयर किया था। रघु राय की क्लिक की गईं 10 ऐतिहासिक तस्वीरें… 1972 में पद्म श्री और 2009 में फ्रांसीसी नागरिक सम्मान से नवाजा गया भारत को कैमरे में उतारने वाले दिग्गज फोटोग्राफर और दुनिया के प्रतिष्ठित फोटो-जर्नलिस्ट रघु की तस्वीरें सिर्फ फोटो नहीं, बल्कि वक्त की कहानी कहती हैं। उनकी तस्वीरों में भारत की सादगी, संघर्ष, संस्कृति और अध्यात्म साफ नजर आता है। चाहे सड़क पर चलता आम आदमी हो या कुम्भ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन, रघु राय हर फ्रेम में गहराई पकड़ लेते थे। उनकी फोटो में भावनाएं इतनी मजबूत होती थीं कि देखने वाला खुद उस माहौल का हिस्सा महसूस करता था। यही वजह है कि उनकी तस्वीरें देश-विदेश में सराही जाती हैं और फोटो-जर्नलिज्म के लिए एक मिसाल मानी जाती हैं। स्व. रघु राय को 1972 में पद्म श्री और 2009 में फ्रांसीसी नागरिक सम्मान से नवाजा गया था। 56 से अधिक पुस्तकों के लेखक राय कहते थे- विजुअल हिस्ट्री यानी तस्वीरें ‘सबसे सच्चा दस्तावेज’ होती हैं। उनके निधन के बाद आज उनकी उन तस्वीरों के लिए पूरे देश में उन्हें याद किया जा रहा है।

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