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Rishi Kapoor 6th Death Anniversary: Daughter Riddhimas Emotional Tribute

Rishi Kapoor 6th Death Anniversary: Daughter Riddhimas Emotional Tribute

37 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र

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ऋषि कपूर की छठी पुण्यतिथि पर उनकी बेटी रिद्धिमा कपूर साहनी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में उनके जज्बे और जिम्मेदारी को याद किया। रिद्धिमा ने कहा कि पापा ने कभी हालात के आगे घुटने नहीं टेके। वो बीमारी में भी काम करते रहे, क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि किसी प्रोड्यूसर को नुकसान हो। यह एक जिम्मेदार इंसान की पहचान थी।

उन्होंने उनके परिवार के प्रति प्यार, ईमानदारी और काम के प्रति जुनून को याद किया। उन्होंने कहा कि आज भी पूरा परिवार उन्हें हर दिन याद करता है और उनकी सीख, मेहनत, विनम्रता और सच्चाई को जीवन में निभाने की कोशिश करता है।

सवाल: ऋषि सर की सबसे पहली याद जो आपके मन में आती है, क्या है?

जवाब: बहुत सारी यादें हैं, एक-दो में उन्हें समेटना मुश्किल है। हमारे जीवन में उनका प्रेजेंस ही सबसे बड़ी याद है। वो हमारी लाइफ में इतना पॉजिटिव इन्फ्लुएंस रखते थे कि आज भी हम उन्हें हर दिन महसूस करते हैं। हम रोज उनकी बातें करते हैं और फैमिली के साथ उनका जिक्र होता है।

सच कहूं तो हम उन्हें हर दिन सेलिब्रेट करते हैं। उनकी पर्सनैलिटी लार्जर दैन लाइफ थी- काम के प्रति जुनून और परिवार के लिए गहरा प्यार। यही चीजें आज भी सबसे ज्यादा याद आती हैं।

सवाल: पापा को एक इंसान के तौर पर कैसे याद करती हैं?

जवाब: वो बहुत सच्चे इंसान थे। दिल के साफ थे। जो भी उनके दिल में होता था, वो बिना झिझक ज़ुबान पर ले आते थे। चीजों को घुमाते-फिराते नहीं थे। थोड़े मुंहफट थे, लेकिन वो उनकी ईमानदारी का हिस्सा था। उनकी सच्चाई और साफ दिल ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।

सवाल: बचपन की सबसे खास यादें कौन-सी हैं?

जवाब: बचपन की कई यादें उनसे जुड़ी हैं। हम हर हॉलिडे और वेकेशन में साथ घूमने जाते थे। पापा शूटिंग ऐसे प्लान करते थे कि छुट्टियां साथ हों और हम साथ रह सकें। वो हर काम में हमें ध्यान में रखते थे और बच्चों को प्राथमिकता देते थे। हर वीकेंड, खासकर सैटरडे नाइट या संडे को, वो हमें लंच पर ले जाते, दिन साथ बिताते और मूवी दिखाते थे।

वो हमारे साथ रैपिड फायर गेम खेलते थे। गाड़ी या ट्रैफिक में वो जनरल नॉलेज के सवाल पूछते थे। सही जवाब पर चॉकलेट मिलती थी। ये छोटे पल हमारे लिए बहुत खास हैं।

सवाल: उनके जाने के बाद परिवार में सबसे बड़ा बदलाव क्या था?

जवाब: बहुत बड़ा खालीपन आ गया था। ऐसा लगा जैसे सब कुछ रुक गया हो। उस समय हम अपने इमोशन्स से जूझ रहे थे, लेकिन फोकस मम्मी को संभालने पर था। हम उन्हें बिजी रखने की कोशिश करते थे- कभी बाहर ले जाकर, कभी बातों में उलझाकर।

वो समय बहुत कठिन था, क्योंकि सब कुछ अचानक हुआ। आज भी हम उन्हें पास्ट टेंस में नहीं याद करते। हम कहते हैं कि वो “हैं”- वो आज भी हमें गाइड कर रहे हैं, प्यार कर रहे हैं और आशीर्वाद बनकर साथ हैं।

सवाल: उनकी कौन-सी बात आज भी सबसे ज्यादा प्रेरित करती है?

जवाब: वो हमेशा कहते थे कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। जीवन में कुछ हासिल करना है, तो मेहनत करनी पड़ेगी। किसी भी फील्ड में हों- एक्टिंग, डिजाइन, फैशन- हर जगह हार्ड वर्क जरूरी है। साथ ही, वो सिखाते थे कि जितना ऊपर जाओ, उतना ही जमीन से जुड़े और विनम्र रहो।

सवाल: फिल्म इंडस्ट्री में उनके अनुभव से आपने क्या सीखा?

जवाब: उनका काम के प्रति जुनून सबसे बड़ा सबक है। वो बीमार होने के बावजूद काम करते रहे। उन्हें बीमारी का पता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अगर उन्होंने कोई फिल्म साइन की होती थी, तो उसे पूरा करने की पूरी कोशिश करते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि उनके कारण किसी प्रोड्यूसर को नुकसान नहीं होना चाहिए।

मुझे याद है, तबीयत खराब होने के बावजूद वो दिल्ली में ठंड में शूटिंग कर रहे थे। उन्हें काम से सच्चा प्यार था और वो आखिरी समय तक एक्टिंग करना चाहते थे।

सवाल: क्या कोई ऐसा पल था जब आपने उन्हें पिता नहीं, बल्कि दोस्त की तरह महसूस किया?

जवाब: हां, बिल्कुल। शादी के बाद हम और करीब हो गए थे। वो मुझे रोज कॉल और फेसटाइम करते थे। अगर मैं फोन नहीं उठाती थी, तो दो-तीन बार कॉल करके पूछते थे। मेरी बेटी समारा से भी उनका खास रिश्ता था। वो उससे वीडियो कॉल पर बात करते थे और उसे अलग-अलग नामों से बुलाते थे- जैसे “तेलू राम”, “बंदरी”। उनके लिए परिवार ही सब कुछ था।

सवाल: कोई ऐसा किस्सा जो हमेशा याद रहेगा?

जवाब: जब मैं फिल्म Kapoor & Sons के सेट पर गई थी, तब मैंने पहली बार उनके काम करने का तरीका करीब से देखा। वो शॉट से पहले कुछ देर अकेले बैठते थे और अपने कैरेक्टर में ढलते थे। फिर तैयार होकर शॉट देते थे। उस दिन मैंने उनके डेडिकेशन और प्रोफेशनलिज्म को करीब से महसूस किया।

सवाल: आपको कब एहसास हुआ कि पापा इतने बड़े स्टार हैं?

जवाब: स्कूल में, जब टीचर्स और दोस्त उनके बारे में बात करते थे। जब हम बाहर जाते थे और लोग उनसे ऑटोग्राफ मांगते थे, तब समझ आया कि वो बड़े स्टार हैं। तब हमें समझाया गया कि लोग उन्हें इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि वो फिल्मों में काम करते हैं और उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं।

सवाल: क्या आप आज भी उनकी किसी सलाह या सीख को याद करती हैं?

जवाब: हार्ड वर्क, ईमानदारी और विनम्रता। वो कहते थे कि जो भी काम करो, पूरी ईमानदारी से करो और जितनी सफलता मिले, उतना विनम्र रहो।

सवाल: आपके लिए उनकी सबसे बड़ी विरासत क्या है?

जवाब: उनका प्यार और परिवार के प्रति समर्पण। दुनिया के लिए वो महान अभिनेता थे, लेकिन मेरे लिए वो हमेशा बेहतरीन पिता और सच्चे फैमिली मैन रहेंगे।

सवाल: आज अगर पापा से कुछ कहना हो, तो क्या कहेंगी?

जवाब: हम आपको हर दिन याद करते हैं, आपकी बातें करते हैं। ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब आपका ज़िक्र न हो। हमें लगता है कि आप आज भी हमारे साथ हैं।

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उन्होंने उनके परिवार के प्रति प्यार, ईमानदारी और काम के प्रति जुनून को याद किया। उन्होंने कहा कि आज भी पूरा परिवार उन्हें हर दिन याद करता है और उनकी सीख, मेहनत, विनम्रता और सच्चाई को जीवन में निभाने की कोशिश करता है।

सवाल: ऋषि सर की सबसे पहली याद जो आपके मन में आती है, क्या है?

जवाब: बहुत सारी यादें हैं, एक-दो में उन्हें समेटना मुश्किल है। हमारे जीवन में उनका प्रेजेंस ही सबसे बड़ी याद है। वो हमारी लाइफ में इतना पॉजिटिव इन्फ्लुएंस रखते थे कि आज भी हम उन्हें हर दिन महसूस करते हैं। हम रोज उनकी बातें करते हैं और फैमिली के साथ उनका जिक्र होता है।

सच कहूं तो हम उन्हें हर दिन सेलिब्रेट करते हैं। उनकी पर्सनैलिटी लार्जर दैन लाइफ थी- काम के प्रति जुनून और परिवार के लिए गहरा प्यार। यही चीजें आज भी सबसे ज्यादा याद आती हैं।

सवाल: पापा को एक इंसान के तौर पर कैसे याद करती हैं?

जवाब: वो बहुत सच्चे इंसान थे। दिल के साफ थे। जो भी उनके दिल में होता था, वो बिना झिझक ज़ुबान पर ले आते थे। चीजों को घुमाते-फिराते नहीं थे। थोड़े मुंहफट थे, लेकिन वो उनकी ईमानदारी का हिस्सा था। उनकी सच्चाई और साफ दिल ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।

सवाल: बचपन की सबसे खास यादें कौन-सी हैं?

जवाब: बचपन की कई यादें उनसे जुड़ी हैं। हम हर हॉलिडे और वेकेशन में साथ घूमने जाते थे। पापा शूटिंग ऐसे प्लान करते थे कि छुट्टियां साथ हों और हम साथ रह सकें। वो हर काम में हमें ध्यान में रखते थे और बच्चों को प्राथमिकता देते थे। हर वीकेंड, खासकर सैटरडे नाइट या संडे को, वो हमें लंच पर ले जाते, दिन साथ बिताते और मूवी दिखाते थे।

वो हमारे साथ रैपिड फायर गेम खेलते थे। गाड़ी या ट्रैफिक में वो जनरल नॉलेज के सवाल पूछते थे। सही जवाब पर चॉकलेट मिलती थी। ये छोटे पल हमारे लिए बहुत खास हैं।

सवाल: उनके जाने के बाद परिवार में सबसे बड़ा बदलाव क्या था?

जवाब: बहुत बड़ा खालीपन आ गया था। ऐसा लगा जैसे सब कुछ रुक गया हो। उस समय हम अपने इमोशन्स से जूझ रहे थे, लेकिन फोकस मम्मी को संभालने पर था। हम उन्हें बिजी रखने की कोशिश करते थे- कभी बाहर ले जाकर, कभी बातों में उलझाकर।

वो समय बहुत कठिन था, क्योंकि सब कुछ अचानक हुआ। आज भी हम उन्हें पास्ट टेंस में नहीं याद करते। हम कहते हैं कि वो “हैं”- वो आज भी हमें गाइड कर रहे हैं, प्यार कर रहे हैं और आशीर्वाद बनकर साथ हैं।

सवाल: उनकी कौन-सी बात आज भी सबसे ज्यादा प्रेरित करती है?

जवाब: वो हमेशा कहते थे कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। जीवन में कुछ हासिल करना है, तो मेहनत करनी पड़ेगी। किसी भी फील्ड में हों- एक्टिंग, डिजाइन, फैशन- हर जगह हार्ड वर्क जरूरी है। साथ ही, वो सिखाते थे कि जितना ऊपर जाओ, उतना ही जमीन से जुड़े और विनम्र रहो।

सवाल: फिल्म इंडस्ट्री में उनके अनुभव से आपने क्या सीखा?

जवाब: उनका काम के प्रति जुनून सबसे बड़ा सबक है। वो बीमार होने के बावजूद काम करते रहे। उन्हें बीमारी का पता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अगर उन्होंने कोई फिल्म साइन की होती थी, तो उसे पूरा करने की पूरी कोशिश करते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि उनके कारण किसी प्रोड्यूसर को नुकसान नहीं होना चाहिए।

मुझे याद है, तबीयत खराब होने के बावजूद वो दिल्ली में ठंड में शूटिंग कर रहे थे। उन्हें काम से सच्चा प्यार था और वो आखिरी समय तक एक्टिंग करना चाहते थे।

सवाल: क्या कोई ऐसा पल था जब आपने उन्हें पिता नहीं, बल्कि दोस्त की तरह महसूस किया?

जवाब: हां, बिल्कुल। शादी के बाद हम और करीब हो गए थे। वो मुझे रोज कॉल और फेसटाइम करते थे। अगर मैं फोन नहीं उठाती थी, तो दो-तीन बार कॉल करके पूछते थे। मेरी बेटी समारा से भी उनका खास रिश्ता था। वो उससे वीडियो कॉल पर बात करते थे और उसे अलग-अलग नामों से बुलाते थे- जैसे “तेलू राम”, “बंदरी”। उनके लिए परिवार ही सब कुछ था।

सवाल: कोई ऐसा किस्सा जो हमेशा याद रहेगा?

जवाब: जब मैं फिल्म Kapoor & Sons के सेट पर गई थी, तब मैंने पहली बार उनके काम करने का तरीका करीब से देखा। वो शॉट से पहले कुछ देर अकेले बैठते थे और अपने कैरेक्टर में ढलते थे। फिर तैयार होकर शॉट देते थे। उस दिन मैंने उनके डेडिकेशन और प्रोफेशनलिज्म को करीब से महसूस किया।

सवाल: आपको कब एहसास हुआ कि पापा इतने बड़े स्टार हैं?

जवाब: स्कूल में, जब टीचर्स और दोस्त उनके बारे में बात करते थे। जब हम बाहर जाते थे और लोग उनसे ऑटोग्राफ मांगते थे, तब समझ आया कि वो बड़े स्टार हैं। तब हमें समझाया गया कि लोग उन्हें इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि वो फिल्मों में काम करते हैं और उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं।

सवाल: क्या आप आज भी उनकी किसी सलाह या सीख को याद करती हैं?

जवाब: हार्ड वर्क, ईमानदारी और विनम्रता। वो कहते थे कि जो भी काम करो, पूरी ईमानदारी से करो और जितनी सफलता मिले, उतना विनम्र रहो।

सवाल: आपके लिए उनकी सबसे बड़ी विरासत क्या है?

जवाब: उनका प्यार और परिवार के प्रति समर्पण। दुनिया के लिए वो महान अभिनेता थे, लेकिन मेरे लिए वो हमेशा बेहतरीन पिता और सच्चे फैमिली मैन रहेंगे।

सवाल: आज अगर पापा से कुछ कहना हो, तो क्या कहेंगी?

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