Friday, 31 Jul 2026 | 04:56 AM

Trending :

EXCLUSIVE

Gangaram Hospital| Delhi news| गंगाराम अस्पताल में महिला को डोनर के दोनों हाथ, 12 घंटे की सर्जरी

authorimg

Gangaram Hospital News: दिल्ली के एक व्यस्त मोहल्ले में रहने वाली 42 वर्षीय रीना शर्मा (बदला हुआ नाम) के जीवन में कुछ हफ्ते पहले तक अंधेरा छाया हुआ था. एक भयानक दुर्घटना में उन्होंने दोनों हाथ खो दिए थे. ट्रेन में सफर करते समय एक अनियंत्रित भीड़ और असंतुलन की वजह से वे प्लेटफॉर्म से नीचे गिर गईं और दोनों हाथ कुचल गए. यह घटना इतनी भयावह थी कि डॉक्टरों को हाथों को काटकर अलग करना पड़ा.

हालांकि रीना, जो पहले एक कुशल गृहिणी और पार्ट-टाइम हैंडीक्राफ्ट आर्टिस्ट थीं, अब रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम भी नहीं कर पाती थीं. चम्मच उठाना, कपड़े पहनना, बच्चों को गले लगाना, सब कुछ दूसरों पर निर्भर हो गया था. उनकी आंखों में हमेशा उदासी और निराशा छाई रहती थी. हालांकि एक दिन फिर उनके जीवन में उजाला आ गया.

एक अन्य परिवार का गम रीना के लिए खुशी बनकर आया. उस परिवार में 38 वर्षीय एक युवक की ब्रेन डेड होने की घोषणा हो चुकी थी. दुर्घटना में उनकी जान चली गई, लेकिन परिवार ने एक नेक फैसला लिया. उन्होंने अंगदान का फैसला किया. उस युवक के स्वस्थ दोनों हाथ अब किसी दूसरे जीवन को सहारा दे सकते थे. परिवार ने कहा, ‘उनकी मौत व्यर्थ नहीं जाएगी. उनका हिस्सा किसी की जिंदगी बनाएगा.’ यही इंसानियत की असली मिसाल थी.

और फिर सर गंगा राम अस्पताल के प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और हैंड माइक्रोसर्जरी विभाग में शुरू हुआ दूसरा द्विपक्षीय हाथ प्रत्यारोपण, जो अपने आप में करिश्मा था. विभाग के चेयरमैन डॉ. महेश मंगल के नेतृत्व में डॉ. अनुभव गुप्ता, डॉ. भीम नंदा, डॉ. निखिल झुनझुनवाला और सभी रेजिडेंट डॉक्टर्स की टीम ने बेहद जटिल सर्जरी को अंजाम दिया. लगभग 12 घंटे की इस सर्जरी में नसों, धमनियों, टेंडन्स, मांसपेशियों और हड्डियों को जोड़ना था. माइक्रोसर्जरी की सूक्ष्मता ऐसी कि एक छोटी सी गलती भी सब बर्बाद कर सकती थी.

ऑपरेशन थिएटर में एनेस्थीसिया टीम में डॉ. जया सूद, डॉ. राकेश सक्सेना और डॉ. अजय सिरोही ने रीना को पूरे समय सुरक्षित रखा. ऑर्थोपेडिक्स से डॉ. ब्रजेश नंदन, नेफ्रोलॉजी से डॉ. विनंत भार्गव, न्यूरोलॉजी से डॉ. सी.एस. अग्रवाल, साइकियाट्री से डॉ. सौम्या तंडन, जेनेटिक्स से डॉ. मोनिका जैन और पैथोलॉजी से डॉ. पल्लव गुप्ता तक हर विभाग ने अपनी भूमिका निभाई.

आखिरकार सर्जरी शुरू हुई. डॉ. मंगल की टीम ने पहले डोनर के हाथों को सावधानी से तैयार किया. फिर रीना के स्टंप्स पर सूक्ष्म कट लगाकर नई शुरुआत की. घंटों तक माइक्रोस्कोप के नीचे नस-नस जोड़ी गई. हड्डियां प्लेट्स से फिक्स की गईं. स्किन को खूबसूरती से सिल दिया गया. हर कदम पर टीम का समन्वय अद्भुत था. 12 घंटे बाद सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हुई.

पोस्ट-ऑपरेटिव केयर में रीना को इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं दी गईं ताकि नए हाथों को शरीर अस्वीकार न करे. फिजियोथेरेपी शुरू हुई. धीरे-धीरे रीना ने महसूस किया कि उनके नए हाथ हिल रहे हैं. पहले तो सिर्फ उंगलियों का हल्का कंपन, फिर धीरे-धीरे पकड़ बनने लगी.

कुछ हफ्तों बाद रीना अस्पताल के बेड पर बैठी मुस्कुरा रही थीं. उन्होंने पहली बार खुद का गिलास उठाया. आंखों में आंसू थे, लेकिन ये खुशी के आंसू थे. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगा था जीवन खत्म हो गया. लेकिन आज मुझे नई जिंदगी मिली है. मैं फिर से अपने बच्चों के लिए खाना बना सकूंगी, उनका हाथ थाम सकूंगी.’

यह उपलब्धि सिर्फ एक सर्जरी नहीं थी बल्कि यह टीमवर्क, विज्ञान, इंसानियत और उम्मीद की जीत थी. डोनर परिवार की उदारता ने रीना को नई राह दिखाई. डॉक्टरों की मेहनत ने उस राह को हकीकत बना दिया.सर गंगा राम अस्पताल ने एक बार फिर साबित किया कि जब इंसानियत और विशेषज्ञता साथ चलें, तो नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Bhopal Driver Suicide LIVE Video

May 18, 2026/
3:33 pm

भोपालकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक वीडियो में शख्स अपना गला काटते, पेट में चाकू मारते दिखाई दे रहा। भोपाल...

बालाजी टेलीफिल्म्स, एलिप्सिस एंटरटेनमेंट और सुधीर चौधरी मिलकर फिल्म बनाएंगे:‘द टेरर रिपोर्ट’ पॉलिटिकल थ्रिलर होगी, इसमें भारत में हुए आतंकी हमलों और देश का रिएक्शन दिखेगा

March 24, 2026/
9:49 pm

बालाजी टेलीफिल्म्स, एलिप्सिस एंटरटेनमेंट और पत्रकार सुधीर चौधरी की कंपनी एस्प्रिट प्रोडक्शंस मिलकर फिल्म “द टेरर रिपोर्ट” बना रहे हैं।...

PM मोदी बोले- भारत-स्वीडन जैसे लोकतंत्रों का साथ जरूरी:आतंकवाद मानवता के लिए खतरा, उसके खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे

May 18, 2026/
12:35 am

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वीडन दौरे पर हैं। उन्होंने गोथेनबर्ग में ‘यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री’ को संबोधित करते हुए...

इंश्योरेंस सेक्टर में 100% FDI को सरकार की मंजूरी:ऑटोमैटिक रूट से विदेशी निवेश का रास्ता साफ; LIC में लिमिट 20% ही रहेगी

May 2, 2026/
7:17 pm

केंद्र सरकार ने शनिवार (2 मई) को इंश्योरेंस सेक्टर में 100% फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट यानी FDI को मंजूरी दे दी...

Ireland Vs New Zealand Only Test Day 2 Live Updates (X)

May 28, 2026/
3:56 pm

आखरी अपडेट:28 मई, 2026, 15:56 IST कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस्तीफा दिया, कहा कि उन्होंने कांग्रेस आलाकमान के आदेशों...

इजराइल बोला- पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भरोसा नहीं:वहां हमास नेता बहुत दौरे कर रहे; ईरान की चेतावनी- हमला हुआ तो पलटवार करेंगे

June 5, 2026/
6:54 am

भारत में इजराइल के राजदूत रियुवेन अजार ने पाकिस्तान को समस्याग्रस्त देश बताते हुए कहा है कि उस पर क्षेत्रीय...

सेल्स टैक्स दफ्तर में आग, सबकुछ जला:खंडवा में झाड़ियों को साफ करने आग लगाई, दफ्तर तक फैल गई

April 12, 2026/
2:45 pm

खंडवा के सेल्स टैक्स कार्यालय में रविवार दोपहर को भीषण आग लग गई। आग ने पूरी बिल्डिंग को चपेट में...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Gangaram Hospital| Delhi news| गंगाराम अस्पताल में महिला को डोनर के दोनों हाथ, 12 घंटे की सर्जरी

authorimg

Gangaram Hospital News: दिल्ली के एक व्यस्त मोहल्ले में रहने वाली 42 वर्षीय रीना शर्मा (बदला हुआ नाम) के जीवन में कुछ हफ्ते पहले तक अंधेरा छाया हुआ था. एक भयानक दुर्घटना में उन्होंने दोनों हाथ खो दिए थे. ट्रेन में सफर करते समय एक अनियंत्रित भीड़ और असंतुलन की वजह से वे प्लेटफॉर्म से नीचे गिर गईं और दोनों हाथ कुचल गए. यह घटना इतनी भयावह थी कि डॉक्टरों को हाथों को काटकर अलग करना पड़ा.

हालांकि रीना, जो पहले एक कुशल गृहिणी और पार्ट-टाइम हैंडीक्राफ्ट आर्टिस्ट थीं, अब रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम भी नहीं कर पाती थीं. चम्मच उठाना, कपड़े पहनना, बच्चों को गले लगाना, सब कुछ दूसरों पर निर्भर हो गया था. उनकी आंखों में हमेशा उदासी और निराशा छाई रहती थी. हालांकि एक दिन फिर उनके जीवन में उजाला आ गया.

एक अन्य परिवार का गम रीना के लिए खुशी बनकर आया. उस परिवार में 38 वर्षीय एक युवक की ब्रेन डेड होने की घोषणा हो चुकी थी. दुर्घटना में उनकी जान चली गई, लेकिन परिवार ने एक नेक फैसला लिया. उन्होंने अंगदान का फैसला किया. उस युवक के स्वस्थ दोनों हाथ अब किसी दूसरे जीवन को सहारा दे सकते थे. परिवार ने कहा, ‘उनकी मौत व्यर्थ नहीं जाएगी. उनका हिस्सा किसी की जिंदगी बनाएगा.’ यही इंसानियत की असली मिसाल थी.

और फिर सर गंगा राम अस्पताल के प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और हैंड माइक्रोसर्जरी विभाग में शुरू हुआ दूसरा द्विपक्षीय हाथ प्रत्यारोपण, जो अपने आप में करिश्मा था. विभाग के चेयरमैन डॉ. महेश मंगल के नेतृत्व में डॉ. अनुभव गुप्ता, डॉ. भीम नंदा, डॉ. निखिल झुनझुनवाला और सभी रेजिडेंट डॉक्टर्स की टीम ने बेहद जटिल सर्जरी को अंजाम दिया. लगभग 12 घंटे की इस सर्जरी में नसों, धमनियों, टेंडन्स, मांसपेशियों और हड्डियों को जोड़ना था. माइक्रोसर्जरी की सूक्ष्मता ऐसी कि एक छोटी सी गलती भी सब बर्बाद कर सकती थी.

ऑपरेशन थिएटर में एनेस्थीसिया टीम में डॉ. जया सूद, डॉ. राकेश सक्सेना और डॉ. अजय सिरोही ने रीना को पूरे समय सुरक्षित रखा. ऑर्थोपेडिक्स से डॉ. ब्रजेश नंदन, नेफ्रोलॉजी से डॉ. विनंत भार्गव, न्यूरोलॉजी से डॉ. सी.एस. अग्रवाल, साइकियाट्री से डॉ. सौम्या तंडन, जेनेटिक्स से डॉ. मोनिका जैन और पैथोलॉजी से डॉ. पल्लव गुप्ता तक हर विभाग ने अपनी भूमिका निभाई.

आखिरकार सर्जरी शुरू हुई. डॉ. मंगल की टीम ने पहले डोनर के हाथों को सावधानी से तैयार किया. फिर रीना के स्टंप्स पर सूक्ष्म कट लगाकर नई शुरुआत की. घंटों तक माइक्रोस्कोप के नीचे नस-नस जोड़ी गई. हड्डियां प्लेट्स से फिक्स की गईं. स्किन को खूबसूरती से सिल दिया गया. हर कदम पर टीम का समन्वय अद्भुत था. 12 घंटे बाद सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हुई.

पोस्ट-ऑपरेटिव केयर में रीना को इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं दी गईं ताकि नए हाथों को शरीर अस्वीकार न करे. फिजियोथेरेपी शुरू हुई. धीरे-धीरे रीना ने महसूस किया कि उनके नए हाथ हिल रहे हैं. पहले तो सिर्फ उंगलियों का हल्का कंपन, फिर धीरे-धीरे पकड़ बनने लगी.

कुछ हफ्तों बाद रीना अस्पताल के बेड पर बैठी मुस्कुरा रही थीं. उन्होंने पहली बार खुद का गिलास उठाया. आंखों में आंसू थे, लेकिन ये खुशी के आंसू थे. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगा था जीवन खत्म हो गया. लेकिन आज मुझे नई जिंदगी मिली है. मैं फिर से अपने बच्चों के लिए खाना बना सकूंगी, उनका हाथ थाम सकूंगी.’

यह उपलब्धि सिर्फ एक सर्जरी नहीं थी बल्कि यह टीमवर्क, विज्ञान, इंसानियत और उम्मीद की जीत थी. डोनर परिवार की उदारता ने रीना को नई राह दिखाई. डॉक्टरों की मेहनत ने उस राह को हकीकत बना दिया.सर गंगा राम अस्पताल ने एक बार फिर साबित किया कि जब इंसानियत और विशेषज्ञता साथ चलें, तो नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.