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India, China Yet to Buy Broadcasting Rights; Global Reach Doubtful

India, China Yet to Buy Broadcasting Rights; Global Reach Doubtful
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नई दिल्ली28 मिनट पहले

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फीफा वर्ल्ड कप 2026 11 जून से 26 जुलाई तक खेला जाएगा।

भारत-चीन में फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स अब तक किसी भी कंपनी ने नहीं खरीदे हैं। मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और श्रीलंका में भी राइट्स के लिए कोई कंपनी इंटरनेस्ट नहीं दिखा रही। अगर यहीं स्थिति रही, तो दुनिया के करीब 300 करोड़ लोग सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट को नहीं देख पाएंगे।

फीफा वर्ल्ड कप 11 जून से 19 जुलाई तक अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। इस टूर्नामेंट में 48 टीमें हिस्सा लेंगी और 104 मैच खेले जाएंगे।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको संयुक्त मेजबान हैं।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको संयुक्त मेजबान हैं।

ब्रॉडकास्टिंग राइट्स अब तक क्यों नहीं खरीदे गए?

फीफा ने शुरुआत में मैचों के राइट्स के लिए $100 मिलियन (948 करोड़ रुपए) की मांग की थी। जब कोई खरीदार नहीं मिला, तो इसका प्राइज घटाकर 35 मिलियन डॉलर (लगभग 332 करोड़ रुपए) कर दिए हैं। भारत या दूसरे देशों में ब्रॉडकास्टिंग राइट्स नहीं खरीदने जाने की तीन बड़ी वजह है…

  1. भारत के हिसाब से मैचों की टाइमिंग सही नहींभारत में फुटबॉल फैंस के लिए सबसे बड़ी दिक्कत समय की है। टूूर्नामेंट में खेने जाने वाले 104 मैचों में सिर्फ 14 ही रात 12 बजे से पहले शुरू होंगे। फाइनल सहित बाकी सभी मैच भारतीय समय के अनुसार रात 12 बजे बाद शुरू होंगे। 2022 वर्ल्ड कप में 64 में से 44 मैच रात मिडनाइट से पहले शुरू हुए थे।कंपनियों को डर है कि इतनी रात को बहुत कम लोग मैच देखेंगे। चीन और बाकी देशों के साथ भी यहीं दिक्कत है।2022 कतर वर्ल्ड कप के मैच भारतीय समयानुसार रात 12 बजे से पहले शुरु हुए थे।
  2. कंपटीशन की कमी और क्रिकेट का असर2022 वर्ल्ड कप के लिए वायकॉम18 ने लगभग 62 मिलियन डॉलर (450 से 500 करोड़ रुपए) दिए थे। वहीं सोनी ने 2014 और 2018 के लिए 90 मिलियन डॉलर (करीब 600 करोड़ रुपए) खर्च किए थे। अब ब्रॉडकास्टिंग कंपनी वायकॉम18 और हॉटस्टार का विलय हो चुका है। इससे मार्केट में कंप्टीशन घटा है।दूसरी बड़ी वजह है कि फीफा, IPL खत्म होने के दो हफ्ते बाद ही शुरु हो रहा है। भारत में कंपनियां अपना सारा मार्केटिंग बजट आईपीएल पर खर्च कर देती हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के स्पोर्ट्स मार्केट में 89% पैसा क्रिकेट पर खर्च होता है, बाकी सभी खेलों के लिए सिर्फ 11% बचता है।IPL भारत में स्पोर्ट्स का सबसे बड़ा मार्केट है।
  3. भारत में सब्सक्रिप्शन मॉडल नहीं चलताभारत एक ऐसा बाजार है जहां लोग खेल देखने के लिए ज्यादा पैसे नहीं देना चाहते। यहां तक की फ्री में देखने के लिए थर्ड पार्टी एप तक इस्तेमाल करते हैं। 2022 वर्ल्ड कप जियोसिनेमा पर मुफ्त दिखाया गया था। फ्री की आदत की वजह से चैनलों के लिए पैसा वसूलना मुश्किल हो गया है।

खरीददार नहीं मिला तो FIFA क्या करेगा?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ‘जियो-स्टार’ जानबूझकर आखिरी वक्त का इंतजार कर रहा है, ताकि FIFA राइट्स के रेट और कम कर दे। अगर कोई नहीं खरीदता, तो फीफा अपने खुद के ऐप ‘FIFA+’ पर मैचों को स्ट्रीम कर सकता है।

एक आखिरी रास्ता यह है कि सरकार इसे ‘राष्ट्रीय महत्व’ का खेल घोषित कर दूरदर्शन पर दिखाए, लेकिन इसके लिए भी किसी प्राइवेट कंपनी का साथ होना जरूरी है।

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फीफा वर्ल्ड कप 2026 11 जून से 26 जुलाई तक खेला जाएगा।

भारत-चीन में फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स अब तक किसी भी कंपनी ने नहीं खरीदे हैं। मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और श्रीलंका में भी राइट्स के लिए कोई कंपनी इंटरनेस्ट नहीं दिखा रही। अगर यहीं स्थिति रही, तो दुनिया के करीब 300 करोड़ लोग सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट को नहीं देख पाएंगे।

फीफा वर्ल्ड कप 11 जून से 19 जुलाई तक अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। इस टूर्नामेंट में 48 टीमें हिस्सा लेंगी और 104 मैच खेले जाएंगे।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको संयुक्त मेजबान हैं।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको संयुक्त मेजबान हैं।

ब्रॉडकास्टिंग राइट्स अब तक क्यों नहीं खरीदे गए?

फीफा ने शुरुआत में मैचों के राइट्स के लिए $100 मिलियन (948 करोड़ रुपए) की मांग की थी। जब कोई खरीदार नहीं मिला, तो इसका प्राइज घटाकर 35 मिलियन डॉलर (लगभग 332 करोड़ रुपए) कर दिए हैं। भारत या दूसरे देशों में ब्रॉडकास्टिंग राइट्स नहीं खरीदने जाने की तीन बड़ी वजह है…

  1. भारत के हिसाब से मैचों की टाइमिंग सही नहींभारत में फुटबॉल फैंस के लिए सबसे बड़ी दिक्कत समय की है। टूूर्नामेंट में खेने जाने वाले 104 मैचों में सिर्फ 14 ही रात 12 बजे से पहले शुरू होंगे। फाइनल सहित बाकी सभी मैच भारतीय समय के अनुसार रात 12 बजे बाद शुरू होंगे। 2022 वर्ल्ड कप में 64 में से 44 मैच रात मिडनाइट से पहले शुरू हुए थे।कंपनियों को डर है कि इतनी रात को बहुत कम लोग मैच देखेंगे। चीन और बाकी देशों के साथ भी यहीं दिक्कत है।2022 कतर वर्ल्ड कप के मैच भारतीय समयानुसार रात 12 बजे से पहले शुरु हुए थे।
  2. कंपटीशन की कमी और क्रिकेट का असर2022 वर्ल्ड कप के लिए वायकॉम18 ने लगभग 62 मिलियन डॉलर (450 से 500 करोड़ रुपए) दिए थे। वहीं सोनी ने 2014 और 2018 के लिए 90 मिलियन डॉलर (करीब 600 करोड़ रुपए) खर्च किए थे। अब ब्रॉडकास्टिंग कंपनी वायकॉम18 और हॉटस्टार का विलय हो चुका है। इससे मार्केट में कंप्टीशन घटा है।दूसरी बड़ी वजह है कि फीफा, IPL खत्म होने के दो हफ्ते बाद ही शुरु हो रहा है। भारत में कंपनियां अपना सारा मार्केटिंग बजट आईपीएल पर खर्च कर देती हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के स्पोर्ट्स मार्केट में 89% पैसा क्रिकेट पर खर्च होता है, बाकी सभी खेलों के लिए सिर्फ 11% बचता है।IPL भारत में स्पोर्ट्स का सबसे बड़ा मार्केट है।
  3. भारत में सब्सक्रिप्शन मॉडल नहीं चलताभारत एक ऐसा बाजार है जहां लोग खेल देखने के लिए ज्यादा पैसे नहीं देना चाहते। यहां तक की फ्री में देखने के लिए थर्ड पार्टी एप तक इस्तेमाल करते हैं। 2022 वर्ल्ड कप जियोसिनेमा पर मुफ्त दिखाया गया था। फ्री की आदत की वजह से चैनलों के लिए पैसा वसूलना मुश्किल हो गया है।

खरीददार नहीं मिला तो FIFA क्या करेगा?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ‘जियो-स्टार’ जानबूझकर आखिरी वक्त का इंतजार कर रहा है, ताकि FIFA राइट्स के रेट और कम कर दे। अगर कोई नहीं खरीदता, तो फीफा अपने खुद के ऐप ‘FIFA+’ पर मैचों को स्ट्रीम कर सकता है।

एक आखिरी रास्ता यह है कि सरकार इसे ‘राष्ट्रीय महत्व’ का खेल घोषित कर दूरदर्शन पर दिखाए, लेकिन इसके लिए भी किसी प्राइवेट कंपनी का साथ होना जरूरी है।

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